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छत्तीसगढ़

सीनियर IPS डी श्रवण डीआईजी एनआईए पर देंगे सेवा : केंद्रीय प्रतिनियुक्ति को मंजूरी

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रायपुर। छत्तीसगढ़ कैडर के वरिष्ठ आईपीएस डी श्रवण की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति को मंजूरी मिल गई है। 2008 बैच के आईपीएस श्रवण 5 साल तक एनआईए में डीआईजी के पद पर अपनी सेवाएं देंगे। इसके लिए राज्य सरकार से प्रतिनियुक्ति की अनुमति मिल गई है।

IPS डी श्रवण पूरा नाम दावुलुरी श्रवण है। मूल रूप से वे आंध्रप्रदेश के रहने वाले हैं। उन्होंने अपनी एम फील की डिग्री लेने के बाद सिविल सर्विस का एग्जाम क्रैक कर आईपीएस की सर्विस ज्वाइन की। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उन्हें प्रशिक्षु आईपीएस के तौर पर जगदलपुर जिले में नियुक्त किया गया था। जहां थाना प्रभारी और केशकाल में SDOP की जिम्मेदारी संभाली।

इन जिलों में रहे पदस्थ

IPS श्रवण सुकमा में करीब 2 साल पदस्थ थे। इसके बाद कोंडागांव, कोरबा, मुंगेली, राजनांदगांव और जगदलपुर जिलों के एसपी भी रह चुके है। डी श्रवण सेनानी 6वीं वाहिनी रायगढ़ में भी थे। वर्तमान में डी श्रवण DIG के पद पर छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल हेड क्वार्टर रायपुर में पोस्टेड है।

देखिये आदेश-

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कोरबा

प्रेस क्लब की महिला क्रिकेट टीम ने बड़े अंतर से जीता अपना लीग मैच

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कोरबा। प्रेस कोरबा  द्वारा आयोजित ऊर्जा कप महिला क्रिकेट प्रतियोगिता में  बुधवार को आयोजित  कोरबा प्रेस क्लब की महिला क्रिकेट टीम और लायंस स्कूल  इलेवन के मध्य क्रिकेट मैच खेला गया निर्धारित 10 ओवर में प्रेस क्लब की महिला क्रिकेट खिलाड़ियों ने 94 रन का लक्ष्य दिया।

वहीं लक्ष्य का पीछा करते हुए लायंस स्कूल की टीम ने निर्धारित 10 ओवर में निधरित रन नही बना पाए इस तरह से कोरबा प्रेस क्लब की टीम ने मैच पर जीत हासिल कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई प्रेस क्लब कोरबा के सभी सदस्यों ने महिला क्रिकेट टीम की जीत पर उन्हें बधाई दी ।

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छत्तीसगढ़

LPG सिलेंडर की कमी के मुद्दे पर विधानसभा में हंगामा:महंत बोले-होटल संचालक परेशान, चंद्राकर बोले- ये सदन क्षेत्र से बाहर, नारेबाजी, कांग्रेस विधायक सस्पेंड

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रायपुर,एजेंसी। विधानसभा के बजट सत्र में एलपीजी सिलेंडर की कमी का मुद्दा उठते ही सदन में जोरदार हंगामा हो गया। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि प्रदेश में सिलेंडर नहीं मिलने से लोग और होटल संचालक परेशान हैं। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने इसे सदन के अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया, जिस पर पक्ष-विपक्ष में तीखी नारेबाजी शुरू हो गई।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि जनहित को देखते हुए स्थगन प्रस्ताव स्वीकार कर इस मुद्दे पर चर्चा कराई जानी चाहिए, लेकिन सभापति ने यह कहते हुए स्थगन प्रस्ताव खारिज कर दिया कि यह विषय केंद्र सरकार से जुड़ा है। इसके बाद विपक्षी सदस्य नारेबाजी करते हुए वेल तक पहुंच गए जिन्हें बाद में सस्पेंड कर दिया गया।

वहीं कार्यक्रमों के भुगतान के मुद्दे पर भाजपा विधायक लता उसेंडी ने अपनी ही सरकार को घेरा और मौखिक-लिखित आदेशों पर हुए कार्यक्रमों का भुगतान न होने का सवाल उठाया। मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने दस्तावेज मिलने पर जांच कर भुगतान कराने की बात कही। इस पर कवासी लखमा ने तंज कसा, जब लता उसेंडी की ही सुनवाई नहीं हो रही, तो हमारी क्या होगी?

