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रूस बोला-भारत किसी से भी तेल खरीदने के लिए आजाद:इसमें कुछ भी गलत नहीं, भारत ने तेल खरीद रोकने की आधिकारिक जानकारी नहीं दी

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मॉस्को,एजेंसी। रूस ने कहा कि भारत किसी भी देश से क्रूड ऑयल खरीदने के लिए पूरी तरह आजाद है। रूस के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि रूस कभी भी भारत का एकमात्र एनर्जी पार्टनर नहीं रहा है। अगर भारत तेल की खरीद किसी और देश से करता है, तो इसे गलत नहीं माना जाना चाहिए।

पेस्कोव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर रहा है, इस तरह की कोई भी ऑफिशियल जानकारी भारत की ओर से नहीं दी गई है। उन्होंने एक दिन पहले भी यही बात कही थी कि नई दिल्ली से ऐसा कोई मैसेज नहीं आया है।

ट्रम्प का दावा- भारत रूसी तेल खरीदना बंद करेगा

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोमवार को कहा था कि भारत, अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील के तहत रूस से तेल खरीद रोकने को तैयार हो गया है।

उन्होंने कहा था कि अमेरिका और भारत के बीच एक व्यापार समझौता हुआ है। इसके तहत भारतीय सामानों पर लगने वाला टैरिफ 50% से घटकर 18% हो गया है।

उन्होंने दावा किया कि इसके बदले में भारत, रूस से तेल खरीदना बंद करेगा और व्यापार से जुड़ी टैरिफ की रुकावटें भी कम करेगा।

रूसी प्रवक्ता बोलीं- तेल खरीदी दोनों देशों के लिए फायदेमंद

रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने बुधवार को रूस और भारत के बीच हाइड्रोकार्बन व्यापार जारी रखने की बात कही। उन्होंने कहा

भारत की रूसी हाइड्रोकार्बन की खरीद दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद है। यह वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मदद करती है। हम अपने भारतीय साझेदारों के साथ निकट सहयोग जारी रखने के लिए तैयार हैं।

इस बीच रूस के एनर्जी एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत के लिए रूसी तेल को पूरी तरह छोड़कर किसी और देश का तेल लेना आसान नहीं है।

नेशनल एनर्जी सिक्योरिटी फंड के विशेषज्ञ इगोर युशकोव ने बताया कि अमेरिका जो तेल बेचता है, वह हल्का होता है, जबकि रूस, भारत को भारी और सल्फर वाला यूराल्स क्रूड सप्लाई करता है जिसका इस्तेमाल भारतीय रिफाइनरियां करती हैं।

उन्होंने कहा कि अगर भारत अमेरिका से हल्का तेल खरीदेगा, तो उसे दूसरे तेलों के साथ ब्लेंड (मिक्स) करना पड़ेगा, ताकि मशीनें ठीक से चल सकें। ऐसा करने पर भारतीय कंपनियों की लागत बढ़ जाएगी। यानी कि भारत को अमेरिकी तेल खरीदना ज्यादा महंगा पड़ेगा।

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का उपभोक्ता है। भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 88% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का उपभोक्ता है। भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 88% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है

भारत बोला- 140 करोड़ लोगों को ध्यान में रखकर फैसला लेंगे

वहीं भारत सरकार ने गुरुवार को कहा कि देश की ऊर्जा सुरक्षा उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है और तेल खरीद से जुड़े सभी फैसले राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर किए जाते हैं।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि सरकार के लिए 140 करोड़ लोगों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना मेन टारगेट है। उन्होंने कहा कि भारत की एनर्जी पॉलिसी का आधार अलग-अलग देशों से तेल और गैस खरीदना है, ताकि आपूर्ति बनी रहे।

रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बाजार की स्थिति और बदलते अंतरराष्ट्रीय हालात को ध्यान में रखते हुए फैसले करता है। उन्होंने साफ किया कि भारत के सभी फैसले इसी सोच के तहत लिए जाते हैं।

वेनेजुएला लंबे समय से भारत का एनर्जी साझेदार

वेनेजुएला से तेल खरीद पर पूछे गए सवाल के जवाब में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि वेनेजुएला भारत का लंबे समय से ऊर्जा साझेदार रहा है। उन्होंने बताया कि भारत 2019-20 तक वेनेजुएला से कच्चा तेल इंपोर्ट करता था, लेकिन उसके बाद इसे रोकना पड़ा।

