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शुभांशु 28 घंटे सफर करके इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पहुंचे:यहां पहुंचने वाले पहले भारतीय, एंट्री के बाद ISS क्रू मेंबर्स से गले मिले

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फ्लोरिडा,एजेंसी। भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला सहित चार एस्ट्रोनॉट आज यानी, 26 जून को शाम 4:01 बजे इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पहुंच गए। 28 घंटे के सफर के बाद वे ISS पहुंचे हैं। करीब 6 बजे स्पेस स्टेशन का हैच खुला और सभी एस्ट्रोनॉट ISS के अंदर दाखिल हुए।

शुभांशु ISS पर जाने वाले पहले और स्पेस में जाने वाले दूसरे भारतीय हैं। इससे 41 साल पहले राकेश शर्मा ने 1984 में सोवियत यूनियन के स्पेसक्राफ्ट से अंतरिक्ष यात्रा की थी।

ISS पर वेलकम सेरेमनी में शुभांशु ने कहा ये मेरी किस्मत है कि मैं उन चंद लोगों में शामिल हो सका, जिन्होंने स्पेस स्टेशन से पृथ्वी का नजारा देखा।आपके प्यार और आशिर्वाद से मैं इंटरनेशनल स्पेस सेंटर पर पहुंचा हूं। यहां खड़ा होना बहुत आसान दिख रहा है, लेकिन ये सब काफी मुश्किल है।

उन्होंने कहा मेरा सर भारी है और थोड़ी तकलीफ हो रही है। लेकिन ये सब बहुत छोटी चीजें हैं, कुछ ही दिनों में हमें इसकी आदत हो जाएगी। इससे पहले दिन में क्रू ने स्पेसक्राफ्ट से लाइव बातचीत में शुभांशु ने कहा था- नमस्कार फ्रॉम स्पेस! यहां एक बच्चे की तरह सीख रहा हूं… अंतरिक्ष में चलना और खाना कैसे है।”

एक्सियम मिशन 4 के तहत 25 जून को दोपहर करीब 12 बजे सभी एस्ट्रोनॉट ISS के लिए रवाना हुए थे। स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट से जुड़े ड्रैगन कैप्सूल में इन्होंने कैनेडी स्पेस सेंटर से उड़ान भरी। ये मिशन तकनीकी खराबी और मौसमी दिक्कतों के कारण 6 बार टाला गया था।

मिशन के दूसरे दिन की तस्वीरें…

स्पेस स्टेशन पर शुभांशु शुक्ला को 634 नंबर का बैज दिया गया।

स्पेस स्टेशन पर शुभांशु शुक्ला को 634 नंबर का बैज दिया गया।

28 घंटे के सफर के बाद इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पहुंचा शुभांशु का स्पेसक्राफ्ट।

28 घंटे के सफर के बाद इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पहुंचा शुभांशु का स्पेसक्राफ्ट।

ISS की ओर करीब 27 हजार किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से बढ़ता स्पेसक्राफ्ट।

ISS की ओर करीब 27 हजार किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से बढ़ता स्पेसक्राफ्ट।

लखनऊ में शुभांशु के माता-पिता आशा शुक्ला और शंभु दयाल शुक्ला। उन्होंने टीवी पर मिशन को लाइव देखा।

लखनऊ में शुभांशु के माता-पिता आशा शुक्ला और शंभु दयाल शुक्ला। उन्होंने टीवी पर मिशन को लाइव देखा।

सुबह शुभांशु ने स्पेसक्राफ्ट से लाइव किया था

नमस्ते फ्रॉम स्पेस! मैं अपने साथी अंतरिक्ष यात्रियों के साथ यहां आकर बहुत उत्साहित हूं। सच कहूं तो, जब मैं कल लॉन्चपैड पर कैप्सूल में बैठा था। 30 दिन के क्वारंटाइन के बाद, मैं बस यही चाहता था कि अब चल पड़ें। लेकिन जब यात्रा शुरू हुई, तो ऐसा लगा जैसे आपको सीट में पीछे धकेला जा रहा हो। यह एक अद्भुत राइड थी.. और फिर अचानक सब कुछ शांत हो गया। आपने बेल्ट खोली और आप वैक्यूम की शांति में तैर रहे थे।

मैं हर उस व्यक्ति को धन्यवाद देना चाहता हूं, जो इस यात्रा का हिस्सा रहा है। मैं समझता हूं कि यह कोई व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, यह आप सभी की सामूहिक उपलब्धि है, जो इस यात्रा का हिस्सा रहे हैं। मैं आप सभी को दिल से धन्यवाद देना चाहता हूं। परिवार और दोस्तों को भी.. आपका समर्थन बहुत मायने रखता है। यह सब आप सभी की वजह से संभव हुआ है।

