खेल
कौन होगा भारत का अगला टी-20 कप्तान:पंड्या की दावेदारी सबसे मजबूत; पंत, सूर्या और बुमराह भी रेस में
नई दिल्ली, एजेंसी। 29 जून को भारत ने दूसरी बार टी-20 वर्ल्ड कप जीता…चैंपियन बनते ही टीम के 3 दिग्गजों ने टी-20 इंटरनेशनल को अलविदा कह दिया, इनमें विराट कोहली और रवींद्र जडेजा के साथ कप्तान रोहित शर्मा भी शामिल हैं।
अब हमें अगला टी-20 वर्ल्ड कप कौन सा कप्तान जिताएगा…क्या वह फाइनल चेंजिंग कैच पकड़ने वाले सूर्यकुमार यादव होंगे। खतरनाक साबित हो रहे क्लासन और मिलर को पवेलियन भेजने वाले हार्दिक पंड्या होंगे, प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट जसप्रीत बुमराह या फिर मौत को मात देकर वर्ल्ड चैंपियन बनने वाले मिरेकल मैन ऋषभ पंत होंगे।
कौन होगा जो 2026 में भारत और श्रीलंका की मेजबानी में होने वाले टी-20 वर्ल्ड कप में टीम इंडिया की कप्तानी करेगा। इस सवाल का जवाब हम इस स्टोरी में जानने की कोशिश करेंगे…
1. हार्दिक पंड्या
हार्दिक पंड्या कप्तान बनने के दावेदारों की रेस में सबसे आगे हैं। उनके पास टी-20 इंटरनेशनल में 100 मैचों का अनुभव है, जो अन्य किसी दावेदार के पास नहीं है। पंड्या ने 16 टी-20 इंटरनेशनल मैचों में भारत की कप्तानी की है, इनमें से टीम ने 10 मुकाबले जीते।
2 पॉइंट में दावेदारी
- गुजरात को पहले सीजन में IPL चैंपियन बनाया हार्दिक ने अपनी लीडरशिप स्किल से गुजरात टाइटंस को पहले ही सीजन में IPL 2022 का चैंपियन बना दिया। 2023 में भी खुद को साबित किया और टीम को लगातार दूसरे फाइनल में पहुंचाया, हालांकि टीम रनर-अप रही।
- 90% बाइलैटरल सीरीज में भारत को जीत दिलाई पंड्या ने 5 बाइलैटरल सीरीज में भारतीय टीम की कप्तानी की है। इनमें से भारतीय टीम ने 4 में जीत हासिल की है। टीम को सिर्फ एक सीरीज में हार का सामना करना पड़ा।
- 2 कमजोर पॉइंट्स
- मुंबई इंडियंस ने हार्दिक को नया कप्तान बनाया। फ्रेंचाइजी ने उन्हें 15 करोड़ रुपए में गुजरात से ट्रेड किया, लेकिन वे लीडरशिप संभाल नहीं सके और टीम IPL पॉइंट्स टेबल के निचले पायदान पर रही।
- पंड्या टी-20 इंटरनेशनल में अब तक 1492 रन बना चुके हैं, लेकिन अपनी कप्तानी में उनका प्रदर्शन कमजोर रहता है। वे अपनी कप्तानी में 296 रन ही बना सके हैं।
- 2. ऋषभ पंत
- जीत का जबर्दस्त जज्बा पंत को भारतीय कप्तानों की रेस का दावेदार बनाता है। वे आज से 18 महीने पहले अस्पताल में थे और जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे थे, उनका कार एक्सीडेंट हुआ था। तब किसी ने नहीं सोचा था कि पंत भारत की टी-20 वर्ल्ड कप विनिंग टीम का हिस्सा होंगे।
