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टाटा समूह देश का सबसे मूल्यवान ब्रांड, अडानी समूह सबसे तेजी से उभरा
नई दिल्ली, एजेंसी। टाटा समूह एकa बार फिर देश का सबसे मूल्यवान ब्रांड चुना गया है जबकि अडानी समूह देश का सबसे तेजी से बढ़ता हुआ ब्रांड बनकर उभरा है। एक नवीनतम रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। ‘ब्रांड फाइनेंस’ की तरफ से सबसे मूल्यवान भारतीय ब्रांड 2025 के बारे में जारी नवीनतम रैंकिंग के मुताबिक, अडानी समूह अपने आक्रामक और एकीकृत बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित करके वृद्धि को गति देने वाले सबसे तेजी से बढ़ते भारतीय ब्रांड के रूप में उभरा है। रिपोर्ट के मुताबिक, अडानी समूह का ब्रांड मूल्य वर्ष 2025 में बढ़कर 6.46 अरब डॉलर हो गया जो पिछले साल 3.55 अरब डॉलर था। एक साल में ब्रांड मूल्य में 2.91 अरब डॉलर की वृद्धि इस समूह की रणनीतिक स्पष्टता, लचीलापन और सतत वृद्धि को लेकर प्रतिबद्धता को दर्शाती है। ब्रांड मूल्य में इस वृद्धि के दम पर अडानी समूह रैंकिंग में 13वें स्थान पर पहुंच गया है जबकि पिछले साल वह 16वें स्थान पर था।
ब्रांड फाइनेंस ने कहा, “अडानी समूह का ब्रांड मूल्य इस साल 82 प्रतिशत बढ़ा है और यह सबसे तेजी से बढ़ने वाले भारतीय ब्रांड के रूप में उभरा है।” इस ब्रांड रैंकिंग के मुताबिक, टाटा समूह का ब्रांड मूल्य इस साल 10 प्रतिशत बढ़कर 31.6 अरब डॉलर हो गया। इसके साथ ही विविध कारोबारों में सक्रिय टाटा समूह एक बार फिर भारत के सबसे मूल्यवान ब्रांड की सूची में शीर्ष पर रहा। ब्रांड फाइनेंस ने टाटा समूह के बारे में कहा, “यह ऐतिहासिक मील का पत्थर भारत के बढ़ते आर्थिक प्रभाव और इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर, कृत्रिम मेधा और नवीकरणीय ऊर्जा में रणनीतिक निवेश के साथ टाटा समूह के बहु-क्षेत्रीय प्रभुत्व को बताता है।”
रिपोर्ट के मुताबिक, देश का दूसरा सबसे मूल्यवान भारतीय ब्रांड इन्फोसिस है जिसका ब्रांड मूल्य 15 प्रतिशत बढ़कर 16.3 अरब डॉलर हो गया है। यह कंपनी आईटी सेवा क्षेत्र में अग्रणी बनी हुई है। एचडीएफसी ग्रुप 14.2 अरब डॉलर के ब्रांड मूल्य के साथ रैंकिंग में तीसरे स्थान पर है जबकि सार्वजनिक बीमा कंपनी एलआईसी 13.6 अरब डॉलर के ब्रांड मूल्य के साथ चौथे स्थान पर है। एचसीएल टेक 8.9 अरब डॉलर के ब्रांड मूल्य के साथ सूची में आठवें स्थान पर है जबकि लार्सन एंड टुब्रो समूह 7.4 अरब डॉलर नौवां सबसे मूल्यवान भारतीय ब्रांड है। महिंद्रा समूह 7.2 अरब डॉलर के ब्रांड मूल्य के साथ इस सूची में 10वें स्थान पर मौजूद है।
इस बीच, ताज होटल्स ने लगातार चौथे साल भारत के सबसे मजबूत ब्रांड के रूप में अपना खिताब बरकरार रखा है। वहीं, एशियन पेंट्स इस साल दूसरा सबसे मजबूत भारतीय ब्रांड रहा है जबकि अमूल तीसरे स्थान पर है। लंदन स्थित ‘ब्रांड फाइनेंस’ दुनिया की अग्रणी ब्रांड मूल्यांकन सलाहकार कंपनी है। इसकी वार्षिक रैंकिंग एक व्यापक पद्धति पर आधारित है जिसमें ब्रांड मजबूती सूचकांक, ब्रांड प्रभाव और पूर्वानुमान राजस्व को आधार बनाया जाता है। नवीनतम इंडिया 100 रिपोर्ट के मुताबिक, रैंकिंग में शामिल शीर्ष 100 ब्रांडों का कुल मूल्य अब 236.5 अरब डॉलर हो गया है। इसने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में सतत पूंजीगत व्यय, मजबूत घरेलू मांग और सार्वजनिक-निजी भागीदारी होने से अग्रणी भारतीय ब्रांड वैश्विक अस्थिरता से निपटने के साथ अवसरों का लाभ उठाने के लिए अच्छी स्थिति में हैं।
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नेपाल सीमा से गिरफ्तार हुए TMC के पूर्व विधायक जहांगीर खान, STF की बड़ी कार्रवाई
कोलकाता, एजेंसी। तृणमूल कांग्रेस के नेता जहांगीर खान को ‘जबरन वसूली’ के आरोप में सोमवार को उत्तर बंगाल में भारत-नेपाल सीमा के पास से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने यह जानकारी दी। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने खान को गिरफ्तारी से दी गई अंतरिम सुरक्षा 26 मई को वापस ले ली थी। खान के खिलाफ दक्षिण 24 परगना जिले के फाल्टा थाने में सात प्राथमिकी दर्ज हैं।
