कोरबा
BALCO Reaffirms Commitment to Carbon Neutrality and Water Positivity on World Environment Day
Drives Environmental Stewardship through Renewable Energy Mix, Water Conservation and Community-Led Initiatives
Balconagar: Bharat Aluminium Company Limited (BALCO), a part of Vedanta Aluminium, marked World Environment Day showcasing commitment to sustainability through strategic ongoing interventions encompassing adoption of renewable energy mix, replenishing water structures and afforestation. These initiatives align with the company’s vision of achieving Net Water Positivity by 2030 and Net Zero Carbon Emissions by 2050.

While practicing environmental responsibility in its core operations, BALCO expanded its usage of renewable energy mix contributing to a significant reduction of over 1.6 lakh tonnes of carbon emissions in FY ’25. Further advancing energy efficiency, the company introduced an improved relining design in its potlines, reducing energy consumption by 400 kWh per metric tonne (MT). Enhanced digitisation across logistics has facilitated data-driven fleet management, optimising the movement of raw materials and finished goods, further lowering emissions.

As part of its water conservation efforts, BALCO has recycled over 5.20 million cubic meters of water, achieving a 17% increase over the previous year. In its surrounding communities, the company has restored 28 water structures, including farm ponds and community reservoirs, with a total storage capacity of over 39,000 cubic meters, enhancing groundwater recharge and supporting local agriculture.

Speaking on the developing resilient ecosystem, Mr. Rajesh Kumar, CEO & Director, BALCO said, “Sustainability is central to our growth philosophy at BALCO. Through our focused interventions in environmental stewardship, renewable energy, and community development, we aim to create a resilient ecosystem that supports circular economy and industrial progress while safeguarding environment. Our initiatives are a testament to BALCO’s vision of transforming the planet, responsibly.”
BALCO also continued its afforestation initiatives, planting over 52,000 saplings across operational sites, including mines, ash dykes, and peripheral community areas. The deployment of electric forklifts in operations and electric vehicles for township waste management and movement, has further contributed to cleaner, energy-efficient operations with a lower carbon footprint.
In alignment with BALCO’s commitment to ‘Transforming the Planet’, the company has maintained ash-free operational spaces while actively channelling fly ash for constructive use across multiple industries, including brick and cement manufacturing, infrastructure development, road construction, mines backfilling and more.
Further strengthening its environmental stewardship in FY25, BALCO has undertaken several key sustainability initiatives, including:
• Development of plastic-free zones within plant premises
• Promotion of electric vehicle usage among employees
• Conduct of nature walks and cleanliness drives to raise awareness on local biodiversity
• Organisation of gardening competitions promoting native and exotic plant species
• Community campaigns celebrating the ecological richness of Chhattisgarh to foster environmental empathy
कोरबा
SECL Inaugurates Model Anganwadi Centre in Bilaspur
200 Anganwadi Centres Across Bilaspur District Being Upgraded Under Rs.4.72 Crore CSR Initiative
Bilaspur/Korba. South Eastern Coalfields Limited (SECL) inaugurated a Model Anganwadi Centre at Lingiadih, Bilaspur, under its Corporate Social Responsibility (CSR) initiative aimed at strengthening early childhood education and improving grassroots social infrastructure. The centre is part of a larger project under which 200 Anganwadi Centres across Bilaspur district are being modernized with a financial assistance of Rs.4.72 crore.

The inauguration was carried out by Shri Biranchi Das, Director (Human Resources), SECL. Speaking on the occasion, he emphasized that quality early childhood education and improved learning facilities play a vital role in laying a strong foundation for the holistic development of children. He expressed confidence that the upgraded centre would provide a more conducive and engaging learning environment for young learners.
Senior officials of SECL, including Shri Ajay Behera, General Manager (CSR), and officers from the CSR Department, were also present during the programme.

