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वैश्विक मसाला व्यापार में टिके रहने के लिए स्थिरता और खाद्य सुरक्षा जरूरी: विशेषज्ञ
नई दिल्ली, एजेंसी। वर्ल्ड स्पाइस ऑर्गनाइजेशन और दक्षिण भारत के लिए नीदरलैंड साम्राज्य का महावाणिज्य दूतावास के सहयोग से आयोजित ‘सस्टेनेबल स्पाइस वैल्यू चेन’ संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने कहा कि वैश्विक मसाला व्यापार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए स्थिरता और कड़े खाद्य सुरक्षा मानक बेहद महत्वपूर्ण हो गए हैं। यह कार्यक्रम बुधवार को ले मेरिडियन में आयोजित किया गया, जिसमें निर्यातकों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), सरकारी प्रतिनिधियों, अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और स्थिरता विशेषज्ञों ने भाग लिया।

दक्षिण भारत के लिए नीदरलैंड के महावाणिज्य दूत एवोट डी विट ने उद्घाटन भाषण में कहा कि बदलते वैश्विक मानकों को पूरा करने के लिए मजबूत प्रमाणन और गुणवत्ता आश्वासन प्रणाली की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मसाला क्षेत्र में स्थिरता का मतलब केवल पर्यावरण संरक्षण नहीं, बल्कि उचित वेतन, महिलाओं की भागीदारी, छोटे किसानों का सशक्तिकरण और मजबूत किसान समूहों का निर्माण भी है।
उन्होंने सरकारों, शोध संस्थानों, निजी उद्योगों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के बीच सहयोग को स्थायी समाधान विकसित करने के लिए आवश्यक बताया। स्पाइसेस बोर्ड इंडिया के विपणन निदेशक बी. एन. झा ने कहा कि भारत 250 से अधिक प्रकार के मसाले और मूल्यवर्धित उत्पाद 180 से ज्यादा देशों को निर्यात करता है। उन्होंने बताया कि यूरोपीय बाजार में भारतीय मसालों की मांग बढ़ने की काफी संभावनाएं हैं।
झा ने कहा कि स्पाइसेस बोर्ड अच्छी कृषि पद्धतियों, वैज्ञानिक फसल प्रबंधन, समेकित कीट नियंत्रण, स्वच्छ प्रसंस्करण प्रणाली और किसानों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा दे रहा है, ताकि मसाला मूल्य श्रृंखला में स्वच्छता और अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
संगोष्ठी में यूरोप के बदलते नियमों और उनके भारतीय मसाला निर्यात पर प्रभाव पर भी चर्चा हुई। विकासशील देशों से आयात को बढ़ावा देने वाले केंद्र के विशेषज्ञ वॉर्नर यूटरविज्क ने कहा कि टिकाऊ और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों की मांग बढ़ने से यूरोप भारतीय मसालों के लिए दीर्घकालिक अवसर प्रदान करता रहेगा।
रामकुमार मेनन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय खरीदार अब केवल उत्पाद की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि पारदर्शिता, पर्यावरणीय प्रभाव, श्रम स्थितियों और आपूर्ति श्रृंखला की विश्वसनीय ट्रेसबिलिटी को भी महत्व दे रहे हैं। संगोष्ठी में मसाला क्षेत्र की आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े जोखिमों और उन्हें कम करने के उपायों पर भी विस्तृत चर्चा की गई।

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पावर ग्रिड के निदेशक मंडल ने कर्ज सीमा बढ़ाकर 2.2 लाख करोड़ रुपए करने को मंजूरी दी
नई दिल्ली, एजेंसी। सार्वजनिक क्षेत्र की पावर ग्रिड कॉरपोरेशन के निदेशक मंडल ने कंपनी की कर्ज लेने की सीमा 1.80 लाख करोड़ रुपए से बढ़ाकर 2.20 लाख करोड़ रुपए करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। कंपनी ने शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि निदेशक मंडल की शुक्रवार को हुई बैठक में यह मंजूरी दी गई। हालांकि, इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर आगामी वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में शेयरधारकों की मंजूरी के बाद लगेगी।

निदेशक मंडल ने इसके अलावा बैंक ऑफ बड़ौदा से बाह्य वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) के जरिये 50 करोड़ अमेरिकी डॉलर तक की विदेशी मुद्रा जुटाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी। कंपनी ने कहा कि निदेशक मंडल ने उडुमलपेट-मदुरै 400 केवी एकल सर्किट (एस/सी) लाइन को 400 केवी क्वाड डबल सर्किट (डी/सी) लाइन में उन्नत/परिवर्तित करने की परियोजना को भी मंजूरी दी है। करीब 772.65 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना को आवंटन की तारीख से 30 महीने के भीतर, यानी 11 अगस्त, 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
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दुनियाभर की सुस्त अर्थव्यवस्था के बीच दौड़ेगी इंडियन इकोनॉमी, Goldman Sachs का अनुमान
मुंबई, एजेंसी। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंदी और भू-राजनीतिक तनाव के बादल छाए हुए हैं लेकिन भारत की विकास रफ्तार को लेकर अच्छी खबर सामने आई है। करीब 150 साल पुराने वैश्विक निवेश बैंक Goldman Sachs ने अनुमान जताया है कि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और महंगाई में कमी के चलते भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहेगी। बैंक ने भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाते हुए कहा है कि आने वाले समय में दुनिया की सुस्त अर्थव्यवस्था के बीच भी भारत सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रह सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, पहले जहां युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित व्यवधान को देखते हुए चालू वित्त वर्ष में भारत की GDP वृद्धि 6.1% रहने का अनुमान लगाया गया था, वहीं अब इसे बढ़ाकर 6.5% कर दिया गया है। बैंक का कहना है कि वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में आर्थिक गतिविधियां अपेक्षा से बेहतर रही हैं, जिससे विकास दर के अनुमान में सुधार हुआ है।

