कोरबा
नवरात्रि पर कई माता के मंदिरों में नहीं जलेंगे घी के दीप
रायपुर । नवरात्र की शुरुआत गुरुवार (3 अक्टूबर) से हो रही है। इसे लेकर छत्तीसगढ़ के शक्ति पीठों और देवी मंदिरों में तैयारियां हो गई हैं। लाइव दर्शन, श्रद्धालुओं के रुकने सहित अन्य इंतजाम किए गए हैं। मिलावट की आशंका से कई मंदिरों में घी के ज्योति कलश पर रोक लगाई गई है।
बिलासपुर जिले के रतनपुर स्थित महामाया मंदिर महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती को समर्पित है। ये 52 शक्ति पीठों में से एक है। देवी महामाया को कोसलेश्वरी के रूप में भी जाना जाता है, जो पुराने दक्षिण कोसल क्षेत्र की अधिष्ठात्री देवी हैं।
- रतनपुर महामाया मंदिर
- ज्योति कलश : इस बार 31 हजार मनोकामना ज्योति कलश प्रज्ज्वलित किए जाने की तैयारी है। इसमें 5 हजार ज्योति घी की होगी। देवभोग से 18 हजार लीटर घी मंगवाया गया है। श्रद्धालु 700 रुपए में तेल, 2100 रुपए में घी का दीपक जला सकेंगे।
- कैसे जाएं : रतनपुर पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन करीब 25 किमी दूर बिलासपुर में है। उसके बाद आपको वहां से बस या टैक्सी-ऑटो से आना होगा। बिलासपुर सड़क और रेल मार्ग से देश के लगभग सभी बड़े स्टेशनों से जुड़ा हुआ है।
- डोंगरगढ़ की पहाड़ी पर मां बम्लेश्वरी देवी
- डोंगरगढ़ की पहाड़ी पर स्थित मां बम्लेश्वरी देवी का विख्यात मंदिर आस्था का केंद्र है। बड़ी बम्लेश्वरी के समतल पर स्थित मंदिर छोटी बम्लेश्वरी के नाम से प्रसिद्ध है। बम्लेश्वरी शक्ति पीठ का इतिहास करीब 2000 वर्ष पुराना है। इसे वैभवशाली कामाख्या नगरी के रूप में जाना जाता था।
- मां बम्लेश्वरी को मध्य प्रदेश के उज्जयिनी के प्रतापी राजा विक्रमादित्य की कुलदेवी भी कहा जाता है। इतिहासकारों ने इस क्षेत्र को कल्चुरी काल का पाया है। मंदिर की अधिष्ठात्री देवी मां बगलामुखी हैं। उन्हें मां दुर्गा का स्वरूप माना जाता है। उन्हें यहां मां बम्लेश्वरी के रूप में पूजा जाता है।
- ज्योति कलश: पहाड़ के ऊपर 6500 और नीचे मंदिर में 875 आस्था के दीप जलाए जाएंगे। मुख्य मंदिर में 1101 रु. तेल की राशि ली जा रही है। मंदिर में घी के दिये जलाने पर रोक लगाई गई है।
- श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था : मंदिर तक जाने के लिए सीढ़ियों के अलावा रोपवे की सुविधा भी है। ऊपर पेयजल की व्यवस्था, विश्रामालयों के अलावा भोजनालय और धार्मिक सामग्री खरीदने की सुविधा है। पहाड़ी के नीचे 24 घंटे भोजन, भंडारे की व्यवस्था।
- कैसे जाएं : रायपुर से 100, नागपुर से 190 किमी की दूरी पर स्थित है और मुंबई-हावड़ा रेल मार्ग के अंतर्गत आता है। सीधे ट्रेन और बस की सुविधा है।
- सक्ती जिले के चंद्रपुर की मां चंद्रहासिनी
