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सेबी ने एसडीआई, म्यूनिसिपल बॉन्ड के नियामकीय ढांचे में संशोधन को मंजूरी दी

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मुंबई, एजेंसी। बाजार नियामक सेबी ने शुक्रवार को प्रतिभूतीकृत ऋण साधन (एसडीआई) और म्युनिसिपल बॉन्ड से जुड़े नियामकीय ढांचे में संशोधनों को मंजूरी दी। इस कदम का उद्देश्य भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नियमों के साथ तालमेल बैठाना, परिचालन दक्षता बढ़ाना और इन बाजारों के विकास को प्रोत्साहित करना है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के निदेशक मंडल की बैठक में संशोधित ढांचे के तहत बैंक और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को एकल परिसंपत्ति प्रतिभूतिकरण सौदों में मौजूदा 25 प्रतिशत ‘उधारकर्ता एकाग्रता’ सीमा से छूट दी गई। 

हालांकि, ऐसी स्थिति में जारीकर्ता को निर्गम दस्तावेज में एकाग्रता जोखिम का स्पष्ट खुलासा करना होगा ताकि निवेशकों को संबंधित जोखिमों की जानकारी मिल सके। नियामक ने प्रतिभूतिकृत परिसंपत्तियों से जुड़े खुलासा और रिपोर्टिंग नियमों में भी बदलाव किया है। इसके तहत ऋण का प्रबंधन करने वाली एजेंसी यानी ऋण सेवा प्रदाता (सर्विसर) को ही नियमित रिपोर्टिंग और खुलासे की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा, सेबी ने म्युनिसिपल बॉन्ड नियमों में संशोधन को भी मंजूरी दी है, ताकि नगर निकायों के बॉन्ड बाजार को विकसित किया जा सके। 

नए प्रावधानों के तहत नगरपालिकाएं विशेष परियोजनाओं के मौजूदा कर्ज के पुनर्वित्त के लिए धन जुटा सकेंगी। इन नियमों के मुताबिक, नगरपालिकाओं को निर्गम दस्तावेज में मौजूदा ऋणदाताओं और पुनर्वित्त किए जा रहे कर्ज का विवरण देना होगा, जिससे निवेशक उनकी वित्तीय स्थिति और तरलता जोखिम का आकलन कर सकें। सेबी ने दो या अधिक नगरपालिकाओं द्वारा समूह आधारित वित्तपोषण व्यवस्था (पूल्ड फाइनेंस) के जरिए धन जुटाने के लिए भी दिशा-निर्देश स्पष्ट किए हैं। इसमें विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) और नगरपालिकाओं के बीच समझौते, एस्क्रो खाते और भुगतान व्यवस्था जैसे परिचालन पहलुओं के खुलासे शामिल होंगे। खुदरा निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए नियामक ने जारीकर्ताओं को वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, रक्षा कर्मियों (सेवारत और सेवानिवृत्त), उनके आश्रितों और खुदरा निवेशकों को अतिरिक्त ब्याज या निर्गम मूल्य पर छूट जैसे प्रोत्साहन देने की अनुमति दी है। 

निजी नियोजन के जरिए जारी म्युनिसिपल बॉन्ड के लिए अंकित मूल्य 10,000 रुपये या एक लाख रुपए तय किया जा सकेगा। 10,000 रुपए अंकित मूल्य वाले बॉन्ड की परिपक्वता निश्चित होगी और इनमें जटिल संरचनाएं नहीं होंगी। इसके अलावा, सेबी ने सार्वजनिक निर्गम से जुड़े विज्ञापनों के लिए इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों के उपयोग की अनुमति दी है और निर्गम के बाद अनुपालन समयसीमा में ढील दी है। अर्द्धवार्षिक बिना ऑडिट वाले वित्तीय नतीजे जमा करने की समयसीमा 45 दिनों से बढ़ाकर 60 दिन और वार्षिक ऑडिट नतीजों के लिए 60 दिनों से बढ़ाकर 90 दिन कर दी गई है। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने इन फैसलों पर कहा कि भारत में नगरपालिका बॉन्ड बाजार के विस्तार में फिलहाल मांग से ज्यादा आपूर्ति बड़ी चुनौती है, क्योंकि नगरपालिकाएं बाजार से धन जुटाने के लिए आगे नहीं आ रही हैं। उन्होंने कहा, “अभी यह मांग का नहीं बल्कि आपूर्ति का मुद्दा है। नगरपालिकाएं वास्तव में बॉन्ड जारी करने के लिए आगे नहीं आ रही हैं। यदि वे आगे आती हैं, तो निवेशक इसमें रुचि दिखाएंगे।” 

