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फूड प्रोसेसिंग से बदल रहा ग्रामीण भारत: चिराग पासवान बोले- ‘मखाना से महुआ तक, अब दुनिया भर में दिखेगा ‘मेड इन इंडिया’ का दम’
नई दिल्ली,एजेंसी। मधुबनी से लेकर बस्तर तक भारत के ग्रामीण इलाकों में एक चुपचाप लेकिन क्रांतिकारी बदलाव हो रहा है और इस बदलाव का नाम है फूड प्रोसेसिंग। केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने अपने एक हालिया लेख में इस तस्वीर को विस्तार से पेश किया है जिसमें बताया गया है कि कैसे यह क्षेत्र ‘ग्रामीण भारत से वैश्विक भारत’ की सोच को हकीकत बना रहा है।
मंत्री ने ज्ञानेश कुमार मिश्रा नामक एक युवा उद्यमी का उदाहरण दिया जिन्होंने पारंपरिक मखाना को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाया है। उनके ब्रांड ने अमेरिका और कनाडा जैसे देशों में भी अपनी जगह बनाई है। यह कहानी सिर्फ एक उद्यमी की नहीं बल्कि भारत के कोने-कोने में पनप रही नई उम्मीद का प्रतीक है।
गाँव की रसोई से वैश्विक बाज़ार तक: PMFME का कमाल
आज भारत के हर कोने से छोटे उद्यमी, किसान और स्वयं सहायता समूह (SHG) PMFME (प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना) के तहत मजबूत हो रहे हैं। यह योजना ग्रामीण स्तर पर खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को बढ़ावा दे रही है। इसके तहत:
- अब तक 1.41 लाख से अधिक माइक्रो एंटरप्राइजेज को ₹11,205 करोड़ के लोन मिल चुके हैं।
- 3.3 लाख से अधिक SHG सदस्यों को सीड कैपिटल (शुरुआती पूंजी) मिली है।
- 1 लाख से अधिक लोगों को फूड प्रोसेसिंग से संबंधित स्किल ट्रेनिंग दी जा चुकी है।
मखाना से महुआ तक: भारत के स्वाद को मिला ब्रांड
इस बदलाव के तहत मधुबनी का पारंपरिक मखाना अब फ्लेवर्ड स्नैक्स के रूप में लोकप्रिय हो रहा है जबकि बस्तर की जनजातीय महिलाएँ महुआ से चॉकलेट्स, एनर्जी बार और चाय जैसे अभिनव उत्पाद बना रही हैं। चिराग पासवान ने जोर देकर कहा, “अब ये उत्पाद न सिर्फ भारत की दुकानों में हैं बल्कि अंतरराष्ट्रीय शेल्फ पर भी बिक रहे हैं।” यह भारत के स्थानीय स्वादों को वैश्विक पहचान दिलाने का एक सफल प्रयास है।
औद्योगिक और निवेश की ताकत
सरकार की प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (PMKSY) भी फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसके तहत:
- अब तक 1,604 परियोजनाएँ स्वीकृत की गई हैं।
- ₹22,000 करोड़ से अधिक का निजी निवेश इस क्षेत्र में आया है।
- इससे 53 लाख से अधिक किसानों को लाभ हुआ है।
- और 7.6 लाख से अधिक नई नौकरियाँ पैदा हुई हैं।
स्टार्टअप्स और टेक्नोलॉजी: फूड-टेक की नई पीढ़ी
भारत में 5,000 से अधिक फूड-टेक स्टार्टअप्स उभर रहे हैं जो इस क्षेत्र में टेक्नोलॉजी और नवाचार ला रहे हैं। ये स्टार्टअप AI-सक्षम ट्रेसिबिलिटी (उत्पादों की पहचान और निगरानी), प्लांट-आधारित उत्पाद और टिकाऊ पैकेजिंग जैसे नए क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। इस सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए तीन NIFTEM (राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता और प्रबंधन संस्थान) संस्थान स्थापित किए गए हैं जिनमें से एक बिहार में निर्माणाधीन है।
गुणवत्ता की गारंटी और विश्वसनीयता
अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरने के लिए गुणवत्ता और विश्वसनीयता पर विशेष जोर दिया जा रहा है:
