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छत्तीसगढ़

809 पूर्व नक्सलियों को PM आवास:पहली बार प्रधानमंत्री आवास योजना के मकान के लिए मदद, हिंसा पीड़ित परिवारों को भी घर के लिए किस्त

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रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ में पहली बार पूर्व नक्सलियों को सरकारी योजना में घर बनाने के लिए सरकार आर्थिक मदद दे रही है। केंद्र सरकार ने बाकायदा इसके लिए छत्तीसगढ़ के लिए अलग से कोटा जारी किया है, ताकि ऐसे नक्सली और नक्सल हिंसा में बर्बाद परिवारों को फिर से नई जिंदगी जीने के लिए मकान-घर की सुविधा मिले। प्रदेश में ये काम प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत किया जा रहा है।

शुक्रवार को सरकार ने पूर्व नक्सली और हिंसा पीड़ित परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर बनाने के लिए पहली किस्त जारी की। छत्तीसगढ़ के विशेष आग्रह पर केंद्र सरकार ने ऐसे परिवारों के लिए 15 हजार आवास स्वीकृत किए हैं। CM साय और गृह मंत्री विजय शर्मा ने कुल दस करोड़ रुपए हितग्राहियों के खातों में भेजे हैं। पहली किस्त के रूप में 2500 परिवारों को 40-40 हजार रुपए जारी किए गए हैं।

मुख्यमंत्री साय ने वर्चुअली जुड़े परिवारों को जारी की राशि

मुख्यमंत्री साय ने अलग-अलग जिलों से मंत्रालय से वर्चुअली जुड़े परिवारों को ये राशि जारी की। CM ने वीडियो कॉन्फ्रेंस में कहा कि राज्य शासन ने केंद्र सरकार से विशेष आग्रह कर आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के लिए जो प्रधानमंत्री आवास योजना की पात्रता की शर्तों में नहीं आ पा रहे थे, उनके लिए 15 हजार आवास स्वीकृत कराया है।

CM साय ने पूर्व नक्सलियों और हिंसा पीड़ित परिवारों से कहा कि अच्छा मकान बनाइए आप लोग, इसमें सरकार हर तरह की मदद करेगी। मुख्यमंत्री ने नक्सली हिंसा के शिकार परिवारों से उनका हाल-चाल पूछा। उन्होंने घर-परिवार और उनके व्यवसाय की जानकारी ली।

नक्सलवाद को समाप्त करने का अभियान अंतिम चरण में

उप मुख्यमंत्री और पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ने भी हितग्राहियों को ऑनलाइन संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है। राज्य में नक्सलवाद को समाप्त करने का अभियान अब अंतिम चरण में है। बस्तर के लोगों के मन से अब आतंक का डर हट जाना चाहिए। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे मुख्य धारा में आएं। बस्तर की शांति और विकास के लिए यह जरूरी है। उन्होंने विशेष परियोजना के तहत हितग्राहियों के चिन्हांकन और इसे अमलीजामा पहनाने के लिए विभागीय अधिकारियों के काम को भी सराहा।

इन्हें जारी हुई किश्त सुकमा के सबसे ज्यादा 809 आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल प्रभावित परिवारों को पहली किस्त मिली है। बीजापुर के 594 और नारायणपुर के 316 परिवार शामिल हैं। बस्तर के 202, दंतेवाड़ा के 180, कोंडागांव के 166 और कांकेर के 138 परिवारों को आवास निर्माण के लिए राशि जारी की गई है।

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कोरबा

वित्तीय वर्ष 25-26 : उत्पादन, प्रेषण और ओबीआर में सकारात्मक वृद्धि दर्ज करने वाली सीआईएल की एकमात्र अनुषंगी कंपनी बनी एसईसीएल

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176.2 मिलियन टन उत्पादन, 178.6 मिलियन टन प्रेषण एवं 364.3 एमसीयूएम ओवरबर्डन निष्कासन के साथ तीनों प्रमुख मानकों में कंपनी ने दर्ज की वृद्धि