एलपीजी गैस की किल्लत को लेकर सदन में हंगामा।

एलपीजी गैस की किल्लत को लेकर सदन में हंगामा।

सड़क हादसों को लेकर हंगामा

इससे पहले सदन में सड़क हादसों में हो रही मौतों का मुद्दा गूंजा। अकलतरा विधायक राघवेन्द्र सिंह ने पूछा कि 2025 में सड़क दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी के क्या कारण हैं, लेकिन स्पष्ट जवाब नहीं मिला।

उन्होंने बताया कि अकलतरा क्षेत्र में वर्ष 2024 में 76 लोगों की मौत हुई थी, जो 2025 में बढ़कर 86 हो गई। वहीं वर्ष 2026 में 1 जनवरी से 14 फरवरी तक ही 13 लोगों की जान जा चुकी है।

इस पर मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि प्रदेश में सड़कों के विस्तार, वाहनों की संख्या बढ़ने और लोगों की लापरवाही के कारण दुर्घटनाएं होती हैं, हालांकि 2024 की तुलना में 2025 में डेथ रेशियो कम हुआ है।

विधायक ने ड्रिंक एंड ड्राइव पर कार्रवाई और ट्रॉमा सेंटर की कमी का मुद्दा भी उठाया। मंत्री ने कहा कि सड़क सुरक्षा को लेकर जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं और जहां ज्यादा हादसे हो रहे हैं, वहां संबंधित विभागों के साथ मिलकर समाधान किया जाएगा।

वहीं विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं का विषय गृह, परिवहन समेत कई विभागों से जुड़ा है, इसलिए सभी विभागों को समन्वय से काम करना चाहिए।

वन मंत्री केदार कश्यप विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए।

वन मंत्री केदार कश्यप विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए।

प्रश्नकाल में विपक्ष के सवाल, पक्ष का जवाब

सवाल: विधायक किरण सिंह देव ने किस सड़क निर्माण का मुद्दा उठाया?

जवाब: पीडब्ल्यूडी मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि सुकमा जिले में झीरम घाटी से एलेंगनार-उरकापाल-कांदानार तक 18 किलोमीटर सड़क निर्माण का मामला है।

सवाल: इस सड़क के लिए कितनी राशि तय की गई थी और टेंडर कब जारी हुआ था?

जवाब: मंत्री केदार कश्यप ने बताया कि 14 करोड़ 60 लाख रुपए तय किए गए थे और टेंडर 30 जनवरी 2023 को जारी हुआ।

सवाल: अब तक कितना काम हुआ और कितना भुगतान किया गया?

जवाब: केदार कश्यप ने कहा कि अर्थवर्क और जीएसबी तक का काम हुआ, 4 करोड़ 23 लाख रुपए का भुगतान किया गया।

सवाल: सड़क निर्माण में देरी का कारण क्या है?

जवाब: मंत्री केदार कश्यप ने बताया कि क्षेत्र घोर नक्सल प्रभावित और दुर्गम पहाड़ी होने के कारण विस्तृत सर्वेक्षण संभव नहीं हो पाया।

सवाल: कार्य को कैसे आगे बढ़ाया जा रहा है?

जवाब: केदार कश्यप ने कहा कि टेंडर को दो भागों में बांटा गया, मॉनिटरिंग टीम गठित होगी, उच्च स्तर के अधिकारी सड़क का निरीक्षण करेंगे और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई होगी।

मुंगेली सड़कों की खराब स्थिति और निर्माण कार्य पर विधानसभा में चर्चा

सवाल: विधायक पुन्नूलाल मोहले ने किस मुद्दे पर ध्यानाकर्षण कराया?

जवाब: मुंगेली जिला और मुंगेली से अन्य जिलों को जोड़ने वाली सड़कों के जर्जर होने और दुर्घटनाओं का।

सवाल: सड़कों की मरम्मत और निर्माण के लिए क्या कार्रवाई हो रही है?

