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छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा नक्सल-ऑपरेशन…2 घंटे में 31 नक्सली ढेर:1000 जवान लाशें 40 किमी कंधे पर लादकर ले गए, रोटी-मैगी खाकर सफर पूरा किया

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दंतेवाड़ा/नारायणपुर,एजेंसी। तारीख 4 अक्टूबर, दिन शुक्रवार,समय दोपहर 1 बजे,ये वो दिन और तारीख है जब दंतेवाड़ा-नारायणपुर जिले के बॉर्डर पर सुरक्षाबलों ने नक्सलियों के खिलाफ सबसे बड़ा ऑपरेशन लॉन्च किया। करीब 1000 जवानों ने महज 2 घंटे की मुठभेड़ में ही 31 नक्सलियों को मार गिराया। सभी के शव बरामद कर लिए गए हैं। पुलिस के जवान 3-4 पहाड़ और नदी-नाले पार कर नक्सलियों के ठिकाने पर पहुंचे थे।

पूर्वी बस्तर डिवीजन कमेटी की लीडर नीति के मारे जाने की खबर है। नीति पर 8 से 10 लाख रुपए का इनाम घोषित था। जवान अब भी मौके पर ही मौजूद हैं। सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। मारे गए माओवादियों की संख्या बढ़ सकती है। इसे अब तक सबसे बड़ा एंटी नक्सल ऑपरेशन बताया जा रहा है। इससे पहले कांकेर में 29 माओवादी मारे थे।

सुरक्षाबलों के जवान एनकाउंटर साइट पर हैं और सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं।

सुरक्षाबलों के जवान एनकाउंटर साइट पर हैं और सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं।

दंतेवाड़ा-नारायणपुर के बॉर्डर पर पुलिस के जवान और अफसर मोटरसाइकिल से पहुंचे।

दंतेवाड़ा-नारायणपुर के बॉर्डर पर पुलिस के जवान और अफसर मोटरसाइकिल से पहुंचे।

एनकाउंटर साइट की निगरानी और छानबीन करते सुरक्षाबलों के जवान।

एनकाउंटर साइट की निगरानी और छानबीन करते सुरक्षाबलों के जवान।

जवान मारे गए नक्सलियों के शवों को इस तरह बांस के डंडों पर ढोकर लाए।

जवान मारे गए नक्सलियों के शवों को इस तरह बांस के डंडों पर ढोकर लाए।

जवानों ने कंधों पर नक्सलियों के शवों को 40 किलोमीटर तक ढोया।

जवानों ने कंधों पर नक्सलियों के शवों को 40 किलोमीटर तक ढोया।

ऑपरेशन में महिला कंमाडो भी शामिल थीं। ऑपरेशन के बाद रेस्ट करते सुरक्षाबल।

ऑपरेशन में महिला कंमाडो भी शामिल थीं। ऑपरेशन के बाद रेस्ट करते सुरक्षाबल।

यह तस्वीर ऑपरेशन के तुरंत पहले की है, जिसमें सुरक्षा बल ऑपरेशन साइट पर जा रहे हैं।

यह तस्वीर ऑपरेशन के तुरंत पहले की है, जिसमें सुरक्षा बल ऑपरेशन साइट पर जा रहे हैं।

  • सूत्रों ने बताया कि नक्सलियों की कंपनी नंबर 6 के 50 से ज्यादा मेंबर्स की मौजूदगी की सटीक सूचना मिली थी। ये अबूझमाड़ में थुलथुली इलाके में पूर्वी बस्तर डिवीजन में मौजूद थे। इसके बाद ऑपरेशन लॉन्च करने के लिए अफसरों ने प्लानिंग की।
  • बुधवार की देर रात तक प्लानिंग की गई। इसके बाद यह ऑपरेशन इंटर डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेशन के तहत चलाने का फैसला लिया गया। ऑपरेशन में जवानों को दो तरफ से भेजने का फैसला लिया गया। पांच जिलों के बेस्ट जवानों को इसमें शामिल किया गया। 3 अक्टूबर को दंतेवाड़ा और नारायणपुर जिले से करीब 1 हजार से ज्यादा DRG और STF के जवानों को ऑपरेशन पर भेजा गया।
  • दंतेवाड़ा और नारायणपुर जिले को गुरुवार की सुबह ऑपरेशन लीड करने की जिम्मेदारी दी गई। जवान गुरुवार को ही जंगलों में घुस गए थे। जवानों ने भारी बारिश के बीच करीब 3 से 4 पहाड़, नदी-नाले पार किए और थुलथुली-नेंदुर गांव के जंगल में पहुंचे।
  • नक्सलियों के टॉप लीडर्स एक जगह से दूसरी जगह मूवमेंट कर रहे थे, लेकिन भारी बारिश की वजह से वे भी पहाड़ पर एक ठिकाने पर रुक गए थे और बारिश थमने का इंतजार कर रहे थे। जवानों को इसी का फायदा मिला। इसके बाद नारायणपुर और दंतेवाड़ा पुलिस फोर्स ने डेढ़ से 2 किलोमीटर के दायरे को चारों तरफ से घेर लिया।

