कोरबा
लोक संत भक्त माता कर्मा की जयंती पर साहू समाज ने निकाली शोभा यात्रा
माता कर्मा संपूर्ण मानवता के लिए भक्ति, त्याग और समर्पण की प्रतिमूर्ति -पूर्व मंत्री अग्रवाल
कोरबा। छत्तीसगढ़ की पूजनीय लोक संत भक्त माता कर्मा की जयंती के पावन अवसर पर कोरबा के घंटाघर में साहू समाज द्वारा शोभा यात्रा का आयोजन किया गया। इस शोभा यात्रा का शुभारंभ पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल द्वारा विधिवत रूप से किया गया।

इस अवसर पर श्री अग्रवाल ने ध्वजा लेकर शोभा यात्रा में सहभागिता की तथा प्रतिभागियों के साथ कुछ दूरी तक पैदल चलकर आयोजन की शोभा बढ़ाई। कार्यक्रम में समाज के सैकड़ों लोग उत्साहपूर्वक उपस्थित रहे और भक्त माता कर्मा के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
इस मौके पर पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कोरबावासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भक्त माता कर्मा समाज में सामाजिक समरसता, प्रेम और सौहार्द्र की प्रतीक हैं। उनका जीवन हमें आपसी भाईचारे, सेवा और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि आज के समय में समाज को उनके बताए आदर्शों को अपनाने की आवश्यकता है, जिससे समाज में एकता और सद्भाव को और मजबूती मिले।

श्री अग्रवाल ने आगे कहा कि माता कर्मा केवल साहु समाज की ही नहीं, वरन संपूर्ण मानवता के लिए भक्ति, त्याग और समर्पण की प्रतिमूर्ति है । माता कर्मा का जीवन हमें सिखाता है कि सच्ची श्रद्धा और अटूट विश्वास से ईश्वर को भी वश में किया जा सकता है । उनकी भक्ति की शक्ति ही थी कि स्वयं भगवान जगन्नाथ को उनके हाथों की खिचड़ी खानी पड़ी । उन्होंने सभी से आह्वान किया कि भक्त माता कर्मा के जीवन से प्रेरणा लेकर समाज में सद्भाव, सहयोग और सेवा की भावना को आगे बढ़ाएं। कार्यक्रम के दौरान समाज के अध्यक्ष बालाराम साहू, गिरधारी साहू, कांग्रेस कोरबा जिला शहर अध्यक्ष मुकेश कुमार राठौर, निगम के नेता प्रतिपक्ष कृपाराम साहू, साहू समाज के तहसील अध्यक्ष पालूराम साहू सहित समाज के अनेक पदाधिकारी, गणमान्य नागरिक, तथा बड़ी संख्या में महिला-पुरुष और युवा उपस्थित रहे।
माता कर्मा जयंती को विशेष यादगार बनाने के लिए समाज के उत्साही युवाओं द्वारा रक्तदान शिविर का भी आयोजन किया गया है जिसमें स्वेच्छा से बड़ी संख्या में लोग शामिल होकर रक्तदान कर रहे हैं। श्री अग्रवाल ने इस आयोजन के लिए भी अपनी शुभकामनाएं व्यक्त किया और कहा कि जरूरतमंदों को जीवनदान देने के लिए यह शिविर स्वतः समाज सेवा का अनुपम उदाहरण है।



