विदेश
सीजफायर के बीच नेतन्याहू का ऐलानः समझौता करें या युद्ध, इजराइल हर हाल में पूरा करेगा लक्ष्य
यरूशलम, एजेंसी। मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच इज़राइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इज़राइल अपने सभी सैन्य और रणनीतिक लक्ष्यों को हर हाल में पूरा करेगा। चाहे वह समझौते के जरिए हो या फिर दोबारा युद्ध शुरू करके। नेतन्याहू ने देश के लोगों की हिम्मत और सेना की बहादुरी की सराहना करते हुए कहा कि इस संघर्ष में इज़राइल ने बड़ी जीत हासिल की है। उन्होंने दावा किया कि ईरान अब पहले से कहीं ज्यादा कमजोर हो गया है, जबकि इज़राइल पहले से ज्यादा मजबूत स्थिति में है।

उन्होंने उन सैनिकों और नागरिकों को भी श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने इस संघर्ष में अपनी जान गंवाई। साथ ही, घायल लोगों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की और शोकाकुल परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। इस बयान के बीच जमीनी हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। इज़राइल डिफेंस फोर्स (IDF) ने दावा किया है कि उसने बेरूत में हिज़्बुल्लाह के एक बड़े नेता के करीबी सहयोगी अली यूसुफ हर्शी को मार गिराया है। इसके अलावा, दक्षिणी लेबनान में हथियारों के ठिकानों और सप्लाई रूट्स को भी निशाना बनाया गया है।
इज़राइल का कहना है कि लेबनान में उसकी कार्रवाई जारी रहेगी, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच हुए सीजफायर में लेबनान शामिल नहीं है। इस बात को अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने भी स्पष्ट किया है कि ऐसा कोई वादा नहीं किया गया था। इस बीच, इज़राइल की कार्रवाई से लेबनान में हालात और खराब हो गए हैं। लगातार हमलों के कारण वहां भारी जनहानि और तबाही की खबरें सामने आ रही हैं।
विदेश
भारत के नक्शेकदम पर नेपाल की नई बालेन सरकार, पेट्रोलियम उत्पादों पर लिया बड़ा फैसला
काठमांडू, एजेंसी। भारत की राह पर चलते हुए नेपाल की नई सरकार ने बढ़ती महंगाई से राहत देने के लिए पेट्रोलियम उत्पादों पर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने पेट्रोल, डीजल और केरोसिन पर लगने वाले कस्टम ड्यूटी और इंफ्रास्ट्रक्चर टैक्स में 50% तक की छूट देने का निर्णय लिया है। यह फैसला कैबिनेट बैठक में लिया गया, जिसकी जानकारी मंत्री प्रतिभा रावल ने दी। सरकार का मानना है कि इससे आम लोगों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम होगा। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब भारत ने भी हाल ही में पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाकर आम लोगों को राहत दी थी। अब नेपाल ने भी उसी राह पर चलते हुए ईंधन को सस्ता करने की कोशिश की है।

नेपाल में फिलहाल पेट्रोल पर करीब 25.23 नेपाली रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 12.02 रुपये प्रति लीटर कस्टम ड्यूटी लगती है। इसके अलावा दोनों पर 10 रुपये प्रति लीटर इंफ्रास्ट्रक्चर टैक्स भी लिया जाता है। इसके साथ VAT, रोड मेंटेनेंस टैक्स और अन्य शुल्क भी लागू होते हैं। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है। इस मार्ग से दुनिया का लगभग 20% तेल गुजरता है, इसलिए यहां संकट का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ा है।
तेल की कीमतों में उछाल के कारण परिवहन लागत बढ़ गई है, जिससे रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी असर पड़ा है। एशियाई देशों पर इसका असर ज्यादा देखा जा रहा है क्योंकि वे खाड़ी देशों से तेल आयात पर निर्भर हैं। हालांकि नेपाल सीधे खाड़ी देशों से तेल नहीं खरीदता, लेकिन वह पूरी तरह भारत पर निर्भर है। भारत भी इस समय ईंधन आयात में दबाव झेल रहा है। इसी कारण भारत ने भी हाल ही में पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती की थी। पिछले वित्त वर्ष में नेपाल ने करीब 288 अरब नेपाली रुपये के पेट्रोलियम उत्पाद आयात किए थे, जो देश का सबसे बड़ा आयात है।
विदेश
ईरान का पलटवारः सऊदी के आर्थिक दिल पर दागी मिसाइल ! जुबैल इंडस्ट्रियल सिटी में लगी भीषण आग
तेहरान, एजेंसी। ईरान और सऊदी अरब के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ा हमला सामने आया है। अमेरिका और इजराइल के हमलों के जवाब में पलटवार करते हुए ईरान की एक मिसाइल ने सीधे अल जुबैल इंडस्ट्रियल सिटी को निशाना बनाया, जिससे वहां भीषण आग लग गई। अल जुबैल सऊदी अरब का सबसे बड़ा औद्योगिक क्षेत्र माना जाता है। यह लगभग 1,000 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और यहां 150 से ज्यादा बड़े औद्योगिक संयंत्र मौजूद हैं। यह क्षेत्र सऊदी की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम है और देश के GDP में लगभग 7% से 12% तक योगदान देता है।

