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छत्तीसगढ़

रायपुर : राज्य के 40 विभागों द्वारा iGOT आधारित विभागीय क्षमता निर्माण योजना तैयार

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मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक क्षमता निर्माण एवं ई-गवर्नेंस को मिल रही नई गति

मुख्य सचिव एवं सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव की पहल पर iGOT प्लेटफॉर्म पर प्रभावी क्रियान्वयन

रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत प्रशासनिक दक्षता एवं डिजिटल गवर्नेंस को सुदृढ़ बनाने की दिशा में सतत एवं दूरदर्शी पहल की जा रही है। इसी क्रम में मुख्य सचिव विकास शील के मार्गदर्शन तथा सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव अविनाश चंपावत की पहल पर आज मंत्रालय, महानदी भवन, नया रायपुर स्थित सभागार में  iGOT (Integrated Government Online Training) प्लेटफॉर्म के माध्यम से विभागीय क्षमता निर्माण योजना (Departmental Capacity Building Plan – CBP) तैयार करने हेतु वर्चुअल हैंड होल्डिंग कार्यशाला आयोजित की गई।

क्षमता निर्माण आयोग के विशेषज्ञों द्वारा दिया गया विस्तृत मार्गदर्शन

कार्यशाला में विभिन्न विभागों के नोडल अधिकारियों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी अदा की। इस अवसर पर नई दिल्ली स्थित क्षमता निर्माण आयोग के विशेषज्ञों द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अधिकारियों को विभागीय क्षमता निर्माण योजना तैयार करने की व्यवस्थित प्रक्रिया, प्रशिक्षण आवश्यकताओं के वैज्ञानिक मूल्यांकन तथा कर्मचारियों के कौशल विकास के लिए संरचित एवं परिणामोन्मुखी प्रशिक्षण रूपरेखा तैयार करने संबंधी विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया गया।

प्रशासनिक दक्षता तथा जनसेवा की गुणवत्ता में होगा सुधार

मुख्य सचिव विकास शील के मार्गदर्शन में प्रदेश में प्रशासनिक कार्यसंस्कृति को आधुनिक, दक्ष एवं परिणामोन्मुखी बनाने हेतु  iGOT प्लेटफॉर्म को शासन की प्राथमिक पहलों में शामिल किया गया है। मिशन कर्मयोगी के माध्यम से ज्ञान आधारित, कुशल एवं उत्तरदायी प्रशासनिक व्यवस्था विकसित करने के उद्देश्य से राज्य स्तर पर सतत प्रयास किए जा रहे हैं। इस पहल के माध्यम से अधिकारियों एवं कर्मचारियों के कौशल उन्नयन, प्रशासनिक दक्षता तथा जनसेवा की गुणवत्ता में सुधार सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

सुव्यवस्थित एवं वैज्ञानिक प्रशिक्षण ढांचा होगा विकसित

सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव अविनाश चंपावत के नेतृत्व में विभागीय क्षमता निर्माण योजना को प्रत्येक विभाग की कार्यप्रणाली, दायित्वों एवं आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया जा रहा है, जिससे प्रशिक्षण कार्यक्रम अधिक व्यवहारिक, लक्ष्य आधारित एवं जनउपयोगी बन सके। इस प्रक्रिया में विभागों के ऑर्गेनोग्राम, कार्य आवंटन विवरण, वार्षिक प्रतिवेदन तथा संबंधित नियमों एवं अधिनियमों के आधार पर सुव्यवस्थित एवं वैज्ञानिक प्रशिक्षण ढांचा विकसित किया जा रहा है।

प्रशासनिक क्षमता संवर्धन में होगा सहायक

उल्लेखनीय है कि राज्य के 40 विभागों के  iGOT नोडल अधिकारियों द्वारा अपने-अपने विभागों की विभागीय क्षमता निर्माण योजना तैयार की गई है। इन योजनाओं के आधार पर संबंधित विभागों के समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए भूमिका (Role) आधारित  iGOT प्रशिक्षण पाठ्यक्रम निर्धारित किए गए हैं, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रत्येक अधिकारी एवं कर्मचारी को उसके कार्य दायित्वों के अनुरूप उपयुक्त प्रशिक्षण प्राप्त हो सके। छत्तीसगढ़ में  iGOT प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रशासनिक क्षमता संवर्धन को व्यापक स्तर पर लागू किया जा रहा है। 

