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कोरबा

मोदी सरकार के 12 वर्षों की उपलब्धियों को प्रदर्शित करती तीन दिवसीय छायाचित्र प्रदर्शनी संपन्न

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वरिष्ठ नागरिकों ने प्रदर्शनी की सराहना, कहा-देश की विकास यात्रा और जनकल्याणकारी योजनाओं की मिली विस्तृत जानकारी’’

विकसित भारत के संकल्प और जनकल्याणकारी योजनाओं की उपलब्धियों से रूबरू हुए नागरिक

कोरबा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर कोरबा नगरीय क्षेत्र के स्मृति उद्यान के समीप आयोजित तीन दिवसीय भव्य छायाचित्र प्रदर्शनी आज गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। प्रदर्शनी के अंतिम दिवस जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, वरिष्ठ नागरिकों, विद्यार्थियों तथा बड़ी संख्या में नागरिकों ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं एवं विकास उपलब्धियों की जानकारी प्राप्त की।

प्रदर्शनी का अवलोकन करने पहुंचे वरिष्ठ नागरिक अवध राम, त्रिभुवन लाल यादव, एम.आर. राठौर एवं गिरीश दुबे ने छायाचित्र प्रदर्शनी की सराहना करते हुए कहा कि प्रदर्शनी के माध्यम से उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की विकास यात्रा, जनकल्याणकारी योजनाओं तथा विभिन्न क्षेत्रों में हुए उल्लेखनीय परिवर्तनों की विस्तृत जानकारी प्राप्त हुई। उन्होंने कहा कि छायाचित्रों, तथ्यों एवं प्रदर्शित सामग्री के माध्यम से केंद्र सरकार की योजनाओं के सकारात्मक प्रभावों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है। ऐसी प्रदर्शनी नागरिकों को शासन की उपलब्धियों एवं विकास कार्यों से जोड़ने के साथ-साथ जनजागरूकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

प्रदर्शनी अवलोकन को पहुंचे कोरबा के गोरेलाल साहू ने छायाचित्र प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने विकास के नए आयाम स्थापित किए हैं। गरीब कल्याण, महिला सशक्तिकरण, कौशल विकास, किसानों की आय वृद्धि तथा आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हुए हैं। उन्होंने नागरिकों से शासन की विभिन्न योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर पात्रतानुसार उनका लाभ उठाने का आग्रह किया। इसी प्रकार नगरवासी उमेष कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने बीते 12 वर्षों में विकास, सुशासन, आधारभूत संरचना, डिजिटल क्रांति, सामाजिक सुरक्षा एवं जनकल्याण के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। आज भारत विश्व पटल पर एक सशक्त, आत्मनिर्भर एवं विकसित राष्ट्र के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की योजनाओं से किसानों, महिलाओं, युवाओं, श्रमिकों तथा वंचित वर्गों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है और देश विकसित भारत के संकल्प की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना तथा आरडीएसएस योजना सहित विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन पहलों ने ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में जीवन स्तर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

जिज्ञासु छात्राओं ने चित्रों में देखी देश के विकास की कहानी

प्रदर्शनी में पहुंचे आदिवासी कन्या आश्रम की छात्राओं के लिए यह केवल तस्वीरों का अवलोकन नहीं, बल्कि देश के विकास की प्रेरणादायक यात्रा को समझने का अवसर था। अधीक्षिका ने चित्रों के माध्यम से पिछले 12 वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में हुए परिवर्तन, जनकल्याणकारी योजनाओं और देश की उपलब्धियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। छात्राएं बड़ी उत्सुकता और ध्यान से हर जानकारी को सुनती रहीं। इस दौरान जब शिक्षिका ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चित्र दिखाया, तो छात्राओं के चेहरे खिल उठे। उन्होंने मुस्कुराते हुए तुरंत कहा, “ये हमारे देश के प्रधानमंत्री जी हैं।” उनकी सहज पहचान और उत्साह यह दर्शा रहा था कि नई पीढ़ी देश के विकास और नेतृत्व के प्रति जागरूक होने के साथ-साथ उससे जुड़ाव भी महसूस कर रही है।

