देश
देश की अधिकतम बिजली मांग सोमवार को दूसरी बार 256 गीगावाट के करीब पहुंची
नई दिल्ली,एजेंसी। देश में भीषण गर्मी के बीच सोमवार को अधिकतम बिजली मांग लगातार दूसरी बार रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गई और 255.85 गीगावाट दर्ज की गई। एयर कंडीशनर और डेजर्ट कूलर जैसे शीतलन उपकरणों के बढ़ते उपयोग ने मांग को बढ़ाया। उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत में तेज गर्मी के बीच बिजली की खपत में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई क्योंकि लोग गर्मी से राहत पाने के लिए शीतलन उपकरणों का अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं।

ऊर्जा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार 27 अप्रैल 2026 को अधिकतम बिजली मांग 255.85 गीगावाट (करीब 256 गीगावाट) रही। इस महीने के दूसरे पखवाड़े में मांग तेजी से बढ़नी शुरू हुई और 24 अप्रैल (शुक्रवार) को यह 252.07 गीगावाट तक पहुंच गई। इसके बाद 25 अप्रैल (शनिवार) को यह 256.11 गीगावाट के स्तर को पार कर गई। हालांकि, 26 अप्रैल (रविवार) को अधिकतर वाणिज्यिक एवं औद्योगिक प्रतिष्ठान बंद रहने से मांग घटकर 238.15 गीगावाट रह गई। देश के कुछ हिस्सों में धूल भरी आंधी और छिटपुट बारिश के कारण भी बिजली खपत पर कुछ हद तक नियंत्रण रहा। पिछले वर्ष गर्मियों में अधिकतम बिजली मांग जून 2025 में 242.77 गीगावाट रही थी जो सरकार के 277 गीगावाट के अनुमान से कम थी। वहीं 2024 में मई में रिकॉर्ड 250 गीगावाट और 2023 में सितंबर में सर्वाधिक 243.27 गीगावाट मांग दर्ज की गई थी। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने इस वर्ष भीषण गर्मी का अनुमान लगाया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मई तथा जून में तापमान बढ़ने और लू चलने से एयर कंडीशनर और कूलर जैसे उपकरणों के बढ़ते उपयोग से बिजली की मांग और बढ़ेगी। बिजली मंत्रालय ने इस वर्ष गर्मियों के दौरान अधिकतम बिजली मांग के करीब 270 गीगावाट रहने का अनुमान लगाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि तापमान में लगातार वृद्धि के साथ बिजली मांग मंत्रालय के अनुमानित 270 गीगावाट के करीब पहुंच रही है। आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में तापमान बढ़ने के साथ देश में बिजली की मांग भी बढ़ी है। 22 अप्रैल को अधिकतम पूरी की गई बिजली मांग 239.70 गीगावाट थी जो 23 अप्रैल 2026 को बढ़कर 240.12 गीगावाट हो गई। हालांकि, इस महीने के पहले पखवाड़े में यह मांग अप्रैल 2025 के 235.32 गीगावाट के स्तर से कम रही थी।
देश
भारत ने फिर दिखाई दरियादिलीः किर्गिस्तान को दिया BHISHM Cube का बड़ा तोहफा !
नई दिल्ली,एजेंसी। भारत ने एक बार फिर वैश्विक स्तर पर अपनी “मानवीय ताकत” और तकनीकी क्षमता का दम दिखाया है। Rajnath Singh ने किर्गिस्तान को स्वदेशी भीष्म क्यूब (BHISHM Cube) मेडिकल सिस्टम भेंट कर यह संदेश दिया कि भारत सिर्फ रक्षा शक्ति ही नहीं, बल्कि आपदा के समय जीवन बचाने वाला भरोसेमंद साझेदार भी है। आज जब दुनिया युद्ध, आपदाओं और मानवीय संकटों से जूझ रही है, ऐसे में BHISHM Cube जैसे सिस्टम किसी भी देश के लिए “लाइफसेवर” साबित हो सकते हैं। यह भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता (Make in India) और वैश्विक जिम्मेदारी दोनों को मजबूत करता है।

क्या है भीष्म क्यूब?
BHISHM (Bharat Health Initiative for Sahyog Hita & Maitri) Cube एक आधुनिक, पोर्टेबल मेडिकल सिस्टम है, जिसे खास तौर पर आपात स्थितियों के लिए तैयार किया गया है। यह “गोल्डन ऑवर” यानी दुर्घटना के बाद के सबसे महत्वपूर्ण समय में तुरंत इलाज उपलब्ध कराने के लिए डिजाइन किया गया है। इसका उद्देश्य गंभीर स्थिति में मरीज की जान बचाना है, जब हर मिनट बेहद कीमती होता है।
कैसे करता है काम ?
इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत इसका मॉड्यूलर डिजाइन है। इसमें छोटे-छोटे 36 “मिनी क्यूब” मिलकर एक “मदर क्यूब” बनाते हैं, और ऐसे दो मदर क्यूब मिलकर पूरा BHISHM Cube तैयार करते हैं। एक पूरा सिस्टम करीब 200 मरीजों का इलाज, यहां तक कि सर्जरी तक संभाल सकता है। इसे हाथ से, साइकिल से या ड्रोन के जरिए भी कहीं भी पहुंचाया जा सकता है।