कोरबा
कोरबा पुलिस लाइन दफ्तर में मिला 4 फीट का कोबरा:अलमारी के पीछे बैठा था सांप, स्नैक कैचर ने जंगल में छोड़ा
कोरबा। कोरबा के रक्षित केंद्र पुलिस लाइन दफ्तर में रविवार को तब हड़कंप मच गया जब एक अलमारी के पीछे 4 फीट लंबा कोबरा सांप कुंडली मारकर बैठा मिला। दफ्तर में मौजूद कर्मचारियों ने तत्काल स्नैक कैचर जितेंद्र सारथी की टीम को इसकी सूचना दी।
सूचना मिलते ही स्नैक कैचर की टीम मौके पर पहुंची और सांप को सुरक्षित रेस्क्यू किया। पुलिसकर्मियों के अनुसार, जब अलमारी खोली गई तो सांप की फुंकार सुनाई दी, जिससे उसकी मौजूदगी का पता चला।
कोबरा को पकड़ कर सुरक्षित जंगल में छोड़ा
सांप को पकड़ने के बाद उसे सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया गया, जिसके बाद पुलिसकर्मियों ने राहत की सांस ली। पुलिस लाइन क्षेत्र नर्सरी से सटा हुआ है, जिसके कारण यहां सांप निकलने की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं।
स्नैक कैचर जितेंद्र सारथी ने बताया कि कोबरा सांप बेहद खतरनाक और जहरीला होता है। हालांकि, इसकी एक खासियत यह भी है कि यह जल्दी किसी पर हमला नहीं करता। छेड़छाड़ करने या अचानक पैर लगने पर ही यह हमला करता है, जिससे मौत भी हो सकती है।
सांप बिच्छू के काटे जाने पर झाड़ फूंक के चक्कर में ना पड़े
सारथी ने यह भी बताया कि सांप या बिच्छू के काटने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अक्सर अंधविश्वास के चक्कर में झाड़-फूंक करने लगते हैं, जिससे समय पर इलाज नहीं मिल पाता और जान चली जाती है। इसे लेकर वन विभाग द्वारा जन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। उनकी टीम भी रेस्क्यू के दौरान लोगों को जागरूक करती है।
उन्होंने बताया कि कई बार सर्पदंश के शिकार होने के बाद लोग सांप को मार देते हैं या उन्हें बंधक बनाकर रखते हैं, जो वन अधिनियम के तहत अपराध है। सांपों के संरक्षण को लेकर भी लोगों को विशेष रूप से जागरूक किया जाता है।


कोरबा
लेट लतीफ़ स्टाफ और इलाज देख कर बिफरे पार्षद:दीपका स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर-स्टाफ नदारद, गर्भवती-इमरजेंसी मरीज घंटों इंतजार को मजबूर, लोगों में आक्रोश
कोरबा। कोरबा के दीपका के एक बड़े स्वास्थ्य केंद्र में शनिवार सुबह गंभीर लापरवाही सामने आई। इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचे मरीजों को घंटों तक डॉक्टर और स्टाफ का इंतजार करना पड़ा, लेकिन तय समय पर कोई भी जिम्मेदार कर्मचारी मौजूद नहीं था। इस अव्यवस्था के कारण मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सुबह करीब 11:30 बजे एक युवक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचा तो वहां कोई स्टाफ मौजूद नहीं था। जब संबंधित कर्मचारी से फोन पर संपर्क किया गया, तो उन्होंने बताया कि वे सुबह 10 बजे से पहले नहीं आ सकतीं। इससे मरीजों में नाराजगी और बढ़ गई।

इलाज के लिए डॉक्टर नर्स का घंटों इंतज़ार करते मरीज
मरीजों को समय पर नहीं मिल पा रहा इलाज
इसी दौरान एक मरीज ने बताया कि उसे शुक्रवार रात कुत्ते ने काट लिया था। वह रात में भी इंजेक्शन लगवाने स्वास्थ्य केंद्र आया था, लेकिन तब भी इलाज नहीं मिल सका। शनिवार सुबह 8 बजे से वह फिर से इंतजार कर रहा था, लेकिन लंबे समय तक कोई स्टाफ नहीं पहुंचा। दीपका बस्ती की एक महिला अपनी गर्भवती बहू को जांच के लिए स्वास्थ्य केंद्र लेकर आई थी। बहू को सर्दी, खांसी और बुखार की शिकायत थी, लेकिन जिस डॉक्टर को दिखाना था वे भी अनुपस्थित थे। मजबूरन उन्हें भी काफ देर तक इंतजार करना पड़ा।

आक्रोशित मरीज और पार्षद
अचानक खुद के इलाज को पहुंचे पार्षद तो देखा
इसी बीच पार्षद अविनाश यादव भी इलाज के लिए स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र का निर्धारित समय सुबह 9 बजे है, लेकिन 11 बजे तक भी रिसेप्शनिस्ट नहीं पहुंची थी। उनके अलावा कई अन्य मरीज भी आधे घंटे से अधिक समय से डॉक्टर का इंतजार कर रहे थे।
पूछने पर कहा गया “आ रहे होंगे”
पार्षद ने इस लापरवाही पर कड़ा आक्रोश जताया। उन्होंने मौके पर मौजूद एक डॉक्टर से पूछा कि डॉक्टर समय पर क्यों नहीं आ रहे हैं। इस पर डॉक्टर ने जवाब दिया कि “आ रहे होंगे।” यह सुनकर पार्षद ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए नाराजगी व्यक्त की।