बिलासपुर/कोरबा। एसईसीएल ने वित्तीय वर्ष 2025–26 में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए कोल इंडिया लिमिटेड की एकमात्र ऐसी सहायक कंपनी के रूप में अपनी पहचान बनाई है, जिसने कोयला उत्पादन, प्रेषण (आफटेक) तथा ओवरबर्डन निष्कासन (ओबीआर)—तीनों प्रमुख मानकों में एक साथ सकारात्मक वृद्धि दर्ज की है।

उत्पादन, प्रेषण एवं ओबीआर में मजबूत प्रदर्शन

वित्तीय वर्ष 2025–26 में एसईसीएल का कोयला उत्पादन 176.2 मिलियन टन रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 5.26 प्रतिशत (8.8 मिलियन टन) अधिक है।
कोयला प्रेषण 178.6 मिलियन टन रहा, जिसमें 4.6 प्रतिशत (7.9 मिलियन टन) की वृद्धि दर्ज की गई।
रेल माध्यम से प्रेषण में 16 प्रतिशत वृद्धि हुई, जबकि एफएमसी के माध्यम से प्रेषण में 28 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई।
364.3 मिलियन क्यूबिक मीटर ओवरबर्डन निष्कासन के साथ एसईसीएल ने अब तक का सर्वाधिक ओबीआर दर्ज किया।
भूमि अधिग्रहण में ऐतिहासिक प्रगति करते हुए 358 हेक्टेयर भूमि अर्जित की गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 867 प्रतिशत वृद्धि है।

पर्यावरण एवं सतत विकास
एसईसीएल ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं। वर्ष के दौरान 13.96 लाख पौधरोपण कर नया कीर्तिमान स्थापित किया गया तथा मियावाकी पद्धति के माध्यम से सघन वृक्षारोपण को बढ़ावा दिया गया।
43.78 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित कर लगभग 41,200 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी लाई गई।
इसके अतिरिक्त 408 लाख किलोलीटर खदान जल का उपयोग कर 3800 से अधिक हेक्टेयर भूमि में सिंचाई सुनिश्चित की गई।

क्षमता विस्तार एवं नई परियोजनाएं
पर्यावरण स्वीकृतियों के माध्यम से 2.16 मिलियन टन प्रति वर्ष अतिरिक्त क्षमता सुनिश्चित की गई, जबकि भावी विस्तार हेतु स्वीकृत संदर्भ शर्तों से 39.02 मिलियन टन प्रति वर्ष क्षमता वृद्धि का मार्ग प्रशस्त हुआ।
नई परियोजनाओं में दुर्गापुर खुली खदान (10 मिलियन टन प्रति वर्ष) तथा अमृतधारा भूमिगत परियोजना को स्वीकृति प्राप्त हुई।

कोयला गुणवत्ता एवं पारदर्शिता
कोयला गुणवत्ता (ग्रेड पुष्टिकरण) में सुधार करते हुए इसे 68 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत किया गया।
डिजिटल प्रणाली ‘डिजीकोल’ के माध्यम से रियल टाइम निगरानी एवं पारदर्शिता को सुदृढ़ किया गया जिसे सीवीसी द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया।

रोजगार एवं सामाजिक समावेशन
एसईसीएल द्वारा 511 आश्रितों को रोजगार प्रदान किया गया, जो अब तक का सर्वोच्च स्तर है तथा पिछले वर्ष की तुलना में 24 प्रतिशत वृद्धि दर्शाता है।
इसके अतिरिक्त 754 परियोजना प्रभावित व्यक्तियों को भी रोजगार उपलब्ध कराया गया तथा 42 माइनिंग सरदारों की नियुक्ति की गई।