रणधीर जायसवाल ने कहा कि 2023-24 में भारत ने वेनेजुएला से फिर से कच्चा तेल खरीदा, लेकिन जब दोबारा प्रतिबंध लगाए गए तो आयात फिर से बंद हो गया। उन्होंने बताया कि भारतीय पब्लिक सेक्टर की कंपनियां 2008 से वेनेजुएला की राष्ट्रीय तेल कंपनी PDVSA के साथ साझेदारी में काम कर रही हैं और वहां उनकी मौजूदगी बनी हुई है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत की नीति साफ है और देश वेनेजुएला या किसी भी अन्य देश से तेल खरीदने के लिए तैयार है, बशर्ते वह व्यावसायिक रूप से फायदेमंद हो। भारत अलग-अलग क्षेत्रों से कच्चे तेल की उपलब्धता का आकलन करता रहता है।

एक्सपर्ट बोले- रूस जितना तेल सप्लाई करना अमेरिका के लिए मुश्किल

एनर्जी एक्सपर्ट इगोर युशकोव ने यह भी कहा कि रूस भारत को रोजाना 1.5 से 2 मिलियन बैरल तक तेल भेजता है। यह बहुत बड़ी मात्रा है। अमेरिका इतनी बड़ी मात्रा में तेल आसानी से भारत को नहीं सप्लाई कर सकता। अमेरिका के पास इतनी क्षमता या तैयार सप्लाई चेन नहीं है जो इतनी जल्दी और इतने बड़े वॉल्यूम में मैच कर सके।

अगर भारत अचानक रूसी तेल खरीदना पूरी तरह बंद कर दे और अमेरिका या किसी और से तेल लेने की कोशिश करे, तो अमेरिका के लिए इतना ज्यादा तेल उपलब्ध करा पाना मुश्किल होगा। इससे भारत को तेल की कमी हो सकती है या कीमतें बहुत बढ़ सकती हैं।

एनर्जी एक्सपर्ट बोले- रूसी तेल बंद हुआ तो कीमतें बढ़ेंगी

युशकोव ने कहा कि भारत का रूसी तेल खरीदना कोई ‘एक झटके में’ होने वाला काम नहीं है। ट्रम्प यह दिखाना चाहते हैं कि उनकी वजह से भारत रूसी तेल छोड़ देगा, लेकिन हकीकत इतनी सरल नहीं है।

युशकोव ने याद दिलाया कि 2022 में जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया, तो पश्चिमी देशों ने रूसी तेल खरीदना कम कर दिया या बंद कर दिया।

रूस ने अपने तेल को यूरोप-अमेरिका से हटाकर भारत जैसे देशों की तरफ मोड़ दिया। इस दौरान रूस ने अपना तेल उत्पादन लगभग 10 लाख बैरल प्रतिदिन (1 मिलियन बैरल/दिन) कम कर दिया।

इस वजह से वैश्विक स्तर पर तेल की सप्लाई में कमी आई। तेल की मांग ज्यादा और सप्लाई कम होने से दुनिया भर में क्रूड ऑयल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। इससे अमेरिका में पेट्रोल और डीजल की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गईं, जिससे वहां आम लोगों को तेल बहुत महंगा पड़ा।

यूक्रेन जंग शुरू होने के बाद बढ़ी रूसी तेल की खरीद

फरवरी 2022 में रूस ने यूक्रेन पर सैन्य हमला किया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच युद्ध शुरू हो गया, जो अब तक जारी है। इस युद्ध के कारण रूस पर अमेरिका और यूरोपीय देशों ने कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए, खासकर उसके तेल और गैस सेक्टर पर।

इन प्रतिबंधों की वजह से रूस को अपना कच्चा तेल सस्ते दामों पर बेचने के लिए नए खरीदार ढूंढने पड़े। इसी दौरान भारत ने रूस से रियायती दरों पर तेल खरीदना शुरू किया।

वित्त वर्ष 2024–25 में भारत और रूस का द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर 68.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया, लेकिन इसमें बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का था। भारत ने अकेले 52.73 अरब डॉलर का कच्चा तेल रूस से खरीदा था।

तेल खरीदी बंद होने से रूस-भारत का व्यापार घट सकता है

भारत अगर रूसी तेल का आयात पूरी तरह बंद कर देता है, तो भारत-रूस का कुल द्विपक्षीय व्यापार घटकर 20 अरब डॉलर से भी नीचे आ सकता है।