फार्मेसी, पैथोलॉजी कक्ष, प्रसव कक्ष और औषधि कक्ष भी बंद पाए गए
अधिकतर रूम्स में ताले जड़े थे
स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति और भी चिंताजनक थी। एंट्री कक्ष पर ताला लगा मिला, जबकि फार्मेसी, पैथोलॉजी कक्ष, प्रसव कक्ष और औषधि कक्ष भी बंद पाए गए। इस अव्यवस्था के कारण इलाज के लिए आए मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। इस पूरे मामले में स्वास्थ्य केंद्र की प्रभारी से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।


कोरबा
ऊर्जाधानी भू-विस्थापित किसान कल्याण समिति ने उठाई आवाज, एसईसीएल गेवरा क्षेत्र में भू-विस्थापितों को टेंडरों में मिले आरक्षण और बढ़े मूल्य सीमा
कोरबा। ऊर्जाधानी भू-विस्थापित किसान कल्याण समिति (UBKKS) ने एसईसीएल गेवरा क्षेत्र के मुख्य महाप्रबंधक को पत्र सौंपकर कोयला खनन के कारण विस्थापित हुए हजारों किसान परिवारों के लिए वैकल्पिक रोजगार और निविदाओं (Tenders) में उचित भागीदारी की मांग की है । समिति ने स्पष्ट किया है कि पैतृक भूमि छिन जाने से किसानों के पास आजीविका का संकट खड़ा हो गया है, जिसे दूर करना प्रबंधन की नैतिक जिम्मेदारी है ।

समिति की प्रमुख मांगें:-
टेंडर मूल्य सीमा में वृद्धि
वर्तमान में विस्थापितों और उनकी सहकारी समितियों के लिए सुरक्षित टेंडर की अनुमानित राशि मात्र 5 लाख रुपये है । समिति ने इसे बढ़ाकर न्यूनतम 20 लाख रुपये करने और वार्षिक टेंडर सीमा को 5 करोड़ रुपये तक करने की मांग की है ।
20% आरक्षण की बहाली
वर्ष 2018 के पत्र (SECL/BSP/CAD/642/FD) का हवाला देते हुए समिति ने मांग की है कि कोल ट्रांसपोर्टेशन और अन्य सभी कार्यों के निविदाओं में स्थानीय भू-विस्थापित सहकारी समितियों के लिए 20% आरक्षण फिर से लागू किया जाए ।
भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े पर रोक
पत्र में चिंता जताई गई है कि कुछ बाहरी लोग भू-विस्थापितों के प्रमाणपत्रों का दुरुपयोग कर निविदाओं में हिस्सा ले रहे हैं । समिति ने मांग की है कि ऐसे लोगों को ब्लैक लिस्ट किया जाए और केवल वास्तविक परियोजना प्रभावितों को ही प्राथमिकता दी जाए ।
अत्यधिक कम रेट (Low Rates) की जांच
समिति ने प्रबंधन का ध्यान इस ओर खींचा है कि कुछ टेंडर अनुमानित लागत से 60% से 73% नीचे की दरों पर डाले जा रहे हैं । इतनी कम राशि में कार्य की गुणवत्ता और विस्थापितों के लाभ पर सवाल उठाते हुए इसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है ।
CSR के तहत अवसर भू-विस्थापितों को कंपनी के सीएसआर (CSR) मद से विभागीय कॉलोनियों और कार्यालयों में स्थायी आजीविका व स्वरोजगार के अवसर प्रदान किए जाएं ।

समिति के अध्यक्ष सपुरन कुलदीप ने बताया कि समिति ने विस्थापितों के रोजगार की समस्या को दूर कराने के लिए लम्बा संघर्ष किया है और कई महत्वपूर्ण फैसले लेने के लिए एसईसीएल को मजबूर किया है । जिसमे रोजगार की वैकल्पिक व्यवस्था के लिए विस्थापित परिवार के बेरोजगारों के टेंडर में भागीदारी के लिए अहम रास्ते निकाले गए हैं, किंतु पूर्व में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों को प्रबंधन द्वारा धीरे-धीरे वापस लिया जा रहा है, या बड़े टेंडर जारी कर छोटे विस्थापितों को बाहर किया जा रहा है । यदि इन मांगों पर विचार नहीं किया गया तो विस्थापित परिवारों के पास अपने अधिकारों के लिए संघर्ष के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा ।
इस पत्र की प्रतिलिपि कोयला मंत्री (भारत सरकार) स्थानीय सांसद विधायकों और एसईसीएल के शीर्ष अधिकारियों को भी उचित कार्रवाई हेतु प्रेषित की गई है ।




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