- 100 NABL-मान्यता प्राप्त फूड टेस्टिंग लैब्स गुणवत्ता सुनिश्चित कर रही हैं।
- 50 इरेडिएशन यूनिट्स से उत्पादों की शेल्फ लाइफ में सुधार किया जा रहा है।
- नेशनल मखाना बोर्ड का गठन किया गया है जिसका मुख्य कार्य मखाना के मूल्य संवर्धन और ब्रांडिंग को बढ़ावा देना है।
फूड प्रोसेसिंग अब सिर्फ एक उद्योग नहीं बल्कि ग्रामीण भारत की प्रगति का एक प्रमुख जरिया बन चुका है। मंत्री चिराग पासवान का कहना बिल्कुल सही है हमारा लक्ष्य साफ है: दुनिया की हर दुकान पर एक ऐसा प्रोडक्ट हो, जिस पर लिखा हो ‘भारत’ और उसके पीछे हो गांव, किसान और आत्मनिर्भरता की कहानी। यह कहानी सिर्फ मुनाफे की नहीं, बल्कि गर्व और पहचान की है।
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शाह ‘विपक्षी दलों को तोड़ने में व्यस्त, उनके दुर्भावनापूर्ण मंसूबे कभी सफल नहीं होंगे’: कांग्रेस
नई दिल्ली, एजेंसी। कांग्रेस ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर लोकसभा में भाजपा के लिए दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश करने का शुक्रवार को आरोप लगाया और कहा कि वह ”लोकतंत्र का पूरी तरह से मजाक उड़ाते हुए” विपक्षी दलों को तोड़ने में व्यस्त हैं लेकिन उनके ”दुर्भावनापूर्ण मंसूबे” कभी सफल नहीं होंगे।

संसद के मानसून सत्र से पहले पूरी तरह से बेचैनी में है सरकार
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”इससे पहले कभी किसी ने लोकसभा में अपनी पार्टी के लिए दो-तिहाई बहुमत जुटाने की ऐसी कोशिश नहीं की, जैसी केंद्रीय गृह मंत्री इन दिनों संसद के मानसून सत्र से पहले पूरी बेचैनी से कर रहे हैं।” रमेश ने कहा, ”स्वयंभू चाणक्य को 17 अप्रैल, 2026 को अपमानित होना पड़ा था, जब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा पाई और परिसीमन से जुड़ा खतरनाक संविधान संशोधन विधेयक अच्छे अंतर से खारिज हो गया।
लोकतंत्र का मजाक बनाने” में व्यस्त भाजपा
उन्होंने आरोप लगाया कि उस करारी हार से तिलमिलाए हुए शाह अब विपक्षी दलों को तोड़ने और ”लोकतंत्र का मजाक बनाने” में व्यस्त हैं। रमेश ने कहा, ”लड़ाई जारी है। उनके दुर्भावनापूर्ण मंसूबे सफल नहीं होने चाहिए और सफल नहीं होंगे।” रमेश का यह बयान तब आया जब तृणमूल कांग्रेस के बागी नेता जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने शुक्रवार को कहा कि पार्टी के बागी सांसद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से सोमवार को मुलाकात कर खुद को ”असली तृणमूल कांग्रेस” के तौर पर मान्यता दिये जाने की मांग करेंगे।
लोकसभा में राजग का समर्थन
बसुनिया ने दावा किया कि अभी 19 लोकसभा सदस्य इस गुट का समर्थन कर रहे हैं। कूचबिहार से सांसद और लोकसभा में राजग का समर्थन करने के इच्छुक सांसदों में शामिल बसुनिया ने वीडियो’ को बताया कि यह गुट सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात करेगा। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार और पार्टी के अंदर हुई बगावत के कारण तृणमूल कांग्रेस संकट का सामना कर रही है। इस बगावत ने पार्टी की संगठनात्मक और विधायी ताकत को काफी कमजोर कर दिया है।
मुख्य विपक्षी गुट के तौर पर हासिल की मान्यता
पिछले हफ्ते, पार्टी के दो-तिहाई से ज़्यादा विधायकों – 80 में से 58 ने आधिकारिक तृणमूल कांग्रेस विधायक दल से अलग होकर, पार्टी से निष्कासित विधायक रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल विधानसभा में मुख्य विपक्षी गुट के तौर पर मान्यता हासिल कर ली। बाद में, यह संकट संसद सदस्यों तक भी पहुंच गया, जहां काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में बागी सांसदों ने 20 से ज़्यादा लोकसभा सदस्यों के समर्थन का दावा किया।
