विदेश
रूस ने यूक्रेन का F-16 फाइटर जेट मार गिराया:पायलट की भी मौत, 6 रूसी मिसाइलें तबाह कीं, अगला टारगेट हिट करते वक्त सिस्टम खराब
कीव / माॅस्को,एजेंसी। रूस ने रविवार रात को यूक्रेन पर अब तक का सबसे बड़ा हवाई हमला किया। रूस ने 477 ड्रोन और 60 मिसाइलें दागीं। रूस ने M/KN-23 बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइलों से हमला किया।
यूक्रेन की डिफेंस मिनिस्ट्री ने सोशल मीडिया पोस्ट कर इसकी जानकारी दी है। यूक्रेनी वायु सेना ने इनमें से 475 हमलों को रोक दिया गया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हमले के दौरान एक मिसाइल ने यूक्रेन के F-16 फाइटर जेट को भी मार गिराया। यूक्रेन ने बताया कि हमले में फाइटर जेट के पायलट पावलो इवानोव की भी मौत हो गई।
रूस के यूक्रेन पर हमले की तस्वीरें देखें…

रूस ने यूक्रेन पर 29 जून, 2025 को हमला किया, इस के दौरान आसमान में विस्फोट देखे गए।

रुसी हमलों में घरों और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है।

रविवार रात को यूक्रेन पर हुए हमले में बच्चे का रेस्क्यू करते बचावकर्मी।

रुसी हमलों में कई रिहायशी बिल्डिंग तबाह हो गई।
हमलों में F-16 लड़ाकू विमान तबाह हुआ
रूसी हमलों में हमलों में रिहायशी इलाकों को नुकसान पहुंचा और छह लोग घायल हो गए। यूक्रेनी वायु सेना ने कहा कि पायलट ने रूस के मिसाइल हमले के दौरान 6 मिसाइलों को मार गिराया, लेकिन आखिरी टारगेट हिट करते वक्त उनके विमान में दिक्कत आ गई।
पायलट एफ-16 को आबादी वाले क्षेत्र से दूर ले गया, लेकिन वह समय पर विमान से बाहर नहीं निकल सका।
यूक्रेन ने रूस के क्रीमिया एयरबेस पर ड्रोन हमला किया था
इससे पहले यूक्रेन ने 28 जून की सुबह रूस के कब्जे वाले क्रीमिया के किरोव्स्के एयरबेस पर हमला करने का दावा किया था। कीव इंडिपेंडेंट के मुताबिक इस हमले में रूस के Mi-8, Mi-26 and Mi-28 अटैक हेलिकॉप्टर और एक पैंटसिर-S1 एयर सेफ्टी सिस्टम तबाह हो गया।
यूक्रेनी सुरक्षा सर्विस (SBU) ने कहा कि यूक्रेन ने रूसी विमानों, हवाई रक्षा प्रणालियों, हथियारों, और ड्रोन भंडार को निशाना बनाया। हालांकि रूस ने इसकी पुष्टि नहीं की थी।
पुतिन बोले थे- बातचीत के नए दौर के लिए तैयार है
ये हमले रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के 27 जून को दिए गए बयान के बाद हुए थे जिसमें उन्होंने कहा था कि मास्को इस्तांबुल में सीधे शांति बातचीत के नए दौर के लिए तैयार है।
हालांकि, युद्ध के थमने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं क्योंकि बातचीत में अब तक कोई सफलता नहीं मिली है। इस्तांबुल में रूसी और यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडलों के बीच हाल ही में हुई दो दौर की वार्ता असफल रही और किसी समझौते पर पहुंचने में कोई प्रगति नहीं हुई थी।
जानिए क्यों शुरू हुई रूस-यूक्रेन की जंग
फरवरी 2022- रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के हमले का ऐलान करते ही यूक्रेन में रूसी टैंक धड़धड़ाते हुए घुसने लगे। तब के अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन बोले- पुतिन से बातचीत का कोई प्लान नहीं है। उन्होंने पूरी दुनिया को खतरे में डाल दिया है। रूस को यूक्रेन पर हमले की गंभीर कीमत चुकानी होगी।
फरवरी 2025- अमेरिका के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पुतिन से फोन पर 90 मिनट तक बात की। इसके बाद सऊदी अरब में यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस और अमेरिकी के बीच हाई लेवल मीटिंग हुई। इसमें यूक्रेन को नहीं रखा गया। ट्रम्प ने पुतिन की तारीफ की और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की को ‘तानाशाह’ कह दिया।
मई 2025- रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को समाप्त करने के लिए शांति बातचीत 2025 में तेज हुई, खासकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की पहल के बाद। हाल के दिनों में कैदी अदला-बदली हुई है, लेकिन क्षेत्रीय नियंत्रण और सुरक्षा गारंटी पर मतभेद बने हुए हैं।
विदेश
ईरान ने एक और इजरायली को दी मौत, जासूसी के आरोप में फांसी पर चढ़ाया
तेहरान, एजेंसी। ईरान ने इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के लिए कथित तौर पर काम करने वाले एक व्यक्ति को फांसी दे दी है। ईरानी न्यायपालिका की वेबसाइट के अनुसार एहसान अफरेशतेह नाम के इस व्यक्ति पर इजरायल को संवेदनशील और गोपनीय जानकारी बेचने का आरोप था। रिपोर्ट में दावा किया गया कि उसे नेपाल में मोसाद की ओर से प्रशिक्षण दिया गया था।ईरान के अनुसार आरोपी को “जासूसी और यहूदी शासन के साथ सहयोग” के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। बाद में अदालत ने उसे दोषी ठहराया और देश के सर्वोच्च न्यायालय ने भी सजा को बरकरार रखा।