भारत के पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पिछले महीने कहा था कि रूस से कच्चे तेल के आयात में आगे भी गिरावट आने की संभावना है। पुरी ने ब्लूमबर्ग को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि रूस से तेल खरीद में आई कमी की वजह किसी राजनीतिक या विदेशी दबाव की वजह से नहीं, बल्कि बाजार की परिस्थितियों का नतीजा है।

उन्होंने कहा था कि भारत अब तेल आपूर्ति के लिए किसी एक देश पर निर्भर नहीं रहना चाहता और इसी वजह से अलग-अलग देशों से तेल खरीदकर आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाई जा रही है।

हालांकि पुरी ने रूसी तेल आयात में कटौती को लेकर किसी अमेरिकी दबाव का जिक्र नहीं किया, लेकिन ट्रम्प खुले तौर पर यह दावा कर रहे हैं कि उन्होंने भारत को रूस से तेल खरीदने से रोका है।

भारत रूसी तेल का तीसरा सबसे बड़ा खरीदार

दिसंबर 2025 में भारत रूस से तेल खरीदने में तीसरे नंबर पर आ गया। तुर्किये दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बन गया। तुर्किये ने 2.6 बिलियन यूरो का तेल खरीदा।

भारत ने दिसंबर में रूस से 2.3 बिलियन यूरो यानी लगभग 23,000 करोड़ रुपए का तेल खरीदा। नवंबर में भारत ने 3.3 बिलियन यूरो यानी करीब 34,700 करोड़ रुपए का तेल खरीदा था।

चीन अब भी सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है, उसने दिसंबर में रूस से 6 बिलियन यूरो यानी करीब 63,100 करोड़ रुपए का तेल खरीदा। भारत की खरीद कम होने की सबसे बड़ी वजह रिलायंस इंडस्ट्रीज रही। रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी ने रूस से तेल खरीद करीब आधी कर दी।

पहले रिलायंस पूरी सप्लाई रूस की कंपनी रोसनेफ्ट से लेती थी, लेकिन अमेरिका के प्रतिबंधों के डर से अब कंपनियां रूस से तेल कम खरीद रही हैं। रिलायंस के अलावा सरकारी तेल कंपनियों ने भी दिसंबर में रूस से तेल खरीद करीब 15% घटा दी।

रूस ने छूट घटाई, भारत को पहले जैसा फायदा नहीं

यूक्रेन युद्ध के बाद रूस ने 20-25 डॉलर प्रति बैरल सस्ता क्रूड ऑयल बेचना शुरू किया। तब अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमत 130 डॉलर प्रति बैरल थी, ऐसे में ये छूट भारत के लिए किफायती थी।

अब स्थिति बदल गई है। फरवरी 2026 में ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 68 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय रिफाइनरियों को रूसी उराल्स क्रूड ब्रेंट से 10-11 डॉलर प्रति बैरल (कुछ मामलों में 10 डॉलर से ज्यादा, शिपिंग और अन्य खर्चों सहित) सस्ता मिल रहा है, जो जनवरी के अंत में 9.15 डॉलर था।

यह छूट पहले के 20-25 डॉलर से कम है, इसलिए भारत को पहले जैसा बड़ा फायदा नहीं मिल रहा। इसके अलावा रूस से तेल लाने में शिपिंग, फ्रेट और बीमा का खर्च ज्यादा पड़ता है, क्योंकि पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण “शैडो फ्लीट” (पुराने टैंकर) का इस्तेमाल होता है, जिससे लागत बढ़ जाती है।

वहीं, सऊदी अरब, यूएई, इराक या अमेरिका जैसे स्थिर सप्लायर्स से तेल लाना सस्ता और कम रिस्क वाला है। इसी वजह से भारत अब दोबारा दूसरे सप्लायर्स से तेल खरीदने पर विचार कर रहा है।

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देश

बांग्लादेश में 20 साल बाद BNP की जीत:तारिक रहमान का PM बनना तय, ममता बनर्जी ने भाई कहकर बधाई दी

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ढाका/कोलकाता,एजेंसी। बांग्लादेश में गुरुवार को हुए आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने बड़ी जीत दर्ज की है। प्रथोम ओलो के मुताबिक BNP+गठबंधन ने 299 सीटों में से 212 सीटें हासिल कर बहुमत के लिए जरूरी 150 के आंकड़े को पार कर लिया। अब तक 297 सीटों के नतीजे घोषित हो चुके हैं।

जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलों के गठबंधन को अब तक 77 सीटें मिली हैं। देश में करीब 20 साल बाद BNP की सरकार बनेगी। 2008 से 2024 तक वहां शेख हसीना की आवामी लीग सत्ता में थी। इस जीत के साथ BNP अध्यक्ष तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनना तय माना जा रहा है।

तारिक ने दो सीटों से चुनाव लड़ा था और दोनों पर जीत हासिल की है। तारिक रहमान की जीत पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा, ‘मेरे भाई तारिक, उनकी टीम और बाकी सभी को बधाई।

बांग्लादेश में 35 साल बाद कोई पुरुष प्रधानमंत्री बनेगा। 1988 में काजी जफर अहमद प्रधानमंत्री बने थे। इसके बाद 1991 से 2024 तक देश की राजनीति में पूर्व पीएम शेख हसीना और खालिदा जिया का दबदबा रहा। ये दोनों ही प्रधानमंत्री बनती रहीं।

हिंदू-अवामी लीग के वोट BNP को मिले, जमात को हराया

बांग्लादेश चुनाव में कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी बुरी तरह हारी है। उसके गठबंधन को सिर्फ 70 सीटें मिलीं हैं। शेख हसीना की सरकार गिराने वाले स्टूडेंट्स की पार्टी नेशनल सिटीजन पार्टी यानी NCP को भी बांग्लादेशियों ने नकार दिया।

एक्सपर्ट्स BNP की एकतरफा जीत की तीन वजह बताते हैं…

  1. पूर्व PM शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के वोट खासकर हिंदू वोटर BNP में शिफ्ट हो गए। BNP को अवामी लीग के गढ़ रहे गोपालगंज के अलावा खुलना, सिलहट, चटगांव, ठाकुरगंज में जीत मिली है।
  2. जमात का अतीत आड़े आ गया, लोगों को याद रहा कि उसने बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम का विरोध किया था। जमात इस दाग को नहीं धो पाई।
  3. स्टूडेंट्स की नेशनल सिटीजन पार्टी को आपसी फूट और जमात से गठबंधन करना भारी पड़ा। उन्हें लोगों ने पूरी तरह खारिज कर दिया।

बांग्लादेश में चुनाव की तस्वीरें…

अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस वोट डालते हुए।

अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस वोट डालते हुए।

BNP अध्यक्ष तारिक रहमान वोट डालते हुए। रहमान पीएम पद के सबसे बड़े दावेदार हैं।

BNP अध्यक्ष तारिक रहमान वोट डालते हुए। रहमान पीएम पद के सबसे बड़े दावेदार हैं।

NCP लीडर नाहिद इस्लाम ने वोट डालने के बाद सरकार बनने की उम्मीद जताई।

NCP लीडर नाहिद इस्लाम ने वोट डालने के बाद सरकार बनने की उम्मीद जताई।

जमात-ए-इस्लामी के नेता शफीकुर रहमान ने कल कहा था कि अगर चुनाव निष्पक्ष हुए तो उनकी पार्टी चुनाव परिणाम स्वीकार कर लेगी।

जमात-ए-इस्लामी के नेता शफीकुर रहमान ने कल कहा था कि अगर चुनाव निष्पक्ष हुए तो उनकी पार्टी चुनाव परिणाम स्वीकार कर लेगी।

इस चुनाव में महिलाओं ने भी बड़ी संख्या में वोट डाला।

इस चुनाव में महिलाओं ने भी बड़ी संख्या में वोट डाला।

मतदान पूरा होने के बाद वोटों की गिनती शुरू हुई।

मतदान पूरा होने के बाद वोटों की गिनती शुरू हुई।

बांग्लादेश में वोटिंग के दौरान झड़पें हुई

बांग्लादेश में वोटिंग के दौरान कई जगहों पर झड़पें भी हुई। खुलना में एक वोटिंग सेंटर के बाहर जमात-ए-इस्लामी कार्यकर्ताओं के साथ झड़प में एक BNP नेता मोहिबुज्जमान कोच्चि की मौत हो गई।

दूसरी तरफ मुंशीगंज-3 और गोपालगंज सदर इलाके में वोटिंग सेंटर के बाहर देसी बम फेंके गए। गोपालगंज सदर इलाके में धमाके से 3 लोग घायल हो गए थे।