जवाब: पीडब्ल्यूडी मंत्री अरुण साव ने कहा कि मरम्मत और नवीनीकरण का काम जारी है, बजट में राशि का प्रावधान किया गया है और मुंगेली-नांदघाट रोड की 114 करोड़ की 36 किमी सड़क का निर्माण जल्द शुरू होगा।

सवाल: अन्य सड़कों की स्थिति क्या है?

जवाब: कई सड़के खराब हैं और उनके निर्माण के लिए प्राकलन स्वीकृति प्रक्रिया में है; नियमित संधारण का काम भी जारी है।

सवाल: सड़क खराब होने से हुई दुर्घटनाओं पर मंत्री ने क्या कहा?

जवाब: मंत्री ने इस सवाल का सीधा जवाब नहीं दिया, लेकिन कहा कि पिछली 5 सालों में मरम्मत नहीं हुई थी, अब लगातार मरम्मत और निर्माण कार्रवाई हो रही है।

सवाल: शहर और ग्रामीण सड़कों का क्या हाल है?

जवाब: मुंगेली-बेमेतरा सड़क का काम चल रहा है, तखतपुर, मुंगेली और पंडरिया के शहरी सड़कों का निर्माण टेंडर सहित जल्द शुरू होगा।

कार्यवाही के दौरान सभापति धरमलाल कौशिश।

कार्यवाही के दौरान सभापति धरमलाल कौशिश।

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छत्तीसगढ़

13-14 साल की लड़कियां अफीम उगाने में लगाई गई:300 में कराई जाती थी मजदूरी; झारखंड में एक्शन के बाद छत्तीसगढ़ का रुख किया

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बलरामपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के जिस त्रिपुरी पंचायत के सरनाटोली मोहल्ले में अफीम की खेती पकड़ी गई, उसका खुलासा उसी गांव की एक नाबालिग मजदूर लड़की को रांची भगाकर ले जाने से जुड़ा है।

ग्रामीणों का कहना है कि लड़की अफीम के खेत में मजदूरी करने के लिए जाती थी। कुछ और नाबालिग वहां काम करने जाते ​थे और बदले में उन्हें 300 रुपए मजदूरी दी जाती थी।

गांव के कुछ लोग खेत में काम करने के लिए नाबालिग मजदूर उपलब्ध करवाते थे। इधर, खजूरी के तुर्रीपानी में भी डेढ़ एकड़ जमीन में अफीम की खेती मिली है।

जानकारों का कहना है कि झारखंड में अफीम की खेती के खिलाफ सख्ती बढ़ने के बाद अफीम नेटवर्क छत्तीसगढ़ में पैर फैला रहा है।

बलरामपुर के सरनाटोली मोहल्ले में 3.67 एकड़ में अफीम की फसल लगी थी।

बलरामपुर के सरनाटोली मोहल्ले में 3.67 एकड़ में अफीम की फसल लगी थी।

इस पूरी अफीम की फसल को उखड़वा दिया गया है।

इस पूरी अफीम की फसल को उखड़वा दिया गया है।

खेत से करीब 350 किलो अफीम जब्त की गई है। जिसकी कीमत करीब 2 करोड़ है।

खेत से करीब 350 किलो अफीम जब्त की गई है। जिसकी कीमत करीब 2 करोड़ है।

ग्रामीणों को नहीं पता था अफीम की फसल है

मंगलवार (10 मार्च) को बलरामपुर के त्रिपुरी ग्राम पंचायत के सरनाटोली मोहल्ले में 3.67 एकड़ में अफीम की फसल मिली थी। बुधवार (11 मार्च) को मजिस्ट्रेट आशीष कुमार चंदोहे की मौजूदगी में अफीम की फसल को उखड़वाया गया और उसे जब्त किया गया।

जब्त अफीम की कीमत 2 करोड़ से ज्यादा बताई जा रही है। मौके पर भास्कर की टीम पहुंची। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने दो महीने पहले अफीम की फसल देखी थी। यदि उन्हें पता होता कि अफीम की खेती हो रही है तो पुलिस को जरूर बताते।