यह इंडस्ट्रियल सिटी विदेशी निवेश का भी बड़ा केंद्र है, जहां कुल विदेशी निवेश का लगभग 50% हिस्सा आता है। यहां स्टील, एल्युमिनियम, खाद (फर्टिलाइज़र) और केमिकल इंडस्ट्री के बड़े-बड़े प्लांट्स स्थित हैं। ऊर्जा के लिहाज से भी यह क्षेत्र बेहद महत्वपूर्ण है। यहां रोजाना करीब 5 लाख से 7 लाख बैरल तेल की प्रोसेसिंग होती है और बड़े पावर प्लांट्स इस पूरे सिस्टम को सपोर्ट करते हैं। मिसाइल हमले के बाद लगी आग ने इन औद्योगिक इकाइयों और ऊर्जा ढांचे को खतरे में डाल दिया है। अगर नुकसान बड़ा हुआ, तो इसका असर सिर्फ सऊदी अरब ही नहीं, बल्कि वैश्विक तेल और उद्योग बाजार पर भी पड़ सकता है।
विदेश
ट्रंप की डेडलाइन समाप्ति से पहले ही बड़े अटैक शुरू ! अमेरिका-इजराइल ने ईरान के 3 पुल उड़ाए, कई मौतें व ट्रेन सेवाएं बंद
तेहरान/तेल अवीव/वाशिंगठन, एजेंसी। ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमले तेज हो गए हैं। डोनाल्ड ट्रंप की तय समय-सीमा खत्म होने से पहले ही ईरान में कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, कम से कम तीन बड़े पुलों को निशाना बनाकर उड़ा दिया गया है। उत्तर-पश्चिम ईरान के तबरेज-जांजन हाईवे पर बने एक अहम पुल को पूरी तरह तबाह कर दिया गया। वहीं काशान में एक रेलवे पुल पर हमले में दो लोगों की मौत और तीन के घायल होने की खबर है।मशहद में हालात को देखते हुए ट्रेन सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कर दी गई हैं। स्थानीय प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है, क्योंकि रेलवे नेटवर्क पर हमले की आशंका जताई गई थी।

🚨 President Trump gives Iran until Tuesday at 8:00 PM ET to make a deal or he will blow up Iranian power plants and bridges. pic.twitter.com/wm9VdQLJmp
— Global News & Geopolitics 🌍 (@GlobalNewsGeo) April 6, 2026
इसके अलावा तेहरान, कोम और लोरेस्तान समेत कई इलाकों में धमाकों की खबरें सामने आई हैं। मेहराबाद एयरपोर्ट और एक बिजली संयंत्र को भी निशाना बनाए जाने की बात कही गई है। रणनीतिक रूप से अहम खार्ग द्वीप पर भी दोबारा हमला हुआ है, जहां से तेल निर्यात किया जाता है। यहां हमले के बाद धुएं के गुबार उठते देखे गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पारचिन कॉम्प्लेक्स जो मिसाइल और रक्षा उत्पादन से जुड़ा एक संवेदनशील सैन्य ठिकाना है वहां भी बड़ा धमाका हुआ है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, उत्तरी अल्बोर्ज़ प्रांत में हवाई हमले में कम से कम 18 लोगों की मौत हुई है।
वहीं कई रिहायशी इलाकों को भी नुकसान पहुंचने की खबर है। इज़राइल की सेना का दावा है कि हाल के हमलों में 130 से अधिक ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम नष्ट कर दिए गए हैं, जिससे ईरान की रक्षा क्षमता को बड़ा झटका लगा है। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए ईरान को अल्टीमेटम दिया हुआ है। चेतावनी दी गई थी कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो ईरान के पुलों और ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया जाएगा जो अब होता दिख रहा है। इस बीच, ईरान ने अपने पड़ोसी देशों से अपील की है कि वे अमेरिका को अपने हवाई क्षेत्र या जमीन का इस्तेमाल न करने दें।
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