देश
अब तक 72 लोगों मौत, 31 लापता… 260 से अधिक सड़कें बंद, इन 3 जिलों के लिए ‘रेड अलर्ट’ जारी
मंडी,एजेंसी। हिमाचल प्रदेश में बीते कुछ दिनों से हो रही भारी बारिश के कारण 260 से अधिक सड़कें बंद हैं, जिनमें से 176 अवरुद्ध सड़कें अकेले मंडी जिले में हैं। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।

भारी बारिश का अलर्ट जारी
स्थानीय मौसम विभाग ने रविवार को कांगड़ा, सिरमौर और मंडी जिलों के कुछ स्थानों पर अत्याधिक बारिश की आशंका जताते हुए ‘रेड अलर्ट’ जारी किया है। इसके अलावा ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, चंबा, सोलन, शिमला और कुल्लू जिलों के कुछ क्षेत्रों में भारी से बहुत बारिश की आशंका के मद्देनजर ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया गया है।
पिछले साल मारे गए थे 550 से अधिक लोग
एक दिन में 115.6 मिमी से 204.4 मिमी के बीच हुई वर्षा को बहुत भारी वर्षा की श्रेणी में रखा जाता है, जबकि 204.4 मिमी से अधिक वर्षा को अति भारी वर्षा माना जाता है। पिछले वर्ष भारी मानसूनी बारिश के कारण राज्य में तबाही मची थी, जिसमें 550 से अधिक लोग मारे गए थे।

मौसम विभाग ने लोगों को भूस्खलन, अचानक बाढ़ आने, जलभराव होने और कमजोर ढांचों, फसलों एवं आवश्यक सेवाओं को नुकसान पहुंचने की आशंका के प्रति सतर्क किया है। साथ ही नदी-नालों से दूर रहने और संवेदनशील इलाकों में न जाने की सलाह दी है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) के अनुसार, अब तक लगभग 541 करोड़ रुपए के नुकसान का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि वास्तविक नुकसान करीब 700 करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है, क्योंकि आंकड़े अभी एकत्र किए जा रहे हैं।
SEOC के मुताबिक, बारिश के कारण करीब 300 ट्रांसफॉर्मर और 281 पेयजल योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं। राज्य के कई हिस्सों में शुक्रवार शाम से हल्की से मध्यम बारिश हुई। जोगिंदरनगर में सबसे अधिक 52 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जबकि नाहन और पालमपुर में 28.8 मिमी, पांवटा साहिब में 21 मिमी, ऊना में 18 मिमी, बरठीन में 17.4 मिमी, कांगड़ा में 15.6 मिमी और नैना देवी में 12.6 मिमी बारिश दर्ज की गई।

अब तक 72 लोगों की गई जान
मानसून की शुरुआत 20 जून से हुई थी और तब से अब तक राज्य में कुल 72 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से 45 मौतें बादल फटने, अचानक बाढ़ आने और भूस्खलन जैसी बारिश संबंधी घटनाओं के कारण हुई हैं। मंडी जिले में सबसे अधिक नुकसान दर्ज किया गया है, जहां मंगलवार को बादल फटने, अचानक बाढ़ आने और भूस्खलन की 10 घटनाएं हुईं, जिनमें 14 लोगों की जान चली गई।
31 लोग लापता
इन घटनाओं के बाद 31 लोग अब भी लापता हैं, जिनकी तलाश के लिए अभियान जारी है। मौसम विभाग ने राज्य के कई जिलों में शनिवार, सोमवार और मंगलवार को भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना के मद्देनजर ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है।
देश
नेस्ले इंडिया का चौथी तिमाही में मुनाफा 27% बढ़कर 1,110 करोड़ रुपए
नई दिल्ली,एजेंसी। चॉकलेट, कॉफी, मैगी जैसे दैनिक उपयोग की चीजें बनाने वाली कंपनी नेस्ले इंडिया का 2025-26 की चौथी तिमाही में एकीकृत शुद्ध लाभ 27.18 प्रतिशत बढ़कर 1,110.9 करोड़ रुपए रहा। कंपनी का वित्त वर्ष 2024-25 की चौथी (जनवरी-मार्च) तिमाही में शुद्ध लाभ 873.46 करोड़ रुपए था। नेस्ले इंडिया ने मंगलवार को शेयर बाजार को दी सूचना में बताया कि जनवरी-मार्च तिमाही में उत्पादों की बिक्री से नेस्ले इंडिया का राजस्व 6,723.75 करोड़ रुपए रहा जो सालाना आधार पर 23.42 प्रतिशत अधिक है। चौथी तिमाही में परिचालन आय 6,747.79 करोड़ रुपए रही जबकि एक वर्ष पहले इसी तिमाही में यह 5,503.88 करोड़ रुपए थी।

