कोरबा
नवरात्रि पर कई माता के मंदिरों में नहीं जलेंगे घी के दीप
रायपुर । नवरात्र की शुरुआत गुरुवार (3 अक्टूबर) से हो रही है। इसे लेकर छत्तीसगढ़ के शक्ति पीठों और देवी मंदिरों में तैयारियां हो गई हैं। लाइव दर्शन, श्रद्धालुओं के रुकने सहित अन्य इंतजाम किए गए हैं। मिलावट की आशंका से कई मंदिरों में घी के ज्योति कलश पर रोक लगाई गई है।
बिलासपुर जिले के रतनपुर स्थित महामाया मंदिर महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती को समर्पित है। ये 52 शक्ति पीठों में से एक है। देवी महामाया को कोसलेश्वरी के रूप में भी जाना जाता है, जो पुराने दक्षिण कोसल क्षेत्र की अधिष्ठात्री देवी हैं।
- रतनपुर महामाया मंदिर
- ज्योति कलश : इस बार 31 हजार मनोकामना ज्योति कलश प्रज्ज्वलित किए जाने की तैयारी है। इसमें 5 हजार ज्योति घी की होगी। देवभोग से 18 हजार लीटर घी मंगवाया गया है। श्रद्धालु 700 रुपए में तेल, 2100 रुपए में घी का दीपक जला सकेंगे।
- कैसे जाएं : रतनपुर पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन करीब 25 किमी दूर बिलासपुर में है। उसके बाद आपको वहां से बस या टैक्सी-ऑटो से आना होगा। बिलासपुर सड़क और रेल मार्ग से देश के लगभग सभी बड़े स्टेशनों से जुड़ा हुआ है।
- डोंगरगढ़ की पहाड़ी पर मां बम्लेश्वरी देवी
- डोंगरगढ़ की पहाड़ी पर स्थित मां बम्लेश्वरी देवी का विख्यात मंदिर आस्था का केंद्र है। बड़ी बम्लेश्वरी के समतल पर स्थित मंदिर छोटी बम्लेश्वरी के नाम से प्रसिद्ध है। बम्लेश्वरी शक्ति पीठ का इतिहास करीब 2000 वर्ष पुराना है। इसे वैभवशाली कामाख्या नगरी के रूप में जाना जाता था।
- मां बम्लेश्वरी को मध्य प्रदेश के उज्जयिनी के प्रतापी राजा विक्रमादित्य की कुलदेवी भी कहा जाता है। इतिहासकारों ने इस क्षेत्र को कल्चुरी काल का पाया है। मंदिर की अधिष्ठात्री देवी मां बगलामुखी हैं। उन्हें मां दुर्गा का स्वरूप माना जाता है। उन्हें यहां मां बम्लेश्वरी के रूप में पूजा जाता है।
- ज्योति कलश: पहाड़ के ऊपर 6500 और नीचे मंदिर में 875 आस्था के दीप जलाए जाएंगे। मुख्य मंदिर में 1101 रु. तेल की राशि ली जा रही है। मंदिर में घी के दिये जलाने पर रोक लगाई गई है।
- श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था : मंदिर तक जाने के लिए सीढ़ियों के अलावा रोपवे की सुविधा भी है। ऊपर पेयजल की व्यवस्था, विश्रामालयों के अलावा भोजनालय और धार्मिक सामग्री खरीदने की सुविधा है। पहाड़ी के नीचे 24 घंटे भोजन, भंडारे की व्यवस्था।
- कैसे जाएं : रायपुर से 100, नागपुर से 190 किमी की दूरी पर स्थित है और मुंबई-हावड़ा रेल मार्ग के अंतर्गत आता है। सीधे ट्रेन और बस की सुविधा है।
- सक्ती जिले के चंद्रपुर की मां चंद्रहासिनी
- सक्ती जिले के चंद्रपुर की छोटी सी पहाड़ी के ऊपर विराजित है मां चंद्रहासिनी। मान्यता है कि देवी सती का अधोदन्त (दाढ़) चंद्रपुर में गिरा था। यह मां दुर्गा के 52 शक्ति पीठों में से एक है। यहां बनी पौराणिक और धार्मिक कथाओं की झाकियां, करीब 100 फीट विशालकाय महादेव पार्वती की मूर्ति आदि आने वाले श्रद्धालुओं का मन मोह लेती है।
- ज्योति कलश : इस साल 6000 से ज्यादा ज्योति कलश जलाए जाएंगे।
- श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था : ठहरने के लिए चंद्रहासिनी मंदिर धर्मशाला उपलब्ध है।