हमने आपको जोय और ग्रेस दिखाए। यह हंस है, एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्रतीक। यह बहुत प्यारा लगता है, लेकिन हमारे भारतीय संस्कृति में हंस बुद्धिमत्ता का प्रतीक है। मुझे लगता है कि पोलैंड, हंगरी और भारत में भी इसका प्रतीकात्मक महत्व है। यह संयोग जैसा लग सकता है, लेकिन ऐसा नहीं है। इसका इससे कहीं ज़्यादा अर्थ है।

स्पेस स्टेशन पहुंचने से पहले एग्जियम मिशन-4 के क्रू ने लाइव बातचीत की।

स्पेस स्टेशन पहुंचने से पहले एग्जियम मिशन-4 के क्रू ने लाइव बातचीत की।

जब हम वैक्यूम में लॉन्च हुए, तब मुझे बहुत अच्छा नहीं लग रहा था, लेकिन कल से मुझे बताया गया है कि मैं बहुत सोया हूं, जो एक अच्छा संकेत है। मुझे लगता है कि यह एक शानदार संकेत है। मैं इस माहौल में अच्छी तरह से ढल रहा हूं।

दृश्यों का आनंद ले रहा हूं, पूरे अनुभव का आनंद ले रहा हूं। एक बच्चे की तरह सीख रहा हूं- नए कदम, चलना, खुद को नियंत्रित करना, खाना, सब कुछ। यह एक नया वातावरण है, नई चुनौती है, और मैं अपने साथी अंतरिक्ष यात्रियों के साथ इस अनुभव का बहुत आनंद ले रहा हूं। गलतियां करना ठीक है, लेकिन किसी और को गलती करते देखना और भी बेहतर है।

यहां ऊपर बहुत मजेदार समय रहा है। बस इतना ही कहना चाहता हूं। आप सभी को इसे संभव बनाने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। मुझे यकीन है कि हम यहां बहुत अच्छा समय बिताएंगे।

मिशन के पहले दिन की तस्वीरें…

लखनऊ में एक्सियम-4 की लॉन्चिंग देखते हुए शुभांशु के माता-पिता आशा शुक्ला और शंभु दयाल शुक्ला भावुक हुए। मिशन के सफल टेकऑफ पर ताली बजाकर खुशी जताई।

लखनऊ में एक्सियम-4 की लॉन्चिंग देखते हुए शुभांशु के माता-पिता आशा शुक्ला और शंभु दयाल शुक्ला भावुक हुए। मिशन के सफल टेकऑफ पर ताली बजाकर खुशी जताई।

ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट में सवार सभी एस्ट्रोनॉट। 28.5 घंटे के बाद 26 जून को शाम 04:30 बजे ISS पहुंचेंगे।

ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट में सवार सभी एस्ट्रोनॉट। 28.5 घंटे के बाद 26 जून को शाम 04:30 बजे ISS पहुंचेंगे।

लॉन्च के करीब 10 मिनट बाद ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट फाल्कन-9 रॉकेट से अलग हो गया।

लॉन्च के करीब 10 मिनट बाद ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट फाल्कन-9 रॉकेट से अलग हो गया।

लॉन्च से पहले फ्लोरिडा में कैनेडी स्पेस सेंटर पर कॉम्प्लेक्स 39 A में खड़ा फाल्कन-9 रॉकेट और कैप्सूल।

लॉन्च से पहले फ्लोरिडा में कैनेडी स्पेस सेंटर पर कॉम्प्लेक्स 39 A में खड़ा फाल्कन-9 रॉकेट और कैप्सूल।

41 साल बाद कोई भारतीय एस्ट्रोनॉट अंतरिक्ष में गया

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा और भारतीय एजेंसी इसरो के बीच हुए एग्रीमेंट के तहत भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को इस मिशन के लिए चुना गया है। शुभांशु इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर जाने वाले पहले और स्पेस में जाने वाले दूसरे भारतीय हैं। इससे 41 साल पहले राकेश शर्मा ने 1984 में सोवियत यूनियन के स्पेसक्राफ्ट से अंतरिक्ष यात्रा की थी।

शुभांशु का ये अनुभव भारत के गगनयान मिशन में काम आएगा। ये भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन है, जिसका उद्देश्य भारतीय गगनयात्रियों को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजना और सुरक्षित रूप से वापस लाना है। इसके 2027 में लॉन्च होने की संभावना है। भारत में एस्ट्रोनॉट को गगनयात्री कहा जाता है। इसी तरह रूस में कॉस्मोनॉट और चीन में ताइकोनॉट कहते हैं।