स्मृति उद्यान के समीप आयोजित इस प्रदर्शनी में केंद्र सरकार की प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं, विकास परियोजनाओं एवं उपलब्धियों को आकर्षक छायाचित्रों, तथ्यात्मक आंकड़ों और सफलता की कहानियों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी में प्रधानमंत्री जनधन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, डिजिटल इंडिया अभियान सहित विभिन्न योजनाओं के सकारात्मक प्रभावों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। प्रदर्शनी का विशेष आकर्षण छत्तीसगढ़ में केंद्र सरकार की विभिन्न विकास परियोजनाओं एवं जनकल्याणकारी योजनाओं की झलक रही, जिसमें सड़क, रेलवे, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, जल संरक्षण, डिजिटल सेवाओं तथा आधारभूत संरचना विकास से जुड़े कार्यों को विस्तार से प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी के माध्यम से नागरिकों को यह जानने का अवसर मिला कि विभिन्न योजनाओं ने समाज के विभिन्न वर्गों के जीवन में किस प्रकार सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य किया है। इस दौरान आगंतुकों को जनसंपर्क विभाग की मासिक पत्रिका ‘जनमन’ सहित अन्य प्रचार सामग्री का भी वितरण किया गया। तीन दिवसीय इस प्रदर्शनी को नागरिकों ने ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायी एवं जन-जागरूकता की दृष्टि से उपयोगी पहल बताते हुए इसकी सराहना की।

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कोरबा

Breaking:कटघोरा डीएफओ कुमार निशांत का मरवाही ट्रांसफर

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निशांत का भ्रष्टाचार और तानाशाही से रहा नाता

कोरबा/कटघोरा। करीब 02 साल से अधिक समय तक कटघोरा वनमंडल में पदस्थ रहे आईएफएस कुमार निशांत का स्थानांतरण मरवाही डीएफओ के रूप में हो गया है।
उनके स्थान पर शासन ने आईएफएस जितेन्द्र कुमार उपाध्याय को पोस्टिंग दी है। श्री उपाध्याय इसके पूर्व धरमजयगढ़ में डीएफओ थे।
निशांत का भ्रष्टाचार और तानाशाही से रहा नाता
कटघोरा में पदस्थ कुमार निशांत का कटघोरा डीएफओ बनते ही तानाशाही और भ्रष्टाचार से नाता रहा। कटघोरा डीएफओ रहते कैम्पा मद में भारी गड़बड़ी की शिकायत रही और विधानसभा तक इसकी गूंज रही। एक विधायक के सवाल के जवाब में छत्तीसगढ़ के उन आईएफएस अधिकारियों का नाम वनमंत्री केदार कश्यप ने बताया, जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत और जांच चल रही है, जिनमें कटघोरा डीएफओ कुमार निशांत का नाम शामिल है। भ्रष्टाचार की शिकायत और जांच चलने के बाद भी कुमार निशांत को सालों तक अभयदान मिलता रहा और काफी समय कटघोरा डीएफओ के रूप में बिताने के बाद 08 अगस्त को उनका स्थानांतरण मरवाही वनमंडल में डीएफओ के रूप में हुआ है। भ्रष्टाचार में जहां वे चर्चा में रहे, वहीं वे तानाशाही के लिए भी चर्चित रहे।
जब जिला पंचायत अध्यक्ष ने कहा-कटघोरा डीएफओ कार्यालय में जा कर लेंगे बैठक
उनकी हिटलरशाही आम जनता के लिए तो चर्चा का विषय रहा ही, वे जनप्रतिनिधियों के निर्देशों की भी अवहेलना करने में भी चर्चित रहे। त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव को एक साल से अधिक हो गए। एक साल में जिला पंचायत की सामान्य सभा जितनी बार हुई, उसमें एक बार भी कटघोरा डीएफओ कुमार निशांत नहीं पहुंचे। जिला पंचायत सीईओ एवं अध्यक्ष डॉ. पवन के निर्देशों को भी वे हवा में उड़ा देते रहे और अपने अधीनस्थ अधिकारियों-कर्मचारियों के बीच कहते-फिरते रहे कि उनका कोई कुछ बिगाड़ नहीं सकता। हुआ भी यही, वे राजा की तरह दम्भ के साथ कटघोरा में अपना पूरा कार्यकाल बिताया और अब 08 अगस्त को शासन स्तर पर हुए तबादला आदेश में वे मरवाही जा रहे हैं।

एक साल की एक भी सामान्य सभा में डीएफओ कुमार निशांत की उपस्थिति न होने पर कई बार कटघोरा डीएफओ को नोटिस दिया गया, लेकिन कोई प्रभाव नहीं पड़ा, इससे खिन्न हो कर जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह ने कहा कि अबकी बार कटघोरा डीएफओ उपस्थित नहीं होते, तो वे सभी सदस्यों के साथ कटघोरा वनमंडल कार्यालय में डीएफओ की बैठक लेंगे, लेकिन ऐसा नहीं कर सके।
सीएम तक हुई शिकायत, लेकिन नौकरशाही हावी रही
डॉ. पवन सिंह सहित जिला पंचायत सदस्यों, भाजपा नेताओं ने कटघोरा डीएफओ कुमार निशांत की तानाशाही एवं भ्रष्टाचार की शिकायत लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के पास पहुंचे, लेकिन महीनों-महीनों बीत गए, लेकिन उन पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। जिला पंचायत सीईओ के आदेश को मानने के लिए वे अपने आपको बाध्य नहीं मानते थे, क्योंकि वे फ्रेश आईएफएस हैं, जबकि जिला पंचायत सीईओ प्रमोटिव एडीएम/जिला पंचायत सीईओ थे।