- कैसे जाएं : प्राइवेट वाहन या टैक्सी से जाना बेहतर होगा। चांपा तक ट्रेन और फिर बस की सुविधा है। रायपुर से सड़क मार्ग से 225 किमी, बिलासपुर से 150 किमी और जांजगीर से 110 किमी, रायगढ़ से 32 किमी, सारंगढ़ से 29 किमी दूर है।
- दंतेश्वरी मंदिर,दंतेवाड़ा
- देश के 52 शक्ति पीठों में से एक दंतेश्वरी मंदिर है। मान्यता है कि यहां देवी का दांत गिरा था। 14वीं शताब्दी में बना यह मंदिर दंतेवाड़ा में स्थित है। मां की मूर्ति काले पत्थर से तराश कर बनाई गई है। मंदिर को चार भागों में विभाजित किया गया है।
- गर्भगृह और महा मंडप का निर्माण पत्थर के टुकड़ों से किया गया था। मंदिर के प्रवेश द्वार के सामने एक गरुड़ स्तंभ है। मंदिर खुद एक विशाल प्रांगण में स्थित है जो विशाल दीवारों से घिरा हुआ है। शिखर को मूर्तिकला से सजाया गया है।
- ज्योति कलश : 11 हजार ज्योति कलश जलाए जाएंगे। श्रद्धालु 1100 रुपए देकर तेल और 2100 रुपए में घी की ज्योति जलवा सकते हैं।
- श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था : सुविधा केंद्र बनाए गए हैं। इनमें मेडिकल सुविधा के अलावा भोजन और फलाहार की सुविधा। इसके अलावा सामाजिक संस्थाओं की तरफ से भोजन की व्यवस्था।
- कैसे जाएं : जगदलपुर तहसील से 80 किमी दूर और रायपुर शहर से 350 किमी दूर स्थित है। यह NH-30 से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। रायपुर शहर से सड़क मार्ग से करीब 7-8 घंटे की यात्रा दूरी पर है। सीधे जाने के लिए बस की सुविधा है।
- महामाया अंबिका देवी
- अंबिकापुर का नाम ही महामाया अंबिका देवी के नाम पर है। किवदंति है कि महामाया का सिर रतनपुर और धड़ अम्बिकापुर में है। माता की प्रतिमा छिन्न मस्तिका है। महामाया के बगल में विंध्यवासिनी विराजी हैं। विंध्यवासिनी की प्राण प्रतिष्ठा विंध्याचल से लाकर की गई है।
- शारदीय नवरात्र में छिन्न मस्तिका महामाया के शीश का निर्माण राजपरिवार के कुम्हार हर साल करते हैं। जिस प्रतिमा को मां महामाया के नाम से लोग पूजते हैं, पहले इनका नाम समलाया था। महामाया मंदिर में ही दो मूर्तियां स्थापित थी।
- पहले महामाया को बड़ी समलाया कहा जाता था और समलाया मंदिर में विराजी मां समलाया को छोटी समलाया कहते थे। बाद में समलाया मंदिर में छोटी समलाया को स्थापित किया गया, तब महामाया कहा जाने लगा।
- ज्योति कलश : पहले दिन शुभ मुहूर्त में हजारों की संख्या में ज्योति कलश प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। घृत ज्योति के लिए 2100 रुपए और तेल ज्योति के लिए 800 रुपए का शुल्क निर्धारित है। ज्योति कलश के लिए नगद राशि देनी पड़ेगी।
- कैसे जाएं: दुर्ग-अंबिकापुर ट्रेन की सुविधा है। अंबिकापुर तक सीधे बस की सुविधा। रेलवे स्टेशन से टैक्सी, बस और ऑटो की सुविधा है।
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- मां सर्वमंगला देवी मंदिर कोरबा त्रिलोकी नाथ मंदिर,काली मंदिर
- यह मंदिर कोरेश के जमींदार परिवार ने बनवाया था। त्रिलोकी नाथ मंदिर, काली मंदिर और ज्योति कलश भवन से घिरा हुआ है। वहां भी एक गुफा है, जो नदी के नीचे जाती है और दूसरी तरफ निकलती है।
- ज्योति कलश : 10 हजार ज्योति कलश जलाने की व्यवस्था। 751 रुपए देकर तेल और 1100 रुपए देकर घी की ज्योति जला सकते हैं।
- कैसे जाएं : कोरबा बस और ट्रेन से जुड़ा हुआ है। मंदिर तक जाने के लिए बस, टैक्सी और ऑटो से पहुंच सकते हैं। पहाड़ी पर मां मड़वारानी, कोसगाई, मतीन और महिषासुर मर्दिनी मंदिर के दर्शन भी किए जा सकते हैं।