- सक्ती जिले के चंद्रपुर की छोटी सी पहाड़ी के ऊपर विराजित है मां चंद्रहासिनी। मान्यता है कि देवी सती का अधोदन्त (दाढ़) चंद्रपुर में गिरा था। यह मां दुर्गा के 52 शक्ति पीठों में से एक है। यहां बनी पौराणिक और धार्मिक कथाओं की झाकियां, करीब 100 फीट विशालकाय महादेव पार्वती की मूर्ति आदि आने वाले श्रद्धालुओं का मन मोह लेती है।
- ज्योति कलश : इस साल 6000 से ज्यादा ज्योति कलश जलाए जाएंगे।
- श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था : ठहरने के लिए चंद्रहासिनी मंदिर धर्मशाला उपलब्ध है।
- कैसे जाएं : प्राइवेट वाहन या टैक्सी से जाना बेहतर होगा। चांपा तक ट्रेन और फिर बस की सुविधा है। रायपुर से सड़क मार्ग से 225 किमी, बिलासपुर से 150 किमी और जांजगीर से 110 किमी, रायगढ़ से 32 किमी, सारंगढ़ से 29 किमी दूर है।
- दंतेश्वरी मंदिर,दंतेवाड़ा
- देश के 52 शक्ति पीठों में से एक दंतेश्वरी मंदिर है। मान्यता है कि यहां देवी का दांत गिरा था। 14वीं शताब्दी में बना यह मंदिर दंतेवाड़ा में स्थित है। मां की मूर्ति काले पत्थर से तराश कर बनाई गई है। मंदिर को चार भागों में विभाजित किया गया है।
- गर्भगृह और महा मंडप का निर्माण पत्थर के टुकड़ों से किया गया था। मंदिर के प्रवेश द्वार के सामने एक गरुड़ स्तंभ है। मंदिर खुद एक विशाल प्रांगण में स्थित है जो विशाल दीवारों से घिरा हुआ है। शिखर को मूर्तिकला से सजाया गया है।
- ज्योति कलश : 11 हजार ज्योति कलश जलाए जाएंगे। श्रद्धालु 1100 रुपए देकर तेल और 2100 रुपए में घी की ज्योति जलवा सकते हैं।
- श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था : सुविधा केंद्र बनाए गए हैं। इनमें मेडिकल सुविधा के अलावा भोजन और फलाहार की सुविधा। इसके अलावा सामाजिक संस्थाओं की तरफ से भोजन की व्यवस्था।
- कैसे जाएं : जगदलपुर तहसील से 80 किमी दूर और रायपुर शहर से 350 किमी दूर स्थित है। यह NH-30 से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। रायपुर शहर से सड़क मार्ग से करीब 7-8 घंटे की यात्रा दूरी पर है। सीधे जाने के लिए बस की सुविधा है।
- महामाया अंबिका देवी
- अंबिकापुर का नाम ही महामाया अंबिका देवी के नाम पर है। किवदंति है कि महामाया का सिर रतनपुर और धड़ अम्बिकापुर में है। माता की प्रतिमा छिन्न मस्तिका है। महामाया के बगल में विंध्यवासिनी विराजी हैं। विंध्यवासिनी की प्राण प्रतिष्ठा विंध्याचल से लाकर की गई है।
- शारदीय नवरात्र में छिन्न मस्तिका महामाया के शीश का निर्माण राजपरिवार के कुम्हार हर साल करते हैं। जिस प्रतिमा को मां महामाया के नाम से लोग पूजते हैं, पहले इनका नाम समलाया था। महामाया मंदिर में ही दो मूर्तियां स्थापित थी।
- पहले महामाया को बड़ी समलाया कहा जाता था और समलाया मंदिर में विराजी मां समलाया को छोटी समलाया कहते थे। बाद में समलाया मंदिर में छोटी समलाया को स्थापित किया गया, तब महामाया कहा जाने लगा।
- ज्योति कलश : पहले दिन शुभ मुहूर्त में हजारों की संख्या में ज्योति कलश प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। घृत ज्योति के लिए 2100 रुपए और तेल ज्योति के लिए 800 रुपए का शुल्क निर्धारित है। ज्योति कलश के लिए नगद राशि देनी पड़ेगी।