जवानों के आने की नक्सलियों को नहीं लगी भनक

भारी बारिश की वजह से नक्सलियों को जवानों के आने की भनक भी नहीं लग पाई। वहीं 4 अक्टूबर को दोपहर एक बजे जवान नक्सलियों के बेहद करीब पहुंच गए थे, जिसके बाद जवानों ने ही फायरिंग की। सूत्रों ने बताया कि नक्सली जवानों के रडार पर थे।

40 किमी. पैदल चल ऑपरेशन साइट तक पहुंचे

जवानों के साथ महिला कमांडो भी गुरुवार से ऑपरेशन में साथ थीं। अलग-अलग टीम बनाई गई। भूख मिटाने के लिए मैगी के पैकेट दिए गए। सभी टीमें एक पॉइंट तक गाड़ियों से पहुंचीं। इसके बाद 40 किलोमीटर तक जवान पैदल चले और उस जगह पहुंचे, जहां नक्सलियों की मौजूदगी थी। लोकेशन कन्फर्मेशन के बाद हाईकमान को सूचित किया गया। ऑर्डर मिलने के बाद एनकाउंटर को अंजाम दिया गया।

ऑपरेशन की 5 अहम बातें…

1. शुरुआत के 10 से 15 मिनट के अंदर ही जवानों ने 7 नक्सलियों को ढेर कर दिया था। नक्सली एक तरफ से दूसरी तरफ भागने लगे तो दूसरी तरफ मौजूद पुलिस पार्टी ने उन्हें घेरकर मारा।

2. गुरुवार देर शाम तक पुलिस ने कुल 31 नक्सलियों के शव बरामद कर लिए थे। रातभर जवान घटनास्थल पर ही मौजूद थे। सुबह होते ही एक बार फिर से सर्च ऑपरेशन चलाया गया।

3. बस्तर आईजी पी सुंदरराज के मुताबिक फोर्स ने मौके से LMG , AK-47, SLR, इंसास, कैलिबर 303 राइफल और अन्य हथियार बरामद किया है।

4. ऐसा बताया जा रहा है कि इस एनकाउंटर में बड़े कैडर के नक्सली मारे गए हैं। कुछ नक्सली घायल भी हैं, जिन्हें उनके साथी अपने साथ लेकर चले गए हैं।

जवान रामचंद्र यादव घायल हो गए, छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा उनसे मिलने अस्पताल पहुंचे।

जवान रामचंद्र यादव घायल हो गए, छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा उनसे मिलने अस्पताल पहुंचे।

ऑपरेशन के बाद नक्सलियों की बॉडी लाने की कश्मकश

एनकाउंटर के बाद जवानों की टीम छोटी-छोटी टुकड़ियों में लौट रही है। इनमें महिलाओं के कंधे पर भी नक्सलियों के शव हैं और 6-6 किलो की राइफल। छोटा सा स्टोव भी। जहां जगह मिली, शवों को रखकर ये टुकड़ियां मैगी बनाकर अपना पेट भर रही हैं।

कांकेर में जवानों ने 29 माओवादियों को मार गिराया था।

कांकेर में जवानों ने 29 माओवादियों को मार गिराया था।

साल का दूसरा सबसे बड़ा ऑपरेशन

इसी साल 16 अप्रैल को बस्तर के कांकेर में जवानों ने 29 माओवादियों को मार गिराया था। तब यह नक्सलियों के खिलाफ सबसे बड़ा और सफल ऑपरेशन था। 4 अक्टूबर को हुए एनकाउंटर में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। यह नक्सल हिस्ट्री का सबसे बड़ा और सफल अभियान था।

एनकाउंटर में सबसे बड़ी भूमिका डीआरजी की

ऑपरेशन में 3 फोर्स लगाई थी। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ), डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड्स (डीआरजी) और सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ)। सीआरपीएफ को सिर्फ बैकअप के लिए रखा गया था। एसटीएफ और डीआरजी ने मुठभेड़ में भाग लिया। सबसे बड़ी भूमिका डीआरजी की रही।

डीआरजी में वे लोग शामिल हैं, जो पहले नक्सली थे। नक्सलियों के रूप में जिनकी जंगलवार ट्रेनिंग हो चुकी है। उन्हें समर्पण के बाद डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड के रूप में फोर्स में शामिल कर लिया गया। इनमें स्थानीय युवकों को ही शामिल किया जाता है।