- 26 साल के इस युवा ने अपनी मेहनत के दम पर महज डेढ़ साल में इंटरनेशनल क्रिकेट में वापसी की। उन्होंने टी-20 वर्ल्ड कप में पाकिस्तान के खिलाफ 42 रन की पारी खेलकर भारत को 119 के स्कोर तक पहुंचाया था।
- ऋषभ टी-20 इंटरनेशनल में 74 मैच खेल चुके हैं और 1158 रन बनाए हैं। उन्होंने 5 मैचों में भारत की कप्तान की और दो जीते। एक बेनतीजा रहा।
- IPL में कप्तानी का अनुभव, दिल्ली को फाइनल में पहुंचाया था पंत के पास IPL मैचों में कप्तानी का अच्छा अनुभव है। वे 2021 में श्रेयस के चोटिल होने के बाद दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान बने और टीम को फाइनल में पहुंचाया था।
- विकेट के पीछे से गेम चलाते हैं, धोनी जैसी खूबी पंत विकेट के पीछे से गेम चलाते रहते हैं। उनमें धोनी जैसी खूबियां हैं। कम उम्र का होने के कारण बोर्ड पंत को कैप्टन बना सकता है, क्योंकि फैंस के सेंटीमेंट्स उनके साथ हैं।
- पंत पर लापरवाही के आरोप लगते रहे हैं। वे गेम के दौरान कई बार गैरजिम्मेदाराना शॉट खेलकर आउट होते हैं।
- 2016 के अंडर-19 वर्ल्ड कप से पहले एशिया कप के लिए भारतीय टीम के कप्तान बनाए गए थे, लेकिन कुछ कारणों से उन्हें कप्तानी से हटा दिया गया था।
- 3. सूर्यकुमार यादव
- सूर्यकुमार यादव अपने दमदार प्रदर्शन से टीम इंडिया का कैप्टन बनने की दावेदारी ठोंक रहे हैं। 68 मैचों में 167.74 के स्ट्राइक रेट से 2340 रन बना चुके हैं। वे अपनी कप्तानी में एक सेंचुरी जमा चुके हैं। सूर्या की कप्तानी में भारत ने 7 में से 5 मैच जीते हैं। सूर्या अपनी कप्तानी में 164.83 की स्ट्राइक रेट से 300 रन बना चुके हैं।
- मुंबईकर होने का फायदा, यहां से 4 कप्तान सूर्या को मुंबईकर होने का फायदा मिल सकता है। भारतीय कप्तान रोहित शर्मा भी मुंबई के हैं। मुंबई के 4 खिलाड़ी भारतीय टीम की कप्तानी कर चुके हैं।
- 3 सीरीज में कप्तानी, एक भी नहीं हारे सूर्यकुमार यादव बोर्ड का भरोसा जीत रहे हैं। भारतीय बोर्ड ने उन्हें बतौर कप्तान 3 असाइनमेंट दिए हैं और वे किसी में फेल नहीं हुए हैं। उनका खुद की कप्तानी में रिकॉर्ड भी अच्छा है।
- सूर्यकुमार के पास कप्तानी का उतना अनुभव नहीं है, जितना पंड्या और पंत के पास है। उन्होंने 7 टी-20 इंटरनेशनल और एक IPL मैच में कप्तानी की है। इस मामले में वे मात खा सकते हैं।
- सूर्यकुमार का ऐज फैक्टर, उनके फेवर में नहीं है। वे 33 साल के हो चुके हैं, ऐसे में बोर्ड ऐसे खिलाड़ी को कप्तान बनाना चाहेगा, जो कुछ साल टीम की कमान संभाल सके।
- 4. जसप्रीत बुमराह
- जसप्रीत बुमराह, भारतीय टीम में तुरुप का इक्का। 70 मैचों में 89 विकेट ले चुके हैं। इनके नाम कई रिकॉर्ड हैं, लेकिन सिर्फ 2 मुकाबलों में ही भारतीय टीम की कप्तानी की है और दोनों ही मुकाबले जीते हैं। बुमराह अपनी कप्तानी में खेले 2 मुकाबलों में 4 विकेट ही ले सके हैं।