कम उम्र के लोगों से करवाते थे मजदूरी

ग्रामीणों ने भास्कर की टीम को बताया कि झारखंड से आए चौकीदार कुछ लोगों के संपर्क में थे और वे मजदूरों को बुलवाते थे। वे कम उम्र के लोगों से मजदूरी करवाते थे। बदले में उन्हें एक दिन के 300 रुपए मजदूरी देते थे। एक ग्रामीण ने बताया कि उसका बेटा रामपाल और नेहरू कुछ दिन खेत पर मजदूरी किए हैं।

वहीं, एक लड़की जो 13-14 साल की है, वह भी अफीम के खेत में काम करने जाती थी। एक दिन वह अचानक गायब हो गई, फिर पता चला कि वह अफीम के खेत के ही एक चौकीदार के पास है। यह मालूम हुआ कि उसे चौकीदार भगाकर रांची ले गया है। वहां आरपीएफ ने संदेह के आधार पर चौकीदार और लड़की से पूछताछ की।

चौकीदार वहां से भाग गया। लड़की ने फोन पर अपने पिता को इस बारे में बताया। पिता उसे गांव लेकर पहुंचे और पंचायत बैठी। इसमें ग्रामीणों ने अजीबोगरीब खेती की बात भी बताई। इसी बीच दुर्ग में अफीम की खेती का खुलासा हुआ तो सोशल मीडिया में लोगों ने डोडे की फोटो देखा और बात खुल गई।

अफीम की खेती डिजिटल सर्वे में अन्य अनाज के नाम पर दर्ज है

जिस जमीन पर अफीम की खेती की गई है, वह डिजिटल सर्वे में अन्य अनाज के नाम से दर्ज है। साथ ही दो मवेशियों की मौत डोडा खाने से होने की भी चर्चा है। वहीं, कुसमी के पास ही खजुरी के तुर्रीपानी में डेढ़ एकड़ जमीन में अफीम की खेती की गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक्स पर इस बारे में लिखा। हालांकि अधिकारी खेती से इनकार करते रहे।

जब्त अफीम की कीमत 2 करोड़ से ज्यादा बताई जा रही है।

जब्त अफीम की कीमत 2 करोड़ से ज्यादा बताई जा रही है।

खेत में उतारे 100 मजदूर, 1 एक घंटे में उखाड़ दी 4 माह की फसल

पटवारी प्रीतम राम ने बताया कि डिजिटल सर्वे में यह पड़त जमीन के तौर पर दर्ज है। बाजू में गेहूं की फसल लगी है। त्रिपुरी के पंचायत सचिव शिवधारी सहित आसपास के अन्य पंचायतों के सचिवों ने 100 मजूदरों को बुधवार (11 मार्च) की सुबह 6 बजे ही अफीम की खेत के पास बुलवा लिया ​था, जिससे वहां मेले जैसा माहौल था।

रायपुर और अंबिकापुर से अधिकारियों की टीम के पहुंचने के बाद दोपहर 2 बजे अफीम की फसल को मजदूरों ने उखाड़ना शुरू किया और तीन बजे तक दो खेतों की फसल को उखाड़ दिया। बताया जा रहा कि नवंबर की शुरुआत में फसल लगाई गई थी।

ग्रामीणों ने बताया कि भाजपा नेता जिरमल राम जो कि पास के ही गांव भगचंद का रहने वाला है, उसने ही ग्रामीणों की जमीन अफीम की खेती करने के लिए झारखंड के किसी व्यक्ति को लीज पर दिलवाई थी। सरगना गांव नहीं आता था। चौकीदार पूरे समय वहां मौजूद रहते ​थे।

कलेक्टर राजेंद्र कटारा और एसपी वैभव बैंकर का कहना है कि मामले की अभी जांच चल रही है। यह प्रक्रिया में है, इसलिए अभी कुछ नहीं बता सकते। 7 लोगों को संदेह के आधार पर गिरफ्तार किया गया है।

मजिस्ट्रेट आशीष कुमार चंदोहे की मौजूदगी में अफीम की फसल को उखड़वाया गया और उसे जब्त किया गया।

