देश
राहुल का शाह को ओपन डिबेट का चैलेंज:गृहमंत्री तेज आवाज में बोले तो राहुल का जवाब– आपका रिएक्शन डरा हुआ
नई दिल्ली,एजेंसी। चुनाव सुधार और SIR पर लोकसभा में चर्चा के दौरान बुधवार को गृहमंत्री अमित शाह और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बीच तीखी बहस हुई। शाह की स्पीच के दौरान राहुल ने डिबेट का चैलेंज दे दिया।
शाह ने अपनी बात रखते हुए नेहरू से लेकर अटल बिहारी वाजपेयी के समय तक के SIR का जिक्र किया। पूछा कि उस समय विरोध क्यों नहीं किया। आज क्यों हो रहा है?
शाह ने इस दौरान SIR पर राहुल की तीन प्रेस कॉन्फ्रेंस का उल्लेख करते हुए कहा कि वह सभी का जवाब देंगे। तभी राहुल उठे चर्चा के लिए चैलेंज देने लगे।
दोनों के बीच क्या बातचीत हुई
इस पर शाह बोले: मैं उनके उकसावे पर नहीं आऊंगा। विषय पर बोलूंगा। मेरे भाषण में पहले-बाद में जो बोलना है मैं तय करूंगा। हमने तो नहीं कहा कि नेता विपक्ष झूठा बोल रहे हैं।
अमित शाह: विपक्ष के नेता (राहुल गांधी) की तीनों प्रेस कॉन्फ्रेंस का जवाब दूंगा। एक सादी वाली, एक एटम बम वाली और एक हाइड्रोजन बम वाली। हर सवाल का जवाब दूंगा। राहुल गांधी ने उन्हें बीच में टोका।
राहुल: शाह जी मैं आपको चैलेंज करता हूं। आप मेरी वोट चोरी की तीनों प्रेस कॉन्फ्रेंस पर चर्चां करें।
शाह: 30 साल से संसद या विधानसभा में चुनकर आ रहा हूं। ऐसा कभी नहीं हुआ। मेरे बोलने का क्रम मैं तय करूंगा। आप नहीं।
राहुल: शाह जी का रिस्पांस पूरी तरह से घबराया हुआ है। डरा हुआ रिस्पांस है।
शाह बोले- 16 हजार EVM चेक हुए, एक भी गलत वोट नहीं पड़ा

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा- चुनाव आयोग को भी लगा कि आरोप सच और झूठ होते हैं। पांच साल रिसर्च के बाद VVPAT लाया गया। इसका मतलब है कि मैंने कमल का निशान दबाया, तो पर्चा निकलती है, वोट कंफर्म होता है। आयोग ने तय कि 5 परसेंट EVM के परिणाम और VVPAT मिलान होंगे। उन्होंने आगे कहा- ये 5 परसेंट मशीनों में मिलता है। आज तक 16 हजार मशीनों में मिलान हुआ है। एक भी गलत वोट सामने नहीं आया। विपक्ष ने अदालत जाता है, न मीडिया में। ये केवल ऐसे ही आरोप लगाते हैं। 2017 में आयोग ने तय किया कि सभी चुनाव EVM से ही होंगे। 2017 में आयोग ने तय किया कि सभी चुनाव EVM से ही होंगे। राहुल गांधी का भाषण में मैंने सुना- उनका भाषण धागों में उलझ गया।
शाह बोले-राजीव गांधी के समय EVM लाए गए, अब ये सवाल उठा रहे
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा- एक दिन विपक्ष के कार्यकर्ता इनसे जवाब मांगेंगे कि इतने चुनाव कैसे हारे हैं। ये लोग फैसला देने वाले जज के लिए महाभियोग लेकर आए हैं। 2014 के बाद इनकी हारने की परंपरा शुरू हुई। इन्होंने EVM पर निशाना साधा। EVM 15 मार्च 1989 को राजीव गांधी के टाइम EVM लाने का फैसला लिया गया। शाह ने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की बेंच ने EVM के कानूनी बदलाव को सही ठहराया। 1998 में एमपी, राजस्थान दिल्ली में 16 विधानसभा में EVM से चुनाव कराया गया। ट्रायल लिया गया। चेक करके 2004 में पूरे देश में EVM का यूज हुआ। मेरे सामने के सभी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ही जीती। तब EVM की चर्चा नहीं हुई। 2009 में EVM से चुनाव हुआ, ये जीते तो चुप्पी साधी। 2014 में हम जीते हो सवाल किए गए।
शाह ने कहा- विपक्ष की राज्य सरकारें BLO की मदद नहीं कर रहीं