- मां अंगार मोती माता गंगरेल
- गंगरेल में 52 गांव डूबने के बाद मां अंगार मोती माता की स्थापना की गई थी। माता के चरण पादुका मंदिर में अभी भी विराजित है।
- ज्योति कलश : इस बार करीब 4000 मनोकामना ज्योत जगमगाएंगे। ज्योति कलश स्थापना शुल्क के लिए क्यूआर कोड जारी किया गया है। 1201 रुपए तेल और 1501 रुपए घी के ज्योति कलश के लिए देने होंगे।
- कैसे जाएं : रायपुर से धमतरी तक बस सेवा, यहां से गंगरेल डैम, अंगार मोती मंदिर जाने के लिए प्राइवेट टैक्सी, ऑटो उपलब्ध है।
- गरियाबंद जिले की जतमई माता
- रायपुर से 80 किमी दूर गरियाबंद जिले में स्थित जतमई माता के मंदिर से सटी जलधाराएं उनके चरण स्पर्श करती हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार ये जलधाराएं माता की दासी होती हैं। मुख्य प्रवेश द्वार के शीर्ष पर, एक पौराणिक पात्रों का चित्रण भित्ति चित्र देख सकते हैं। मां जतमई की पत्थर की मूर्ति गर्भगृह में स्थापित है।
- ज्योति कलश : 8 हजार ज्योति कलश जलाए जाएंगे। तेल की ज्योति के लिए 651 रुपए निर्धारित है। इसके लिए सरपंच प्रतिनिधि रामकिशन से 9770429085, डेरहा राम ध्रुव से 8435245601 और लुमेश कंवर से 8815255450 पर संपर्क करना होगा।
- कैसे जाएं : रायपुर या गरियाबंद से स्वयं के वाहन या टैक्सी से जाना ज्यादा बेहतर है। पहाड़ी में होने की वजह से पब्लिक ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था नहीं है। जतमई मंदिर से 25 किमी दूर घटारानी देवी के भी दर्शन किए जा सकते हैं।
- महासमुंद जिले के बागबहारा घुंचापाली में मां चंडी का मंदिर
- महासमुंद जिले के बागबहारा घुंचापाली में मां चंडी का मंदिर स्थित है। किंवदन्ती है कि करीब 150 साल पहले ये तंत्र-मंत्र की साधना स्थल हुआ करता था। यहां महिलाओं का जाना प्रतिबंधित था। प्राकृतिक रूप से माता चंडी के स्वरूप में शिला (पत्थर) ने आकार लिया।
- वैदिक रीति रिवाज से पूजा-अर्चना शुरू हो गई। इसके बाद महिलाओं का चंडी माता की पूजा करने की प्रतिबंध समाप्त हुआ। यहां सुबह शाम, आरती के वक्त भालूओं की आमद भी होती है।
- ज्योति कलश : 6 से 7 हजार ज्योति कलश जलाए जाने की संभावना है। तेल का ही ज्योति जलेगी इसके लिए 700 रुपए देना होगा।
- कैसे जाएं : बागबहारा तक बस की सुविधा, यहां से टैक्सी या ऑटो से जाया जा सकता है। स्वयं के वाहन या टैक्सी से जाना ज्यादा बेहतर है।
- खलवाटिका,महासमुंद
- महासमुंद जिले में ही 24 किलोमीटर दूरी पर ये मंदिर एक ऊंची पहाड़ी पर बना हुआ है। प्राचीन काल में इसे खलवाटिका कहा जाता था। करीब 850 सीढ़ियां चढ़कर माता के दर्शन होते हैं।
- ज्योति कलश : 3 से 5 हजार मनोकामना ज्योत प्रज्ज्वलित किए जा सकते हैं।
- कैसे जाएं : महासमुंद तक बस की सुविधा, यहां से टैक्सी या ऑटो से जाया जा सकता है। स्वयं के वाहन या टैक्सी से जाना ज्यादा बेहतर है।
- ज्योति कलश : 6 से 7 हजार ज्योति कलश जलाए जाने की संभावना है। तेल का ही ज्योति जलेगी इसके लिए 700 रुपए देना होगा।
- महामाया मंदिर, मां समलेश्वरी रायपुर
- 1400 साल पहले मंदिर का निर्माण हैहयवंशी राजाओं ने करवाया था। महामाया मंदिर का गर्भगृह और गुंबद का निर्माण श्रीयंत्र के रूप में हुआ है। मंदिर में मां महालक्ष्मी, मां महामाया और मां समलेश्वरी तीनों की पूजा आराधना एक साथ की जाती है।