- सीनियॉरिटी का फायदा रोहित, कोहली और जडेजा के रिटायरमेंट के बाद बुमराह ही सबसे सीनियर हैं। इसलिए बोर्ड बुमराह के नाम पर विचार कर सकता है।
- 100% सक्सेस रेट है बुमराह को दो बार भारतीय टीम का कप्तान बनाया गया है और उन्होंने दोनों बार टीम इंडिया को जीत दिलाई है, जो बुमराह की दावेदारी मजबूत कर रही है।
- WTC 2023-25 तक कप्तानी कर सकते हैं रोहित
- आने वाले एक-दो साल में भारतीय बोर्ड को टीम के लिए टेस्ट और वनडे कप्तान की तलाश भी करनी होगी, क्योंकि टी-20 फॉर्मेट से संन्यास लेने के बाद रोहित WTC 2023-25 सीजन के फाइनल तक भारतीय टीम की कप्तानी कर चुके हैं। उनके 2027 वनडे वर्ल्ड कप में कप्तानी करने पर संदेह है, क्योंकि तब वे 40 साल के होंगे।
- फिलहाल, रोहित अगले साल होने जा रही चैंपियंस ट्रॉफी में भारतीय टीम की कमान संभालते नजर आएंगे। पूरी तरह संभव है कि 37 साल के रोहित शर्मा का बतौर भारतीय कप्तान और प्लेयर यह आखिरी ICC टूर्नामेंट हो।
खेल
पहली बार छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी का इंडिया A में चयन:आयुष पांडेय श्रीलंका के खिलाफ खेलेंगे, 25 जून से होने वाले 4 दिवसीय-सीरीज में दिखेंगे
रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ क्रिकेट के लिए बड़ी उपलब्धि सामने आई है। प्रदेश के रणजी खिलाड़ी और बाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज आयुष पांडे का चयन भारतीय ए टीम में हुआ है। राज्य में यह पहली बार है, जब किसी खिलाड़ी का चयन भारतीय ए टीम के लिए हुआ है।

आयुष 25 जून 2026 से शुरू होने वाली श्रीलंका ए के खिलाफ चार दिवसीय सीरीज में भारत ए टीम का हिस्सा होंगे। आयुष पांडे ने पिछले रणजी ट्रॉफी सीजन में छत्तीसगढ़ की ओर से शानदार प्रदर्शन किया था।
उन्होंने 7 मैचों की 13 पारियों में 57.30 की औसत से 573 रन बनाए। इस दौरान उनके बल्ले से 2 शतक और 2 अर्धशतक निकले। उनका सर्वोच्च स्कोर 183 रन रहा। रणजी ट्रॉफी में लगातार अच्छे प्रदर्शन के दम पर आयुष का चयन दलीप ट्रॉफी के लिए भी हुआ था।
वहां भी उन्होंने अपनी बल्लेबाजी से प्रभावित किया। दलीप ट्रॉफी में 2 मैचों की 3 पारियों में उन्होंने 53.92 की औसत से 102 रन बनाए।
भारत A टीम क्या है?
भारत A टीम को भारतीय क्रिकेट की “दूसरी राष्ट्रीय टीम” या राष्ट्रीय टीम की फीडर टीम कहा जाता है। इसमें घरेलू क्रिकेट (रणजी ट्रॉफी, दलीप ट्रॉफी, विजय हजारे आदि) में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को मौका दिया जाता है।
इसका मुख्य उद्देश्य सीनियर भारतीय टीम के संभावित खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर जैसी प्रतिस्पर्धा में परखना होता है।

भारत A टीम का रोल क्या होता है?