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, ”खान को उत्तर बंगाल में भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया।” हालांकि पुलिस ने गिरफ्तारी के संबंध में विस्तृत जानकारी नहीं दी है। खान 21 मई को फाल्टा विधानसभा उपचुनाव में चौथे स्थान पर रहे थे। हालांकि, उन्होंने चुनाव से कुछ दिन पहले अपनी उम्मीदवारी वापस लेने की घोषणा की थी, लेकिन नाम वापस लेने की अवधि समाप्त हो चुकी थी इसीलिए उनका नाम ईवीएम में दर्ज रहा।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने खान को मिली अंतरिम सुरक्षा वापस ली
इससे पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने खान के खिलाफ दर्ज कई आपराधिक मामलों में पुलिस की किसी भी सख्त कार्रवाई से उन्हें मिली अंतरिम सुरक्षा वापस ले ली थी। कोर्ट ने 18 मई को खान को सख्त कार्रवाई से राहत दी थी, लेकिन बाद में इसे रद्द कर दिया गया। जजों ने कहा कि राज्य में राजनीतिक स्थिति में बदलाव और याचिकाकर्ता द्वारा राजनीतिक बदले की भावना के दावों के कारण ऐसी सुरक्षा जारी रखना उचित नहीं होगा।
खान के वकील किशोर दत्ता ने कोर्ट में तर्क दिया कि 4 मई को विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद उनके मुवक्किल के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे। उन्होंने दावा किया कि ये मामले राजनीतिक बदले की भावना का नतीजा थे और कहा कि सुरक्षा न केवल चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी थी, बल्कि खान को कथित उत्पीड़न से बचाने के लिए भी थी। दूसरी ओर, अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने सुरक्षा बढ़ाने की मांग का विरोध किया। उन्होंने कहा कि पहले दी गई सुरक्षा केवल खान को 21 मई को फाल्टा में हुए दोबारा मतदान (रीपोल) में भाग लेने में सक्षम बनाने के लिए थी, जिसके नतीजे 24 मई को घोषित किए गए थे।
पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में फाल्टा विधानसभा उपचुनाव (रीपोल) के बीच एक बड़ी राजनीतिक घटनाक्रम में, जहांगीर खान ने अपना नामांकन वापस ले लिया, जो पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा झटका था। उन्होंने कहा कि दौड़ से हटने का फैसला फाल्टा के लोगों की भलाई के लिए लिया गया था। खान ने कहा, “मैं फाल्टा का बेटा हूं और चाहता हूं कि फाल्टा शांतिपूर्ण रहे और तरक्की करे। हमारे मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी फाल्टा के विकास के लिए एक विशेष पैकेज दे रहे हैं, इसलिए मैंने निर्वाचन क्षेत्र में दोबारा मतदान प्रक्रिया से दूर रहने का फैसला किया है।”
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भाजपा की फूट डालने की पुरानी चाल कामयाब नहीं होगी, क्रॉस वोटिंग की आशंका पर दिग्विजय सिंह का तीखा हमला
भोपाल, एजेंसी। मध्य प्रदेश में कांग्रेस से राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने अपना नामाकंन दाखिल किया। उनका मुकाबले में भाजपा ने तीसरे उम्मीदवार के रूप में महेश केवट को उतारा है। ऐसे में मुकाबला बेहद रोचक हो गया है। वहीं कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग का खतरा बढ़ गया है। हालांकि कांग्रेस ने इसे भाजपा की गलतफहमी बताया है।

कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह का कहना है, “बीजेपी को गलतफहमी है कि वे पार्टी में फूट डाल सकते हैं। कांग्रेस पूरी तरह से संगठित और एकजुट है; सभी कांग्रेस विधायक पार्टी की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को मजबूती से अपना पूरा समर्थन देंगे और बीजेपी की फूट डालने की पुरानी चाल कामयाब नहीं होगी। मीनाक्षी नटराजन कांग्रेस की उम्मीदवार हैं और हम कांग्रेस में एकजुट हैं।”
बता दें कि 230 सदस्यों वाली मध्य प्रदेश विधानसभा में प्रभावी वोट संख्या 228 है। इनमें से BJP के पास 164 और कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं। बीना की विधायक निर्मला सप्रे के वोट की स्थिति साफ न होने (जो BJP की तरफ झुकती दिख रही है) और विजयपुर के विधायक मुकेश मल्होत्रा के वोटिंग पर रोक के कारण, कांग्रेस की प्रभावी संख्या घटकर 62 रह गई है।
राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए हर उम्मीदवार को 58 वोटों की ज़रूरत होती है। इस तरह, BJP को दो सीटें जीतने के लिए 116 वोटों की ज़रूरत है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कुल 164 वोटों में से 116 वोट डालने के बाद BJP के पास 48 वोट बचेंगे, जबकि तीसरी सीट पक्की करने के लिए उसे 10 और वोटों की ज़रूरत होगी। कांग्रेस के पास एक सीट जीतने के लिए ज़रूरी संख्या तो है, लेकिन BJP द्वारा तीसरे उम्मीदवार के ऐलान ने उसकी चिंताएं बढ़ा दी हैं और नटराजन के चुनाव जीतने की राह मुश्किल कर दी है।
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क्या शिवसेना की तहर दो गुटों में बंट जाएगी TMC?, सांसद के इस्तीफे से बंगल में गरमाई सियासत
कोलकाता, एजेंसी। बंगाल चुनाव में बीजेपी की शानदार जीत की पूरे देश में चर्चा है तो वहीं तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी के बीच अंदरूनी कलह भी सामने आने लगी है इसे लेकर अब पार्टी के भविष्य की रणनीति पर लोग चर्चा कर रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में अब इस बात को लेकर चर्चा शुरू हो गई है कि क्या तृणमूल कांग्रेस में भी Shiv Sena की तरह अंदरूनी खींचतान बढ़ेगी या पार्टी नेतृत्व समय रहते हालात संभाल लेगा। विपक्ष लगातार TMC में असंतोष और गुटबाजी के आरोप लगा रहा है, जबकि पार्टी नेतृत्व इसे सामान्य राजनीतिक घटनाक्रम बता रहा है।

अगल गुट बनाने को लेकर चर्चा तेज इस्तीफा
दरअसल, अंदरूनी कलह के बीच पार्टी के सांसदों के एक समूह ने भविष्य की रणनीति और पार्टी से अलग होकर एक नया गुट बनाने की संभावना पर चर्चा करने के लिए सोमवार को यहां बैठक की। बैठक में हिस्सा लेने वाले नेताओं में सुखेंदु शेखर राय भी शामिल थे, जिन्होंने सोमवार को ही पार्टी से इस्तीफा दे दिया और राज्यसभा की सदस्यता भी छोड़ दी थी। उनके अलावा तृणमूल के लोकसभा सांसद प्रसून बनर्जी, शर्मिला सरकार, जगदीश चंद्र बसुनिया, कालीपद सरन खेरवाल और अरूप चक्रवर्ती भी बैठक में मौजूद थे।
ममता बनर्जी को व्हाट्सऐप पर भेजा
मीडिया से बातचीत में राय ने कहा कि उन्होंने राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन से मुलाकात कर उन्हें अपना इस्तीफा सौंप दिया है। राय ने कहा, ”मैंने पार्टी से इस्तीफा देने के अपने फैसले से ममता बनर्जी को व्हाट्सऐप और ईमेल के जरिये अवगत करा दिया है। यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल के 60 विधायकों द्वारा एक अलग गुट बनाने के बाद सामने आया है, जहां रिताब्रता बनर्जी ने ममता बनर्जी के नामित उम्मीदवार के बजाय नेता प्रतिपक्ष का कार्यभार संभाल लिया है।
इस्तीफे को लेकर दिया ये बयान
राय ने कहा, “विधानसभा में जो कुछ भी हुआ, क्या कोई यह बता सकता है कि राज्यसभा या लोकसभा में वैसी ही स्थिति पैदा नहीं होगी?” हालांकि, राय ने स्पष्ट किया कि राज्यसभा और पार्टी से उनका इस्तीफा राज्य विधानसभा में हुए घटनाक्रम से अलग है, क्योंकि वहां के विधायकों ने इस्तीफा नहीं दिया है। उन्होंने कहा, ”उनके कदम और मेरे कदम के बीच कोई संबंध नहीं है। यह पूरी तरह से अलग है। मैंने पार्टी से इस्तीफा दिया है, उन्होंने नहीं। राज्यसभा में मेरा कार्यकाल 2029 में समाप्त होना था, लेकिन मैंने सैद्धांतिक तौर पर इस्तीफा दे दिया, क्योंकि मेरे लिए (पार्टी में) बने रहना मुश्किल हो गया था।”
‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में शामिल हुए अभिषेक बनर्जी
यह राजनीतिक घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी और उनके भतीजे एवं पार्टी सांसद अभिषेक बनर्जी यहां ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में भाग ले रहे हैं। इस बैठक में गठबंधन के भीतर एकजुटता पर जोर दिया गया और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने तथा जनता की आजीविका से जुड़े मुद्दों को उठाने की आवश्यकता बताई गई।
तृणमूल के इन दोनों नेताओं के अलावा बैठक में कांग्रेस की सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के तेजस्वी यादव, नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला और पीडीपी की महबूबा मुफ्ती के साथ-साथ वामपंथी नेता भी मौजूद थे। हालांकि ममता से नाराज विधायकों ने अभी तक अलग पार्टी बनाए जाने को लेकर कोई भी अधिकारिक ऐलान नहीं किया।
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