पारदर्शी क्रय एवं प्रशासनिक उत्कृष्टता
सरकारी ई-बाजार (जेम) पोर्टल के माध्यम से रेकॉर्ड 25,799 करोड़ रुपये की खरीद की गई।
एसईसीएल ने विशेष अभियान 5.0 में लगातार तीसरी बार शीर्ष स्थान प्राप्त किया।

तकनीकी नवाचार एवं आधारभूत संरचना
एसईसीएल देश की पहली कोयला सार्वजनिक उपक्रम बनी जिसने पेस्ट फिल तकनीक लागू की।
औसतन 53.2 रेक प्रतिदिन कोयला प्रेषण के साथ परिवहन व्यवस्था को और सुदृढ़ किया गया।
रेल कॉरिडोर परियोजनाओं के माध्यम से कोयला निकासी तंत्र को मजबूत किया गया।

विविधीकरण की दिशा में प्रगति
कंपनी ने कोयला गैसीकरण, उच्च दक्षता तापीय विद्युत, कोयला धुलाई, महत्वपूर्ण खनिजों की खोज, दुर्लभ तत्वों के निष्कर्षण तथा जल आधारित ऊर्जा उत्पादन जैसे क्षेत्रों में प्रगति की है, जो भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं के अनुरूप रणनीतिक पहल को दर्शाता है।

कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व
वित्तीय वर्ष 2025–26 में 365.39 करोड़ रुपये के सामाजिक दायित्व कार्यों को स्वीकृति प्रदान की गई, जो स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण एवं आजीविका के क्षेत्र में व्यापक प्रभाव डाल रहे हैं।

महिला सशक्तिकरण
एसईसीएल ने कोयला उद्योग में पहली बार पूर्णतः महिला संचालित औषधालय एवं महिला संचालित केंद्रीय भंडार इकाई स्थापित कर महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है।

“वित्तीय वर्ष 2025–26 में साऊथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की यह उपलब्धि हमारे प्रत्येक कर्मचारी के समर्पण, कठोर परिश्रम और टीम भावना का परिणाम है। अनेक परिचालन एवं भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद, हमारे कर्मियों ने निरंतर प्रयास करते हुए उत्पादन, प्रेषण एवं ओवरबर्डन निष्कासन तीनों क्षेत्रों में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित की है।
यह सफलता केवल आंकड़ों की उपलब्धि नहीं, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा के प्रति हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतिबिंब है। मैं एसईसीएल परिवार के सभी सदस्यों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए हार्दिक बधाई देता हूं और विश्वास व्यक्त करता हूं कि हम इसी टीम भावना और समर्पण के साथ भविष्य में भी नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेंगे।”

