छत्तीसगढ़
2 दिन रायपुर में रहेंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू:25 को AIIMS-NIT के दीक्षांत समारोह में शामिल होंगी, 26 को जगन्नाथ मंदिर जाएंगी; ट्रैफिक एडवाइजरी जारी
रायपुर ,एजेंसी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 25-26 अक्टूबर को 2 दिन के लिए रायपुर के दौरे पर रहेंगी। इस दौरान शहर की सुरक्षा व्यवस्था हाई अलर्ट पर होगी। राष्ट्रपति के दौरे को लेकर ट्रैफिक पुलिस ने रूट प्लान बनाया है। जिसमें VVIP का काफिला जिन रास्तों से गुजरेगा, वहां कुछ देर के लिए आम लोगों को इंतजार करना होगा।
25 अक्टूबर को सुबह 11 बजे राष्ट्रपति मुर्मू दिल्ली से माना के स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट पहुंचेंगी। जहां से सड़क मार्ग से वो एम्स हॉस्पिटल के ऑडिटोरियम के लिए निकलेंगी। यहां पहुंचने के लिए VVIP काफिला माना से VIP रोड होकर पीटीएस चौक जाएगा।
ग्राम टेमरी, ग्राम फुंडहर चौक से फुंडहर एक्सप्रेस-वे होकर तेलीबांधा एक्सप्रेस-वे ब्रिज के नीचे से रिंग रोड नंबर-1 होकर पचपेड़ीनाका, संतोषीनगर, कुशालपुर चौक, रायपुरा ब्रिज के आगे से यू-टर्न लेगा।

राष्ट्रपति मुर्मू एम्स हॉस्पिटल भी आएंगी।
11 बजे पहुंचेंगी एम्स अस्पताल
राष्ट्रपति का काफिला सर्विस रोड से होकर रोहिणीपुरम गोल चौक, गायत्री हॉस्पिटल चौक से एनआईटी तिराहा, रविशंकर यूनिवर्सिटी गेट के सामने, आमानाका ब्रिज, मोहबा बाजार चौक, मोहबा बाजार ब्रिज से एम्स हॉस्पिटल गेट नंबर 5 से एंट्री करेगा। जो साढ़े 11 बजे एम्स हॉस्पिटल के कार्यक्रम स्थल ऑडिटोरियम में पहुंचेगा।
एम्स हॉस्पिटल के कार्यक्रम के बाद 12:45 बजे वापस डीडीनगर रोड से होकर रिंग रोड नम्बर-1 से कांशीराम नगर ब्रिज किनारे से केनाल रोड होकर बूढ़ीमाई चौक, कटोरा तालाब चौक, पंचशील नगर चौक, आनंद नगर चौक से जीई रोड होकर भगत सिंह चौक और अंबेडकर चौक से होकर दोपहर 1 बजे राजभवन पहुंचेंगी।
करीब 2 घंटे बाद 3 बजे राष्ट्रपति राजभवन से डीडीयू ऑडिटोरियम साइंस कॉलेज रायपुर के लिए जाएंगी। इसके लिए एक बार फिर उसी सड़क का इस्तेमाल होगा, जो रिंग रोड से होकर रोहिणीपुरम की ओर जाता है।

डीडीयू ऑडिटोरियम।
पुरखौती मुक्तांगन भी जाएंगी राष्ट्रपति
इस कार्यक्रम के बाद VVIP काफिला डीडीयू ऑडिटोरियम से शाम साढ़े 4 बजे बजे डीडीनगर मार्ग से होकर रिंग रोड 1 से तेलीबांधा एक्सप्रेस-वे होकर फुंडहर एक्सप्रेस-वे चौक से ग्राम फुंडहर चौक से VIP रोड होकर पीटीएस चौक, माना विमानतल तिराहा।
स्टेडियम टर्निंग, चीचा तिराहा, खूबचंद बघेल चौक, चंदूलाल चंद्राकर चौक, महात्मा गांधी चौक, सेक्टर-22, राज्योत्सव तिराहा, नंदकुमार पटेल चौक से कार्यक्रम स्थल पुरखौती मुक्तांगन शाम सवा 5 बजे पहुंचेगा।
पुरखौती मुक्तांगन के बाद इस मार्ग से वापस वीआईपी रोड से होकर फुंडहर चौक से एक्सप्रेस-वे चौक फुंडहर होकर एक्सप्रेस-वे रोड से होकर शंकर नगर एक्सप्रेस वे ब्रिज के नीचे से भारतमाता चौक, भगत सिंह चौक, अंबेडकर चौक होकर शाम साढ़े 6 बजे राजभवन में आराम करेंगी।
- 26 अक्टूबर का VVIP मूवमेंट का मार्ग
26 अक्टूबर को राष्ट्रपति सुबह 9 बजे राजभवन से जगन्नाथ मंदिर, गायत्री नगर के लिए निकलेंगी, जो राजभवन चौक से अंबेडकर चौक जीई रोड होकर एसआरपी चौक से भारतमाता चौक, शंकर नगर एक्सप्रेस वे ब्रिज चौक, अनुपम नगर चौक से खम्हारडीह थाना होकर सुबह 9 बजकर 10 मिनट पर गायत्री नगर जगन्नाथ मंदिर पहुंचेंगी।