जैसे दंतवाड़ा डीआरजी में दंतेवाड़ा के सरेंडर्ड को शामिल किया जाएगा। इससे उन्हें वहां के भूगोल की पूरी जानकारी होती है। नक्सलियों के कोड को वे समझ लेते हैं। इसलिए इन्हें आगे रखा जाता है।

इस मुठभेड़ में भी यही हुआ। डीआरजी के जवान नक्सलियों के कोड को डिकोड करते रहे और एसटीएफ के लिए रास्ता बनाते रहे। इस तरह फोर्स को इतनी बड़ी सफलता मिली।

बस्तर में तैनात 60 हजार से ज्यादा जवान

नक्सलियों के खिलाफ चल रही लड़ाई के लिए बस्तर में अलग-अलग फोर्स के करीब 60 हजार से ज्यादा जवान तैनात हैं। इनमें कांकेर में SSB, BSF, ITBP, नारायणपुर में ITBP, BSF, STF, कोंडागांव में ITBP, CRPF के जवान तैनात हैं।

वहीं दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा में STF, कोबरा और CRPF के जवान तैनात हैं। इसके अलावा सभी जिलों में DRG, जिला बल, बस्तर फाइटर्स, बस्तरिया बटालियन भी सुरक्षा बलों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं।

अमित शाह ने कहा था- 2026 तक नक्सलवाद से दिलाएंगे आजादी

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जब CG के दौरे पर थे तो उन्होंने दावा किया था कि 2026 तक बस्तर से माओवादियों का खात्मा कर दिया जाएगा। बस्तर नक्सलवाद की समस्या से आजाद हो जाएगा। शाह के इस दावे के बाद बस्तर में जवान नक्सलियों के ठिकाने में घुसकर उन्हें मार रहे हैं। पिछले 9 महीने में 188 माओवादियों को मार गिराया गया है।

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छत्तीसगढ़

महासमुन्द : बारनावापारा अभयाण्य में “बर्ड सर्वे 2026” का आयोजन,200 से अधिक पक्षी प्रजातियों का रिकॉर्ड दर्ज

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देश के 11 राज्यों के प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा,अभयारण्य क्षेत्र में जैव विविधता का वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण, बर्डिंग कल्चर एवं इको पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

महासमुन्द। बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य में 16 से 18 जनवरी 2026 तक “बर्ड सर्वे 2026” का आयोजन किया गया। सर्वे के दौरान पक्षियों की अच्छी विविधता देखने को मिली। अब तक प्राप्त डेटा के अनुसार इस सर्वे में लगभग 202 पक्षी प्रजातियों का रिकॉर्ड दर्ज किया गया है।

इस सर्वे में देश के 11 राज्यों महाराष्ट्र, ओड़िशा, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, गुजरात, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, बिहार, राजस्थान, केरल एवं कर्नाटक से आए 70 प्रतिभागियों, 12 वॉलंटियर्स, विशेषज्ञों एवं फोटोग्राफर्स सहित लगभग 100 लोगों की सहभागिता रही।यह बर्ड सर्वे केवल बारनवापारा अभ्यारण्य तक सीमित न होकर उसके आसपास से जुड़े कोठारी, सोनाखान एवं देवपुर परिक्षेत्रों में भी किया जा रहा है। सर्वे के दौरान प्रतिभागियों द्वारा संग्रहित पक्षी आंकड़े वैश्विक डाटाबेस का हिस्सा बनेंगे।अभयारण्य क्षेत्र में जैव विविधता का वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण, बर्डिंग कल्चर एवं इको पर्यटन को बढ़ावा देने में सहायक होग़ा। सर्वे में प्रमुख विशेषज्ञों  में डॉ. हकीमुद्दीन एफ. सैफी, डॉ. जागेश्वर वर्मा,  मोहित साहू एवं सोनू अरोरा की सहभागिता रही।

सर्वे के आकर्षण बने प्रमुख प्रजातियां-इस सर्वे में विशेष रूप से कुछ प्रजातियाँ प्रतिभागियों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र रहीं, जिनमें बार-हेडेड गूज उल्लेखनीय रही, जो प्रायः मध्य एशिया के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में प्रजनन करती है तथा सर्दियों में भारत सहित दक्षिण एशिया के जलाशयों और खेतों में देखी जाती है। इसी प्रकार आर्द्र घासभूमि, धान के खेतों, दलदली क्षेत्रों एवं नदी किनारे पाए जाने वाले ग्रे-हेडेड लैपविंग, शिकारी पक्षी प्रजाति पेरेग्रिन फाल्कन, ब्लू-कैप्ड रॉक थ्रश, यूरेशियन स्पैरोहॉक,वन पारिस्थितिकी में बीज प्रसार के लिए महत्वपूर्ण माना जाने वाला ऑरेंज-ब्रेस्टेड ग्रीन पिजन का अवलोकन भी आकर्षण का केंद्र बना।