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महिला आरक्षण से जुड़ा बिल 54 वोट से गिरा:पास होने के लिए चाहिए थे 352, मिले 298; मोदी सरकार बिल पास कराने में पहली बार नाकाम

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नई दिल्ली,एजेंसी। महिला आरक्षण बिल से जुड़ा संविधान (131वां) संशोधन बिल सरकार लोकसभा में पास नहीं करा पाई। इसमें संसद की 543 सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान था। 21 घंटे की चर्चा के बाद वोटिंग हुई। लोकसभा में मौजूद 528 सांसदों ने वोट डाले। पक्ष में 298, विपक्ष में 230 वोट पड़े। बिल पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी। 528 का दो तिहाई 352 होता है। इस तरह ये बिल 54 वोट से गिर गया। लोकसभा में कुल 543 सीटें हैं, लेकिन 3 सीटें खाली होने की वजह से मौजूदा सांसद 540 है।

सरकार ने दो बिल वोटिंग के लिए पेश ही नहीं किए

पहला- परिसीमन संशोधन संविधान बिल 2026

दूसरा- केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल 2026

सरकार ने इन पर वोटिंग से इनकार किया। कहा कि ये बिल एक-दूसरे से लिंक है इसलिए वोटिंग की जरूरत नहीं है।

12 साल के शासन में यह पहला मौका जब मोदी सरकार सदन में कोई बिल पास नहीं करा पाई। इससे पहले अमित शाह ने एक घंटा स्पीच दी थी। कहा कि अगर ये बिल पास नहीं होते हैं तो जिम्मेदारी विपक्ष की होगी। देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनकी राह का रोड़ा कौन है।

बिल गिरने के बाद विपक्ष ने कहा- हमने हरा दिया

  • राहुल गांधी ने कहा- हमने संविधान पर हुए हमले को हरा दिया है। हमने साफ कहा है कि यह महिला आरक्षण बिल नहीं है, बल्कि यह भारत की राजनीतिक संरचना को बदलने का एक तरीका है।
  • प्रियंका ने कहा– यह हमारे लोकतंत्र और देश की एकता के लिए एक बड़ी जीत है। जैसा कि मैंने अंदर कहा, यह संविधान पर हमला था, और हमने इसे विफल कर दिया है, जो कि एक अच्छी बात है।
  • शशि थरूर ने कहा– हमने हमेशा कहा है कि हम महिला आरक्षण का पूर्ण समर्थन करते हैं और आज भी इसके पक्ष में मतदान करने को तैयार हैं। हालांकि, इसे परिसीमन से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
  • एमके स्टालिन ने कहा- 23 अप्रैल को हम दिल्ली का अहंकार और उस अहंकार का समर्थन करने वाले गुलामों को हराएंगे।

संसद के बाहर भाजपा महिला सांसदों के प्रदर्शन की तस्वीरें…

बिल गिरने के बाद एनडीए की महिला सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया।

बिल गिरने के बाद एनडीए की महिला सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया।

महिला सांसदों ने ‘महिला का अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान’ के नारे लगाए।

महिला सांसदों ने ‘महिला का अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान’ के नारे लगाए।

सरकार को पता था बिल पास नहीं होगा, मोदी ने 3, शाह ने एक अपील की

सरकार जानती थी कि उसके पक्ष में लोकसभा में नंबर नहीं है, इसीलिए सरकार बार-बार सभी सांसदों से समर्थन की मांग कर रही थी। पीएम नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू समेत बीजेपी और NDA नेताओं ने विपक्ष से बिल को सपोर्ट करने की अपील की।

पीएम की 3 अपील

  • 13 अप्रैल एक कार्यक्रम में: मैं आपसे आग्रह करता हूं कि अपने स्थानीय सांसदों को पत्र लिखें और इस ऐतिहासिक संसद सत्र में हिस्सा लेते समय उनका हौसला बढ़ाएं।
  • 16 अप्रैल लोकसभा में: ‘हमें क्रेडिट नहीं चाहिए, जैसे ही पारित हो जाए तो मैं एड देकर सबको धन्यवाद देने को तैयार हूं। सामने से क्रेडिट का ब्लैंक चेक आपको दे रहा हूं।’
  • 17 अप्रैल सोशल मीडिया में: सभी सांसद वोटिंग से पहले अपनी अंतर्रात्मा की आवाज सुनें।