गृह मंत्री अमित शाह बोले- विपक्ष की राज्य सरकारें BLO की मदद नहीं कर रही हैं। विपक्ष को जब कोई पत्रकार पसंद नहीं आता तो ये कहते हैं कि वो भाजपा का एजेंट हैं। ऐसा नहीं होता। ये इमरजेंसी नहीं है। कोई सवाल करता है तो कहते हैं संबंधित व्यक्ति बीजेपी का है। EVM का मुद्दा नहीं चला तो SIR पर आ गए। इनके हारने का कारण EVM, SIR, मतदाता सूची नहीं है। इसका कारण इसका नेतृत्व है।
शाह बोले- राहुल ने वायनाड में वोटर लिस्ट की गलतियों का मुद्दा क्यों नहीं उठाया
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा- मई 2014 में मोदी देश के पीएम बने। NDA की जीत हुई। 2025 तक हम 3 लोकसभा, 41 विधानसभा चुनाव जीते। विपक्ष 30 जगह चुनाव जीते हैं। अगर मतदाता सूची गलत है कि ये लोग ने क्यों शपथ ली। उन्होंने आगे कहा कि वायनाड की मतदाता सूची की गलतियां भाजपा ने बताईं। राहुल गांधी ने ये मुद्दा क्यों नहीं उठाया। रायबरेली का भी हमने बताया था। इसलिए SIR किया जा रहा है।
शाह बोले- बिहार में विपक्ष नहीं जीता तो चुनाव आयोग को बदनाम कर रहे
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि स्टालिन, खड़गे, तेजस्वी, अखिलेश, ममता समेत और भी विपक्षी नेताओं ने EC पर आरोप लगाए। चुनाव आयोग स्वतंत्र चुनाव कराने की संस्था है। चुनाव कराना संवैधानिक प्रक्रिया है। आयोग पर सवाल करके इसकी छवि को धूमिल कर रहे हैं। भारत के लोकतंत्र की छवि धूमिल किया जा रहा है।
शाह ने आगे कहा कि मतदाता को पता है उसने वोट दिया है। इसलिए चुन कर आए हैं। बिहार में हम दो तिहाई बहुमत से जीते हैं। ये नहीं जीते तो चुनाव आयोग, आयुक्त, लोकतंत्र को बदनाम करते हैं। हमने चुनाव हारे तो हमने कभी आरोप नहीं लगाए। हमने अपनी कमी पर सोच विचार किया।
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नेपाल सीमा से गिरफ्तार हुए TMC के पूर्व विधायक जहांगीर खान, STF की बड़ी कार्रवाई
कोलकाता, एजेंसी। तृणमूल कांग्रेस के नेता जहांगीर खान को ‘जबरन वसूली’ के आरोप में सोमवार को उत्तर बंगाल में भारत-नेपाल सीमा के पास से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने यह जानकारी दी। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने खान को गिरफ्तारी से दी गई अंतरिम सुरक्षा 26 मई को वापस ले ली थी। खान के खिलाफ दक्षिण 24 परगना जिले के फाल्टा थाने में सात प्राथमिकी दर्ज हैं।
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, ”खान को उत्तर बंगाल में भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया।” हालांकि पुलिस ने गिरफ्तारी के संबंध में विस्तृत जानकारी नहीं दी है। खान 21 मई को फाल्टा विधानसभा उपचुनाव में चौथे स्थान पर रहे थे। हालांकि, उन्होंने चुनाव से कुछ दिन पहले अपनी उम्मीदवारी वापस लेने की घोषणा की थी, लेकिन नाम वापस लेने की अवधि समाप्त हो चुकी थी इसीलिए उनका नाम ईवीएम में दर्ज रहा।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने खान को मिली अंतरिम सुरक्षा वापस ली
इससे पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने खान के खिलाफ दर्ज कई आपराधिक मामलों में पुलिस की किसी भी सख्त कार्रवाई से उन्हें मिली अंतरिम सुरक्षा वापस ले ली थी। कोर्ट ने 18 मई को खान को सख्त कार्रवाई से राहत दी थी, लेकिन बाद में इसे रद्द कर दिया गया। जजों ने कहा कि राज्य में राजनीतिक स्थिति में बदलाव और याचिकाकर्ता द्वारा राजनीतिक बदले की भावना के दावों के कारण ऐसी सुरक्षा जारी रखना उचित नहीं होगा।