- कैसे जाएं: दुर्ग-अंबिकापुर ट्रेन की सुविधा है। अंबिकापुर तक सीधे बस की सुविधा। रेलवे स्टेशन से टैक्सी, बस और ऑटो की सुविधा है।
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- मां सर्वमंगला देवी मंदिर कोरबा त्रिलोकी नाथ मंदिर,काली मंदिर
- यह मंदिर कोरेश के जमींदार परिवार ने बनवाया था। त्रिलोकी नाथ मंदिर, काली मंदिर और ज्योति कलश भवन से घिरा हुआ है। वहां भी एक गुफा है, जो नदी के नीचे जाती है और दूसरी तरफ निकलती है।
- ज्योति कलश : 10 हजार ज्योति कलश जलाने की व्यवस्था। 751 रुपए देकर तेल और 1100 रुपए देकर घी की ज्योति जला सकते हैं।
- कैसे जाएं : कोरबा बस और ट्रेन से जुड़ा हुआ है। मंदिर तक जाने के लिए बस, टैक्सी और ऑटो से पहुंच सकते हैं। पहाड़ी पर मां मड़वारानी, कोसगाई, मतीन और महिषासुर मर्दिनी मंदिर के दर्शन भी किए जा सकते हैं।
- मां अंगार मोती माता गंगरेल
- गंगरेल में 52 गांव डूबने के बाद मां अंगार मोती माता की स्थापना की गई थी। माता के चरण पादुका मंदिर में अभी भी विराजित है।
- ज्योति कलश : इस बार करीब 4000 मनोकामना ज्योत जगमगाएंगे। ज्योति कलश स्थापना शुल्क के लिए क्यूआर कोड जारी किया गया है। 1201 रुपए तेल और 1501 रुपए घी के ज्योति कलश के लिए देने होंगे।
- कैसे जाएं : रायपुर से धमतरी तक बस सेवा, यहां से गंगरेल डैम, अंगार मोती मंदिर जाने के लिए प्राइवेट टैक्सी, ऑटो उपलब्ध है।
- गरियाबंद जिले की जतमई माता
- रायपुर से 80 किमी दूर गरियाबंद जिले में स्थित जतमई माता के मंदिर से सटी जलधाराएं उनके चरण स्पर्श करती हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार ये जलधाराएं माता की दासी होती हैं। मुख्य प्रवेश द्वार के शीर्ष पर, एक पौराणिक पात्रों का चित्रण भित्ति चित्र देख सकते हैं। मां जतमई की पत्थर की मूर्ति गर्भगृह में स्थापित है।
- ज्योति कलश : 8 हजार ज्योति कलश जलाए जाएंगे। तेल की ज्योति के लिए 651 रुपए निर्धारित है। इसके लिए सरपंच प्रतिनिधि रामकिशन से 9770429085, डेरहा राम ध्रुव से 8435245601 और लुमेश कंवर से 8815255450 पर संपर्क करना होगा।
- कैसे जाएं : रायपुर या गरियाबंद से स्वयं के वाहन या टैक्सी से जाना ज्यादा बेहतर है। पहाड़ी में होने की वजह से पब्लिक ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था नहीं है। जतमई मंदिर से 25 किमी दूर घटारानी देवी के भी दर्शन किए जा सकते हैं।
- महासमुंद जिले के बागबहारा घुंचापाली में मां चंडी का मंदिर
- महासमुंद जिले के बागबहारा घुंचापाली में मां चंडी का मंदिर स्थित है। किंवदन्ती है कि करीब 150 साल पहले ये तंत्र-मंत्र की साधना स्थल हुआ करता था। यहां महिलाओं का जाना प्रतिबंधित था। प्राकृतिक रूप से माता चंडी के स्वरूप में शिला (पत्थर) ने आकार लिया।