- सीनियर भारतीय टीम के लिए खिलाड़ियों की तैयारी करना।
- घरेलू क्रिकेट और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के बीच की खाई को कम करना।
- चयनकर्ताओं को यह देखने का मौका देना कि खिलाड़ी विदेशी या मजबूत विपक्ष के खिलाफ कैसा प्रदर्शन करता है।
- टेस्ट क्रिकेट के संभावित खिलाड़ियों को लंबे प्रारूप के मैचों में परखना।
खेल
कवर्धा: उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने राष्ट्रीय पदक विजेता बेसबॉल खिलाडि़यों का किया सम्मान
कवर्धा के पांच खिलाडि़यों ने राष्ट्रीय प्रतियोगिता में जीते 3 स्वर्ण और 2 रजत पदक


कवर्धा। ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित 31वीं राष्ट्रीय सब जूनियर बेसबॉल बालक एवं बालिका प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश का गौरव बढ़ाने वाले कवर्धा के खिलाडि़यों से उप मुख्यमंत्री एवं विधायक कवर्धा विजय शर्मा ने अपने कवर्धा स्थित निवास कार्यालय में मुलाकात कर उन्हें शुभकामनाएं दीं तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

एमेच्योर बेसबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया के तत्वावधान में 24 से 29 मई तक आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रयास स्पोर्ट्स अकादमी कवर्धा के पांच खिलाडि़यों का छत्तीसगढ़ टीम में चयन हुआ था। इनमें बालक वर्ग से चंद्रेश कोर्राम, पंकज मेरावी और शुभम सेन तथा बालिका वर्ग से चांदनी साहू और जयश्री घृतलहरे शामिल थीं। प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ की बालक टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया, जबकि बालिका टीम ने रजत पदक जीतकर प्रदेश का नाम रोशन किया।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने खिलाडि़यों को बधाई देते हुए कहा कि ग्रामीण अंचलों से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करना पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और उन्हें बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत है। खिलाडि़यों की यह सफलता आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनेगी।
अकादमी के प्रशिक्षक राजा जोशी ने बताया कि खिलाडि़यों का चयन राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर हुआ था। राष्ट्रीय प्रतियोगिता के दौरान छत्तीसगढ़ की बालक टीम ने मध्यप्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, राजस्थान और दिल्ली जैसी मजबूत टीमों को हराकर फाइनल में महाराष्ट्र को 6-2 से पराजित कर राष्ट्रीय खिताब अपने नाम किया। फाइनल मुकाबले में चंद्रेश कोर्राम ने शानदार होमरन लगाकर टीम की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में तीन होमरन लगाए।
वहीं बालिका वर्ग में छत्तीसगढ़ टीम ने दिल्ली, तेलंगाना और मेजबान ओडिशा को हराकर फाइनल में प्रवेश किया। हालांकि फाइनल मुकाबले में महाराष्ट्र के खिलाफ टीम को हार का सामना करना पड़ा, लेकिन रजत पदक जीतकर खिलाडि़यों ने शानदार प्रदर्शन किया। चांदनी साहू और जयश्री घृतलहरे ने टीम की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान दिया। खिलाडि़यों की इस राष्ट्रीय उपलब्धि पर खेल प्रेमियों, अभिभावकों और जिलेवासियों में उत्साह का माहौल है। सभी ने खिलाडि़यों एवं उनके प्रशिक्षकों को बधाई देते हुए भविष्य में और बड़ी सफलताओं की शुभकामनाएं दी हैं।
खेल
20 साल के प्रज्ञानानंदा ने रचा इतिहास, प्रतिष्ठित ‘नार्वे शतरंज’ का खिताब जीतने वाले बने पहले भारतीय