The Anganwadi Centre currently has 22 enrolled children. On the occasion, educational materials such as books, pencils, drawing pads, sketch books and other learning aids were distributed among the children. The upgraded facility features child-friendly learning spaces, improved sanitation facilities, educational aids and modern furniture designed to support early childhood development.
It is noteworthy that SECL is implementing several impactful CSR initiatives across Bilaspur district in the fields of education, healthcare and social welfare. Recently, the foundation stone for a state-of-the-art Old Age Home and Divyangjan Rehabilitation Centre, being developed through SECL’s CSR funding at Sakri, Bilaspur, was laid by Hon’ble Chief Minister of Chhattisgarh Shri Vishnu Deo Sai.
कोरबा
एसईसीएल ने बिलासपुर में मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र का किया शुभारंभ
रू.4.72 करोड़ की सीएसआर परियोजना के तहत बिलासपुर जिले की 200 आंगनबाड़ियों का हो रहा उन्नयन
बिलासपुर/कोरबा। साऊथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) ने अपनी सीएसआर पहल के अंतर्गत बिलासपुर के लिंगियाडीह में विकसित मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र का लोकार्पण किया। यह केंद्र बिलासपुर जिले की 200 आंगनबाड़ियों के आधुनिकीकरण एवं उन्नयन के लिए रू.4.72 करोड़ की लागत से संचालित परियोजना का हिस्सा है।

इस अवसर पर एसईसीएल के निदेशक (मानव संसाधन) बिरंची दास ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा और बेहतर सुविधाएं बच्चों के सर्वांगीण विकास की मजबूत नींव तैयार करती हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के लिए सीखने का बेहतर वातावरण उपलब्ध कराएगा।
कार्यक्रम में महाप्रबंधक (सीएसआर) अजय बेहरा, सीएसआर विभाग सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

वर्तमान में केंद्र में 22 बच्चे नामांकित हैं। इस अवसर पर बच्चों को पुस्तकें, पेंसिल, ड्राइंग पैड, स्केच बुक सहित विभिन्न शिक्षण सामग्री वितरित की गई। उन्नत केंद्र में बाल-अनुकूल शिक्षण कक्ष, बेहतर स्वच्छता सुविधाएं, शैक्षणिक सामग्री एवं आधुनिक फर्नीचर उपलब्ध कराया गया है।
उल्लेखनीय है कि एसईसीएल शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में बिलासपुर जिले में अनेक महत्वपूर्ण सीएसआर परियोजनाएं संचालित कर रहा है। हाल ही में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा बिलासपुर के सकरी क्षेत्र में एसईसीएल की सीएसआर निधि से निर्मित किए जाने वाले अत्याधुनिक वृद्धाश्रम एवं दिव्यांगजन पुनर्वास केंद्र का शिलान्यास किया गया था।
कोरबा
दीपका नगर पालिका में भ्रष्टाचार और सरकारी संपत्ति पर कब्जे का आरोप, नेता प्रतिपक्ष हर्षित देवी राजपूत ने कलेक्टर से की शिकायत
जनता के पैसे का निजी इस्तेमाल, पार्षदों ने अपने घरों में करा लिए बोरवेल
वार्ड क्रमांक 10 का बस स्टैंड बना असामाजिक तत्वों का अड्डा, माफियाओं ने जमाया अवैध कब्जा
नेता प्रतिपक्ष ने दी चेतावनी- जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो होगा आंदोलन
कोरबा/दीपका। नगर पालिका परिषद दीपका की नेता प्रतिपक्ष श्रीमती हर्षित देवी राजपूत ने क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार, जनहित की अनदेखी और शासकीय संपत्तियों के दुरुपयोग को लेकर जिला कलेक्टर को दो अलग-अलग ज्ञापन सौंपकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने वर्तमान व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाते हुए जिला प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है ।