बांग्लादेश चुनाव को लेकर भारत ने नतीजों का इंतजार करने के लिए कहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि नतीजे आने के बाद ही यह देखा जाएगा कि जनादेश किस तरह का है।

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बिज़नस

इलॉन मस्क की AI कंपनी चांद पर फैक्ट्री लगाएगी:इससे सूर्य की ऊर्जा कैप्चर होगी, मस्क बोले- ये शायद इंसानों को एलियन से मिला सके

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वॉशिंगटन,एजेंसी। दुनिया के सबसे अमीर इंसान इलॉन मस्क चांद पर AI सैटेलाइट फैक्ट्री लगाएंगे। मस्क ने बताया कि वे इसके जरिए सूरज की ऊर्जा कैप्चर करना चाहते हैं। मस्क ने अपनी AI कंपनी XAI की इंटरनल मीटिंग का 45 मिनट का वीडियो पोस्ट किया, जिसमें ये जानकारी सामने आई है।

इलॉन मस्क की मीटिंग से जुड़ी बड़ी बातें…

1. सूरज की ऊर्जा का इस्तेमाल

मस्क ने कहा अगर हम आज की मानव सभ्यता की ऊर्जा खपत को देखें, तो हम पृथ्वी की संभावित ऊर्जा का केवल 1% हिस्सा ही इस्तेमाल कर रहे हैं।

अगर हम सूरज की कुल ऊर्जा का 10 लाखवां हिस्सा भी हासिल कर लें, तो वह आज की सभ्यता द्वारा उपयोग की जाने वाली ऊर्जा से करीब 10 लाख गुना ज्यादा होगी।

सूरज हमारे सौर मंडल के कुल द्रव्यमान का 99.8% है। अगर हमें सूरज की ऊर्जा का सही इस्तेमाल करना है, तो हमें पृथ्वी की सीमा से बाहर निकलना ही होगा।

‘मास ड्राइवर’ से डीप स्पेस में चांद से लॉन्च होंगे सैटेलाइट्स

हमारा अगला कदम ‘अर्थ ऑर्बिटल डेटा सेंटर्स’ है। हम स्पेसएक्स की मदद से हर साल 100 से 200 गीगावाट क्षमता वाले डेटा सेंटर्स अंतरिक्ष में लॉन्च करेंगे।

उन्होंने कहा अगर हमें 1 टेरावॉट से भी आगे जाना है, तो चांद पर जाना होगा। मस्क ने बताया वे चांद पर ऐसी फैक्ट्रियां बनाएंगे जो एआई सैटेलाइट्स तैयार करेंगी।

वहां एक ‘मास ड्राइवर’ भी लगाया जाएगा। यह चांद से एआई सैटेलाइट्स को सीधे डीप स्पेस में लॉन्च करेगा। इससे हम सूरज की ऊर्जा के कुछ प्रतिशत हिस्से तक पहुंच पाएंगे।

इलेक्ट्रोमैग्नेटिक लॉन्चर चांद से सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में छोड़ेगा।

इलेक्ट्रोमैग्नेटिक लॉन्चर चांद से सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में छोड़ेगा।

पूरे सौर मंडल में कहीं भी इंसानी बस्तियां बसा सकेंगे

मस्क का विजन असल में ‘डाइसन स्फीयर’ के कॉन्सेप्ट पर आधारित है। यह एक ऐसा विशाल ढांचा होता है जो ऊर्जा को कैप्चर करने के लिए पूरे सूरज को चारों तरफ से ढक लेता है।

मस्क चांद पर ‘मास ड्राइवर’ के जरिए जो एआई सैटेलाइट्स भेजेंगे, वे धीरे-धीरे सूरज के चारों ओर ऐसा ही एक जाल या घेरा बनाएंगे। इससे हमारे पास इतनी बिजली होगी कि हम पूरे सौर मंडल में कहीं भी इंसानी बस्तियां बसा सकेंगे और बड़े से बड़े स्पेसशिप चला सकेंगे।

'डाइसन स्फीयर' एक मेगास्ट्रक्चर है, जिसे किसी तारे (जैसे सूरज) के चारों ओर उसकी ऊर्जा का पूरी तरह इस्तेमाल करने के लिए बनाया जा सकता है।

‘डाइसन स्फीयर’ एक मेगास्ट्रक्चर है, जिसे किसी तारे (जैसे सूरज) के चारों ओर उसकी ऊर्जा का पूरी तरह इस्तेमाल करने के लिए बनाया जा सकता है।