ओस्लो/नई दिल्ली/चेन्नई, एजेंसी। भारतीय ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानानंदा (R Praggnanandhaa) ने वैश्विक शतरंज की दुनिया में एक नया इतिहास रच दिया है। उन्होंने सबसे कड़े और प्रतिष्ठित टूर्नामेंटों में से एक ‘नार्वे शतरंज’ (Norway Chess) का खिताब अपने नाम कर लिया है। वह इस महामुकाबले को जीतने वाले देश के पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। अंतिम दौर (लास्ट राउंड) के करो या मरो के मुकाबले में चेन्नई के इस 20 वर्षीय युवा खिलाड़ी ने जर्मनी के दिग्गज विन्सेंट कीमर को क्लासिकल बाजी में मात देकर पूरे 3 अंक बटोरे और एलीट शतरंज की सबसे चमचमाती ट्रॉफी अपने नाम कर ली। प्रज्ञानानंदा ने आखिरी दिन की शुरुआत 15 अंक के साथ तीसरे स्थान से की।

उन्होंने सबसे अहम मौके पर बेहतरीन खेल दिखाया और क्लासिकल बाजी में जीत हासिल करके पूरे तीन अंक बटोरे। इस तरह वे 18 अंक पर पहुंचे और एलीट शतरंज की सबसे प्रतिष्ठित ट्रॉफियों में से एक अपने नाम की। चेन्नई के इस 20 वर्षीय खिलाड़ी ने वह उपलब्धि हासिल की जो 2013 में टूर्नामेंट की शुरुआत के बाद से भारतीय शतरंज के दिग्गज विश्वनाथन आनंद और मौजूदा विश्व चैंपियन डी गुकेश जैसे खिलाड़ी भी हासिल नहीं कर पाए थे।

नार्वे शतरंज में दूसरी बार हिस्सा ले रहे प्रज्ञानानंदा की शुरुआत धीमी रही थी लेकिन टूर्नामेंट के दूसरे हाफ में उन्होंने रफ्तार पकड़ी और लगातार चार जीत हासिल की। प्रज्ञानानंदा के अभियान की सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने नार्वे शतरंज के सात बार के चैंपियन और दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन को क्लासिकल बाजी में दो बार हराया। मौजूदा विश्व चैंपियन गुकेश के अंतिम चरण में खिताब की दौड़ से बाहर होने के बाद प्रज्ञानानंदा ने भारत की उम्मीदों को जीवंत रखा और आखिरकार खिताब अपने नाम किया।
अमेरिकी ग्रैंडमास्टर वेस्ली सो आखिरी दौर से पहले 15.5 अंक के साथ सबसे आगे थे लेकिन अलीरेजा फिरोजा के खिलाफ उनकी क्लासिकल बाजी ड्रॉ रही जिससे मुकाबला आर्मागेडन टाईब्रेक में चला गया। इस नतीजे ने प्रज्ञानानंदा के लिए रास्ता खोल दिया। उन्हें पता था कि कीमर के खिलाफ क्लासिकल बाजी में जीत उन्हें अंक तालिका में सबसे ऊपर पहुंचा देगी और यादगार खिताब दिला देगी।

हालांकि वेस्ली सो ने टाईब्रेक जीत लिया लेकिन उस जीत से उन्हें सिर्फ डेढ़ अंक मिला जिससे उनके कुल अंक 17 रहे जबकि प्रज्ञानानंदा ने 18 अंक के साथ खिताब जीता। खिताब जीतने की उम्मीद के साथ आखिरी दौर में उतरे अलीरेजा 15.5 अंक के साथ तीसरे स्थान पर रहे। मैच के बाद प्रज्ञानानंदा ने बताया कि चेन्नई में अपनी मां से हुई बातचीत ने उनका हौसला बढ़ाया था।
उन्होंने कहा, उन्होंने मेरे से कहा था कि जून का महीना मेरे लिए अच्छा रहेगा और उनकी यह भविष्यवाणी सच साबित हुई। प्रज्ञानंदा ने कहा, मैं एक जून को अलीरेजा के खिलाफ मुकाबले से पहले अपनी मां से बात कर रहा था और वह मुझे कह रही थी, ‘यह नया महीना है, तुम अच्छा खेलोगे।’ यह वैसी ही बात है जो मां हमेशा कहती हैं और फिर मैंने ये चार बाजी जीतीं। मुझे लगता है कि उन्हें कुछ पता था।
इसके बाद प्रज्ञानानंदा ने लगातार चार जीत हासिल कीं। यहां तक कि कार्लसन ने भी प्रज्ञानानंदा की जमकर तारीफ की और पूरे टूर्नामेंट में इस युवा भारतीय खिलाड़ी के प्रदर्शन को ‘शानदार’ बताया। कार्लसन ने प्रसारणकर्ता से कहा, ”यह वाकई कमाल की बात है। यह बहुत ही निर्णायक और जबरदस्त प्रदर्शन था और इससे पता चलता है कि अगर मैं भी इसी तरह का नतीजा हासिल करता तो मेरे लिए भी यह मुमकिन हो सकता था लेकिन हां यह अविश्वसनीय है।

वह एक जबरदस्त फाइटर है और उसे इसका इनाम मिलते देखना अच्छा लगता है। इस बीच गुकेश का निराशाजनक सफर जारी रहा। टूर्नामेंट में उनकी तीसरी मौजूदगी भी उस कामयाबी के बिना खत्म हुई जिसकी उन्हें उम्मीद थी विशेषकर ऐसे साल में जब उन्हें चैलेंजर जावोखिर सिंदारोव के खिलाफ अपने विश्व खिताब का बचाव करना है।
आखिरी दौर में सफेद मोहरों से खेलते हुए कार्लसन ने क्लासिकल बाजी में 20 साल के गुकेश को हराकर तीन अंक हासिल किए। नार्वे का यह दिग्गज हालांकि इस जीत के बावजूद 13 अंक के साथ पांचवें स्थान पर रहा।
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