पार्षद निधि की भारी लूट, जनता के पैसे से निजी घरों में बोरवेल
नेता प्रतिपक्ष हर्षित देवी राजपूत ने साक्ष्यों के साथ शिकायत करते हुए बताया कि नगर पालिका दीपका के वार्ड क्रमांक 04, 05 और 18 में जनता की सहूलियत के लिए स्वीकृत पार्षद निधि का खुल्लम-खुल्ला दुरुपयोग किया जा रहा है, सार्वजनिक स्थानों पर लगने वाले बोरवेल (नलकूप) को पार्षदों द्वारा अपने व्यक्तिगत फायदे के लिए निजी घरों में करवा लिया गया है ।
नेता प्रतिपक्ष हर्षित देवी राजपूत ने कहा कि जब जनता पानी की बूंद-बूंद के लिए तरस रही है, तब जनता के टैक्स के पैसे से पार्षद अपने घरों को चमका रहे हैं। इस बंदरबांट को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा ।
20 साल से बंद पड़ा बस स्टैंड बना कबाड़ और कोल माफियाओं का गढ़
दूसरे गंभीर मामले में नेता प्रतिपक्ष ने वार्ड क्रमांक 10 स्थित बस स्टैंड की दुर्दशा पर प्रशासन को घेरा, उन्होंने बताया कि यह बस स्टैंड पिछले 20 वर्षों से निष्क्रिय पड़ा है, जिससे जनता को इसका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस निष्क्रियता का फायदा उठाकर कोल एवं कबाड़ माफियाओं ने बस स्टैंड परिसर और वहां निर्मित दुकानों पर अवैध कब्जा कर लिया है। वर्तमान में यह पूरा परिसर शराबियों और असामाजिक गतिविधियों का मुख्य अड्डा बन चुका है। दुःखद बात यह है कि नगर पालिका परिषद के जिम्मेदार अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी मूकदर्शक बने बैठे हैं ।
कलेक्टर कार्यालय में शिकायत दर्ज, जांच की मांग
दोनों ही मामलों की लिखित शिकायत आज दिनांक 08 जून 2026 को कलेक्टर कार्यालय कोरबा में दर्ज करा दी गई है, जिसकी पावती पत्र क्रमांक 25 है। नेता प्रतिपक्ष हर्षित देवी राजपूत ने कलेक्टर से मांग की है कि वे स्वयं या उच्च अधिकारियों की टीम भेजकर इन स्थलों का भौतिक निरीक्षण (Spot Inspection) कराएं और दोषियों के खिलाफ तत्काल दंडात्मक कार्रवाई करते हुए बस स्टैंड को अतिक्रमण मुक्त कराएं ।
उन्होंने साफ लहजे में चेतावनी दी है कि यदि नगर पालिका प्रशासन और जिला प्रशासन ने इस पर जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो वे जनता के हक के लिए सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने को विवश होंगी ।


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BALCO also continued its afforestation initiatives, planting over 52,000 saplings across operational sites, including mines, ash dykes, and peripheral community areas. The deployment of electric forklifts in operations and electric vehicles for township waste management and movement, has further contributed to cleaner, energy-efficient operations with a lower carbon footprint.
In alignment with BALCO’s commitment to ‘Transforming the Planet’, the company has maintained ash-free operational spaces while actively channelling fly ash for constructive use across multiple industries, including brick and cement manufacturing, infrastructure development, road construction, mines backfilling and more.
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SECL के बंद मकान में लगी भीषण आग, DJ-लाइट व टेंट का लाखों का सामान जलकर खाक, असामाजिक तत्वों पर जताई जा रही शंका
संवाददाता साबीर अंसारी
बांकीमोंगरा :– पुराने थाना परिसर के पीछे स्थित रहवासी क्षेत्र में एक बंद पड़े SECL के मकान में शनिवार दोपहर करीब 12:30 बजे अचानक भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही देर में पूरे मकान को अपनी चपेट में ले लिया। घटना से क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
जानकारी के अनुसार, मकान से उठते धुएं को सबसे पहले वहां खेल रहे बच्चों ने देखा और इसकी सूचना अपने परिजनों को दी। देखते ही देखते धुआं आग की भयावह लपटों में बदल गया। सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों ने डायल 112 को फोन किया, जिसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची। वहीं नगर पालिका परिषद बांकीमोंगरा के कर्मचारी विद्यासागर पानी का टैंकर लेकर घटनास्थल पहुंचे।