शाह ने कहा- महिलाएं माफ नहीं करेंगी

17 अप्रैल लोकसभा में अमित शाह ने कहा कि देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनके रास्ते का रोड़ा कौन है। यहां पर तो शोर-शराबा करके बच जाओगे लेकिन माताओं-बहनों का आक्रोश बाहर पता चलेगा। चुनाव में वोट मांगने जाएंगे तो मातृशक्ति हिसाब मांगेगी।

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देश

‘परिसीमन एक ‘राजनीतिक नोटबंदी’ साबित होगा’- शशि थरुर का केंद्र सरकार पर तीखा हमला

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नई दिल्ली,एजेंसी। लोकसभा में शुक्रवार को ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ और ‘परिसीमन’ (Delimitation) पर चल रही बहस के दौरान कांग्रेस नेता शशि थरूर ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया की तुलना ‘नोटबंदी’ से करते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र की आत्मा के लिए खतरा बताया।

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थरुर ने अपने भाषण में कहा

शशि थरूर ने कहा कि दशकों से महिला आरक्षण का वादा किया गया और इसे टाला गया। आज जब इस पर राजनीतिक सहमति बनी है, तब सरकार ने इसे परिसीमन जैसी जटिल प्रक्रिया से बांधकर महिलाओं की आकांक्षाओं को ‘बंधक’ बना लिया है। थरूर ने सरकार की जल्दबाजी पर सवाल उठाते हुए कहा, “आपने परिसीमन का प्रस्ताव वैसी ही जल्दबाजी में पेश किया है जैसी नोटबंदी के समय दिखाई थी। हम सब जानते हैं कि नोटबंदी ने देश का क्या हाल किया था। परिसीमन भी एक ‘राजनीतिक नोटबंदी’ साबित होगा, इसे मत कीजिए।”

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थरूर ने उत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों के बीच शक्ति संतुलन बिगड़ने की आशंका जताई। उन्होंने तर्क दिया कि केरल और तमिलनाडु जैसे दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण और मानव विकास में बेहतरीन काम किया है। यदि परिसीमन जनसंख्या के आधार पर हुआ, तो जनसंख्या नियंत्रण में विफल रहने वाले राज्यों को अधिक राजनीतिक ताकत मिलेगी और अच्छा काम करने वाले राज्य हाशिए पर चले जाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आर्थिक रूप से समृद्ध और विकासशील राज्यों की आवाज को दबाया गया, तो इससे देश के संघीय ढांचे पर बुरा असर पड़ेगा। उनके अनुसार, यह “बहुसंख्यकवाद की तानाशाही” (Tyranny of the democratic majority) पैदा करने जैसा होगा।

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छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ ब्लास्ट हादसा: धमाके में 20 श्रमिकों की मौत के बाद वेदांता कंपनी के चेयरमैन, कई अन्य के खिलाफ मामला दर्ज

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सक्ती,एजेंसी। छत्तीसगढ़ पुलिस ने सक्ती जिले में वेदांता के विद्युत संयंत्र में हुए धमाके में 20 लोगों की मौत की घटना के बाद वेदांता कंपनी के चेयरमैन अनिल अग्रवाल समेत संयंत्र प्रबंधन के अधिकारियों और अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस अधिकारियों ने यह जानकारी दी। सक्ती पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर ने बताया, ”डाभरा पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।” अधिकारी ने बताया कि इस मामले में वेदांता कंपनी के चेयरमैन अनिल अग्रवाल, कंपनी प्रबंधक देवेन्द्र पटेल सहित अन्य जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।

यह धमाका 14 अप्रैल को सिंघीतराई गांव में स्थित संयंत्र में हुआ था। उस समय बॉयलर से टर्बाइन तक उच्च दाब वाली भाप ले जाने वाला एक स्टील का पाइप फट गया था, जिससे कई मजदूर बुरी तरह झुलस गए थे। इस घटना में 20 लोगों की मौत हो गई थी और 16 लोग घायल हो गए। ठाकुर ने ‘पीटीआई भाषा’ को बताया कि यदि जांच के दौरान और लोग भी दोषी पाए जाते हैं, तो उनका नाम भी प्राथमिकी में जोड़ा जाएगा।

उन्होंने बताया कि घटना की जांच जारी है और मृतकों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट और औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग की रिपोर्ट सहित कई रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि धमाके के कारणों की जांच के लिए एक तकनीकी टीम भी बनाई गई है। पुलिस अधीक्षक ने कहा, ”सभी रिपोर्ट मिलने के बाद, अगर जरूरत पड़ी तो प्राथमिकी में और धाराएं भी जोड़ी जाएंगी।” इस घटना के बाद, विपक्षी दल कांग्रेस ने संयंत्र प्रबंधन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग की थी। 

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