इसके बाद सुबह 9:40 बजे जगन्नाथ मंदिर, गायत्री नगर से माना एयरपोर्ट के लिए निकलेंगी, जो खम्हारडीह थाना चौक से अनुपम नगर चौक, शंकर नगर एक्सप्रेस वे ब्रिज सर्विस रोड से एक्सप्रेस वे मार्ग होकर फुंडहर एक्सप्रेस वे चौक से फुंडहर चौक वीआईपी रोड होकर सुबह 10 बजे माना एयरपोर्ट पहुंचेगी। इसके बाद भिलाई के लिए हेलीकॉप्टर से रवाना होंगी।
26 अक्टूबर को भिलाई में कार्यक्रम के बाद दोपहर 1 बजकर 5 मिनट में वापस आकर माना एयरपोर्ट से राजभवन के लिए रवाना होंगी, जो व्हीआईपी रोड से ग्राम फुंडहर से एक्सप्रेस-वे मार्ग से शंकर नगर एक्सप्रेस-वे ब्रिज के नीचे से भगत सिंह चौक से जीई रोड होकर अंबेडकर चौक से राजभवन चौक होकर दोपहर 13:20 बजे राजभवन पहुंचेंगी।
26 अक्टूबर को 2 बजकर 55 मिनट पर राष्ट्रपति राजभवन से आयुष विश्वविद्यालय नया रायपुर के लिए रवाना होंगी, जो जी.ई रोड से भगत सिंह चौक से शंकर नगर एक्सप्रेस वे ब्रिज से एक्सप्रेस-वे मार्ग होकर फुंडहर एक्सप्रेस-वे चौक से ग्राम फुंडहर व्हीआईपी रोड से पीटीएस चौक ,नया रायपुर विमानतल तिराहा, स्टेडियम टर्निंग, चीचा तिराहा, खूबचंद बघेल चौक, चंदूलाल चंद्राकर चौक, महात्मा गांधी चौक, सेक्टर-22, राज्योत्सव तिराहा, नंदकुमार पटेल चौक, दानवीर भामाशाह चौक उपरवारा, बैरिस्टर छेदी लाल चौक से लॉ यूनिवर्सिटी टर्निंग होकर दोपहर साढ़े 3 बजे आयुष विश्वविद्यालय पहुंचेंगी।
आयुष यूनिवर्सिटी कार्यक्रम के बाद साढ़े 4 बजे राष्ट्रपति आयुष यूनिवर्सिटी से सीधे माना एयरपोर्ट जाएंगी। 5 बजे के करीब वह दिल्ली के लिए रवाना होंगी।
ट्रैफिक पुलिस ने जारी की एडवाइजरी
राष्ट्रपति के दौरे को लेकर रायपुर ट्रैफिक पुलिस ने एडवाइजरी जारी करते हुए कहा कि, 25 और 26 अक्टूबर को VVIP रोड में सामान्य यातायात का आवागमन कुछ समय के लिए पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। जब काफिला इन रास्तों से गुजर जाएगा तो यातायात वापस सामान्य कर दिया जाएगा।
इन वैकल्पिक रास्तों का करें इस्तेमाल
ट्रैफिक पुलिस ने लोगों की सहूलियत के लिए उन्हें वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। इस दौरान एयरपोर्ट जाने वाले यात्री वैकल्पिक मार्ग जोरा-धरमपुरा होकर या सेरीखेड़ी से नवा रायपुर एंट्री मार्ग होकर माना एयरपोर्ट पहुंच सकते है।
इसी प्रकार एम्स हॉस्पिटल ऑडिटोरियम और पं.दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम आवागमन के दौरान VIP मार्ग रिंग रोड नम्बर-1 में सामान्य यातायात का आवागमन कुछ समय के लिए बैन रहेगा।
इसके अलावा 25 अक्टूबर को रिंग-रोड 1 में भारी मालवाहक वाहनों का आना-जाना सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक प्रतिबंधित रहेगा। इस दौरान भारी मालवाहक वाहन चालक व्हीआईपी मूवमेंट के दौरान वैकल्पिक मार्ग टाटीबंद-सिलतरा बाइपास से होकर रिंगरोड नंबर 3 से आना-जाना कर सकते हैं।
छत्तीसगढ़
रायपुर : फिल्में समाज को संदेश देने का सशक्त माध्यम- राज्यपाल डेका