समीक्षाधीन तिमाही में कुल खर्च सालाना आधार पर 21 प्रतिशत बढ़कर 5,217.48 करोड़ रुपए हो गया। कुल आय (जिसमें अन्य आय भी शामिल है) 22.73 प्रतिशत बढ़कर 6,766.24 करोड़ रुपए रही। वित्त वर्ष 2025-26 की जनवरी-मार्च तिमाही में घरेलू बिक्री 23.11 प्रतिशत बढ़कर 6,445.07 करोड़ रुपए रही। कंपनी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक मनीष तिवारी ने कहा, ”नेस्ले इंडिया ने दहाई अंकों की मजबूत वृद्धि दर्ज की और 6,445 करोड़ रुपए की अपनी अब तक की सबसे अधिक घरेलू बिक्री हासिल की…।”
निर्यात से राजस्व 31 प्रतिशत बढ़कर 278.68 करोड़ रुपए रहा। तिवारी ने कहा कि इस प्रदर्शन में सभी उत्पाद समूहों का योगदान रहा और प्रीमियम उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ाने के साथ-साथ संसाधनों का अनुशासित उपयोग और मजबूत क्रियान्वयन वृद्धि के प्रमुख कारक रहे। पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में नेस्ले इंडिया का लाभ सालाना आधार पर नौ प्रतिशत बढ़कर 3,499.08 करोड़ रुपए रहा। कुल आय 14.46 प्रतिशत बढ़कर 23,194.95 करोड़ रुपए हो गई। तिवारी ने कहा कि पिछले पांच वर्ष में कंपनी के प्रमुख ब्रांड मैगी नूडल्स ने बाजार में अपनी अग्रणी स्थिति बनाए रखी जबकि किटकैट तथा नेस्कैफे की बाजार हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है।
देश
Crude Oil Import: अमेरिका-ईरान युद्ध का असर, कच्चे तेल इंपोर्ट में बड़ी गिरावट
मुंबई, एजेंसी। अमेरिका-ईरान युद्ध का असर अब भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर साफ दिखाई देने लगा है। हालिया शिपिंग आंकड़ों के मुताबिक, मार्च महीने में भारत के कच्चे तेल के आयात में फरवरी के मुकाबले करीब 13% की गिरावट दर्ज की गई है।
इस गिरावट की बड़ी वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ा तनाव है, जो दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक है। इस रूट से आने वाली सप्लाई में भारी कमी आई है और खाड़ी देशों से तेल आयात 61% तक गिरकर लगभग 1.18 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया है। हालात इतने गंभीर हैं कि हाल के दिनों में इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की संख्या बेहद कम हो गई है।

रूस बना नंबर-1 सप्लायर
खाड़ी क्षेत्र से आपूर्ति प्रभावित होने के बाद भारत ने वैकल्पिक स्रोतों की ओर रुख किया है। रूस अब भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बनकर उभरा है। रूस से आयात लगभग दोगुना होकर 2.25 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया है और कुल आयात में उसकी हिस्सेदारी करीब 50% हो गई है।
सऊदी अरब दूसरे नंबर पर
वहीं सऊदी अरब अब दूसरे स्थान पर पहुंच गया है, जबकि अंगोला से आयात बढ़ने के कारण वह तीसरे नंबर पर आ गया है। यूएई और इराक क्रमशः चौथे और पांचवें स्थान पर खिसक गए हैं। इस बदलाव का असर ओपेक पर भी पड़ा है। भारत के कुल तेल आयात में ओपेक देशों की हिस्सेदारी घटकर करीब 29% रह गई है, जो अब तक का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है।
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव ने भारत की तेल आपूर्ति रणनीति को बदल दिया है, जहां खाड़ी देशों पर निर्भरता कम होकर रूस और अन्य विकल्पों की भूमिका तेजी से बढ़ रही है।
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शेयर बाजार में रौनक, हरे निशान पर बाजार बंद, सेंसेक्स 753 अंक उछला
मुंबई, एजेंसी। शेयर बाजार में आज दिनभर तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स 753.03 अंक की तेजी के साथ 79,273.33 के स्तर पर पहुंच गया। निफ्टी में 215.75 अंक की बढ़त रही, ये 24,576.60 के स्तर पर बंद हुआ। रियल्टी और ऑटो शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली। एशियाई बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत और अमेरिका-ईरान तनाव में संभावित नरमी की उम्मीद ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया।

तेजी के कारण
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट क्रूड की कीमतों में कमी आई है। भारत तेल का बड़ा आयातक है, इसलिए तेल सस्ता होने से इकोनॉमी और कंपनियों के मार्जिन को फायदा मिलता है।
ग्लोबल मार्केट से अच्छे संकेत
अमेरिकी बाजारों में मजबूती और एशियाई बाजारों (निक्केई और कोस्पी) में बढ़त का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी
अमेरिका में 10 साल के ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में गिरावट आई है। जब बॉन्ड यील्ड गिरती है, तो विदेशी निवेशक (FIIs) भारतीय जैसे उभरते बाजारों में पैसा लगाना पसंद करते हैं।
सोमवार को मामूली बढ़त
शेयर बाजार में सोमवार, 20 अप्रैल को मामूली बढ़त रही। सेंसेक्स 27 अंक की तेजी के साथ 78,520 पर बंद हुआ। निफ्टी में 11 अंक की बढ़त रही, ये 24,365 के स्तर पर बंद हुआ।
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