स्थानीय रहवासियों, पुलिस एवं नगर पालिका के सहयोग से बाल्टियों और टैंकर के पानी की मदद से आग बुझाने का प्रयास शुरू किया गया। लोगों की तत्परता से आग को आसपास के मकानों तक फैलने से रोक लिया गया, जिससे एक बड़ी दुर्घटना टल गई।
बताया जा रहा है कि उक्त मकान का उपयोग एक लाइट एवं साउंड संचालक द्वारा गोदाम के रूप में किया जा रहा था, जहां डीजे, साउंड सिस्टम, लाइटिंग उपकरण, टेंट एवं अन्य सामग्री रखी हुई थी। आग की चपेट में आने से लगभग 5 लाख रुपये से अधिक मूल्य का डीजे, लाइट एवं टेंट का सामान पूरी तरह जलकर खाक हो गया।

घटना को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। स्थानीय लोगों द्वारा असामाजिक तत्वों के द्वारा आग लगाए जाने की शंका भी जताई जा रही है। हालांकि आग लगने के वास्तविक कारणों का अभी खुलासा नहीं हो सका है और पुलिस मामले की जांच कर रही है।
वहीं लोगों में इस बात को लेकर भी नाराजगी देखने को मिली कि हमेशा की तरह अग्निशमन वाहन आग से अधिकांश सामान जलकर खाक हो जाने के बाद मौके पर पहुंचा। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि फायर ब्रिगेड केंद्र दूर होने के कारण आपात स्थितियों में अक्सर विलंब होता है, जिससे नुकसान बढ़ जाता है।
खबर लिखे जाने तक आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया था। राहत की बात यह रही कि घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, लेकिन लाखों रुपये की संपत्ति नष्ट हो गई। अब सभी की नजर पुलिस जांच पर टिकी है कि आग हादसा थी या इसके पीछे किसी असामाजिक तत्व का हाथ है।
नगर पालिका परिषद बांकीमोंगरा
बांकी – एसईसीएल कॉलोनी में चरम पर अवैध बेजा कब्जा, रहवासियों ने सौंपा ज्ञापन, प्रबंध की नजर अनदेखी समझ से परे…देखे पूरी खबर
संवाददाता साबीर अंसारी
बांकी मोंगरा :- नगर पालिका परिषद बांकी मोगरा के वॉर्ड क्रमांक 14 एसईसीएल कॉलोनी में इन दिनों अवैध कब्जा निर्माण जोरो पर है, किसी ने कॉलोनी के बिछे बची जगह में अपना मकान निर्माण करा लिया तो कही क्वाटर के सामने पक्का निर्माण कराकर अतिक्रमण किया गया है।
इसी विषय पर गंभीर होकर कॉलोनी के रहवासियों ने एसईसीएल प्रबंधन को ज्ञापन सौंपकर क्षेत्र में कथित बेजा कब्जे को हटाने की मांग की है। ज्ञापन में संतराम साहू का नाम उल्लेखित करते हुए आरोप लगाया गया है कि उनके द्वारा कॉलोनी क्षेत्र में अतिक्रमण किया गया है, जिससे स्थानीय नागरिकों को विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है और भविष्य में इससे बड़ी बड़ी समस्याएं भी उत्पन्न होगी ।

• शिकायत के बाद भी प्रबंधन की नजर अनदेखी करना समझ से परे।
• आखिर क्यों नहीं की जाती कार्यवाही, क्या पर्दे के पीछे चलता है की और खेल।