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कोरबा

अलर्ट जारी, कभी भी खोला जा सकता है मिनीमाता बांगो जलाशय का गेट

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मिनीमाता बांगो जलाशय में जल भराव 89.55 प्रतिशत

कोरबा। कोरबा जिले  के मिनीमाता बांगो जलाशय में बारिश के साथ ही जलभराव में वृद्धि हुई है। बांगो जलाशय के कार्यपालन अभियंता एस.के.भारती से प्राप्त जानकारी के अनुसार आज की स्थिति में बांगो जलाशय में जलभराव  89.55 प्रतिशत है। जलाशय में पानी की आवक बढ़ने पर कभी भी मिनीमाता जलाशय का गेट खोलकर पानी बहाया जा सकता है।

बाढ़ क्षेत्र से परिसम्पतियां हटाने की सूचना जारी

वर्षाकाल 2026 के दौरान आवश्यकता होने पर मिनी माता बांगो बांध माचाडोली से हसदेव नदी में पानी प्रवाहित किया जायेगा। कार्यपालन अभियंता एस.के.भारती मिनीमाता हसदेव बांगो बांध संभाग क्रमांक 03 माचाडोली  ने सर्व साधारण एवं कार्य संबंधितों को सूचित किया है कि मिनीमाता बांगो जलाशय में बारिश के साथ ही जलभराव में वृद्धि हुई है। आज की स्थिति में बांगो जलाशय में जल भराव  मीटर 89.55 प्रतिशत है।

उक्त बांध से नीचे, हसदेव नदी के किनारे, बाढ़ क्षेत्र में स्थापित चल-अचल सम्पत्ति सुरक्षित स्थानों पर ले जायें। बाढ़ क्षेत्र में स्थापित खनिज खदान ठेकेदार, औद्योगिक इकाईयां, संस्थानों आदि को भी सूचित किया गया है कि वे अपनी परिसम्पत्तियों को बाढ़ क्षेत्र से बाहर कर लेवें। कार्यपालन अभियंता मिनीमाता बांगो बांध ने कहा है कि अकस्मात बाढ़ से होने वाली किसी भी प्रकार की क्षति के लिए जल संसाधन विभाग उत्तरदायी नहीं होगा। कार्यपालन अभियंता मिनीमाता बांगो बांध ने बाढ़ क्षेत्र में आने वाले गांवों में बाढ़ चेतावनी की मुनादी करवाने के भी निर्देश दिए गए हैं।

कार्यपालन अभियंता ने बताया कि बाढ़ क्षेत्र में आने वाले संभावित गांवो में बांगो, चर्रा, पोड़ी उपरोड़ा, कोनकोना, लेपरा, टुनियाकछार, पाथा, गाड़ाघाट,  छिनमेर, कछार, कलमीपारा,  सिलीयारीपारा, जूनापारा, तिलाईडाड, डुगुपारा, टुंगुमांड़ा, छिर्रापारा, मछलीबाटा, कोरियाघाट, धनगांव, डोंगाघाट, नरमदा, औराकछार, सोनगुड़ा, जेलगांव, झाबू, नवागांव, तिलसाभाटा, लोतलोता, स्याहीमुड़ी, कोडा, हथमार,  झोरा, सिरकीकला आदि शामिल हैं।

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कोरबा

जर्जर सड़क और क्षतिग्रस्त पुल को लेकर चक्काजाम:15 दिन का अल्टीमेटम खत्म होने पर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन

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कोरबा। कोरबा के कटघोरा विधानसभा क्षेत्र में बुंदेली से चांदनी चौक तक जर्जर पीएमजीएसवाई सड़क और क्षतिग्रस्त खोलार नदी के पुल को लेकर जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी (जेसीपी) ने शुक्रवार, 7 अगस्त को चांदनी चौक पर चक्काजाम किया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में ग्रामीण भी शामिल हुए। इससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। पुलिस और जिला प्रशासन की टीम मौके पर मौजूद रही।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर जगह-जगह बड़े गड्ढे हैं और बारिश का पानी भर गया है। इसके कारण सड़क तालाब जैसी हो गई है। ग्रामीणों, किसानों और स्कूली बच्चों को रोज जान जोखिम में डालकर इस रास्ते से गुजरना पड़ रहा है।

जेसीपी ने बताया कि सड़क और पुल की समस्या को लेकर पहले प्रशासन को 15 दिन का समय दिया गया था। समय पूरा होने के बाद भी कोई ठोस काम शुरू नहीं हुआ। इसके बाद पार्टी ने चांदनी चौक पर चक्काजाम कर विरोध जताया।