खान के वकील किशोर दत्ता ने कोर्ट में तर्क दिया कि 4 मई को विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद उनके मुवक्किल के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे। उन्होंने दावा किया कि ये मामले राजनीतिक बदले की भावना का नतीजा थे और कहा कि सुरक्षा न केवल चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी थी, बल्कि खान को कथित उत्पीड़न से बचाने के लिए भी थी। दूसरी ओर, अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने सुरक्षा बढ़ाने की मांग का विरोध किया। उन्होंने कहा कि पहले दी गई सुरक्षा केवल खान को 21 मई को फाल्टा में हुए दोबारा मतदान (रीपोल) में भाग लेने में सक्षम बनाने के लिए थी, जिसके नतीजे 24 मई को घोषित किए गए थे।
पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में फाल्टा विधानसभा उपचुनाव (रीपोल) के बीच एक बड़ी राजनीतिक घटनाक्रम में, जहांगीर खान ने अपना नामांकन वापस ले लिया, जो पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा झटका था। उन्होंने कहा कि दौड़ से हटने का फैसला फाल्टा के लोगों की भलाई के लिए लिया गया था। खान ने कहा, “मैं फाल्टा का बेटा हूं और चाहता हूं कि फाल्टा शांतिपूर्ण रहे और तरक्की करे। हमारे मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी फाल्टा के विकास के लिए एक विशेष पैकेज दे रहे हैं, इसलिए मैंने निर्वाचन क्षेत्र में दोबारा मतदान प्रक्रिया से दूर रहने का फैसला किया है।”
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भाजपा की फूट डालने की पुरानी चाल कामयाब नहीं होगी, क्रॉस वोटिंग की आशंका पर दिग्विजय सिंह का तीखा हमला
भोपाल, एजेंसी। मध्य प्रदेश में कांग्रेस से राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने अपना नामाकंन दाखिल किया। उनका मुकाबले में भाजपा ने तीसरे उम्मीदवार के रूप में महेश केवट को उतारा है। ऐसे में मुकाबला बेहद रोचक हो गया है। वहीं कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग का खतरा बढ़ गया है। हालांकि कांग्रेस ने इसे भाजपा की गलतफहमी बताया है।

कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह का कहना है, “बीजेपी को गलतफहमी है कि वे पार्टी में फूट डाल सकते हैं। कांग्रेस पूरी तरह से संगठित और एकजुट है; सभी कांग्रेस विधायक पार्टी की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को मजबूती से अपना पूरा समर्थन देंगे और बीजेपी की फूट डालने की पुरानी चाल कामयाब नहीं होगी। मीनाक्षी नटराजन कांग्रेस की उम्मीदवार हैं और हम कांग्रेस में एकजुट हैं।”
बता दें कि 230 सदस्यों वाली मध्य प्रदेश विधानसभा में प्रभावी वोट संख्या 228 है। इनमें से BJP के पास 164 और कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं। बीना की विधायक निर्मला सप्रे के वोट की स्थिति साफ न होने (जो BJP की तरफ झुकती दिख रही है) और विजयपुर के विधायक मुकेश मल्होत्रा के वोटिंग पर रोक के कारण, कांग्रेस की प्रभावी संख्या घटकर 62 रह गई है।
राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए हर उम्मीदवार को 58 वोटों की ज़रूरत होती है। इस तरह, BJP को दो सीटें जीतने के लिए 116 वोटों की ज़रूरत है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कुल 164 वोटों में से 116 वोट डालने के बाद BJP के पास 48 वोट बचेंगे, जबकि तीसरी सीट पक्की करने के लिए उसे 10 और वोटों की ज़रूरत होगी। कांग्रेस के पास एक सीट जीतने के लिए ज़रूरी संख्या तो है, लेकिन BJP द्वारा तीसरे उम्मीदवार के ऐलान ने उसकी चिंताएं बढ़ा दी हैं और नटराजन के चुनाव जीतने की राह मुश्किल कर दी है।
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क्या शिवसेना की तहर दो गुटों में बंट जाएगी TMC?, सांसद के इस्तीफे से बंगल में गरमाई सियासत