- वैदिक रीति रिवाज से पूजा-अर्चना शुरू हो गई। इसके बाद महिलाओं का चंडी माता की पूजा करने की प्रतिबंध समाप्त हुआ। यहां सुबह शाम, आरती के वक्त भालूओं की आमद भी होती है।
- ज्योति कलश : 6 से 7 हजार ज्योति कलश जलाए जाने की संभावना है। तेल का ही ज्योति जलेगी इसके लिए 700 रुपए देना होगा।
- कैसे जाएं : बागबहारा तक बस की सुविधा, यहां से टैक्सी या ऑटो से जाया जा सकता है। स्वयं के वाहन या टैक्सी से जाना ज्यादा बेहतर है।
- खलवाटिका,महासमुंद
- महासमुंद जिले में ही 24 किलोमीटर दूरी पर ये मंदिर एक ऊंची पहाड़ी पर बना हुआ है। प्राचीन काल में इसे खलवाटिका कहा जाता था। करीब 850 सीढ़ियां चढ़कर माता के दर्शन होते हैं।
- ज्योति कलश : 3 से 5 हजार मनोकामना ज्योत प्रज्ज्वलित किए जा सकते हैं।
- कैसे जाएं : महासमुंद तक बस की सुविधा, यहां से टैक्सी या ऑटो से जाया जा सकता है। स्वयं के वाहन या टैक्सी से जाना ज्यादा बेहतर है।
- ज्योति कलश : 6 से 7 हजार ज्योति कलश जलाए जाने की संभावना है। तेल का ही ज्योति जलेगी इसके लिए 700 रुपए देना होगा।
- महामाया मंदिर, मां समलेश्वरी रायपुर
- 1400 साल पहले मंदिर का निर्माण हैहयवंशी राजाओं ने करवाया था। महामाया मंदिर का गर्भगृह और गुंबद का निर्माण श्रीयंत्र के रूप में हुआ है। मंदिर में मां महालक्ष्मी, मां महामाया और मां समलेश्वरी तीनों की पूजा आराधना एक साथ की जाती है।
- ज्योति कलश : करीब 10 हजार ज्योति कलश इस बार जलाए जाएंगे। चकमक पत्थर की चिंगारी से नवरात्र की पहली ज्योति जलाई जाती है। 700 रुपए में सिर्फ तेल का ही ज्योति जलेगी। मिलावट के चलते घी का दिया नहीं जलेगा।
- भक्तों के लिए सुविधा : भोग और भंडारे का आयोजन होगा। घर बैठे दान और दर्शन की सुविधा है। माता को शृंगार का सामान चढ़ाने और अपने नाम से भोग लगाने के लिए लोग सुविधा ले सकते हैं।
- कैसे जाएं : रायपुर तक रेल और बस सुविधा है। यहां से प्राइवेट ऑटो या टैक्सी से मंदिर जाया जा सकता है।
कोरबा
भाजयुमो: गौकरण व रिपक महामंत्री बने

कोरबा/गेवरा-दीपका। भाजपा युवा मोर्चा दीपका मंडल में नई कार्यकारिणी का विस्तार किया गया है। मंडल अध्यक्ष सत्यम यादव ने कार्यकारिणी की घोषणा की। इसमें गौकरण कंवर व रिपक कुमार को महामंत्री और विकास साहू को कोषाध्यक्ष बनाया है। उपाध्यक्ष अजूबा राज, प्रकाश गोंडारे और विरेंद्र यादव को नियुक्त किया है। वहीं महामंत्री पद पर रिपक कुमार और गौकरण कंवर को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा मंत्री पद पर अतुल सिंह, मोनू बंसल को शामिल है।
कोरबा
प्रेसवार्ता:कांग्रेस महिला आरक्षण का विरोधी नहीं, 2023 के ड्राफ्ट को लागू करे भाजपा, देश को कर रही गुमराह-जयसिंह अग्रवाल
मंत्री लखनलाल देवांगन पर फिर हमला, कहा-झोपड़ी में रहने की कहता है बात, उसके घर में भाई-भतीजा एवं ओएसडी का चेम्बर, जहां होती है अवैध वसूली
