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कोरबा

प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना बनी आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण का आधार

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सौर ऊर्जा से मिली राहत, आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ा मित्तल परिवार

कोरबा। केंद्र सरकार द्वारा प्रारंभ की गई प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना आज देशभर में आमजन के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाली जनकल्याणकारी योजना के रूप में स्थापित हो चुकी है। यह योजना न केवल बड़े शहरों तक सीमित रही, बल्कि राज्यों के दूरस्थ क्षेत्रों, छोटे शहरों और कस्बों तक भी इसकी प्रभावी पहुंच बनी है। छत्तीसगढ़ राज्य के कोरबा जिले में इस योजना ने ऊर्जा क्रांति का नया अध्याय रच दिया है।
जहां पहले बिजली की खपत को लेकर लोगों के चेहरों पर चिंता और असमंजस देखा जाता था, वहीं अब वही लोग आत्मनिर्भर बनकर बिजली उत्पादन में भी भागीदार हो चुके हैं। प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना ने उन्हें सिर्फ बिजली बिल से मुक्ति नहीं दिलाई, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी सशक्त कदम उठाने का अवसर दिया है।


कोरबा, जिसे ऊर्जाधानी के रूप में जाना जाता है, जहां देश के प्रमुख थर्मल पावर प्लांट और बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियां स्थित हैं, वहां ऊर्जा की अहमियत को आमजन भलीभांति समझते हैं। ऐसे में इस योजना का क्रियान्वयन सोने पर सुहागा साबित हुआ है। अब लोगों को यह चिंता नहीं सताती कि गर्मी के मौसम में बिजली का बिल कितना आएगा, या अतिरिक्त भुगतान कैसे किया जाएगा। योजना के चलते अब कोरबा के लोग सोलर पैनलों की मदद से अपने घरों में निःशुल्क बिजली उत्पन्न कर रहे हैं और नवीनीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के उपयोग को प्रोत्साहित कर रहे हैं।
कोरबा जिले के कटघोरा निवासी विशेष मित्तल जो पेशे से व्यापारी हैं और एक बाइक शोरूम के संचालक भी हैं, उन्होंने प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के तहत अपने घर की छत पर सोलर पैनल लगवाकर योजना का प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त किया है। योजना लागू होने से पूर्व उनके घर और शोरूम की बिजली खपत अधिक होती थी, जिससे उन्हें हर महीने भारी बिजली बिल का भुगतान करना पड़ता था। लेकिन अब पैनल लगवाने के बाद उनका बिजली बिल शून्य हो गया है और उन्होंने इस परिवर्तन को अत्यंत सुखद बताया।
उन्होंने बताया कि एक दिन अपने पिता गोपाल कृष्ण मित्तल के साथ दुकान पर बैठने के दौरान उन्हें समाचार माध्यमों से इस योजना की जानकारी मिली। योजना की उपयोगिता से प्रभावित होकर उन्होंने अपने पिता की सलाह पर प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना की आधिकारिक वेबसाइट पर पंजीकरण कराया। महज 3 से 4 दिनों के भीतर उनके घर की छत पर सोलर पैनल स्थापित हो गया। इसके कुछ ही समय बाद शासन से रू.78,000 की सब्सिडी भी प्राप्त हो गई।
श्री मित्तल ने यह पैनल अपनी माताजी श्रीमती अंजनी मित्तल के नाम पर स्थापित कराया। वे बताती हैं कि पहले जब उन्होंने इस योजना के बारे में सुना तो विश्वास नहीं हुआ कि ऐसी कोई व्यवस्था भी संभव है जिससे बिजली बिल ही शून्य हो जाए। लेकिन जब पैनल लग गया और वास्तविक रूप में बिजली बिल समाप्त हुआ, तो उन्होंने न केवल स्वयं योजना की सराहना की बल्कि अपने मायके और परिचितों को भी इसके बारे में बताया, जिससे उनके परिवार के अन्य लोगों ने भी इस योजना का लाभ उठाया।
मित्तल परिवार ने इस योजना को एक वरदान बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि –प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना जैसी योजनाएं वास्तव में आमजन को राहत पहुंचाने वाली होती हैं। इससे हमारे जैसे मध्यमवर्गीय परिवारों को आर्थिक रूप से मजबूती मिलती है और हम अपने भविष्य को सुरक्षित बना पाते हैं। यह योजना न केवल आर्थिक बचत का साधन बनी, बल्कि पर्यावरण प्रेम और ऊर्जा स्वावलंबन की दिशा में भी बड़ा कदम है।

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कोरबा

दुर्घटना की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग ने की आवश्यक कार्रवाई

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आपातकालीन सेवाओं को और सुदृढ़ बनाने हेतु की जा रही आवश्यक कार्यवाही

