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UAE प्रेसिडेंट को मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़कर रिसीव किया:कहा- अपने भाई को लेने आया हूं

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नई दिल्ली,एजेंसी। UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान सोमवार शाम साढ़े 4 बजे भारत पहुंचे। पीएम मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़कर उन्हें दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर रिसीव किया। मोदी ने X पर एक पोस्ट में कहा, मैं अपने भाई को लेने खुद एयरपोर्ट आया हूं।

शेख जायद कुछ देर में पीएम मोदी के साथ मीटिंग करेंगे और करीब शाम 6 बजे भारत से रवाना हो जाएंगे। विदेश मंत्रालय (MEA) के मुताबिक दोनों नेताओं के बीच आज व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग, ऊर्जा और दुनिया से जुड़े अहम मुद्दों पर बड़ी डील हो सकती है।

MEA ने बताया कि दोनों नेता मिडिल-ईस्ट के मौजूदा हालात पर भी चर्चा कर सकते हैं। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम एशिया में स्थिति काफी संवेदनशील बनी हुई है। यमन में UAE और सऊदी अरब के बीच तनाव बना हुआ है।

पीएम मोदी और शेख जायद की मुलाकात की तस्वीरें…

पीएम मोदी UAE के राष्ट्रपति को लेने दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पहुंचे।

पीएम मोदी UAE के राष्ट्रपति को लेने दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पहुंचे।

मोदी ने एयरपोर्ट पर शेख जायद को गले लगाया और उन्हें अपना भाई बताया।

मोदी ने एयरपोर्ट पर शेख जायद को गले लगाया और उन्हें अपना भाई बताया।

दोनों नेताओं ने एयरपोर्ट पर ही एक दूसरे का हालचाल पूछा।

दोनों नेताओं ने एयरपोर्ट पर ही एक दूसरे का हालचाल पूछा।

पीएम मोदी और राष्ट्रपति शेख जायद एयरपोर्ट से मीटिंग के लिए जाते हुए।

पीएम मोदी और राष्ट्रपति शेख जायद एयरपोर्ट से मीटिंग के लिए जाते हुए।

दोनों नेता एक ही गाड़ी से मीटिंग के लिए रवाना हुए।

दोनों नेता एक ही गाड़ी से मीटिंग के लिए रवाना हुए।

MEA ने दौरे की जानकारी देते हुए कहा-

  • दोनों देशों के बीच लंबे समय से ऊर्जा आपूर्ति को लेकर मजबूत साझेदारी है। साथ ही, लोकल करेंसी सेटलमेंट सिस्टम और बाइलेटरल इन्वेस्टमेंट ट्रीटी ने आर्थिक रिश्तों को और मजबूती दी है।
  • यह दौरा भारत-UAE कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप को और आगे बढ़ाने तथा आपसी हितों से जुड़े क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग के नए रास्ते खोलने का अवसर देगा।
  • भारत और UAE के बीच 1972 में राजनयिक संबंध स्थापित हुए थे। दोनों देश संयुक्त राष्ट्र, BRICS, I2U2 और UFI जैसे बहुपक्षीय मंचों पर भी करीबी सहयोग करते हैं।

गल्फ देशों में UAE को सबसे ज्यादा एक्सपोर्ट करता है भारत

UAE भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच 6 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का कारोबार है। इसमें UAE ने भारत से 2 लाख करोड़ रुपए का इम्पोर्ट किया है। भारत का UAE के साथ वित्तीय घाटा है। यानी भारत UAE से आयात ज्यादा करता है और निर्यात कम।

भारत ने वित्तवर्ष 2022-23 में UAE से 4 लाख करोड़ रुपए का इंपोर्ट किया है। भारत ने UAE के साथ एक ट्रेड पैक्ट पर भी साइन किया था। भारत, UAE को पेट्रोलियम प्रोडक्ट, मेटल, स्टोन, जेम्स एंड ज्वेलरी, मिनरल्स, फूड आइटम जैसे अनाज, चीनी, फल और सब्जियां, चाय, मांस और सीफूड, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग मशीनरी प्रोडक्ट और कैमिकल्स एक्सपोर्ट करता है।

भारत UAE को क्या एक्सपोर्ट करता है?