— हरीश दुहन, अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक, एसईसीएल

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कोरबा

जिला कोरबा स्थित मेंडकल दुकानो´ में अनियमितता पाये जाने के कारण लायसेंस निलंबित

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कोरबा। जिला दंडाधिकारी कुणाल दुदावत द्वारा दिये गये निर्देश के परिपालन में एवं सहायक औषधि नियत्रंक के मार्गदर्शन में औषधि विभाग के औषधि निरीक्षको´ के द्वारा जिला  कोरबा स्थित मेडिकल स्टोर्स में बिना प्रिस्क्रीपसन के प्रतिबंधित नशीली दवाओं औषधियों के व्यापार पर नियंत्रण हेतू औचक निरीक्षण की कार्यवाही किया जा रहा है।  
इसी क्रम में विगत दिनो में हरदी बाजार स्थित अन्नपूर्णा मेडिकल स्टोर्स, पाली स्थित जीके मेडिकल स्टोर्स, बालको स्थित मिश्रा मेडिकल स्टोर्स, ओम सांई मेडिकल गोढी, भैसमा स्थित मेनन मेडिकल, जायसवाल मेडिकल, मोनिशा मेडिकल स्टोर्स, प्रिशा मेडिकल ढेलवाडीह, सोहागपुर स्थित गर्वित मेडिकल स्टोर्स एवं छुरी स्थित  मारूति मेडिकल स्टोर्स की जांच की गयी थी एवं जांच के दौरान औषधियों  के क्रय-विक्रय अभिलेख मे अनियमितता पाये जाने पर उन्हे कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। उक्त फर्मो मे से हरदी बाजार स्थित अन्नपूर्णा मेडिकल स्टोर्स, पाली स्थित जीके मेडिकल स्टोर्स, एवं सोहागपुर स्थित गर्वित मेडिकल स्टोर्स के द्वारा प्रस्तुत नोटिस का जवाब संतोषप्रद नही पाये जाने के कारण तीनो फर्मो का लाइसेंस का निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि के दौरान फर्म से औषधियों का क्रय विक्रय नही किया जाएगा। अन्य फर्मो के जवाब प्राप्ति उपरांत अग्रिम कार्यवाही किया जाना प्रस्तावित है।
 औषधि नियम के अनुसार नशे के रूप में दुरूपयोग होने वाली औषधियों को बिना प्रिस्क्रीपसन के बिक्री किया जाना पूर्णरूपेण प्रतिंबंधित है। कोरबा जिले के समस्त ब्लाकों के मेडिकल स्टोर्स के नशीली दवाओं के अवैध विक्रय में नियंत्रण हेतू आगामी समय में इसी प्रकार औषधि विभाग एवं पुलिस विभाग द्वारा संयुक्त रूप से चरणबद्व तरिकों से कार्यवाही की जायेगी।
निरीक्षण के दौरान जांच हेतु कोसबाडी, मडवारानी एवं ढेलवाडीह कटघोरा स्थित मेडिकल स्टोर्स से औषधि नमूनो का संकलन किया गया, जिसे परीक्षण हेतु राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशाला, रायपुर भेजा गया हैं। उक्त औषधि नमूनो की जांच परिणाम उपरांत नियमानुसार कार्यवाही किया जायेगा। उपरोक्त कार्यवाही के दौरान खाद्य एवं औषधि विभाग के  औषधि निरीक्षक उपस्थित थे।

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कोरबा

अग्निवीर थल सेना भर्ती के लिए ऑनलाईन पंजीकरण की अंतिम तिथि बढ़ी 10 अप्रैल 2026 तक करें आवेदन

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कोरबा । सेना भर्ती कार्यालय, रायपुर सेना में भर्ती के लिए ऑनलाईन पंजीकरण प्रक्रिया जो 13 फरवरी 2026 से 01 अप्रैल 2026 तक थी अब उसकी अंतिम तिथि 10 अप्रैल 2026 तक बढ़ा दी गयी है। यह अधिसूचना भारतीय सेना की आधिकारिक वेबसाईट  www.joinindianarmy.nic.in  पर भी उपलब्ध है। इस प्रक्रिया के अन्तर्गत अग्निवीर केटेगरी (अग्निवीर पुरूष जनरल ड्यूटी, तकनीकी, लिपिक/स्टोरकीपर, ट्रेडमैन-दसवीं), ट्रेडमैन (आठवी), अग्निवीर महिला (सेना पुलिस) तथा स्थाई कैडर (नर्सिंग सहायक, सिपाही, फार्मा, हवलदार सेना शिक्षा तथा धर्म शिक्षक) के लिए पंजीकरण किया जा रहा है। इच्छुक तथा योग्य पुरूष अथवा  महिला उम्मीदवार वेबसाईट पर उपलब्ध विभिन्न पदों की अर्हता के अनुसार आवेदन कर सकते हैं।
उम्मीदवार किसी भी स्पष्टीकरण के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के नजदीक, सेना भर्ती कार्यालय रायपुर के दूरभाष क्रमांक 0771-2965212/0771-2965214 पर सम्पर्क कर सकते हैं। भारतीय सेना में चयन पारदर्शी है और केवल योग्यता के आधार पर चयन होता है। उम्मीदवारों को दलालों से सावधान रहने की सलाह दी जाती है।

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