रायपुर। फिल्में और डॉक्युमेंट्री केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि समाज को जागरूक करने और सकारात्मक संदेश देने का एक प्रभावी साधन हैं। राज्यपाल रमेन डेका ने आज राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता डॉक्यूमेंट्री फिल्मों के सम्मान समारोह में उक्त बातें कही। यह कार्यक्रम रायपुर के एक निजी होटल में छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम और संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था।

राज्यपाल ने कहा कि आदिम युग से ही मनुष्य विभिन्न माध्यमों से अपने विचार और संदेश व्यक्त करता रहा है। समय के साथ नाटक, रेडियो, टेलीविजन और अब डिजिटल माध्यमों ने इस भूमिका को और व्यापक बनाया है। उन्होंने कहा कि पहले सिनेमा का मूल उद्देश्य केवल धन अर्जित करना नहीं था, बल्कि समाज को संदेश देना और जागरूक करना था। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भी भारतीय सिनेमा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
राज्यपाल ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से बस्तर में नक्सलवाद के विरुद्ध उल्लेखनीय सफलता मिली है। फिल्म निर्माताओं को चाहिए कि अब वे बस्तर की समृद्ध संस्कृति से देश और दुनिया को परिचित कराएं। इससे क्षेत्र की सकारात्मक छवि को मजबूती मिलेगी।
राज्यपाल ने सद्गति, चरणदास चोर और देवदास जैसी फिल्मों और नाटकों का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन और जागरूकता लाने वाली फिल्मों की आज भी उतनी ही आवश्यकता है। राज्यपाल ने कहा की लोककलाओं, लोकगीतों, जनजातीय परंपराओं और पर्व-त्योहारों जैसे हमारे धरोहर को स्थायी रूप से संरक्षित करने का महत्वपूर्ण माध्यम डॉक्यूमेंट्री फिल्में हैं। उन्होंने कलाकारों से लोककला, लोकगीत, जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
राज्यपाल ने कहा कि मोबाइल की बढ़ती लत आज गंभीर सामाजिक समस्या बनती जा रही है। बच्चे खेल के मैदानों से दूर हो रहे हैं और उनकी रचनात्मकता प्रभावित हो रही है। उन्होंने कलाकारों से आग्रह किया कि वे नई पीढ़ी को कला, संगीत, नाटक और नृत्य जैसी रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने के लिए आगे आएं। इस अवसर पर राज्यपाल ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार प्राप्त डॉक्युमेंट्री फिल्मों छत्तीसगढ़ के भीम दाऊ चिंताराम, हैप्पी बर्थडे और स्क्रीन के निर्माता-निर्देशकों को सम्मानित किया।
कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन संस्कृति विभाग के संचालक संजय कन्नौजे ने दिया। छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन ने कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। आभार प्रदर्शन प्रसिद्ध फिल्म निर्माता-निर्देशक मनोज वर्मा ने किया। कार्यक्रम में विधायक पुरंदर मिश्रा, विभिन्न डॉक्युमेंट्री फिल्मों के निर्माता-निर्देशक कलाकार एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
छत्तीसगढ़
रायपुर : स्ट्रीट वेंडर्स के सपनों को मिली नई उड़ान
छत्तीसगढ़ में 1.12 लाख से अधिक वेंडर्स को मिला आर्थिक संबल
रायपुर। कभी सड़क किनारे ठेला लगाकर सब्जियां बेचने वाले, चाय-नाश्ते की छोटी दुकान चलाने वाले या फिर फुटपाथ पर रोजी-रोटी कमाने वाले लाखों स्ट्रीट वेंडर (रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों) के लिए पूंजी की कमी सबसे बड़ी चुनौती थी। बैंक ऋण तक पहुंच नहीं होने के कारण उनका व्यवसाय सीमित था। लेकिन प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना ने इन छोटे उद्यमियों के जीवन में बदलाव की नई कहानी लिखी है।