पांडेय ने कहा कि नगरपालिका बॉन्ड बाजार अभी शुरुआती चरण में है और इसके विकास के लिए नियामकीय स्पष्टता, नगरपालिकाओं की क्षमता निर्माण और निवेशकों में जागरूकता जरूरी है। उन्होंने कहा कि खासकर छोटी नगरपालिकाओं के लिए ढांचे को अधिक सक्षम बनाने और सामूहिक वित्तपोषण जैसे माध्यमों का बेहतर उपयोग करने की जरूरत है।

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सरकार का बड़ा फैसला: 16 कॉम्बिनेशन दवाओं पर लगा तुरंत बैन

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नई दिल्ली, एजेंसी। देश में लोगों की सेहत की सेफ्टी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया गया है। सरकार ने पूरे भारत में 16 फिक्स्ड-डोज़ कॉम्बिनेशन (FDC) दवाओं के बनाने, बेचने, बांटने और सप्लाई करने पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी है।

यह कड़ा फैसला केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा ‘ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940’ की धारा 26A के तहत एक नोटिफिकेशन जारी करके लिया गया है। एक्सपर्ट्स की जांच में सामने आया है कि इन दवाओं को मिलाकर बेचना वैज्ञानिक और मेडिकल तौर पर सही नहीं था।  यह कदम एक वैज्ञानिक समीक्षा के बाद उठाया गया है। 

क्यों लगाया गया इन दवाओं पर बैन?
क्या होती हैं FDC दवाएं? FDC (Fixed-Dose Combination) दवाएं वे होती हैं, जिनमें दो या दो से ज्यादा दवाओं के एक्टिव साल्ट (सामाग्री) को एक निश्चित मात्रा में मिलाकर एक ही दवा (जैसे एक टैबलेट या सिरप) के रूप में तैयार किया जाता है।

बैन की वजह: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ‘ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड’ ने एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई थी। जांच में पाया गया कि इन 16 कॉम्बिनेशन दवाओं को एक साथ मिलाकर देने का कोई मेडिकल आधार नहीं था। सरकार के मुताबिक, इन दवाओं के फायदे से ज्यादा इनके नुकसान या जोखिम होने की आशंका थी, इसलिए इन्हें ‘असुरक्षित और अतार्किक’ माना गया।

कौन-कौन सी दवाओं पर लगी है रोक?  
बैन की गई दवाएं अलग-अलग बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होती थीं, जिनमें एंटीबायोटिक, दर्द निवारक, पेट दर्द और स्किनकेयर (त्वचा) की दवाएं शामिल हैं:

1. पेट दर्द, दर्द और ऐंठन की दवाएं:
एसिटाइल सैलिसिलिक एसिड + एथोहेप्टाज़ीन 

डाइसाइक्लोमाइन + पैरासिटामोल + क्लिडिनियम ब्रोमाइड 

डाइसाइक्लोमाइन + पैरासिटामोल + क्लिडिनियम ब्रोमाइड + क्लोरडायज़ेपॉक्साइड 

पैरासिटामोल + लिग्नोकेन 

2. डायबिटीज की दवा:
ग्लिक्लाज़ाइड + क्रोमियम पिकोलिनेट 

3. एंटीबायोटिक दवाओं के कॉम्बिनेशन:
एमोक्सिसिलिन + सेराटियोपेप्टिडेज़

एमोक्सिसिलिन + सेराटियोपेप्टिडेज़ + लैक्टोबैसिलस स्पोरोजेन्स 

एमोक्सिसिलिन + क्लोक्सासिलिन + लैक्टिक एसिड बैसिलस + सेराटियोपेप्टिडेज़ 

सेफैड्रोक्सिल + प्रोबेनेसिड 

सेफुरोक्सिम + सेराटियोपेप्टिडेज़

4. स्किनकेयर और क्रीम :
ऐसी क्रीम या लोशन जिनमे एलोवेरा (Aloe extract) के साथ नीचे दिए गए तत्वों को मिलाया गया था, उन पर भी रोक लगा दी गई है जैसे कि… Vitamin E, Jojoba oil, Orange oil, Wheat germ oil, Tea tree oil, Allantoin, D-Panthenol का कॉम्बिनेशन।

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PM मोदी ने ओडिशा को दी बड़ी सौगात, ₹47,000 करोड़ के प्रोजेक्ट्स किए लॉन्च

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मयूरभंज,एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को मयूरभंज में ‘विकास की धारा, पूरा ओडिशा’ (विकास रा धारा, ओडिशा सारा) नाम के एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित किया। यह कार्यक्रम ओडिशा में BJP सरकार के दो साल पूरे होने के मौके पर आयोजित किया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के साथ शामिल हुए। इस मौके पर PM मोदी ने कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन भी किया।