कोरबा। ग्राम लामपहाड़ में घटित सड़क दुर्घटना की घटना को जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा गंभीरता से लेते हुए तत्काल तथ्यात्मक जांच कराई गई। जांच हेतु खंड चिकित्सा अधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पताढ़ी को वस्तुस्थिति का परीक्षण कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। संबंधित अधिकारियों से प्राप्त प्रतिवेदन एवं स्थल स्तर पर उपलब्ध जानकारी के परीक्षण उपरांत घटना से संबंधित वस्तुस्थिति स्पष्ट हुई है। साथ ही आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में सामने आई चुनौतियों के निराकरण हेतु आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई भी प्रारंभ कर दी गई है।
प्राप्त प्रतिवेदन के अनुसार 08 जून 2026 की रात्रि लगभग 8ः30 बजे ग्राम लामपहाड़ में एक बाइक दुर्घटना की सूचना सेक्टर मेडिकल ऑफिसर लेमरू को प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही संबंधित अधिकारियों द्वारा उपलब्ध आपातकालीन संसाधनों के माध्यम से तत्काल कार्रवाई प्रारंभ की गई। इस दौरान लेमरू स्थित 108 एम्बुलेंस पूर्व से एक रेफर मरीज को कोरबा पहुंचाने के कार्य में लगी हुई थी तथा ड्यूटी अवधि पूर्ण होने एवं आवश्यक मानव संसाधन की अनुपलब्धता के कारण समय पर दुर्घटना स्थल तक नहीं पहुंच सकी।
जांच में यह भी पाया गया कि 108 एम्बुलेंस सेवा का संचालन संबंधित एजेंसी द्वारा किया जाता है। वर्तमान में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेमरू में अवस्थित 108 एम्बुलेंस की आवश्यकता पड़ने पर कॉल कंन्ट्रोल सेंटर रायपुर को कॉल करने पर कोरबा में पॉयलेट को सीधे कॉल लगने की सुविधा नहीं है। पॉयलेट के निजी नम्बर पर कॉल किया जाता है।  नेटवर्क सम्बन्धी समस्या के कारण कॉल कनेन्ट नही हो पाता है जिससे तत्कालीन अवधि में परेशानी का सामना करना पड़ता है।  इस संबंध में सेक्टर प्रभारी द्वारा तत्काल 108 सेवा के जिला समन्वयक से संपर्क कर स्थिति से अवगत कराया गया। लेमरू क्षेत्र में नेटवर्क संबंधी बाधाओं तथा द्वितीय व तृतीय पाली में डयूटी करने हेतु पर्याप्त पायलट एवं ईएमटी (इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन) की उपलब्धता नहीं होने से आपातकालीन सेवा संचालन में व्यावहारिक कठिनाइयां उत्पन्न हुईं।
दुर्घटना से प्रभावित व्यक्ति को तत्पश्चात 112 वाहन के माध्यम से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेमरू लाया गया, जहां चिकित्सकीय परीक्षण के दौरान उसे मृत पाया गया। इसके बाद नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करते हुए शव को सुरक्षित रखकर उच्च अधिकारियों को घटना की जानकारी दी गई।
जांच प्रतिवेदन में यह स्पष्ट हुआ है कि 108 एम्बुलेंस सेवा एक सतत (24×7) आपातकालीन सेवा है, जिसके सुचारू संचालन के लिए प्रत्येक शिफ्ट में पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध होना आवश्यक है। संबंधित एजेंसी द्वारा तीनों पालियों के लिए पृथक-पृथक पायलट एवं ईएमटी की व्यवस्था नहीं किए जाने के कारण उक्त स्थिति निर्मित हुई।
मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा 108 संजीवनी एक्सप्रेस के जिला समन्वयक से स्पष्टीकरण प्राप्त करने की कार्रवाई की गई है। साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेमरू में संचालित नवीन 108 संजीवनी एक्सप्रेस के लिए तीनों शिफ्टों में पृथक पायलट एवं ईएमटी की नियुक्ति सुनिश्चित करने हेतु उप संचालक (108), संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं, रायपुर को पत्र प्रेषित किया गया है।
जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा दूरस्थ एवं वनांचल क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और गुणवत्ता को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जा रही है। घटना के संबंध में प्राप्त तथ्यों के आधार पर आवश्यक सुधारात्मक कदम प्रारंभ कर दिए गए हैं, ताकि भविष्य में किसी भी आपात स्थिति में नागरिकों को और अधिक त्वरित एवं प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनहित से जुड़े प्रत्येक मामले में संवेदनशीलता, जवाबदेही एवं त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना उसकी सर्वाेच्च प्राथमिकता है तथा स्वास्थ्य सेवाओं के निरंतर सुदृढ़ीकरण की दिशा में प्रभावी प्रयास जारी है।

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कोरबा

मछलियों के संरक्षण हेतु 15 अगस्त तक बंद ऋतु घोषित

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मत्स्य आखेट पर रहेगा प्रतिबंध,

प्रतिबंधित अवधि पर मछली पकड़ने पर देना होगा 25 हजार रूपये जुर्माना

कोरबा। जिले में वर्षा ऋतु में मछलियों की वंश वृद्धि को ध्यान में रखकर उनके संरक्षण के लिए छत्तीसगढ़ नदीय मत्स्योद्योग अधिनियम के तहत 16 जून से 15 अगस्त तक की अवधि को बंद ऋतु (क्लोज सीजन) घोषित किया गया है। इस अधिनियम के अंतर्गत जिले के सभी तालाबों एवं जल स्त्रोतों जिनका संबंध नदी नालों से नहीं है, के अतिरिक्त जलाषयों में किये जा रहे केज कल्चर को छोड़कर सभी प्रकार के जल संसाधनों में मत्स्याखेट कार्य 16 जून से 15 अगस्त 2026 तक पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा।
सहायक संचालक मछली पालन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार नियमों का उल्लंघन करने तथा अपराध सिद्ध होने पर छत्तीसगढ़ राज्य मत्स्य क्षेत्र अधिनियम के तहत 25 हजार रूपए का जुर्माने का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि उक्त नियम केवल छोटे तालाब या अन्य जल स्रोत जिनका संबंध किसी नदी-नाले से नहीं है और उनके अतिरिक्त जलाशय जिनमें केज कल्चर का कार्य किया जा रहा है, उनमें मत्स्य अधिनियम लागू नहीं होंगे।

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कोरबा

राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान के संबंध में बैठक 16 को

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कोरबा। राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान 28 जून 2026 के संबंध में कलेक्टर कुणाल दुदावत की अध्यक्षता में जिला स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक कलेक्टोरेट सभा कक्ष में दोपहर 01 बजे आयोजित की गई है। सर्व संबंधितों को बैठक में उपस्थित होने कहा गया है।

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