छत्तीसगढ़ में इस योजना के माध्यम से अब तक 1 लाख 12 हजार 36 से अधिक स्ट्रीट वेंडर (पथ विक्रेताओं) को 256 करोड़ 94 लाख रुपये से अधिक की ऋण सहायता उपलब्ध कराई जा चुकी है। योजना ने न केवल उनके कारोबार को मजबूती दी है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक आजीविका का नया अवसर भी प्रदान किया है।
कोविड-19 महामारी के दौरान आजीविका पर पड़े गंभीर प्रभाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने 1 जून 2020 को प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि योजना शुरू की थी। इसका उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में काम करने वाले स्ट्रीट वेंडर को बिना गारंटी कार्यशील पूंजी ऋण उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपने व्यवसाय को फिर से शुरू कर सकें और उसका विस्तार कर सकें। योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें किसी प्रकार की गारंटी की आवश्यकता नहीं होती। समय पर ऋण चुकाने वाले हितग्राहियों को अगले चरण में अधिक राशि का ऋण प्राप्त करने का अवसर मिलता है।
योजना के तहत लाभार्थियों को चरणबद्ध तरीके से ऋण उपलब्ध कराया जाता है। प्रथम चरण में 10,000 रूपए तक का ऋण, द्वितीय चरण में 20,000 रूपए तक का ऋण तथा तृतीय चरण में 50,000 रूपए तक का ऋण दिया जाता है। अर्थात इस योजना के अंतर्गत न्यूनतम 10 हजार रुपये से लेकर अधिकतम 50 हजार रुपये तक की कार्यशील पूंजी ऋण सहायता प्राप्त की जा सकती है। समय पर पुनर्भुगतान करने वाले हितग्राही ही अगले चरण के लिए पात्र बनते हैं।
पीएम स्वनिधि योजना का लाभ उन छोटे कारोबारियों को मिलता है जो सड़क किनारे या सार्वजनिक स्थानों पर वस्तुएं एवं सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। इनमें सब्जी एवं फल विक्रेता, चाय, नाश्ता एवं फास्ट फूड विक्रेता, पान दुकान संचालक, कपड़ा एवं रेडीमेड वस्त्र विक्रेता, जूता-चप्पल विक्रेता, किताब एवं स्टेशनरी विक्रेता, फूल एवं पूजा सामग्री विक्रेता, मोबाइल एक्सेसरीज विक्रेता, नाई, मोची, लॉन्ड्री जैसी सेवाएं देने वाले स्वरोजगारी, जैसे अनेक छोटे व्यवसाय शामिल हैं।
छत्तीसगढ़ में योजना का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, रायगढ़ और धमतरी जैसे जिलों में हजारों पथ विक्रेताओं को ऋण सहायता प्रदान की गई है। राज्य स्तर पर 267.22 करोड़ रुपये की स्वीकृत राशि के विरुद्ध 256.94 करोड़ रुपये से अधिक का वितरण किया जा चुका है, जिससे 1.12 लाख से अधिक हितग्राही लाभान्वित हुए हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का कहना है कि पीएम स्वनिधि योजना केवल ऋण वितरण कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह छोटे उद्यमियों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने का एक व्यापक अभियान है। इससे स्ट्रीट वेंडर्स की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है, उनकी आय में वृद्धि हो रही है और वे अपने परिवार के लिए बेहतर भविष्य का निर्माण कर पा रहे हैं। आज छत्तीसगढ़ के शहरों और कस्बों में हजारों पथ विक्रेता इस योजना के सहारे अपने कारोबार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहे हैं। प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना वास्तव में उन मेहनतकश हाथों को आर्थिक संबल देने का माध्यम बनी है, जो अपने परिश्रम से शहरों की अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करते हैं।
छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ के 250 MBBS सीटों पर लगा ब्रेक:5 नए सरकारी मेडिकल-कॉलेजों को NMC की मंजूरी नहीं, इंफ्रास्ट्रक्चर और फैकल्टी की कमी बनी बड़ी वजह
रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित 5 नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों को नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) से मान्यता नहीं मिली है। आयोग ने सभी कॉलेजों के आवेदन रिजेक्ट कर दिए हैं। इससे इस साल एमबीबीएस की 250 नई सीटें शुरू नहीं हो पाएंगी।
ये मेडिकल कॉलेज कवर्धा, जांजगीर-चांपा, मनेंद्रगढ़, दंतेवाड़ा और कुनकुरी में प्रस्तावित हैं। हर कॉलेज में 50-50 एमबीबीएस सीटों का प्रस्ताव था।

छात्रों को मिलता बड़ा फायदा
अगर इन कॉलेजों को मंजूरी मिल जाती तो प्रदेश में एमबीबीएस की 250 सीटें बढ़ जातीं। इससे नीट यूजी में प्रवेश के लिए प्रतिस्पर्धा कुछ कम होती और कटऑफ पर भी असर पड़ सकता था।
फिलहाल छत्तीसगढ़ के 10 सरकारी और 5 निजी मेडिकल कॉलेजों में कुल 2330 एमबीबीएस सीटें हैं।
शिक्षा विभाग की तैयारी पर उठे सवाल
जानकारी के मुताबिक, नए मेडिकल कॉलेजों में जरूरी तैयारियां पूरी नहीं हो सकीं। कई जगह न पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर है, न फैकल्टी और न ही जरूरी मेडिकल सुविधाएं। इससे NMC के तय मानकों पर कॉलेज खरे नहीं उतर पाए।
बताया जा रहा है कि राज्य सरकार ने फिलहाल सिर्फ डीन और अस्पताल अधीक्षक की प्रभार नियुक्तियां की हैं। नियमित फैकल्टी की भर्ती नहीं हुई।
जिला अस्पतालों के कुछ डॉक्टरों को असिस्टेंट प्रोफेसर और जूनियर रेजिडेंट के तौर पर पदस्थ करने के आदेश जरूर दिए गए, लेकिन यह व्यवस्था पर्याप्त नहीं मानी गई।

प्रमोशन नहीं होने से भी बढ़ी परेशानी
प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में काम कर रहे कई डॉक्टर लंबे समय से प्रमोशन का इंतजार कर रहे हैं। करीब 296 डॉक्टर प्रमोशन के पात्र बताए जा रहे हैं, जबकि 73 असिस्टेंट प्रोफेसरों का प्रोबेशन पीरियड भी पूरा नहीं किया गया है।
अगर समय पर प्रमोशन होते तो नए कॉलेजों के लिए प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर उपलब्ध हो सकते थे, जिससे मान्यता मिलने की संभावना बढ़ जाती।
अधिकारियों का ओवर कॉन्फिडेंस पड़ा भारी
चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भरोसा था कि सरकारी मेडिकल कॉलेज होने के कारण मान्यता मिल जाएगी। लेकिन NMC साल 2023 से तय पैरामीटर के आधार पर ही मंजूरी दे रहा है। इसी वजह से इस बार सभी कॉलेजों के आवेदन खारिज हो गए।
एफिलिएशन सर्टिफिकेट तक नहीं भेजा गया
जानकारी यह भी सामने आई है कि जिन पांच कॉलेजों के आवेदन रिजेक्ट हुए, उनमें से दो-तीन कॉलेजों ने हेल्थ साइंस यूनिवर्सिटी का एफिलिएशन सर्टिफिकेट तक आवेदन के साथ संलग्न नहीं किया। जबकि इस दस्तावेज के बिना मेडिकल कॉलेज शुरू नहीं किया जा सकता।
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