कोलकाता, एजेंसी। बंगाल चुनाव में बीजेपी की शानदार जीत की पूरे देश में चर्चा है तो वहीं तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी के बीच अंदरूनी कलह भी सामने आने लगी है इसे लेकर अब पार्टी के भविष्य की रणनीति पर लोग चर्चा कर रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में अब इस बात को लेकर चर्चा शुरू हो गई है कि क्या तृणमूल कांग्रेस में भी Shiv Sena की तरह अंदरूनी खींचतान बढ़ेगी या पार्टी नेतृत्व समय रहते हालात संभाल लेगा। विपक्ष लगातार TMC में असंतोष और गुटबाजी के आरोप लगा रहा है, जबकि पार्टी नेतृत्व इसे सामान्य राजनीतिक घटनाक्रम बता रहा है।

अगल गुट बनाने को लेकर चर्चा तेज इस्तीफा
दरअसल, अंदरूनी कलह के बीच पार्टी के सांसदों के एक समूह ने भविष्य की रणनीति और पार्टी से अलग होकर एक नया गुट बनाने की संभावना पर चर्चा करने के लिए सोमवार को यहां बैठक की। बैठक में हिस्सा लेने वाले नेताओं में सुखेंदु शेखर राय भी शामिल थे, जिन्होंने सोमवार को ही पार्टी से इस्तीफा दे दिया और राज्यसभा की सदस्यता भी छोड़ दी थी। उनके अलावा तृणमूल के लोकसभा सांसद प्रसून बनर्जी, शर्मिला सरकार, जगदीश चंद्र बसुनिया, कालीपद सरन खेरवाल और अरूप चक्रवर्ती भी बैठक में मौजूद थे।
ममता बनर्जी को व्हाट्सऐप पर भेजा
मीडिया से बातचीत में राय ने कहा कि उन्होंने राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन से मुलाकात कर उन्हें अपना इस्तीफा सौंप दिया है। राय ने कहा, ”मैंने पार्टी से इस्तीफा देने के अपने फैसले से ममता बनर्जी को व्हाट्सऐप और ईमेल के जरिये अवगत करा दिया है। यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल के 60 विधायकों द्वारा एक अलग गुट बनाने के बाद सामने आया है, जहां रिताब्रता बनर्जी ने ममता बनर्जी के नामित उम्मीदवार के बजाय नेता प्रतिपक्ष का कार्यभार संभाल लिया है।
इस्तीफे को लेकर दिया ये बयान
राय ने कहा, “विधानसभा में जो कुछ भी हुआ, क्या कोई यह बता सकता है कि राज्यसभा या लोकसभा में वैसी ही स्थिति पैदा नहीं होगी?” हालांकि, राय ने स्पष्ट किया कि राज्यसभा और पार्टी से उनका इस्तीफा राज्य विधानसभा में हुए घटनाक्रम से अलग है, क्योंकि वहां के विधायकों ने इस्तीफा नहीं दिया है। उन्होंने कहा, ”उनके कदम और मेरे कदम के बीच कोई संबंध नहीं है। यह पूरी तरह से अलग है। मैंने पार्टी से इस्तीफा दिया है, उन्होंने नहीं। राज्यसभा में मेरा कार्यकाल 2029 में समाप्त होना था, लेकिन मैंने सैद्धांतिक तौर पर इस्तीफा दे दिया, क्योंकि मेरे लिए (पार्टी में) बने रहना मुश्किल हो गया था।”
‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में शामिल हुए अभिषेक बनर्जी
यह राजनीतिक घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी और उनके भतीजे एवं पार्टी सांसद अभिषेक बनर्जी यहां ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में भाग ले रहे हैं। इस बैठक में गठबंधन के भीतर एकजुटता पर जोर दिया गया और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने तथा जनता की आजीविका से जुड़े मुद्दों को उठाने की आवश्यकता बताई गई।
तृणमूल के इन दोनों नेताओं के अलावा बैठक में कांग्रेस की सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के तेजस्वी यादव, नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला और पीडीपी की महबूबा मुफ्ती के साथ-साथ वामपंथी नेता भी मौजूद थे। हालांकि ममता से नाराज विधायकों ने अभी तक अलग पार्टी बनाए जाने को लेकर कोई भी अधिकारिक ऐलान नहीं किया।
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