इसके बाद बुधवार सुबह उसे फांसी दे दी गई। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बना हुआ है। फरवरी 2026 के बाद से ईरान में जासूसी और सुरक्षा मामलों में फांसी की घटनाएं बढ़ी हैं। कुछ दिन पहले भी ईरान ने एक एयरोस्पेस इंजीनियरिंग छात्र को फांसी दी थी, जिस पर अमेरिका और इजरायल के लिए जासूसी करने का आरोप था।
मानवाधिकार संगठनों के अनुसार चीन के बाद ईरान दुनिया में सबसे अधिक फांसी देने वाले देशों में शामिल है। इस बीच पश्चिम एशिया में हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। इजरायली सेना ने दावा किया है कि उसने दक्षिणी लेबनान में एक संदिग्ध हवाई लक्ष्य को मार गिराया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी तनाव आने वाले समय में क्षेत्रीय सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
विदेश
ट्रंप के चीन पहुंचने से पहले जिनपिंग ने दिखाए तेवर, कहा-‘ये चार लाल रेखाएं पार मत करना’
वाशिंगठन/बीजिंग, एजेंसी। चीन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा से पहले साफ संदेश देते हुए कहा है कि दोनों देशों के संबंधों में मौजूद “चार लाल रेखाओं” को चुनौती नहीं दी जानी चाहिए। अमेरिका में स्थित चीनी दूतावास ने सोशल मीडिया पर जारी संदेश में कहा कि चीन-अमेरिका संबंधों में कुछ मुद्दे बेहद संवेदनशील हैं और उन्हें पार नहीं किया जाना चाहिए। बीजिंग ने जिन चार मुद्दों को “लाल रेखा” बताया है, उनमें ताइवान का प्रश्न, लोकतंत्र और मानवाधिकार, राजनीतिक व्यवस्था और चीन के विकास का अधिकार शामिल हैं।

चीनी दूतावास ने यह भी कहा कि दोनों देशों को आपसी सम्मान, शांतिपूर्ण सहअस्तित्व और सहयोग के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहिए। इसी बीच ट्रंप ने कहा कि वह चीन यात्रा के दौरान व्यापार और आर्थिक सहयोग पर विशेष जोर देंगे। ट्रंप ने बताया कि कई बड़े अमेरिकी उद्योगपति भी उनके साथ चीन जा रहे हैं। इनमें एलोन मस्क, टिम कुक और जेन्सेन हुआंग जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। ट्रंप ने कहा कि वह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से चीन के बाजार को और खोलने की मांग करेंगे ताकि अमेरिकी कंपनियों को अधिक अवसर मिल सकें।
उन्होंने शी को “बेहद प्रभावशाली नेता” बताते हुए कहा कि यह यात्रा बहुत महत्वपूर्ण और उत्साहजनक रहने वाली है। ईरान मुद्दे पर भी ट्रंप ने सख्त रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि ईरान सैन्य रूप से कमजोर पड़ चुका है और या तो समझौता करेगा या फिर अमेरिका कार्रवाई पूरी करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच होने वाली यह वार्ता आने वाले समय में वैश्विक व्यापार, सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
विदेश
अमेरिका का ईरान पर नया दांवः IRGC के गुप्त नेटवर्क पर गढ़ाई नजर, जानकारी देने वाले को मिलेगा 1.5 करोड़ डॉलर का ईनाम
वाशिंगठन, एजेंसी। अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाते हुए उसकी सैन्य संस्था Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) के वित्तीय नेटवर्क की जानकारी देने वालों के लिए 1.5 करोड़ डॉलर तक के इनाम की घोषणा की है। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि यह कदम ईरान के कथित अवैध तेल कारोबार और उससे जुड़े वित्तीय तंत्र को निशाना बनाने के लिए उठाया गया है। अमेरिका के अनुसार IRGC और उसकी विभिन्न शाखाएं तेल बिक्री, फर्जी कंपनियों और गुप्त वित्तीय चैनलों के जरिए धन जुटाती हैं, जिसका इस्तेमाल क्षेत्रीय सैन्य गतिविधियों और सहयोगी संगठनों को समर्थन देने में किया जाता है।

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि ट्रंप प्रशासन “आर्थिक प्रहार” नीति के तहत ईरान पर दबाव बढ़ा रहा है। उन्होंने बताया कि अमेरिका ने ईरानी तेल की बिक्री और ढुलाई से जुड़े एक नेटवर्क तथा आईआरजीसी के तीन वरिष्ठ अधिकारियों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिका का आरोप है कि ये अधिकारी तेल कारोबार से जुड़े वित्तीय लेनदेन का समन्वय कर रहे थे। इनाम योजना के तहत अमेरिका ऐसी जानकारी मांग रहा है जिससे आईआरजीसी के वित्तीय ढांचे, प्रतिबंधों से बचने वाले नेटवर्क, फर्जी कंपनियों, गुप्त बैंकिंग चैनलों और दोहरे उपयोग वाली तकनीकों की खरीद प्रणाली को बाधित किया जा सके।
अमेरिका ने यह भी कहा कि ईरान की जनता आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रही है, जबकि शासन अपने संसाधनों का उपयोग हथियार कार्यक्रमों और क्षेत्रीय संघर्षों में कर रहा है। यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है और अमेरिका-ईरान संबंध बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की यह रणनीति ईरान की आर्थिक ताकत और उसके क्षेत्रीय प्रभाव को कमजोर करने की कोशिश है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और पश्चिम एशियाई राजनीति पर भी पड़ सकता है।
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