प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को उनके जन्मदिन पर बधाई देते हुए कहा, “ओडिशा की बेटी आज देश में इतने ऊंचे पद पर पहुंची हैं और हम सभी का मार्गदर्शन कर रही हैं। यह हम सभी के लिए बहुत गर्व की बात है। राष्ट्रपति का व्यक्तित्व, उनका उदार और दयालु स्वभाव, और देश व समाज की सेवा के प्रति उनका अटूट समर्पण – इन सबने न केवल मयूरभंज की, बल्कि पूरे ओडिशा राज्य की पहचान को मजबूत किया है।” PM ने आगे कहा, “आज एक बहुत शुभ क्षण है क्योंकि आज राष्ट्रपति जी का जन्मदिन है, और मुझे आज उनके गांव जाने और उन्हें शुभकामनाएं देने का मौका मिला। आज मैं राष्ट्रपति जी के साथ पहाड़पुर भी गया था।”प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि पहाड़पुर गांव का तेजी से विकास करके उसे “सोलर विलेज” बनाया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इलाके के हर घर में सौर ऊर्जा की सुविधा हो। इस पहल की तुलना कोणार्क सूर्य मंदिर की विरासत से करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि पहाड़पुर नवीकरणीय ऊर्जा (renewable energy) के केंद्र के रूप में वैश्विक मानचित्र पर अपनी एक अलग पहचान बनाने जा रहा है।
 PM मोदी ने कहा, “अब पहाड़पुर को तेजी से सोलर विलेज के तौर पर विकसित किया जाएगा। इसका मतलब है कि यहां हर घर तक सौर ऊर्जा पहुंचाई जाएगी। जिस तरह ओडिशा के कोणार्क सूर्य मंदिर की एक खास पहचान है, उसी तरह पहाड़पुर भी सोलर विलेज के तौर पर अपनी पहचान बनाएगा।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सरकार ओडिशा के प्राकृतिक संसाधनों को आर्थिक “संभावनाओं” में बदलने पर ध्यान केंद्रित कर रही है और राज्य में बड़े पैमाने पर औद्योगिक विकास हो रहा है।

प्रधानमंत्री ने ‘उत्कर्ष ओडिशा’ अभियान जैसी पहलों की सफलता का भी जिक्र किया, जिसने राज्य में वैश्विक और घरेलू निवेशकों को आकर्षित करने में अहम भूमिका निभाई है। पीएम मोदी ने कहा, “हमारी सरकार ओडिशा के संसाधनों को ओडिशा की संभावनाओं में बदल रही है। ओडिशा में बड़े निवेश आ रहे हैं, यहाँ नए उद्योग लगाए जा रहे हैं और इस मकसद से ‘उत्कर्ष ओडिशा’ जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं।”पीएम मोदी ने आदिवासी समुदायों को सशक्त बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को भी दोहराया और कहा कि आदिवासी युवाओं को शिक्षा और रोज़गार के बेहतर मौकों से जोड़ा जा रहा है।

पीएम मोदी ने कहा, “आदिवासी समाज को आगे बढ़ाने के लिए हम आदिवासी युवाओं को शिक्षा और रोज़गार के मौकों से जोड़ रहे हैं। इन बच्चों को पढ़ाई के लिए बेहतर सुविधाएँ मिलनी चाहिए… इसके लिए देश भर में लगभग 500 एकलव्य मॉडल स्कूल खोले गए हैं।”
इस इलाके के साथ अपने जुड़ाव का ज़िक्र करते हुए, पीएम मोदी ने लोगों की भारी मौजूदगी के लिए आभार जताया और कहा कि मयूरभंज के लोगों का प्यार उन्हें बार-बार यहाँ खींच लाता है।