2. फाउंडिंग टीम के 12 मेंबर्स में से 6 को निकाला

मीटिंग में मस्क ने बताया कि कंपनी से कई पुराने कर्मचारियों को बाहर कर दिया गया है। इसमें कंपनी की शुरुआत करने वाली फाउंडिंग टीम के सदस्य भी शामिल हैं।

xAI की शुरुआत करने वाले 12 मुख्य सदस्यों में से अब केवल आधे ही मस्क के साथ बचे हैं। मस्क ने इसे कंपनी के ‘ऑर्गेनाइजेशनल स्ट्रक्चर’ में बदलाव का नाम दिया है।

3. चार टीमों में बंटी xAI, ‘मैक्रोहार्ड’ प्रोजेक्ट सबसे खास

  • ग्रोक टीम: यह चैटबॉट और वॉयस फीचर्स पर काम करेगी।
  • कोडिंग टीम: एप के सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए।
  • इमेजिन टीम: यह वीडियो जेनरेशन टूल पर फोकस करेगी।
  • मैक्रोहार्ड प्रोजेक्ट: यह कंप्यूटर सिम्युलेशन से लेकर पूरी कंपनियों की मॉडलिंग करेगी। इसका लक्ष्य एआई के जरिए रॉकेट इंजन तक डिजाइन करना है।

यह प्रोजेक्ट सिर्फ साधारण सॉफ्टवेयर नहीं बनाएगा, बल्कि पूरी की पूरी कंपनियों का ‘डिजिटल सिमुलेशन’ तैयार करेगा। इसका मतलब है कि एआई एक कंपनी के हर विभाग, सप्लाई चेन और बिजनेस फैसलों का एक कंप्यूटर मॉडल बना देगा। इससे किसी भी बड़े फैसले को असल में लागू करने से पहले एआई पर टेस्ट किया जा सकेगा कि उसका नतीजा क्या होगा।

मैक्रोहार्ड का एक बड़ा लक्ष्य एआई के जरिए जटिल मशीनों को डिजाइन करना है। यह एआई इतना एडवांस होगा कि खुद ही रॉकेट के इंजन और उनके पार्ट्स के डिजाइन तैयार करेगा, जिससे इंसानी गलती की गुंजाइश खत्म हो जाएगी और काम की रफ्तार कई गुना बढ़ जाएगी।

4. इंसानों की जगह सॉफ्टवेयर खुद लिखेगा पूरा प्रोग्राम

अब AI मॉडल्स किसी भी समस्या को एक अनुभवी इंजीनियर की तरह समझते हैं। अगर प्रोग्राम में कोई गलती आती है, तो वे उसे ढूंढकर खुद ही ठीक भी कर सकते हैं।

मस्क ने कहा कि इस साल के अंत तक शायद कोडिंग लिखने की जरूरत ही न पड़े। AI सीधे ‘बाइनरी’ (कंप्यूटर की अपनी भाषा यानी 0 और 1) में फाइलें बना देगा। यह काम किसी भी इंसानी प्रोग्रामर या मौजूदा सॉफ्टवेयर (कंपाइलर) से कहीं ज्यादा बेहतर और तेज होगा।

मस्क का दावा है कि अगले 2-3 महीनों में उनका ‘ग्रोक कोड’ दुनिया का सबसे बेहतरीन कोडिंग मॉडल बन जाएगा, जो चुटकियों में जटिल से जटिल सॉफ्टवेयर तैयार कर देगा।

मस्क ने भविष्यवाणी की है कि इस साल के अंत तक शायद कोडिंग लिखने की जरूरत ही न पड़े।

मस्क ने भविष्यवाणी की है कि इस साल के अंत तक शायद कोडिंग लिखने की जरूरत ही न पड़े।

5. AI बना पाएगा 20 मिनट तक लंबे वीडियो

XAI की इमेजिन टीम साल के अंत तक ऐसे मॉडल्स लाएगी जो एक बार में 10 से 20 मिनट के लंबे वीडियो बना सकेंगे। इसमें किसी मानवीय दखल की भी जरूरत नहीं पड़ेगी।

