छत्तीसगढ़
निर्माण कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी: जिला पंचायत सीईओ गोकुल रावटे…
जांजगीर–चांपा। जिला पंचायत के सभाकक्ष में आज बुधवार को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता जिला पंचायत सीईओ गोकुल रावटे ने की। बैठक के दौरान उन्होंने विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जिले में चल रहे सभी निर्माण एवं विकास कार्यों में गुणवत्ता और समय-सीमा का कड़ाई से पालन किया जाए। किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी और कार्य निर्धारित प्रक्रिया अनुसार पूर्ण किए जाएँ।
बैठक में मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), स्वच्छ भारत मिशन, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, 15वें वित्त आयोग, जिला एवं जनपद पंचायत विकास निधि, मुख्यमंत्री आंतरिक विद्युतीकरण योजना, डीपीआरसी प्रशिक्षण सहित अन्य योजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। सीईओ ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि निर्माण कार्यों में पारदर्शिता, गुणवत्तापूर्ण सामग्री एवं जन-सहभागिता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने मैदानी अमले को नियमित रूप से गांवों का भ्रमण कर कार्यों की मॉनिटरिंग करने के निर्देश भी दिए।
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) वर्ष 2025–26 अंतर्गत स्वीकृत नए आवासों की राशि हितग्राहियों के खातों में हस्तांतरित किए जाने की जानकारी दी गई। सीईओ रावटे ने स्पष्ट कहा कि आवास निर्माण कार्यों में बिना देरी के प्रगति लाई जाए तथा जिन आवासों का निर्माण प्रारंभ नहीं हुआ है, उन्हें तत्काल शुरू कराया जाए। इसके लिए मस्टर रोल जारी करने, मैदानी अमले की सक्रियता बढ़ाने और विभागों के बीच मजबूत समन्वय पर बल दिया गया।

मनरेगा कार्यों की समीक्षा के दौरान उन्होंने मजदूरी भुगतान, सामग्री भुगतान, सामाजिक अंकेक्षण और परिसंपत्तियों के संरक्षण पर विशेष ध्यान देने की बात कही। उन्होंने निर्देश दिए कि भुगतान एवं मस्टर रोल में किसी भी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए तथा जल संरक्षण, नाला संरक्षण, खेत-तालाब निर्माण, वृक्षारोपण एवं एनआरएम कार्यों में गति लाई जाए। मनरेगा के माध्यम से अधिक से अधिक ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराने और निर्मित परिसंपत्तियों के सतत उपयोग पर भी जोर दिया गया। उन्होंने क्षेत्र में सभी पंचायत भवनों में क्यूआर कोड लगाए जाने, युक्तधारा पोर्टल में लक्ष्य अनुसार कार्य स्वीकृति, एनआरएम एवं कृषि श्रेणी के कार्यों का नियमानुसार व्यय, ईएमबी के माध्यम से मूल्यांकन और एरिया ऑफिसर एप से नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
सीईओ रावटे ने अमृत सरोवर के सदुपयोग को ग्रामीण आजीविका संवर्धन का माध्यम बनाने की आवश्यकता जताई। उन्होंने मत्स्य पालन को बढ़ावा देने, मत्स्य विभाग की सहायता से बीज डालने एवं रेन वाटर हार्वेस्टिंग तथा सोखता गड्ढा निर्माण के लिए प्रेरित करने के निर्देश दिए। उन्होंने पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के लाभों के प्रति ग्रामीणों को जागरूक करने और अधिकाधिक हितग्राहियों तक योजना का लाभ पहुँचाने पर बल दिया।
बैठक में ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के ईई, एसडीईओ, जनपद पंचायत सीईओ, जिला एवं जनपद पंचायत समन्वयक, तकनीकी सहायक, परियोजना अधिकारी (मनरेगा), कार्यक्रम अधिकारी सहित मैदानी अमले के अधिकारी उपस्थित रहे। प्रशासन ने आश्वस्त किया कि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सतत मॉनिटरिंग जारी रहेगी।
छत्तीसगढ़
रायपुर : विशेष लेख : मियावकी वन तकनीक से हरित छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ते कदम
’कम समय में घने जंगल तैयार कर पर्यावरण संरक्षण को मिल रही नई दिशा’