UAE को भारत के प्रमुख एक्सपोर्ट में पेट्रोलियम प्रोडक्ट, मेटल, स्टोन, जेम्स एंड ज्वैलरी, मिनरल्स, फूड आइटम जैसे अनाज, चीनी, फल और सब्जियां, चाय, मांस और सीफूड, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग मशीनरी प्रोडक्ट और कैमिकल्स शामिल हैं।

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शेयर बाजार में रौनक, सेंसेक्स-निफ्टी में उछाल, इन 5 वजहों से आई तेजी

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मुंबई, एजेंसी। मंगलवार (9 जून) को शेयर बाजार में तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स-निफ्टी दोनों हरे निशान पर बंद हुआ। सेंसेक्स 394.50 अंक उछल कर 73,918.76 पर बंद हुआ, तो निफ्टी में भी 119.10 अंक की तेजी आई, 23,242.10 के स्तर पर बंद हुआ।  

शेयर बाजार में तेजी की वजह

जियोपॉलिटिकल टेंशन में नरमी

ईरान और इजरायल ने सोमवार को कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अपील पर उन्होंने एक-दूसरे पर हमले बंद कर दिए हैं। इससे मार्केट में रौनक आ गई।

कच्चे तेल में गिरावट

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स फिसलकर प्रति बैरल $97 से टूटकर रू.93 के आसपास आ गया।

बैंकिंग शेयरों में खरीदारी

पीएसयू बैंक और प्राइवेट बैंक, दोनों के निफ्टी इंडेक्स में 1-1% से अधिक तेजी आई। इन्हें मिनिमम तीन साल के मेच्योरिटी वाले विदेशी कर्ज को लेकर कंसेशनल स्वैप फैसिलिटी को आरबीआई की मंजूरी से सपोर्ट मिला है। 

एशियाई बाजारों में रौनक

दक्षिण कोरिया का कोस्पी 7% से अधिक, इंडोनेशिया के जकार्ता कंपोजिट में करीब 5%, ताइवान के ताइवान वेटेड में करीब 3%, जापान के निक्केई 225 में 2% से अधिक और चीन के शंघाई कंपोजिट में आधे फीसदी से अधिक तेजी है।

India VIX में नरमी

मार्केट की घबराहट को मापने वाला इंडिया विक्स फिसलकर 17 के नीचे आया तो मार्केट को सपोर्ट मिला। फिलहाल यह 5.05% की गिरावट के साथ 16.17 पर है। इसके अधिक होने का मतलब मार्केट में वोलैटिलिटी का बढ़ना और नीचे आने का मतलब होता है इसका कम होना।

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FTA का लाभ उठाने की भारत की दर साझेदार देशों से बहुत कम

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नई दिल्ली, एजेंसी। मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का लाभ उठाने की भारत की दर महज 20-30 प्रतिशत तक सीमित है, जबकि भारत को निर्यात करने वाले साझेदार देशों में यह उपयोग दर 60-70 प्रतिशत तक है। मंगलवार को एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। निजी शोध संस्था जीटीआरआई की रिपोर्ट कहती है कि भारत के निर्यातक उच्च अनुपालन लागत और कई देशों में पहले से ही कम शुल्क के कारण एफटीए से मिलने वाले लाभों का पूरा उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। 

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने कहा कि मुक्त व्यापार समझौतों के चलते उलटे शुल्क ढांचे की समस्या और जटिल हो गई है, क्योंकि कई तैयार उत्पाद अब आसियान, जापान, दक्षिण कोरिया, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ऑस्ट्रेलिया जैसे साझेदार देशों से शून्य या कम शुल्क पर भारत में आ रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में कच्चे माल और उत्पादन सामग्रियों पर अपेक्षाकृत अधिक आयात शुल्क लगता है, जबकि उन्हीं सामग्रियों से बने तैयार उत्पाद एफटीए के तहत कम या शून्य शुल्क पर आयात हो जाते हैं, जिससे घरेलू उद्योगों की प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती है। 