6. ‘मेम्फिस क्लस्टर’ धरती का सबसे बड़ा सुपरकंप्यूटर

मस्क के पास दुनिया का सबसे बड़ा GPU क्लस्टर है। ये 24 घंटे बिना रुके काम करता है। इसका मुख्य काम AI चैटबॉट ‘ग्रोक’ के अगले और एडवांस वर्जन को ट्रेनिंग देना है। यहां हजारों ऑपरेटिंग सिस्टम एक साथ मिलकर विशाल दिमाग की तरह काम कर रहे हैं।

मस्क की टीम ने इस प्रोजेक्ट के बारे में बताया कि डेटा सेंटर का एक बड़ा हिस्सा मात्र 6 हफ्ते में तैयार किया गया है। हॉल के अंदर 1363 किलोमीटर लंबी फाइबर केबल बिछाई गई है। पूरा क्लस्टर तैयार होने पर यह 1 गीगावाट से ज्यादा बिजली खर्च करेगा।

7. छत पर लिखवाया ‘मैक्रो हार्ड’

मस्क ने अपनी सफलता का मंत्र ‘कंप्यूट एडवांटेज’ (ज्यादा से ज्यादा मशीनी ताकत) को बताया। एनवीडिया के CEO जेन्सेन हुआंग ने भी माना कि मस्क जितनी तेजी से एआई इंफ्रास्ट्रक्चर दुनिया में कोई नहीं बना सकता। मस्क ने डेटा सेंटर की छत पर ‘Macro Hard’ (माइक्रोसॉफ्ट के नाम पर तंज) लिखवाया है।

मस्क ने डेटा सेंटर की छत पर 'Macro Hard' (माइक्रोसॉफ्ट के नाम पर तंज) लिखवाया है।

मस्क ने डेटा सेंटर की छत पर ‘Macro Hard’ (माइक्रोसॉफ्ट के नाम पर तंज) लिखवाया है।

8. ग्रोक वॉइस और ‘एवरीथिंग एप’ का विजन

वॉइस टीम ने बताया कि सितंबर 2024 तक उनके पास कोई वॉइस मॉडल नहीं था, लेकिन सिर्फ 6 महीने में उन्होंने स्क्रैच से ऐसा मॉडल बनाया जो ओपन एआई को टक्कर दे रहा है। उनका लक्ष्य इसे सिर्फ सवाल-जवाब तक सीमित न रखकर एक ‘एवरीथिंग एप’ बनाना है।

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विदेश

अमेरिका ने इंडियन मैप वाला पोस्ट हटाया:PoK-अक्साई चिन को भारत का हिस्सा दिखाया था, पाकिस्तान-चीन से तनाव की अटकलें लगी थीं

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वॉशिंगटन डीसी,एजेंसी। अमेरिका ने बुधवार को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और अक्साई चिन (चीन के कब्जे वाला इलाका) को भारत का हिस्सा दिखाने वाला पोस्ट डिलीट कर दिया है।

यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) ने 7 फरवरी को भारत-अमेरिका के बीच हुए ट्रेड एग्रीमेंट के बाद किए गए पोस्ट में इंडियन मैप शेयर किया था। जारी होने के बाद यह नक्शा चर्चा में आ गया था।

अब तक अमेरिकी एजेंसियां इंडियन मैप में PoK और अक्साई चिन को विवादित इलाके के तौर पर अलग रंग या ‘डॉटेड लाइन्स’ से दिखाती थी। हालांकि, इस पोस्ट में ऐसा कोई निशान या लाइन नहीं थी, बल्कि पूरे क्षेत्र को भारत का अभिन्न हिस्सा दिखाया गया था।

इस बदलाव के बाद कई एक्सपर्ट का कहना था कि पाकिस्तान और चीन के साथ अमेरिका के रिश्तों में तनाव के बीच यह कदम भारत के समर्थन का संकेत हो सकता है। वहीं, कुछ लोगों ने इसे गलती से जारी हुआ बताया। इन तमाम अटकलों के बीच अब USTR ने यह पोस्ट हटा दिया है। हालांकि, इस पर फिलहाल कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

अमेरिका ने यह इंडियन मैप शेयर किया था…

अमेरिकी ट्रेड ऑफिस ने यह इंडियन मैप अंतरिम व्यापार समझौते के फ्रेमवर्क के ऐलान के साथ पोस्ट किया था, जिसे अब हटा दिया गया है।

अमेरिकी ट्रेड ऑफिस ने यह इंडियन मैप अंतरिम व्यापार समझौते के फ्रेमवर्क के ऐलान के साथ पोस्ट किया था, जिसे अब हटा दिया गया है।