- धनंजय राठौर , संयुक्त संचालक
- अशोक कुमार चंद्रवंशी, सहायक जनसंपर्क अधिकारी

वन क्षेत्र बढ़ाने के लिए मियावाकी तकनीक एक बेहद प्रभावी और लोकप्रिय विधि बन गई है। जापानी वनस्पतिशास्त्री डॉ. अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित यह तकनीक केवल 2-3 वर्षों में बंजर भूमि को घने, आत्मनिर्भर सूक्ष्म वनों में बदल देती है। पारंपरिक वृक्षारोपण की तुलना में यह विधि 10 गुना तेजी से बढ़ती है और 30 गुना अधिक घने जंगल बनाती है, जो शहरी क्षेत्रों के लिए आदर्श है।
छत्तीसगढ़ में पर्यावरण संरक्षण और वन क्षेत्र बढ़ाने के लिए मियावकी वन तकनीक तेजी से अपनाई जा रही है। राज्य में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तथा छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम लिमिटेड द्वारा इस तकनीक के जरिए शहरी क्षेत्रों, औद्योगिक क्षेत्रों और खनन प्रभावित इलाकों में बड़े पैमाने पर हरियाली विकसित की जा रही है। मियावकी पद्धति में स्थानीय प्रजातियों के पौधों को अधिक घनत्व में लगाया जाता है, जिससे मात्र 3 से 5 वर्षों में घना जंगल तैयार हो जाता है।

’राज्य में तेजी से बढ़ रहा सघन वनीकरण’
छत्तीसगढ़ में वर्ष 2022 से मियावकी पद्धति के तहत लगातार वृक्षारोपण किया जा रहा है। वर्ष 2022 में कोटा मण्डल में एनटीपीसी लिमिटेड के सहयोग से 1 हेक्टेयर क्षेत्र में 23 हजार पौधे तथा 0.3 हेक्टेयर में 7 हजार पौधे लगाए गए। वर्ष 2023 में कोटा के भिल्मी क्षेत्र में 6.4 हेक्टेयर भूमि पर 64 हजार पौधों का रोपण किया गया। वहीं गेवरा क्षेत्र में 2 हेक्टेयर भूमि पर 20 हजार पौधे लगाए गए। वर्ष 2024 में कोटा के उच्चभट्टी क्षेत्र में 3.2 हेक्टेयर में 32 हजार पौधे लगाए गए। इसके अलावा रायगढ़ मण्डल के तिलईपाली और छाल क्षेत्रों में कुल 3.75 हेक्टेयर भूमि पर 37 हजार 500 पौधों का सफल रोपण किया गया।
’वर्ष 2025 में कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं जारी’
वर्तमान में राज्य के कई क्षेत्रों में वृक्षारोपण कार्य तेजी से जारी है। बारनवापारा मण्डल में ‘हरियर छत्तीसगढ़’ योजना के तहत 6 हजार पौधे लगाए जा रहे हैं। कोरबा और रायगढ़ क्षेत्रों में साउथ इस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड के सहयोग से 4 हेक्टेयर क्षेत्र में 40 हजार पौधों का रोपण किया जा रहा है। वहीं विशेष परियोजनाओं के अंतर्गत महानदीकोलफील्ड लिमिटेड द्वारा 1.9 हेक्टेयर भूमि पर 64 हजार पौधे लगाए जा रहे हैं। इसके साथ ही अरपा नदी के किनारे भी बड़े पैमाने पर पौधारोपण कर हरित क्षेत्र का विस्तार किया जा रहा है।
’पर्यावरण संरक्षण में मिल रहे बहुआयामी लाभ’
विशेषज्ञों के अनुसार मियावकी वन सामान्य जंगलों की तुलना में अधिक कार्बन अवशोषित करते हैं। इससे जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है। यह तकनीक वायु और ध्वनि प्रदूषण को कम करने, भू-जल स्तर सुधारने और मिट्टी संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इन वनों की शुरुआती वर्षों में देखभाल की जाती है, जिसके बाद ये जंगल स्वतः विकसित होने लगते हैं। इससे रखरखाव की लागत कम होती है और लंबे समय तक पर्यावरणीय लाभ मिलता है।
’बंजर डंप क्षेत्र से हरित जंगल बनने की ओर गेवरा की प्रेरक पहल’
छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम लिमिटेड ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अनूठी पहल करते हुए कोरबा जिले के गेवरा क्षेत्र के 12.45 हेक्टेयर डंप क्षेत्र में 33 हजार 935 मिश्रित प्रजातियों के पौधों का सफल रोपण किया है। वन मंत्री केदार कश्यप ने इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है।
’जहां हरियाली संभव नहीं थी, वहां तैयार हो रहा जंगल’