1200 अधिकारियों को दिया जाएगा विशेष प्रशिक्षण

इसी क्रम में प्रदेश में लगभग 1200 अधिकारियों को दस बैचों में विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जिसमें अधिकारियों को प्लेटफॉर्म पर पंजीयन, प्रशिक्षण मॉड्यूल पूर्ण करने, प्रमाण पत्र प्राप्त करने तथा उपलब्धियों के डिजिटल अभिलेखीकरण की संपूर्ण प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। उल्लेखनीय है कि मुख्य सचिव विकास शील एवं सचिव सामान्य प्रशासन विभाग अविनाश चंपावत के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में विगत अवधि में  iGOT प्लेटफॉर्म के माध्यम से लगभग 1200 अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रशिक्षित कर प्रशासनिक क्षमता संवर्धन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की गई है। यह पहल प्रदेश के अधिकारियों एवं कर्मचारियों में नेतृत्व क्षमता, नवाचार, ज्ञान-साझेदारी तथा सकारात्मक प्रतिस्पर्धा की संस्कृति को प्रोत्साहित कर रही है।

“डिजिटल, दक्ष एवं जनोन्मुखी प्रशासन” होगा निर्माण

कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य राज्य के विभिन्न विभागों में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों की दक्षता, कार्यकुशलता एवं क्षमता में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित करना है, जिससे शासन की कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी, त्वरित एवं परिणामोन्मुखी बन सके। छत्तीसगढ़ शासन की यह पहल प्रदेश को डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करने तथा “डिजिटल, दक्ष एवं जनोन्मुखी प्रशासन” की संकल्पना को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं सशक्त कदम सिद्ध होगी।

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कोरबा

पेड़ की डाल नहीं, पूरा विशाल धौरा वृक्ष गिरा था, वन विभाग के दावे पर उठे सवाल

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कोरबा/पाली। पाली थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम चोरका डांड में शनिवार शाम आंधी-तूफान और बारिश के दौरान हुई दर्दनाक घटना में तीन युवकों की मौत के मामले में अब कई सवाल खड़े होने लगे हैं। प्रारंभिक जानकारी में बताया गया था कि तीनों युवक बारिश से बचने के लिए पेड़ के नीचे रुके हुए थे, तभी पेड़ की भारी डाल टूटकर उन पर गिर गई। लेकिन मीडिया टीम के मौके पर पहुंचने पर सामने आए तथ्यों ने मामले को नया मोड़ दे दिया है।

घटनास्थल पर देखा गया कि कोई डाल नहीं टूटी थी, बल्कि एक विशाल धौरा का पेड़ जड़ सहित गिरा हुआ था। वहीं ग्रामीणों, मृतक दिनेशु तिर्की के परिजनों तथा निर्माण कार्य में लगी महिलाओं ने बताया कि घटनास्थल पर वन समिति के माध्यम से सूअर पालन के लिए कोठा निर्माण का कार्य चल रहा था। उनके अनुसार दिनेशु तिर्की और कमलेश बड़ा निर्माण कार्य में लगे हुए थे।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक अचानक तेज आंधी-तूफान शुरू हुआ। इसी दौरान धौरा वृक्ष से आवाज आई और कुछ ही क्षणों में वह घूमकर निर्माण स्थल पर गिर पड़ा। पेड़ के नीचे काम कर रहे युवक उसकी चपेट में आ गए। घटना में एक महिला को भी सिर और हाथ में हल्की चोटें आईं, जिसने शोर मचाकर ग्रामीणों को बुलाया। इसके बाद लोगों ने किसी तरह दबे हुए लोगों को बाहर निकाला और घायल युवकों को वाहन की व्यवस्था कर पाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। जहां जांच उपरांत दो युवकों को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि एक गंभीर रूप से घायल युवक को रेफर किया गया, जिसकी रास्ते में मौत हो गई। ग्रामीणों के अनुसार जंगल क्षेत्र होने के कारण तत्काल वाहन उपलब्ध नहीं हो पाया और अस्पताल पहुंचने में करीब ढाई घंटे का विलंब हुआ।