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राम मंदिर के बनने से अब तक के सभी वित्तीय लेन-देन को सार्वजनिक किया जाए: भाजपा नेता
लखनऊ, एजेंसी। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता रजनीश सिंह ने अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले दान में कथित हेराफेरी को लेकर हो रहे विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के बनने के समय से लेकर अब तक के सभी वित्तीय लेन-देन और संपत्ति को सार्वजनिक करने की मांग की। सिंह ने शुक्रवार को भेजे पत्र में प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वह ट्रस्ट को निर्देश दें कि न्यास अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सभी आय, खर्च, दान, बैंक खातों, जमीन के लेन-देन और संपत्तियों का विवरण सार्वजनिक करे।

करोड़ों भक्तों की श्रद्धा का प्रतीक राम मंदिर
उन्होंने भगवान राम को सत्य, धर्म और जन-कल्याण का प्रतीक बताते हुए कहा कि राम के नाम पर काम करने वाली संस्थाओं को पारदर्शिता के उच्चतम मानकों का पालन करना चाहिए। उन्होंने पत्र में कहा, “देश-विदेश के करोड़ों भक्तों ने राम मंदिर के निर्माण के लिए अपनी आस्था और जीवन भर की कमाई का योगदान दिया है। यह धन किसी व्यक्ति, समूह या संस्था का नहीं है, बल्कि करोड़ों भक्तों की श्रद्धा का प्रतीक है।” सिंह ने कहा कि हर भक्त को यह जानने का ‘नैतिक और लोकतांत्रिक अधिकार’ है कि दान में मिले पैसे, गहनों और अन्य कीमती चीजों का इस्तेमाल कैसे किया गया है। भाजपा नेता की यह मांग मंदिर के दान के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं को लेकर बढ़ते विवाद के बीच आई है।
पूर्व सांसद ने मंदिर में चोरी को लेकर उठाए सवाल
पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने बुधवार को दावा किया था कि उन्हें राम मंदिर में दान के कथित दुरुपयोग और चोरी के बारे में जानकारी थी लेकिन वे इसका विवरण बताने की स्थिति में नहीं थे। उन्होंने गोंडा में पत्रकारों से कहा था, “अगर मैं सच बोलूंगा, तो मुसीबत में पड़ जाऊंगा क्योंकि वे बहुत ताकतवर लोग हैं।” रजनीश सिंह ने पत्र में ‘समर्पण निधि’ अभियान के तहत जमा हुए फंड, नकद, चेक, ऑनलाइन अंतरण और दान पेटियों के जरिए मिले दान, सोना, चांदी व गहनों के रूप में मिले योगदान का विवरण सार्वजनिक करने की मांग की।
श्रद्धालु की आस्था के साथ खिलवाड़ नहीं
इस बीच उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने शुक्रवार को कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट ने इस मामले की जांच पहले ही शुरू कर दी है। शाही ने कहा, “ट्रस्ट अपने नियमों और कानूनों के अनुसार जरूरी कार्रवाई करेगा। ट्रस्ट इस मामले को लेकर पूरी तरह से जागरूक और सतर्क है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था की रक्षा की जाएगी और कहा, “किसी भी श्रद्धालु की आस्था के साथ खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा।
ट्रस्ट के मामले में सरकार नहीं करेगी हत्क्षेप