कोयला खनन के बाद डंप क्षेत्रों में उपजाऊ मिट्टी नीचे दब जाती है और ऊपर पत्थर, कोयला अवशेष तथा अनुपजाऊ मिट्टी रह जाती है। ऐसे क्षेत्रों में पौधों का उगना बेहद कठिन माना जाता है। लेकिन वैज्ञानिक पद्धति और सतत प्रयासों से इस बंजर भूमि को अब हरियाली में बदला जा रहा है।
’वैज्ञानिक तरीके से किया गया पौधारोपण’
डंप क्षेत्र की कठिन परिस्थितियों को देखते हुए मिट्टी को उपजाऊ बनाने के लिए वर्मी कम्पोस्ट, नीमखली और डीएपी का उपयोग किया गया। जीपीएस सर्वे और सीमांकन के बाद व्यवस्थित गड्ढे तैयार किए गए तथा 3 से 4 फीट ऊंचाई वाले स्वस्थ पौधों का रोपण किया गया। इस क्षेत्र में नीम, शीशम, सिरस, कचनार, करंज, आंवला, बांस, महोगनी, महुआ और बेल जैसी विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं। इससे आने वाले समय में यह क्षेत्र पक्षियों और अन्य वन्य जीवों के लिए भी उपयुक्त आवास बन सकेगा।
निरंतर देखभाल से मिल रही सफलता
शुरुआती 2-3 वर्षों की देखभाल के बाद, यह वन पूरी तरह से आत्मनिर्भर हो जाता है और इसे किसी उर्वरक या पानी की आवश्यकता नहीं होती है। रोपण के बाद पौधों की नियमित सिंचाई, खाद, निंदाई-गुड़ाई, घास कटाई और सुरक्षा का कार्य लगातार किया जा रहा है। मृत पौधों का समय पर प्रतिस्थापन भी सुनिश्चित किया जा रहा है। वर्ष 2025 से 2029 तक पांच वर्षों तक रखरखाव के बाद इस विकसित हरित क्षेत्र को साउथ इस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड गेवरा को सौंपा जाएगा।
’हरित भविष्य की ओर मजबूत पहल’
कम जगह में घने जंगल बनाकर शहरों में प्रदूषण (धूल और ध्वनि) को कम करने में सहायक होते हैं। ये वन पारंपरिक वनों की तुलना में 30 गुना अधिक कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करते हैं। गेवरा की यह पहल दर्शाती है कि सही योजना, वैज्ञानिक तकनीक और निरंतर प्रयासों से बंजर और पत्थरीली भूमि को भी घने जंगल में बदला जा सकता है। आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र सघन हरित वन और जैव विविधता से भरपूर मानव निर्मित जंगल के रूप में विकसित होगा, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रेरणादायक उदाहरण बनेगा।
कोरबा
उद्यमिता विकास प्रशिक्षण हेतु 12 आवेदकों का चयन
कोरबा। रायपुर में आयोजित होने वाले उद्यमिता विकास संबंधी प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए 23 अप्रैल 2026 तक इच्छुक अभ्यर्थियों से आवेदन आमंत्रित किए गए थे। प्राप्त आवेदनों का परीक्षण एवं सारणीकरण किया गया, जिसके आधार पर कुल 12 आवेदकों का चयन किया गया है।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 15 मई 2026 से प्रारम्भ होना सुनिश्चित है।चयनित आवेदकों की सूची इस प्रकार है-विकास कुमार, कौशलेंद्र सिंह, योगिता धाकड़े, विष्णु सिंह राठिया, आशुतोष मार्वल, अजय डहरिया, गौरव अग्रवाल, अमित कुमार चैहान, स्वप्निल पाटिल, राजकुमारी, वीरेंद्र कुमार तरुण, वंशिका सिंह सेंगर।
प्रशिक्षण कार्यक्रम से संबंधित आगे की जानकारी चयनित अभ्यर्थियों को समय-समय पर उपलब्ध कराई जाएगी।
कोरबा
सुरक्षित भविष्य कि ओर एक कदम – अपनी बेटी को दें सुरक्षा का उपहार
कोरबा। बेटियों के उज्जवल भविष्य और स्वस्थ जीवन में कैंसर जैसी गंभीर बिमारी से बचाव के लिए एचपीवी टीकाकरण अत्यंत आवश्यक है। यह टीका विशेष रूप से सर्वाइकल कैंसर (बच्चेदानी के मुँह का कैंसर) से सुरक्षा प्रदान करने में सहायक है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.एस.एन.केशरी ने जिले के सभी पात्र बालिकाओं, अभिभावकों एवं नागरिकों से अपील किया है कि वे पात्र बालिकाओं (जिन किशोरियों ने 14 वर्ष की आयु पूर्ण कर ली हो, लेकिन 15 वर्ष का जन्मदिन न मनाया हो ) का एचपीवी का टीकाकरण करावं। यह टीका पूरी तरह सुरक्षित और डॉक्टर द्वारा प्रमाणित है। एचपीवी टीका राष्ट्रीय टीकाकरण के अंतर्गत मेडिकल कालेज संबद्ध जिला चिकित्सालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है।
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