इधर जब इस संबंध में वन विभाग से जानकारी ली गई तो विभागीय अधिकारियों ने निर्माण कार्य में युवकों को लगाए जाने से इनकार किया। यहीं से कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि निर्माण कार्य में युवक शामिल नहीं थे तो वे घटनास्थल पर क्या कर रहे थे? ग्रामीण, परिजन और वहां मौजूद महिलाएं निर्माण कार्य में लगे होने की बात क्यों कह रही हैं? यदि वन समिति के अंतर्गत निर्माण कार्य चल रहा था तो वहां कार्यरत लोगों की निगरानी कौन कर रहा था? निर्माण स्थल पर सुरक्षा के क्या इंतजाम थे? क्या कार्य शुरू करने से पहले संभावित जोखिमों का आकलन किया गया था? यदि नाबालिग मौके पर मौजूद थे तो उनकी उपस्थिति किन परिस्थितियों में थी? क्या निर्माण कार्य के लिए मजदूरों का कोई पंजीयन या उपस्थिति रजिस्टर रखा गया था? दुर्घटना के समय वहां कितने लोग काम कर रहे थे और उन्हें किसके निर्देश पर लगाया गया था? आखिर घटना के संबंध में सामने आ रहे अलग-अलग दावों में सच्चाई क्या है?

मृतकों में 14 वर्षीय शिवराम टेकाम और 17 वर्षीय दिनेश तिर्की भी शामिल हैं। ऐसे में नाबालिगों से कार्य कराए जाने की आशंका को लेकर मामला और गंभीर हो जाता है। अब आवश्यकता इस बात की है कि पूरे घटनाक्रम की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दुर्घटना के समय वहां वास्तव में क्या कार्य चल रहा था और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।फिलहाल यह मामला केवल प्राकृतिक दुर्घटना तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि कई ऐसे सवाल छोड़ गया है जिनके जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।

चोरकाडांड निवासी हीरा सिंह ने बताया कि वन विभाग द्वारा पशुपालन के लिए भवन निर्माण कराया जा रहा था, जिसमें युवक कार्य कर रहे थे। उनके अनुसार मौसम सामान्य था और केवल हल्की हवा चल रही थी। इसी दौरान अचानक एक विशाल धौरा पेड़ गिर गया, जिसकी चपेट में आने से तीनों युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में उनकी मौत हो गई।

मृतक दिनेशु तिर्की की मां हीरामणि ने बताया कि उनका बेटा पिछले तीन दिनों से वहां काम पर जा रहा था। घटना की जानकारी गांव के एक युवक ने आकर दी, जिसके बाद वह तत्काल घटनास्थल पहुंचीं। ग्रामीणों की मदद से वाहन की व्यवस्था कर घायल युवकों को पाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत की खबर मिली।

काम करने वाली राधाबाई बाइसेम्हर ने बताया कि वह एक अन्य महिला के साथ दो दिनों से निर्माण कार्य में लगी थीं। हादसे के समय वह बालू उठा रही थीं, जबकि दूसरी महिला बालू छान रही थी। तभी कटने जैसी तेज आवाज सुनाई दी। जान बचाने के लिए भागते समय विशाल धौरा वृक्ष गिर पड़ा, जिसकी चपेट में आकर तीन युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। राधाबाई ने बताया कि तीनों युवक पिछले दो दिनों से पानी ढुलाई और मसाला बनाने का काम कर रहे थे।

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छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ के विकास मॉडल की चर्चा कोलकाता तक,व्यवसायी राजीव कुमार सिंह ने डॉ. रमन सिंह से की मुलाकात

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पूर्व मुख्यमंत्री के सुशासन और विकास कार्यों को बताया राष्ट्रीय राजनीति में भाजपा के विस्तार की महत्वपूर्ण प्रेरणा