PoK को लेकर भारत-पाकिस्तान के बीच लंबे समय से विवाद

भारत और पाकिस्तान के बीच PoK विवाद जम्मू-कश्मीर क्षेत्र से जुड़ा सबसे पुराना विवाद है। यह 1947 से चला आ रहा है और दोनों देशों के बीच युद्ध, तनाव और कूटनीतिक लड़ाई का कारण बना हुआ है।

विवाद की शुरुआत

  • 1947: भारत-पाकिस्तान विभाजन- भारत के विभाजन के समय जम्मू-कश्मीर एक रियासत (प्रिंसली स्टेट) थी, जिसके महाराजा हरि सिंह हिंदू थे, लेकिन आबादी में मुस्लिम बहुमत में थे। विभाजन के नियम के अनुसार, रियासतें भारत या पाकिस्तान में शामिल हो सकती थीं या स्वतंत्र रह सकती थीं।
  • 1947-48: पहला भारत-पाकिस्तान युद्ध- पाकिस्तान से आए मिलिशिया ने कश्मीर पर हमला किया। महाराजा हरि सिंह ने मदद के लिए भारत से संपर्क किया और 26 अक्टूबर 1947 को इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन (विलय पत्र) पर हस्ताक्षर किए, जिससे जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा बन गया। भारत ने सैन्य मदद भेजी।युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने क्षेत्र के पश्चिमी और उत्तरी हिस्से पर कब्जा कर लिया, जिसे अब PoK कहा जाता है। 1949 में UN की मध्यस्थता से युद्धविराम हुआ और सीजफायर लाइन (बाद में लाइन ऑफ कंट्रोल – LoC) बनाई गई, जो दोनों देशों के नियंत्रण को अलग करती है।
  • भारत का दावा- भारत कहता है कि पूरा जम्मू-कश्मीर (PoK सहित) उसका अभिन्न अंग है, क्योंकि महाराजा ने भारत में विलय किया था। 2019 में अनुच्छेद 370 हटाने के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया। भारत PoK को अवैध कब्जा मानता है और इसे वापस लेने की बात करता है।
  • पाकिस्तान का दावा- पाकिस्तान कहता है कि कश्मीर मुस्लिम बहुल क्षेत्र है, इसलिए वह पाकिस्तान का हिस्सा होना चाहिए। पाकिस्तान PoK को आजाद कश्मीर कहता है और वहां अपनी तरह की सरकार चलाता है। पाकिस्तान UN के पुराने प्रस्तावों का हवाला देता है, जिसमें कश्मीरियों को जनमत संग्रह का अधिकार देने की बात थी।

पाकिस्तानी PM बोले थे- कश्मीर पाकिस्तान का हिस्सा बनेगा

अमेरिका के मैप शेयर करने से पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 5 फरवरी को बयान जारी कर कहा था कि कश्मीर पाकिस्तान का हिस्सा बनेगा।

शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान कश्मीरियों के साथ मजबूती से खड़ा है और जम्मू-कश्मीर विवाद का हल कश्मीर के लोगों की इच्छा के मुताबिक होना चाहिए। शहबाज ने कहा कि जम्मू-कश्मीर विवाद का समाधान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्तावों को लागू करने से ही हो सकता है।

उन्होंने कहा, ‘मैं पाकिस्तानी लोगों और पाकिस्तानी नेतृत्व की ओर से कश्मीर के अपने भाइयों के साथ एकजुटता दिखाने आया हूं।’ उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना ने इस क्षेत्र को पाकिस्तान की लाइफ लाइन बताया था।

शहबाज बोले- कश्मीर का मुद्दा हमारी फॉरेन पॉलिसी की नींव है

शहबाज शरीफ ने कहा कि कश्मीर का मुद्दा पाकिस्तान की फॉरेन पॉलिसी का आधार है। शहबाज ने भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 में हुए चार दिवसीय सैन्य संघर्ष को भी याद किया। उन्होंने दावा किया कि इस संघर्ष के बाद कश्मीर मुद्दा एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूरी ताकत के साथ उठाया गया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भारत अब प्रॉक्सी के जरिए आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है। पाकिस्तान, मिलिटेंट ग्रुप बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) को भारत का समर्थन मिलने का दावा करता है, जबकि भारत ऐसे आरोपों को हमेशा खारिज करता रहा है।

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