कोरबा। पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कहा है कि केंद्र की भाजपा सरकार महिला आरक्षण के नाम पर देश के लोगों को गुमराह करने का प्रयास कर रही हैं। पांच राज्यों में चुनाव को देखते हुए लाभ लेने की सरकार की मंशा साफ हो गई है। सरकार चाहती तो वर्तमान की सीटों के आधार पर आरक्षण दे सकती थी, लेकिन परिसीमन को जोड़कर लटकाना चाहती है।

अग्रवाल सोमवार को कांग्रेस कार्यालय में महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन क्यों नहीं विषय पर चर्चा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण का विरोध नहीं है, बल्कि इसके अधूरे और भ्रामक स्वरूप के खिलाफ में है। महिला आरक्षण के नाम पर देश की महिलाओं के साथ छल किया जा रहा है। सरकार ने जो बिल लाया था, उसमें ओबीसी और वंचित वर्ग की महिलाओं की अनदेखी की गई है। जनगणना व परिसीमन की शर्त जोड़ने से कानून तुरंत लागू नहीं होगा और कई वर्षों तक लटक सकता है। सरकार ने कोई ठोस समय सीमा भी नहीं दी है, जिससे हमें संदेह पैदा होता है कि इसे जानबूझकर लंबित रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण के नाम पर राजनीतिक लाभ लेने भाजपा प्रयास कर रही है। वह अपनी पार्टी की छवि सुधारने और वोट बैंक साधने की रणनीति पर काम कर रही है। अग्रवाल ने कहा कि यदि यह कानून प्रभावी रूप से लागू नहीं होता तो जनता का लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास कम हो सकता है। कांग्रेस पार्टी हमेशा महिला आरक्षण के पक्ष में है, इसे मजबूत लोकतंत्र के लिए आवश्यक मानती है। अगर सरकार की मंशा है कि अभी इसे लागू किया जाए तो कांग्रेस तैयार है, पार्टी अपना रुख पहले ही बता चुकी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में महिला आरक्षण कानून पारित हो गया था, उसे 2024 से लागू करने में क्या बाधा थी, इसे परिसीमन से जोड़कर अनावश्यक रूप से टालना इस बात का संकेत है कि सरकार की प्राथमिकता किसके लिए अनुमान में नहीं है। कांग्रेस तत्काल की क्रियान्वयन करना नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी की महिला अध्यक्ष हो, देश की पहली महिला प्रधानमंत्री, महिला राष्ट्रपति, महिला मुख्यमंत्री, लोकसभा स्पीकर, सुप्रीम कोर्ट जज कांग्रेस के कार्यकाल में ही हुआ है। इस मौके पर शहर कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश राठौर, नेता प्रतिपक्ष कृपाराम साहू, विकास सिंह, महिला कांग्रेस अध्यक्ष कुसुम द्विवेदी, संतोष राठौर, पालूराम साहू, आनंद पालीवाल, के डी महंत, विजय सिंह, राकेश पंकज समेत कांग्रेसी मौजूद रहे।
जयसिंह ने मंत्री पर फिर साधा निशाना: कोयला, रेत तस्करी की वसूली के लिए मंत्री के घर में अलग-अलग चेम्बर

ठेकेदारी मेरे जीवकोपार्जन का व्यवसाय, इसमें गलत क्या? स्वर्गीय तुलसी ठाकुर भी करते थे ठेकेदारी