सुनील चिंचोलकर
बिलासपुर। कोलकाता के व्यवसायी राजीव कुमार सिंह ने छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान प्रदेश के तीन बार के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह तथा उनके पुत्र एवं पूर्व सांसद अभिषेक सिंह से सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर उन्होंने छत्तीसगढ़ में हुए विकास कार्यों और सुशासन के मॉडल की सराहना करते हुए कहा कि राज्य में स्थापित विकास की सकारात्मक छवि ने देश के विभिन्न हिस्सों में भाजपा के प्रति विश्वास बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मुलाकात के दौरान राजीव कुमार सिंह ने कहा कि डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने पारदर्शी प्रशासन, नियोजित आधारभूत संरचना, जनकल्याणकारी योजनाओं और वित्तीय अनुशासन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं। उनके अनुसार, इन उपलब्धियों ने भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों के सामने सुशासन का एक व्यावहारिक मॉडल प्रस्तुत किया, जिसने अन्य राज्यों में भी सकारात्मक राजनीतिक संदेश पहुंचाया।
उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य की प्रगति के लिए मजबूत प्रशासन, निवेश-अनुकूल वातावरण, कानून-व्यवस्था तथा विकासोन्मुख नीतियां आवश्यक होती हैं। छत्तीसगढ़ में इन पहलुओं पर किए गए कार्यों ने राज्य को एक अलग पहचान दिलाई, जिसकी चर्चा राष्ट्रीय स्तर पर भी होती रही है।

राजीव कुमार सिंह ने यह भी कहा कि वर्तमान समय में उद्योग एवं व्यापार जगत उन राज्यों की ओर विशेष उम्मीद से देख रहा है, जहां प्रशासनिक दक्षता, पारदर्शिता और विकास को प्राथमिकता दी जाती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सुशासन, आर्थिक विकास और सामाजिक समरसता पर आधारित नीतियां देश के विभिन्न राज्यों में विकास की नई संभावनाओं को जन्म देंगी।

मुलाकात के दौरान डॉ. रमन सिंह और अभिषेक सिंह ने भी विकास, जनकल्याण और सुशासन के विषयों पर विचार साझा किए। इस अवसर पर प्रदेश के विकास मॉडल, निवेश की संभावनाओं तथा राष्ट्रीय स्तर पर उभरते आर्थिक अवसरों पर भी चर्चा हुई।

राजीव कुमार सिंह ने छत्तीसगढ़ के विकास अनुभवों को प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि राज्य ने सीमित संसाधनों के बावजूद जिस प्रकार विकास और प्रशासनिक स्थिरता का उदाहरण प्रस्तुत किया है, वह अन्य राज्यों के लिए भी अध्ययन का विषय है।

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कोरबा

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत कोरबा जिले में एक लाख से अधिक आवास पूर्ण

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मनरेगा के माध्यम से हितग्राहियों को मिल रहा 90 दिवस का रोजगार

कोरबा। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत कोरबा जिले ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए एक लाख से अधिक पक्के आवासों का निर्माण पूर्ण कर लिया है। वर्ष 2016 से अब तक जिले में कुल 1,00,013 आवासों का निर्माण सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा चुका है, जिससे हजारों ग्रामीण परिवारों का अपने पक्के घर का सपना साकार हुआ है।

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के आवासहीन एवं वंचित परिवारों को सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराया जा रहा है। योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को आवास निर्माण के लिए चरणबद्ध तरीके से 1.20 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाती है। इसके साथ ही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत आवास निर्माण कार्य हेतु 90 दिवस का रोजगार उपलब्ध कराया जाता है, जिससे हितग्राहियों को मजदूरी भुगतान का लाभ भी प्राप्त होता है।

योजना के अंतर्गत एसईसीसी-2011 सर्वे तथा वर्ष 2018 में आयोजित आवास प्लस सर्वे में पात्र पाए गए परिवारों को क्रमबद्ध रूप से आवास स्वीकृत किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन द्वारा सतत निगरानी एवं प्रभावी क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप आवास निर्माण कार्यों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है।

जिले में वर्ष 2016 से 2023 के दौरान 61,223 आवास पूर्ण किए गए, जबकि वर्ष 2024 से 2026 के बीच 37,804 आवासों का निर्माण पूरा हुआ। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत 478 आवास तथा प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के अंतर्गत 508 आवास पूर्ण किए गए हैं।

इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी दिनेश कुमार नाग ने कहा कि शासन के निर्देशानुसार पात्र ग्रामीण हितग्राहियों को गुणवत्तापूर्ण पक्के आवास उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिले में एक लाख से अधिक आवासों का पूर्ण होना ग्रामीण विकास एवं जनकल्याण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है, जिससे हजारों परिवारों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है।

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