पीएम मोदी ने कहा, “ओडिशा में बीजेपी सरकार के अब 2 साल पूरे हो गए हैं। इस मौके पर आप सभी के बीच आना, मयूरभंज आने का यह सौभाग्य और इतनी बड़ी संख्या में आपकी मौजूदगी—यह मौका मेरे लिए बहुत खास है। आपका प्यार मुझे बार-बार यहाँ खींच लाता है।” इस समय के सांस्कृतिक महत्व पर ज़ोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि ओडिशा अभी त्योहारों के माहौल में है और यहाँ बड़े पारंपरिक उत्सव चल रहे हैं। पीएम ने आगे कहा, “हमारा ओडिशा अभी त्योहारों की खुशी में डूबा हुआ है। पिछले हफ़्ते ही यहाँ ‘गण परदा’ त्योहार बहुत धूमधाम से मनाया गया। भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा की तैयारियाँ भी ज़ोरों पर हैं। मयूरभंज में बारीपदा रथ यात्रा को लेकर भी उत्साह का माहौल है। और इन सबके बीच, लोकतंत्र और विकास का उत्सव भी चल रहा है।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओडिशा में लगभग 47,000 करोड़ रुपये की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया, जिनका मकसद राज्य के बुनियादी ढाँचे और सार्वजनिक सेवाओं को बदलना है। इससे पहले दिन में, एक अहम सांस्कृतिक पहल के तहत, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मयूरभंज ज़िले के पहाड़पुर गाँव का दौरा किया। दोनों नेताओं ने ‘संताली जाहिरा’ और ‘हो जाहिरा’ के पवित्र स्थलों पर पारंपरिक पूजा-अर्चना और अनुष्ठान किए और देश की समृद्धि के लिए आशीर्वाद माँगा।

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गाजा संकट पर फिलिस्तीन की PM मोदी से भावुक अपील- ‘हमारा बड़ा भाई भारत मदद देकर बचा सकता हजारों जानें ’

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नई दिल्ली, एजेंसी। एक ओर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की खबरें सामने आ रही हैं, वहीं दूसरी ओर गाजा पट्टी में जारी मानवीय संकट को लेकर फिलिस्तीन ने भारत से मदद की अपील की है। भारत में फिलिस्तीन के राजदूत अब्दुल्ला एम. अबू शावेश (Abdullah M. Abu Shawesh) ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) द्वारा घोषित ‘आरोग्य मैत्री’ पहल अब गाजा के हजारों लोगों के लिए जीवनदायिनी साबित हो सकती है। राजदूत अबू शावेश ने कहा कि फिलिस्तीन लंबे समय से भारत को अपना मित्र और बड़ा भाई मानता आया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत मानवीय आधार पर गाजा के स्वास्थ्य क्षेत्र की सहायता के लिए आगे आएगा। उनके अनुसार, इजरायली सैन्य अभियानों के कारण गाजा की स्वास्थ्य व्यवस्था लगभग ध्वस्त हो चुकी है और अस्पताल गंभीर संसाधन संकट से जूझ रहे हैं।  


राजदूत ने अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों और मानवीय संगठनों के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि

  • गाजा के 36 अस्पतालों में से केवल 19 आंशिक रूप से कार्यरत हैं।
  • एंटीबायोटिक्स, एनेस्थीसिया, डायलिसिस सामग्री और सर्जिकल उपकरणों की भारी कमी है।
  • रक्त की यूनिटों और इंसुलिन का भी गंभीर अभाव है।
  • अस्पतालों के जनरेटर चलाने के लिए ईंधन की कमी बनी हुई है।
  • हजारों मरीजों को तत्काल मेडिकल इवैक्यूएशन की जरूरत है।
  • 180 आवश्यक दवाएं पूरी तरह खत्म

फिलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार:

  • लगभग 520 आवश्यक दवाओं की तत्काल आवश्यकता है।
  • इनमें से करीब 180 दवाओं का स्टॉक पूरी तरह समाप्त हो चुका है।
  • कैंसर और ट्यूमर उपचार में उपयोग होने वाली 97 विशेष दवाओं में से 50 उपलब्ध नहीं हैं।
  • लगभग 4,000 कैंसर मरीजों का उपचार गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है।

राजदूत ने कहा कि लाखों इमारतों के नष्ट होने और मलबे के नीचे हजारों शवों के दबे होने से स्थिति और गंभीर हो गई है। साफ पानी की कमी और कचरे के ढेरों के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। अबू शावेश ने भारत सरकार, भारतीय चिकित्सा संस्थानों, मानवीय संगठनों और नागरिक समाज से अपील की कि वे दवाएं, चिकित्सा उपकरण और अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने में सहयोग करें। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया समझौते पर प्रतिक्रिया देते हुए राजदूत ने कहा कि यदि यह प्रक्रिया स्थायी शांति की दिशा में आगे बढ़ती है तो इसका स्वागत किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि शांति हर मानवतावादी प्रयास की बुनियाद है और क्षेत्र में स्थिरता आने से फिलिस्तीनी जनता को भी राहत मिल सकती है।भारत पारंपरिक रूप से फिलिस्तीन को मानवीय सहायता प्रदान करता रहा है और साथ ही इजरायल के साथ भी मजबूत संबंध बनाए हुए है। ऐसे में गाजा संकट के बीच फिलिस्तीन की यह अपील भारत की पश्चिम एशिया नीति और मानवीय कूटनीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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