हाई-टेक तकनीक और तेज तैनाती
BHISHM Cube को सिर्फ 12 मिनट में सेटअप किया जा सकता है, जो किसी भी आपदा या युद्ध जैसी स्थिति में बेहद अहम है। इसमें RFID तकनीक के जरिए हर मेडिकल उपकरण को ट्रैक किया जा सकता है, और एक डिजिटल सिस्टम 180 भाषाओं में जानकारी उपलब्ध कराता है। साथ ही इसमें AI और डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल होता है, जिससे रियल-टाइम मॉनिटरिंग और बेहतर मैनेजमेंट संभव होता है।
भारत की ‘मानवीय कूटनीति’ का उदाहरण
यह पहल Project Aarogya Maitri के तहत की गई है, जिसका मकसद जरूरत के समय दुनिया के देशों को तुरंत चिकित्सा सहायता देना है। किर्गिस्तान को यह सिस्टम देकर भारत ने यह साफ कर दिया कि वह सिर्फ रणनीतिक साझेदार ही नहीं, बल्कि संकट में साथ खड़ा रहने वाला दोस्त भी है।
देश
Petrol-Diesel की कीमतों को लेकर सरकार ने दी राहत भरी खबर, अभी नहीं बढ़ेंगे दाम
नई दिल्ली,एजेंसी। पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर चल रही अटकलों के बीच सरकार ने फिलहाल राहत भरी खबर दी है। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने स्पष्ट किया है कि अभी ईंधन की कीमतें बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है और सरकार उपभोक्ताओं को राहत देने पर ध्यान दे रही है।

कीमतों पर फिलहाल नहीं बढ़ोतरी
सरकार के मुताबिक मौजूदा परिस्थितियों में आम जनता पर बोझ न बढ़े, यह प्राथमिकता है। हालांकि, वैश्विक हालात को देखते हुए भविष्य में बदलाव से इनकार भी नहीं किया गया है।
होरमुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही घटी
युद्ध शुरू होने के बाद से होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी गिरावट आई है। युद्ध से पहले जहां इस रूट पर करीब 138 जहाज रोजाना चलते थे, वहीं अब यह संख्या घटकर सिर्फ 67 रह गई है। यह गिरावट समुद्री ट्रैफिक में बड़ी कमी को दिखाती है और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन पर इसका असर पड़ सकता है।
भारतीय जहाजों ने बनाई दूरी
अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा कारणों से हाल के दिनों में इस रूट से कोई भी भारतीय ध्वज वाला कंटेनर जहाज नहीं गुजरा है। इससे साफ है कि कंपनियां जोखिम से बचने के लिए वैकल्पिक रास्ते तलाश रही हैं।
विदेशी जहाजों का डेटा सीमित
सरकार के अनुसार विदेशी जहाजों की आवाजाही से जुड़ा डेटा व्यावसायिक होता है, इसलिए इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।
भारतीय नाविक सुरक्षित
सरकार ने भरोसा दिलाया है कि मौजूदा तनाव के बावजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और किसी दुर्घटना की सूचना नहीं है।
देश
एसईजेड इकाइयों से घरेलू क्षेत्र में आए माल का निर्यात होने पर मिलेगा शुल्क रिफंड
नई दिल्ली, एजेंसी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) में स्थित इकाइयों से घरेलू क्षेत्र में शुल्क अदा कर भेजे गए माल को बाद में निर्यात किए जाने की स्थिति में ‘आयातित माल’ माना जाएगा और उस पर भी शुल्क वापसी (ड्यूटी ड्रॉबैक) का लाभ मिलेगा। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने सीमा शुल्क अधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि एसईजेड इकाइयों से घरेलू शुल्क क्षेत्रों (डीटीए) में शुल्क अदा कर भेजे गए माल को यदि बाद में निर्यात किया जाता है, तो उसे सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 की धारा 74 के तहत आयातित माल माना जाएगा।

निर्देश में कहा गया है कि अब तक कुछ क्षेत्रीय कार्यालयों में अलग-अलग तरीके अपनाए जा रहे थे। कुछ जगहों पर एसईजेड से डीटीए में भेजे गए माल को आयात नहीं माना जा रहा था, जिसके कारण ड्यूटी ड्रॉबैक के दावों को अस्वीकार किया जा रहा था। इसी असमानता को दूर करने के लिए यह स्पष्टीकरण जारी किया गया है। सीबीआईसी ने कहा, “जहां एसईजेड इकाई से डीटीए में माल लागू शुल्कों के भुगतान के बाद भेजा गया हो और बाद में उसका पुनः निर्यात किया जाए, उसे शुल्क रिफंड के लिहाज से आयातित माल माना जाएगा।” इस कदम को शोध संस्थान ‘ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव’ (जीटीआरआई) ने ‘स्वागत योग्य और न्यायसंगत’ बताते हुए कहा है कि यह निर्देश विभिन्न सीमा शुल्क कार्यालयों में चल रही अलग-अलग प्रक्रियाओं को समाप्त करेगा और अनावश्यक विवादों को कम करेगा।
जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, “इससे निर्यातकों को राहत मिलेगी क्योंकि पहले से शुल्क चुका चुके माल पर दोबारा निर्यात के समय फंसी राशि वापस मिल सकेगी। इससे नकदी प्रवाह बेहतर होगा और व्यापारिक अनिश्चितता कम होगी।” भारतीय निर्यातकों के निकाय ‘फियो’ ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह लंबे समय से लंबित अस्पष्टता को दूर करता है और खासकर एमएसएमई निर्यातकों के लिए राहत लेकर आएगा। फियो ने कहा कि इस प्रावधान के समान और सुचारु क्रियान्वयन से निर्यात प्रक्रिया अधिक सरल और सुविधाजनक बनेगी तथा व्यापारियों को अधिक निश्चितता मिलेगी।
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