जीटीआरआई ने एक उदाहरण देते हुए कहा कि इस्पात और एल्युमीनियम पर 7.5 से 10 प्रतिशत तक सर्वाधिक तरजीही देश (एमएफएन) शुल्क लगता है लेकिन इन्हीं से बने मशीनरी और उपकरण कई एफटीए के तहत बिना शुल्क भारत में प्रवेश कर सकते हैं। जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, “भारत के एफटीए साझेदार देशों में औसतन एमएफएन शुल्क बहुत कम या लगभग शून्य है, जबकि भारत का औसत व्यापार-भारित एमएफएन शुल्क लगभग 12.6 प्रतिशत है।” 

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पिछले तीन वर्षों में भारत का आसियान, जापान और दक्षिण कोरिया के साथ औसत वार्षिक व्यापार घाटा लगभग 62 अरब अमेरिकी डॉलर रहा है। थिंक टैंक ने सुझाव दिया कि भारत को शुल्क संरचना में सुधार, उलटी शुल्क संरचना को ठीक करने, घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने और एफटीए उपयोग की निगरानी के लिए एक अलग संस्था बनाने पर विचार करना चाहिए।

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Salary Hike: सैलरी में होगा इजाफा, कंपनियां कर सकती हैं 8.6-10.2% तक वेतन बढ़ोतरी

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मुंबई, एजेंसी। चालू वित्त वर्ष में कंपनियों में कार्यरत कर्मचारियों के वेतन में 8.6 प्रतिशत से 10.2 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी होने की संभावना है। कुशल एवं बेहतर निष्पादन वाले कर्मचारियों की लगातार बढ़ती मांग के कारण यह वृद्धि देखने को मिल रही है। मंगलवार को एक रिपोर्ट में यह संभावना जताई गई। टीमलीज सर्विसेज की रोजगार एवं वेतन परिदृश्य पर जारी रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान औसत वेतन वृद्धि 8.6 प्रतिशत से 10.2 प्रतिशत के दायरे में रह सकती है। इसमें इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी), ईवी अवसंरचना, वित्तीय-प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा और औषधि जैसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों की प्रमुख भूमिका रहने वाली है। 

रिपोर्ट कहती है कि ईवी और उससे जुड़े क्षेत्र में 9.6 प्रतिशत से 10.2 प्रतिशत तक वेतन वृद्धि देखने को मिल सकती है। इसमें इलेक्ट्रिकल इंजीनियर, गुणवत्ता नियंत्रण निरीक्षक और साइट इंजीनियर जैसी भूमिकाओं में सबसे अधिक वृद्धि होने का अनुमान है। टीमलीज सर्विसेज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष बालासुब्रमण्यम ए ने कहा, “भारत का वेतन ढांचा पहले की तुलना में अधिक विविध और प्रदर्शन-आधारित होता जा रहा है। अब वेतन बढ़ोतरी के रुझान अलग-अलग क्षेत्रों की वृद्धि और विशेष कौशल पर निर्भर कर रहे हैं। वेतन वृद्धि अब केवल बड़े मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं रह गई है। छोटे और उभरते शहर भी अपनी स्थिति को लगातार मजबूत कर रहे हैं।”

रिपोर्ट के मुताबिक, वाहन, बीमा और बीपीओ जैसे क्षेत्रों में इस साल वेतन वृद्धि 8.9 प्रतिशत से 9.5 प्रतिशत के बीच रह सकती है। वहीं बैंकिंग, निर्माण एवं रियल एस्टेट, दूरसंचार और कपड़ा जैसे क्षेत्रों में वेतन वृद्धि 8.6 प्रतिशत से 8.8 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है। रिपोर्ट कहती है कि विभिन्न कार्य क्षेत्रों में वेतन वृद्धि का सबसे अधिक असर बिक्री एवं विपणन, इंजीनियरिंग और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्रों में देखा जा रहा है। 

शहरों के स्तर पर चेन्नई, पुणे, हैदराबाद और अहमदाबाद वेतन वृद्धि के मामले में आगे रह सकते हैं। इनके अलावा विशाखापट्टनम और नागपुर जैसे उभरते शहरों में भी अच्छी वृद्धि देखे जाने की संभावना है। इसके उलट सूरत, चंडीगढ़ और लखनऊ जैसे शहरों में पिछले वर्ष की तुलना में वेतन वृद्धि की दर में थोड़ी गिरावट देखी गई है।

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