महिला आरक्षण बिल पर कांग्रेस का पक्ष रखने सोमवार शाम 4.30 बजे अपने कार्यालय में पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल पे्रसवार्ता रखी थी, जिसमें उन्होंने बिल पास न होने पर भाजपा द्वारा देश को गुमराह करने का आरोप लगाया, वहीं उन्होंने एक बार फिर मंत्री देवांगन पर कड़ा प्रहार किया और कहा-झोपड़ी रहने की बात करने वाले मंत्री लखनलाल देवांगन का घर जा कर देखिए, झोपड़ी है या अंदर से कुछ और? उसके घर में भाई-भतीजा, ओएसडी का अलग-अलग चेम्बर बना है, जहां पर रेत, कोयला की अवैध वसूली होती है।
जयसिंह अग्रवाल ने आरोप लगाया कि रेत की कहां-कहां सप्लाई हो रही है, यह सब जनता जानती है और मैं खुलेआम फिर बोल रहा हूं कि बालको, अडाणी के सार्वजनिक प्रतिष्ठानों सहित कई जगहों पर मंत्री द्वारा रेत सप्लाई की जा रही है और पूरे जिले में रेत की अवैध तस्करी मंत्री के संरक्षण में हो रही है।
उन्होंने कहा कि ठेकेदारी मेरे परिवार के जीवकोपार्जन का साधन है। चुनाव लड़ने से पहले मैं भी ठेकेदारी करता था, लेकिन अब मेरे परिवार के लोग ठेकेदारी करते हैं, इसमें गलत क्या है? उन्होंने प्रशासन की प्रशंसा की और कहा कि प्रशासन अच्छा चल रहा है, लेकिन रेत और कोयला तस्करी के साथ-साथ कबाड़ भी खुलेआम चल रहा है।
जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि मैंने कभी न तो रेत तस्करी की, न कोयले का अवैध कारोबार किया, लेकिन अभी रेत और कोयला तस्करी किसके संरक्षण में चल रहा है। इसके पूर्व भी बालको में आयोजित एक सभा को संबोधित करते हुए जयसिंह अग्रवाल ने सार्वजनिक मंच से कहा था-यहां का मंत्री और विधायक बालको, अडाणी सहित अन्य सार्वजनिक प्रतिष्ठानों में रेत आपूर्ति करता है, वह भी अवैध?
अवैध रेत:दो धु्रवों के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का बड़ा मुद्दा

जयसिंह अग्रवाल आए दिन मंत्री लखनलाल देवांगन पर हमलावर हो रहे हैं। बालको की एक सभा में पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने मंत्री लखनलाल देवांगन पर बालको में रेत कारोबार करने का आरोप लगाया था, उसके बाद पत्रकारों को जवाब देते हुए लखनलाल देवांगन ने कहा था-न मोर सो टेक्टर हावे, न ट्रक, मुड़ म रेत तस्करी करथों का? ठेकेदारी ओ करता है और आरोप मेरे ऊपर! इसके बाद सोमवार 20 अप्रैल को जयसिंह अग्रवाल ने फिर मंत्री पर हमला बोला और कहा कि रेत तस्करी कब और कैसे होती है, कौन करा रहा है, इसका सबूत मेरे पास है। झोपड़ी में रहता हूं, कह कर जनता को गुमराह करता है और उसके काले कारनामे चल रहे हैं। अवैध रेत की वसूली, अवैध कोयला की वसूली का अड्डा बन गया है मंत्री का गुप्त चेम्बर, जहां पर उसके भाई-भतीजे एवं ओएसडी अवैध वसूली कर रहे हैं और मंत्री अपने आपको ईमानदार जनप्रतिनिधि बताता है।
कोरबा
कोरबा में पहली बार होगा श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग दिव्य दर्शन एवं “सोमनाथ की अनकही कथा” का भव्य आयोजन