कच्चे तेल की कीमतों का अनुमान घटाया
Goldman Sachs ने कच्चे तेल के पूर्वानुमान में भी कटौती की है। बैंक के मुताबिक, वर्ष 2026 की तीसरी और चौथी तिमाही में कच्चे तेल की औसत कीमत 82 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान है, जबकि पहले यह अनुमान 92 डॉलर प्रति बैरल था। वहीं 2027 के लिए अनुमान 80 डॉलर से घटाकर 75 डॉलर प्रति बैरल कर दिया गया है।
भारतीय बास्केट के कच्चे तेल की कीमत भी हाल के दिनों में तेजी से घटी है। जून में यह घटकर करीब 86.31 डॉलर प्रति बैरल रही, जबकि 24 जून को इसका स्तर 70.71 डॉलर प्रति बैरल दर्ज किया गया।
महंगाई का अनुमान भी हुआ कम
Goldman Sachs ने भारत के महंगाई अनुमान को भी घटा दिया है। बैंक ने वित्त वर्ष के लिए महंगाई का अनुमान 5.1% से घटाकर 4.9% कर दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक यूरिया कीमतों में कमी आने से खाद सब्सिडी पर सरकार का बोझ कम हो सकता है। साथ ही तेल की कीमतों में गिरावट से सरकार पर राजकोषीय दबाव भी कम होने की संभावना है। हालांकि मौसम से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण मांग पर असर पड़ने की आशंका बनी हुई है।
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Volkswagen की 4 फैक्ट्रियां बंद करने का प्लान, 1,00,000 लोग होंगे बेरोगजार
बर्लिन, एजेंसी। यूरोप की दिग्गज ऑटोमोबाइल कंपनी फॉक्सवैगन AG कुछ फैक्ट्रियां बंद कर सकती है और कर्मचारियों की संख्या में भारी कटौती पर विचार कर रही हैं। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में हुई बोर्ड बैठक में कंपनी के CEO ओलिवर ब्लूम ने एक नई रणनीति पेश की। प्रस्तावित योजना के तहत कर्मचारियों की छंटनी का आंकड़ा बढ़ाकर करीब 1 लाख तक किया जा सकता है। फिलहाल Volkswagen Group में लगभग 6.57 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं। समूह के तहत Volkswagen के अलावा Porsche और Audi जैसे प्रीमियम ब्रांड भी शामिल हैं।

जर्मनी में 4 प्लांट बंद हो सकते हैं
रिपोर्ट के अनुसार, रणनीति में इस दशक के अंत तक जनरल ओवरहेड कॉस्ट में 11 अरब यूरो (12.5 अरब डॉलर) तक की कटौती करना और मीडियम टर्म में जर्मनी में 4 फैक्ट्रियां बंद करना भी शामिल है। इनमें नेकरसल्म में Audi के प्लांट के साथ-साथ हनोवर, ज्विकौ और एमडेन में फॉक्सवैगन के प्लांट शामिल हैं।
इसके अलावा कंपनी Volkswagen ब्रांड और उसके कंपोनेंट बिजनेस को अलग करने के विकल्प पर भी विचार कर रही है। लंबे समय से कम मुनाफे से जूझ रहे Volkswagen ब्रांड को अधिक लाभदायक और कुशल बनाने की दिशा में यह कदम अहम माना जा रहा है।
क्यों उठाने पड़ रहे हैं ये कदम?
फॉक्सवैगन इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रही है। अमेरिका के आयात शुल्क (टैरिफ), चीन में कमजोर मांग और यूरोप में BYD तथा Stellantis जैसी कंपनियों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने कंपनी पर दबाव बढ़ा दिया है। इसी वजह से लागत घटाने और कारोबार को अधिक प्रभावी बनाने की रणनीति तैयार की जा रही है।
पहले से जारी है कर्मचारियों की संख्या घटाने का अभियान
रिपोर्ट के अनुसार, करीब 28,000 कर्मचारी पहले ही स्वैच्छिक रूप से कंपनी छोड़ने पर सहमत हो चुके हैं। यह 2030 तक पूरे Volkswagen Group में 50,000 कर्मचारियों की संख्या कम करने की पहले घोषित योजना का हिस्सा है।
हालांकि, नई प्रस्तावित छंटनी योजना को कर्मचारी संगठनों का विरोध झेलना पड़ सकता है। Volkswagen के सुपरवाइजरी बोर्ड में आधी सीटें कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के पास हैं, जबकि जर्मनी का लोअर सैक्सनी राज्य भी बोर्ड में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और आमतौर पर कर्मचारी यूनियनों का समर्थन करता है। ऐसे में कंपनी के लिए इस योजना को लागू करना आसान नहीं होगा।
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