अगर कहीं कोई कमी या गड़बड़ी है, तो उसकी जांच की जा रही है। शाही ने कहा कि राज्य सरकार अभी इस मामले में दखल नहीं दे रही है क्योंकि यह ट्रस्ट का मामला है। उन्होंने कहा, “अगर ट्रस्ट सरकार से किसी मदद या कार्रवाई की उम्मीद करता है, तो सरकार उस पर विचार करेगी।
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ममता बनर्जी के खिलाफ FIR दर्ज, सांप्रदायिक टिप्पणी का आरोप
कोलकाता, एजेंसी। कोलकाता में Mamata Banerjee के खिलाफ कथित सांप्रदायिक टिप्पणी को लेकर FIR दर्ज की गई है। यह मामला कोलकाता के Hare Street Police Station में दर्ज किया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2026 में दिए गए एक राजनीतिक भाषण के दौरान ममता बनर्जी ने ऐसी टिप्पणियां कीं, जिनसे सांप्रदायिक भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं। इसी आधार पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई थी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है और पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी है। हालांकि, मामले में अभी तक किसी गिरफ्तारी या अन्य कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। फिलहाल जांच जारी है।
वहीं दूसरी ओर, BJP ने शुक्रवार को दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस के 20 लोकसभा सांसदों के हस्ताक्षर वाला एक दस्तावेज़ यह साबित करता है कि ‘असली TMC’ का नेतृत्व काकोली घोष दस्तीदार कर रही हैं, न कि ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी। यह बयान ऐसी खबरों के बीच आया है कि 19-20 तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को संबोधित एक पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं।

एक वीडियो बयान में, BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने आरोप लगाया कि वंशवादी राजनीति और पार्टी के बजाय अपने भतीजे को ममता की प्राथमिकता के कारण TMC में अंदरूनी बिखराव हो रहा है। उन्होंने कहा, “अब सबूत सबके सामने है। काकोली घोष के नेतृत्व में असली TMC के 20 लोकसभा सांसदों के हस्ताक्षर वाला दस्तावेज़ दिखाता है कि असली TMC उस TMC से अलग है जिसका प्रतिनिधित्व ममता और अभिषेक कर रहे हैं। वे अब नकली TMC हैं।”
2026 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार के बाद TMC संकट में घिर गई, क्योंकि BJP ने राज्य में ममता के 15 साल के शासन को खत्म कर दिया। इसमें भवानीपुर सीट पर ममता का सुवेंदु अधिकारी से 15,105 वोटों के अंतर से हारना और पार्टी के विधायकों के एक बड़े हिस्से का बागी हो जाना शामिल था। बाद में यह उथल-पुथल संसद तक फैल गई, जिसमें बागी सांसदों ने 20 से अधिक लोकसभा सदस्यों के समर्थन का दावा किया।
पूनावाला ने आरोप लगाया कि लगभग 65-70 TMC विधायक और कई राज्यसभा सांसद भी “असली TMC” के साथ हैं। उन्होंने कहा, “विधानसभा में भी, लगभग 65-70 विधायक असली TMC के तहत एक साथ आए हैं। राज्यसभा सांसद भी इस गुट के साथ हैं। यह TMC का पूरी तरह से बिखराव है। इसे अब ‘टुकड़ों में कांग्रेस’ कहा जा रहा है।”
पूनावाला ने कहा, “क्योंकि वह पार्टी से ज़्यादा अपने भतीजे को अहमियत देती हैं, इसलिए पार्टी उनसे दूर हो गई है। परिवारवाद की राजनीति को बढ़ावा देने पर ऐसा ही होता है। जिनके पास संख्या बल है, वही असली TMC है। अफ़सोस की बात है कि ममता के पास अब बहुत कम विकल्प बचे हैं। हो सकता है कि वह अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय करना चाहें।”
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