- ज्योति कलश : करीब 10 हजार ज्योति कलश इस बार जलाए जाएंगे। चकमक पत्थर की चिंगारी से नवरात्र की पहली ज्योति जलाई जाती है। 700 रुपए में सिर्फ तेल का ही ज्योति जलेगी। मिलावट के चलते घी का दिया नहीं जलेगा।
- भक्तों के लिए सुविधा : भोग और भंडारे का आयोजन होगा। घर बैठे दान और दर्शन की सुविधा है। माता को शृंगार का सामान चढ़ाने और अपने नाम से भोग लगाने के लिए लोग सुविधा ले सकते हैं।
- कैसे जाएं : रायपुर तक रेल और बस सुविधा है। यहां से प्राइवेट ऑटो या टैक्सी से मंदिर जाया जा सकता है।
कोरबा
राखड़ डेम फटा, JCB ऑपरेटर की मलबे में दबकर मौत:कोरबा के झाबू राखड़ डेम में हादसा, दर्री पुलिस मौके पर, लोगों में आक्रोश
कोरबा। कोरबा जिले के झाबू गांव में रविवार दोपहर सीएसईबी का राखड़ डेम अचानक फट गया। इस हादसे में डेम पर काम कर रहा एक जेसीबी ऑपरेटर मलबे में दब गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, सीएसईबी पश्चिम के राखड़ डेम के एक हिस्से में अचानक दबाव बढ़ा, जिससे राख का सैलाब बह निकला। जेसीबी ऑपरेटर मशीन सहित राख के दलदल में समा गया। आसपास मौजूद कर्मचारियों ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन राख के अत्यधिक दबाव के कारण उसे बाहर नहीं निकाला जा सका।

हादसे राख में दबा हुआ जेसीबी ऑपरेटर जिस से उसकी मौत हो गई

ग्रामीणों का आरोप प्रबंधन ने चेतावनी के बाद भी ध्यान नहीं दिया
प्रबंधन और सुरक्षा अमला तुरंत घटनास्थल पर पहुंचा और राहत-बचाव कार्य शुरू किया। प्रशासनिक अधिकारियों को भी घटना की सूचना दी गई है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि झाबू राखड़ डेम की सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही सवालों के घेरे में थी। ग्रामीणों के अनुसार, यह डेम पहले भी कई बार फट चुका है। ग्रामीणों ने डेम की मजबूती और निगरानी को लेकर बार-बार चेतावनी दी थी, लेकिन प्रबंधन ने इस पर ध्यान नहीं दिया।

झाबू राखड़ डेम जहाँ ये दुर्घटना हुई है।
तीन घंटे बाद भी संबंधित विभाग के अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे
घटना की सूचना मिलते ही दर्री थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई है। दलदल में फंसे व्यक्ति को निकला गया है। लोगों में घटना को लेकर भारी आक्रोश है, खासकर इसलिए क्योंकि हादसे के तीन घंटे बाद भी संबंधित विभाग के अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे थे।
यह हादसा औद्योगिक सुरक्षा प्रबंधन की खामियों को एक बार फिर उजागर करता है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि राखड़ डेम की नियमित जांच और सुरक्षा इंतजाम इतने कमजोर क्यों हैं, और मजदूरों की सुरक्षा को लेकर यह लापरवाही कब तक जारी रहेगी।
कोरबा
कोयले की धूल के साये में जीने को मजबूर नगरवासी, जहरीली हवा लील रही है मासूम जिंदगियां
कोरबा/दीपका। कोयलांचल क्षेत्र के दीपका में प्रदूषण की स्थिति अब नियंत्रण से बाहर होती जा रही है एसईसीएल (SECL) प्रबंधन और नगर प्रशासन की उदासीनता के चलते स्थानीय नागरिक कोयले की काली धूल और विषैले कणों को सांसों के जरिए निगलने को मजबूर हैं। खदानों से निकलने वाले भारी वाहनों द्वारा उड़ाई जा रही यह धूल न केवल सड़कों पर अंधेरा छा रही है बल्कि जनमानस की औसत आयु को भी तेजी से कम कर रही है ।