कोरबा। समस्त शहरवासियों एवं श्रद्धालुजनों के लिए अत्यंत हर्ष और सौभाग्य का विषय है कि श्रीश्री रविशंकर के सान्निध्य में आगामी 24 अप्रैल 2026 को सायं 6 बजे से 9 बजे तक के घंटाघर ओपन थिएटर में भव्य श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग दिव्य दर्शन कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं को दिव्य शिवलिंग के दर्शन, भजन, ध्यान, सत्संग एवं आध्यात्मिक अनुभूति का अनुपम लाभ प्राप्त होगा।

यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास, ऊर्जा और सनातन संस्कृति से जुड़ने का एक अद्भुत अवसर है। कार्यक्रम में विशेष रूप से “सोमनाथ की अनकही कथा” का भी वाचन एवं प्रस्तुतीकरण किया जाएगा, जिसमें की गौरवगाथा, संघर्ष, पुनर्स्थापना और सनातन चेतना की प्रेरक यात्रा को जनमानस के समक्ष रखा जाएगा।

मान्यता है कि भारत के पवित्र पश्चिमी तट पर स्थित केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि अनादि काल से श्रद्धा, शक्ति और शिवत्व का प्रतीक रहा है। सदियों पूर्व यात्रियों, साधकों और संतों ने इस धाम की दिव्यता का वर्णन किया है। कहा जाता है कि यहाँ का वातावरण अलौकिक शांति, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत रहता था।
इतिहास साक्षी है कि अनेक बार आक्रमणों और विध्वंस के प्रयासों के बावजूद सोमनाथ की आस्था कभी पराजित नहीं हुई। मंदिर टूटता रहा, पर श्रद्धा नहीं टूटी। सनातन संस्कृति की यही जीवंतता आज भी समस्त भारतवर्ष को प्रेरित करती है। हर बार विनाश के बाद पुनर्निर्माण होना इस बात का प्रमाण है कि सत्य, श्रद्धा और चेतना को कोई समाप्त नहीं कर सकता।
कार्यक्रम में यह भी बताया जाएगा कि किस प्रकार युगों से करोड़ों भक्तों की प्रार्थनाएँ, तपस्या और शिवभक्ति इस ज्योतिर्लिंग से जुड़ी रही हैं। यह केवल पत्थर या प्रतीक नहीं, बल्कि अनंत श्रद्धा का केंद्र है। श्रद्धालु जब दर्शन करते हैं, तो वे केवल एक शिवलिंग नहीं, बल्कि सनातन इतिहास, लाखों भक्तों की भावनाओं और शिव चेतना के स्पंदन से जुड़ते हैं।
आयोजन समिति ने जानकारी दी है कि यह दिव्य शिवलिंग पहली बार की पावन धरती पर दर्शन हेतु लाया जा रहा है। इससे क्षेत्रवासियों में भारी उत्साह, श्रद्धा और आनंद का वातावरण है। शहर के विभिन्न क्षेत्रों में डिजिटल प्रचार, जनसंपर्क, वाहन प्रचार, भजन आमंत्रण, पत्रक वितरण एवं अन्य माध्यमों से लोगों को आमंत्रित किया जा रहा है।
कार्यक्रम स्थल पर भव्य सज्जा, भक्तिमय वातावरण, शिव आराधना, ध्यान सत्र एवं सामूहिक प्रार्थना का आयोजन भी किया जाएगा। परिवार सहित बड़ी संख्या में उपस्थित होकर श्रद्धालु इस दुर्लभ अवसर का पुण्य लाभ ले सकते हैं।
आयोजन समिति ने समस्त नागरिकों, मातृशक्ति, युवाओं, वरिष्ठजनों एवं धर्मप्रेमी समाज से आग्रह किया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाएं।
कार्यक्रम विवरण:
दिनांक: 24 अप्रैल 2026
समय: सायं 6:00 बजे से 9:00 बजे तक
स्थान: घंटाघर ओपन थिएटर, कोरबा
आयोजन: , कोरबा परिवार
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