मजिस्ट्रेट आशीष कुमार चंदोहे की मौजूदगी में अफीम की फसल को उखड़वाया गया और उसे जब्त किया गया।

कांग्रेस की जांच टीम पहुंची

कांग्रेस की 10 सदस्यीय जांच टीम भी मौके पहुंची। कांग्रेस नेताओं में पूर्व विधायक डॉ.प्रीतम राम, पूर्व विधायक भानुप्रताप सिंह, जिला कांग्रेस अध्यक्ष हरिहर यादव, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष हरीश मिश्रा सहित अन्य नेताओं ने भाजपा सरकार व प्रशासन पर आरोप लगाए।

नेताओं ने कहा कि पहले धान के नाम पर प्रदेश को जाना जाता था लेकिन अब अफीम की खेती के लिए छत्तीसगढ़ चर्चा में है। भाजपा राज में नशे का कारोबार चल रहा है। प्रशासन को पूरे मामले का पता था, लेकिन अधिकारियों ने कार्रवाई नहीं की।

इधर, कांग्रेस के दूसरे गुट के नेता भी मौके पर पहुंचे और उन्होंने भाजपा सरकार पर नशे को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।

राज्य के अन्य दूरस्थ वन क्षेत्रों में सिंडिकेट की होगी जांच

क्या छत्तीसगढ़ में अफीम की खेती का संगठित नेटवर्क? छत्तीसगढ़ के बलरामपुर में 3.67 एकड़ में अफीम की खेती मिलने से राज्य में सक्रिय किसी संगठित ड्रग नेटवर्क की आशंका गहरा गई है। दुर्ग के बाद बलरामपुर का यह मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि यहां झारखंड के विशेषज्ञों को बुलाकर खेती कराई जा रही थी।

स्थानीय स्तर पर जमीन लीज पर दिलाने और बकायदा चौकीदार तैनात करने जैसी व्यवस्था एक सुनियोजित गिरोह की ओर इशारा करती है। प्रशासन और एजेंसियां अब यह जांच रही हैं कि क्या राज्य के अन्य दूरस्थ वन क्षेत्रों में भी इसी तरह का सिंडिकेट फैला है और इसमें किन बड़े चेहरों की संलिप्तता है।

जानकारों का कहना है कि झारखंड में अफीम की खेती के खिलाफ सख्ती बढ़ने के बाद अफीम नेटवर्क छत्तीसगढ़ में पैर फैला रहा है।

जानकारों का कहना है कि झारखंड में अफीम की खेती के खिलाफ सख्ती बढ़ने के बाद अफीम नेटवर्क छत्तीसगढ़ में पैर फैला रहा है।

जनवरी में शिकायत, कार्रवाई मार्च में क्यों?

प्रशासन की कार्रवाई के दौरान सरपंच नजर नहीं आया। कुछ लोगों ने बताया कि वह कुछ समय के लिए आया था, फिर चला गया। वहीं, उसके नदारद रहने को लेकर भी चर्चा होती रही। सवाल ये है कि जब ग्रामीणों ने अफीम की फसल देखी और सरपंच ने पुलिस को फोटो भेजा था तो आखिर किस बात का इंतजार किया जा रहा था या कोई और दबाव था। ग्रामीणों के मुताबिक जब सरपंच ने जनवरी में शिकायत की थी तो कार्रवाई मार्च में क्यों की जा रही है।

इसलिए अफीम बेल्ट बन रहा बॉर्डर

छत्तीसगढ़–झारखंड सीमा के बलरामपुर, जशपुर, सरगुजा और झारखंड के गढ़वा, लातेहार, चतरा, खूंटी जिलों में अवैध अफीम खेती बार-बार पकड़ी जा रही है। 2017–18 में खूंटी में करीब 1550 एकड़ फसल नष्ट की गई। 2019–21 में भी कई इलाकों में खेती मिली। 2023 में एनसीबी ने चतरा में कार्रवाई की, जबकि 2025 में झारखंड पुलिस ने 3000 एकड़ से ज्यादा फसल नष्ट की। विशेषज्ञों के मुताबिक घने जंगल और पहाड़ी इलाकों में खेती छिपाना आसान है। नेटवर्क अब छत्तीसगढ़ तक फैल रहा है।

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