जमीनी हकीकत कागजों पर छिड़काव, सड़कों पर धूल का गुबारे
नियमों के मुताबिक धूल को बैठने के लिए सड़कों पर नियमित रूप से पानी का छिड़काव किया जाना अनिवार्य है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलटे है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन के दावे सिर्फ फाइलों तक सीमित हैं। भारी वाहनों के कारण दिन-रात कोयले का गुबार उड़ता रहता है जिससे राहगीरों और आसपास रहने वाले परिवारों का जीना दूभर हो गया है ।
प्रशासनिक विफलता और पर्यावरण विभाग की चुप्पी
इस गंभीर संकट के पीछे पर्यावरण विभाग की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। नियमानुसार विभाग को समय-समय पर डस्ट मॉनिटरिंग और डस्ट ऑडिट करना चाहिए, लेकिन सख्त कार्रवाई के अभाव में प्रबंधन बेखौफ होकर नियमों की धज्जियां उड़ा रहा है। अधिकारियों द्वारा निर्देशित न किए जाने के कारण प्रदूषण का स्तर खतरे के निशान को पार कर चुका है ।
प्रमुख चिंताएं और मांगें
स्वास्थ्य का संकट:- कोयले की सूक्ष्म धूल (PM 2.5 और PM 10) सीधे फेफड़ों में जाकर जानलेवा बीमारियां पैदा कर रही है ।
शून्य विजिबिलिटी:- धूल के गुबारे के कारण सड़कों पर दुर्घटनाओं का अंदेशा हर समय बना रहता है ।
प्रबंधन की जवाबदेही:- एसईसीएल और नगर प्रशासन तत्काल प्रभाव से आधुनिक स्प्रिंकलर सिस्टम और नियमित जल छिड़काव सुनिश्चित करें ।
कठोर दण्ड:- पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों और ठेकेदारों पर सख्त कानूनी कार्यवाही की जाए ।
दीपका के नगरवासियों ने अब चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उन्हें इस काले जहर से मुक्ति दिलाने के लिए ठोस उपाय नहीं किए गए तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे ।
कोरबा
आंबेडकर जयंती पर भाजपा की संगोष्ठी संपन्न, बाबा साहेब के विचारों को आत्मसात करने का संदेश
भाजपा संगोष्ठी में बाबा साहेब को नमन, वरिष्ठों का हुआ सम्मान
कोरबा। भारतीय जनता पार्टी, जिला कोरबा द्वारा भारत रत्न बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर जी की जयंती के पावन अवसर पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। साथ ही समाज के वरिष्ठों का शाल व श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया।भाजपा जिला कार्यालय, टी.पी. नगर, कोरबा में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में पूर्व नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक, उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन, जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी, विधायक प्रेमचंद पटेल, महापौर संजू देवी राजपूत, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ पवन सिंह, वरिष्ठ पार्षद नरेंद्र देवांगन सहित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की उपस्थिति रही।
बाबा साहेब का व्यक्तित्व जितना व्यापक, उतना ही प्रेरणादायी – धरमलाल कौशिक

संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी का व्यक्तित्व और कृतित्व इतना व्यापक है कि उनके बारे में जितना कहा जाए, वह कम ही है। देश की आज़ादी से पहले भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही और आज़ादी के बाद भी उन्होंने राष्ट्र निर्माण में ऐतिहासिक योगदान दिया। बाबा साहेब एक महान विधिवेत्ता, समाज सुधारक, प्रख्यात प्रोफेसर, समाजशास्त्री और भारतीय संविधान के निर्माता थे। उनके व्यक्तित्व में विविधता और एकरूपता का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है, जो उन्हें असाधारण बनाता है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने देश ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर बाबा साहेब की कीर्ति और उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने का कार्य किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में उनके विचारों को वैश्विक पहचान मिली है। कौशिक जी ने आगे कहा कि जब देश को आज़ादी मिली और अंतरिम सरकार का गठन हुआ, तब पंडित जवाहरलाल नेहरू ने ऐसे व्यक्तित्वों को मंत्रिमंडल में स्थान दिया जो कांग्रेस विचारधारा से नहीं थे। उनमें एक थे बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर, जिन्हें देश का पहला कानून मंत्री बनाया गया, और दूसरे थे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, जिन्हें उद्योग मंत्री बनाया गया। इसके पश्चात 1948 में संविधान निर्माण के लिए जो समिति गठित की गई, उसमें सात सदस्य थे, और उस समिति के अध्यक्ष बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर थे।

संविधान के मार्ग पर चलना ही सच्ची देशभक्ति – गोपाल मोदी
भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर का नाम हम सभी आदर के साथ लेते हैं और उनके विचारों को सदैव अपने जीवन में अपनाने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि बाबा साहब देश के प्रथम कानून मंत्री रहे और उनके द्वारा निर्मित संविधान का हम सभी निष्ठापूर्वक पालन करते हैं।
उन्होंने बताया कि बाबा साहब की 136 वीं जयंती के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। जयंती के एक दिन पूर्व 13 अप्रैल को उनके स्मारक स्थल की साफ-सफाई कर दीप प्रज्वलित किया गया तथा प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया।
श्री मोदी ने आगे कहा कि “घर चलो, बस्ती चलो” अभियान के तहत भाजपा कार्यकर्ता बस्तियों में पहुंचे और सामाजिक समरसता का संदेश देते हुए झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले परिवारों के साथ बैठकर भोजन किया। इस अभियान के माध्यम से छुआछूत जैसी कुरीतियों को समाप्त करने का संदेश दिया गया।
उन्होंने अंत में कहा कि संविधान के मार्ग पर चलना ही सच्ची देशभक्ति हैं, भारतीय जनता पार्टी का प्रत्येक कार्यकर्ता बाबा साहब के बताए नियमों और संविधान के प्रति पूर्ण आस्था और कृतज्ञता रखता है।

इस अवसर पर उपस्थित सभी जनों ने बाबा साहेब के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर जिला संगठन सह प्रभारी बृजेंद्र शुक्ला, सह संभाग प्रभारी रायपुर डॉ. राजीव सिंह, प्रदेश मंत्री रितु चौरसिया, पूर्व महापौर जोगेश लांबा, पूर्व जिलाध्यक्ष पवन गर्ग, जिला महामंत्री संजय शर्मा, अजय विश्वकर्मा, जिला कोषाध्यक्ष अजय पांडेय, एमआईसी मेंबर हितानंद अग्रवाल, प्रदेश सदस्य मीना शर्मा, जिला उपाध्यक्ष मंजू सिंह, लक्की नंदा, ज्योति वर्मा, जिला अध्यक्ष महिला मोर्चा प्रिती स्वर्णकार, जिला मीडिया प्रभारी अर्जुन गुप्ता, कार्यक्रम संयोजक राजेश लहरे, कुल सिंह कंवर, मनोज राठौर, अजय चन्द्रा सहित मंडल अध्यक्ष व भाजपा कार्यकर्ता शामिल हुए।

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