बर्ड सर्वे के सबंध में वनमण्डलाधिकारी गणवीर धम्मशील  ने बताया कि बारनवापारा सेंट्रल छत्तीसगढ़ की जैव विविधता का प्रतिनिधित्व करता है, जहाँ मिश्रित एवं साल वनों के साथ विभिन्न प्रकार के पारिस्थितिक परिदृश्य मौजूद हैं। इस सर्वे से प्राप्त डेटा आगे चलकर अभयारण्य में आवश्यक प्रबंधन कार्ययोजनाओं की पहचान में सहायक होगा, खासतौर पर उन पक्षी प्रजातियों के संरक्षण कार्य में जिनकी संख्या में गिरावट देखी जा रही है।

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छत्तीसगढ़

वीबी-जी राम जी योजना से करमरी में आत्मनिर्भरता को मिली नई दिशा

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डबरियों से मछली पालन, सिंचाई सुविधा, दलहन-तिलहन की खेती तथा उद्यानिकी गतिविधियों को मिल रहा बढ़ावा

मोहला-मानपुर-अम्बागढ़। आदिवासी बहुल एवं कृषि आधारित आजीविका वाले मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी जिले की ग्राम पंचायत करमरी में वीबी-जी राम जी (विकसित भारत ग्राम गारंटी) योजना के अंतर्गत आज जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया और विकासोन्मुख नारों के साथ योजना का स्वागत किया। ग्रामीणों द्वारा मानव श्रृंखला बनाकर “आत्मनिर्भर गांव-विकसित भारत” का संदेश भी दिया गया। 

कार्यक्रम के अंतर्गत कन्वर्जेंस आधारित आजीविका डबरी जैसे कृषि, मछली तालाब निर्माण कार्यों का अवलोकन किया गया। ये कार्य कृषि विभाग, उद्यानिकी विभाग, सीआरईडीए एवं वन विभाग के आपसी समन्वय से तैयार कार्य योजना के अनुसार संचालित किए जा रहे हैं। इन आजीविका डबरियों से मछली पालन, सिंचाई सुविधा, दलहन-तिलहन की खेती तथा उद्यानिकी गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इससे आदिवासी एवं सीमांत किसानों को स्थायी आजीविका, खाद्य सुरक्षा और अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध होंगे।

इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती नम्रता सिंह ने ग्रामीणों को संबोधित किया। उन्होंने वीबी-जी राम जी योजना के उद्देश्यों, स्थानीय रोजगार सृजन और कन्वर्जेंस मॉडल की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ग्राम स्तर पर सक्रिय सहभागिता, पारदर्शिता और सामुदायिक स्वामित्व के बिना किसी भी योजना की सफलता संभव नहीं है, और  वीबी-जीराम जी इन मूल सिद्धांतों पर आधारित है।

कार्यक्रम के दौरान हितग्राही विनोद कुमार एवं दलपत साई मेहरू राम को मछली जाल का वितरण किया गया। इससे मछली पालन गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा और ग्रामीणों में स्वरोजगार के प्रति उत्साह बढ़ेगा। हितग्राहियों ने बताया कि योजना से प्राप्त सहयोग के माध्यम से वे मछली पालन के साथ-साथ दलहन-तिलहन की खेती भी करेंगे, जिससे उनकी आय में निरंतर वृद्धि होगी और परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ बनेगी।ग्रामीणों ने वीबी-जीराम जी योजना को आदिवासी बहुल, कृषि-आधारित जिले के लिए सर्वांगीण विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। गांव आत्मनिर्भर होंगे, तभी भारत विकसित बनेगा के संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।

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खेल

केंद्रीय खेल मंत्री से मिले ओलिंपिक संघ के सचिव सिसोदिया:40वें राष्ट्रीय खेलों का आयोजन छत्तीसगढ़ में किए जाने का किया आग्रह

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रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ ओलिंपिक एसोसिएशन के महासचिव डॉ. विक्रम सिंह सिसोदिया ने नई दिल्ली में केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के आयोजन के लिए केंद्र सरकार का आभार जताया।

बैठक में डॉ. सिसोदिया ने छत्तीसगढ़ में चल रही खेल गतिविधियों की विस्तृत जानकारी साझा की। सिसोदिया ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, जो छत्तीसगढ़ ओलिंपिक एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं, लगातार खेल अधोसंरचना और खिलाड़ियों के विकास के लिए प्रयासरत हैं।

महासचिव ने केंद्रीय खेल मंत्री से आग्रह किया कि मेघालय में प्रस्तावित 39वें राष्ट्रीय खेलों के बाद 40वें राष्ट्रीय खेलों का आयोजन फरवरी 2028 में छत्तीसगढ़ को सौंपा जाए। इससे राज्य के खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिलने के साथ-साथ खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर मंच मिलेगा।

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