पुल के लिए 5.36 करोड़ का प्रस्ताव

जेसीपी के जिला सचिव महावीर यादव ने बताया कि खोलार नदी पर नए पुल के निर्माण के लिए सीजीआरआरडीए कोरबा ने डीएमएफटी मद से 536.01 लाख रुपए का प्राक्कलन तैयार कर जिला प्रशासन को भेजा है। यह प्रस्ताव कई महीनों से मंजूरी के इंतजार में है।

घोषणा और शिकायत के बाद भी काम शुरू नहीं

महावीर यादव ने कहा कि उपमुख्यमंत्री की घोषणा और सीएम हेल्पलाइन में शिकायत के बाद भी मौके पर काम शुरू नहीं हुआ है। उन्होंने इसे प्रशासन की लापरवाही बताया। उनका कहना है कि खराब सड़क और पुल के कारण रोजाना स्कूली बच्चों, किसानों और आम लोगों को परेशानी हो रही है।

अस्पताल और मंडी जाने में भी परेशानी

ग्रामीणों के अनुसार, यह सड़क कई गांवों को शहर से जोड़ती है। पुल टूटने और सड़क खराब होने से मरीजों को अस्पताल ले जाने, बच्चों को स्कूल पहुंचाने और किसानों को अपनी फसल मंडी तक ले जाने में काफी दिक्कत हो रही है।

काम शुरू होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान

जेसीपी ने कहा है कि सड़क की मरम्मत और खोलार नदी पर नए पुल का निर्माण शुरू होने तक आंदोलन जारी रहेगा। पार्टी ने किसानों, युवाओं और आम लोगों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की थी, जिसे स्थानीय लोगों का समर्थन मिला।

नियमित नौकरी की मांग को लेकर ग्रामीणों ने राखड़ डैम बंद किया

कोरबा में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ताप विद्युत गृह के राखड़ बांध से प्रभावित ग्रामीणों ने शुक्रवार को डैम बंद कर विरोध प्रदर्शन किया। गोढ़ी, बेन्द्रकोना और पडरीपानी के ग्रामीण 2007 में अधिग्रहित जमीन के बदले अब तक नियमित नौकरी नहीं मिलने से नाराज हैं।

ग्रामीण राखड़ डैम पंडोपानी पहुंचे और डैम का काम बंद कराकर धरने पर बैठ गए। ग्रामीणों के अनुसार, करीब 46 परिवार ऐसे हैं, जिन्हें जमीन अधिग्रहण के बाद अब तक स्थायी नौकरी नहीं मिली है।

प्रभावित ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें नियमित नौकरी देने के बजाय सिर्फ तीन साल की संविदा नौकरी का प्रस्ताव दिया जा रहा है। कुछ लोगों ने यह नौकरी स्वीकार कर ली है, जबकि कई ग्रामीणों ने इसे लेने से इनकार कर दिया है।

2010 में नियमित नौकरी देने की हुई थी घोषणा

ग्रामीणों के अनुसार, 29 नवंबर 2010 को तत्कालीन मुख्यमंत्री ने घोषणा की थी कि राखड़ बांध के लिए अधिग्रहित जमीन के बदले 308 प्रभावित परिवारों के एक-एक सदस्य को CSPGCL में नियमित नौकरी दी जाएगी। इस घोषणा को संचालक मंडल से भी मंजूरी मिलने की बात ग्रामीणों ने कही है।

308 में से आधे से ज्यादा परिवारों को मिली नौकरी

प्रभावितों का कहना है कि 308 परिवारों में से आधे से ज्यादा को ही अब तक नौकरी मिल पाई है। बाकी परिवारों को नियमित पद देने के बजाय तीन साल की संविदा नौकरी दी जा रही है। इसमें हर साल अनुबंध बढ़ाने की बात है, लेकिन तीन साल बाद नियमित नौकरी देने की कोई गारंटी नहीं है।

जमीन गई, अब रोजगार भी नहीं

ग्रामीणों का कहना है कि 2007 में उनकी पुश्तैनी जमीन अधिग्रहित की गई थी। यही जमीन उनके परिवार की आय का मुख्य साधन थी। जमीन जाने के बाद परिवारों के सामने रोजी-रोटी की समस्या खड़ी हो गई है। उनका कहना है कि उन्हें भी पहले नौकरी पा चुके प्रभावित परिवारों की तरह नियमित पद दिया जाए।

15 साल से सिर्फ आश्वासन मिलने का आरोप

किसानों ने कहा कि वे पिछले 15 साल से नौकरी के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं। कई बार ज्ञापन दिए गए और बैठकें भी हुईं, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों ने नियमित नौकरी नहीं मिलने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी है।

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