स्थानीय निवासियों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि बार-बार शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, इस ज्ञापन में एसईसीएल प्रबंधन से मामले की जांच कर कार्रवाई करने तथा भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की गई है साथ ही चेतावनी दी है कि समय रहते कार्यवाही नहीं हुई तो हम आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे, जिसकी संपूर्ण जवाबदारी प्रबंधन की होगी ।
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‘PM को बच्चों के भविष्य की नहीं, अपनी सरकार के अस्तित्व की चिंता है’ : राहुल गांधी
नई दिल्ली, एजेंसी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की गड़बड़ी पर चुप्पी और शिक्षा मंत्री के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं किया जाना यह दर्शाता है कि उन्हें केवल अपनी सरकार के अस्तित्व की चिंता है, लाखों छात्रों के भविष्य की नहीं। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि वह पहले दिन से ही सीबीएसई की 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' (ओएसएम) और 'सीओईएमपीटी' को अनुबंध दिए जाने के मामले में स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग कर रहे हैं, क्योंकि देश के युवाओं को सच जानने का अधिकार है। गांधी ने मीडिया की खबरों को साझा किया और लोगों से उन्हें ध्यानपूर्वक पढ़ने का आह्वान किया।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया, ”सीबीएसई ने ओएसएम निविदाएं तीन बार आमंत्रित कीं। पहली बार एक भी बोली नहीं लगी। दूसरी बार कोई भी बोलीदाता पात्र नहीं पाया गया। और अंततः, तकनीकी मानकों को तब तक कमतर किया गया जब तक कि ‘सीओईएमपीटी’ उन्हें पार नहीं कर गई। स्कैनिंग रेजोल्यूशन कम कर दिया गया। रोबोटिक स्कैनर की अनिवार्यता हटा दी गई। सीएमएमआई प्रमाणन स्तर-5 से घटाकर स्तर-3 कर दिया गया। उत्तर पुस्तिकाओं में त्रुटियों के लिए जुर्माने के प्रावधान भी हटा दिये गए।” राहुल गांधी ने कहा, ”भारत की सबसे बड़ी आईटी सेवा कंपनी टीसीएस ने भी तीसरे दौर के लिए अर्हता प्राप्त की थी। लेकिन टीसीएस दौड़ में हार गई और सीओईएमपीटी-एक ऐसी कंपनी जिसका रिकॉर्ड विफलताओं से भरा रहा है-वह जीत गई। और आज सीबीएसई के छात्र किस बात की शिकायत कर रहे हैं? खराब तरीके से स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं, गायब पन्ने और एक खराब मूल्यांकन पोर्टल।”

गांधी ने कहा कि शिक्षकों ने सीबीएसई को चेतावनी दी थी कि ओएसएम प्रणाली को राष्ट्रव्यापी क्रियान्वयन से पहले कम से कम एक या दो साल की अतिरिक्त तैयारी की आवश्यकता है, फिर भी इसे जल्दबाजी में आगे बढ़ा दिया गया। लोकसभा में विपक्ष के नेता गांधी ने कहा, ”तो मैं फिर से पूछता हूं – कौन चाहता था कि सीओईएमपीटी जीते? किसने धीरे-धीरे मानकों को इतना कम किया कि यह कंपनी इसे पार कर सके?” उन्होंने कहा, “प्रधान जी और सीबीएसई का कहना है कि ‘कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया’। यह कोई जवाब नहीं है, यह जवाबदेही नहीं है। सवाल यह है कि क्या अनुबंध ईमानदारी से उस सर्वश्रेष्ठ कंपनी को दिया गया था जो काम को सही ढंग से कर सकती थी?”

गांधी ने कहा कि 18.5 लाख बच्चों का भविष्य एक ऐसी कंपनी के हाथों में सौंप दिया गया, जो केवल तब अर्हता प्राप्त कर सकी जब उसके लिए नियमों में ”ढील दी गई।” उन्होंने कहा, ”सवाल पूछने के कारण मुझ पर हमला करने वाले भाजपा मंत्रियों के लिए – मैंने पहले दिन से ही स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की। इसे (जांच को) सीबीएसई से लेकर सीओईएमपीटी को दिए गए हर अनुबंध तक विस्तारित करें। हमारे युवाओं को सच्चाई जानने का हक है।” गांधी ने कहा, “मोदी जी, सीबीएसई की गड़बड़ी पर आपकी चुप्पी और शिक्षा मंत्री के खिलाफ आपकी निष्क्रियता देश को बताती है कि आपको वास्तव में किसकी परवाह है – लाखों छात्रों के भविष्य की नहीं, बल्कि सिर्फ अपनी सरकार के अस्तित्व की।”

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मीडिया की खबरों का हवाला देते हुए कहा कि उनसे यह खुलासा हुआ है कि सीबीएसई ने इस साल की कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं के लिए ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ (ओएसएम) प्रणाली प्रदान करने वाले ठेकेदारों के लिए प्रस्तावों के वास्ते अपने अनुरोध में तकनीकी शर्तों को लगातार नरम किया। रमेश ने अन्य चिंताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि न्यूनतम ‘स्कैनिंग रेजोल्यूशन’ को 300 डीपीआई से घटाकर 200 डीपीआई कर दिया गया और अनिवार्य ‘कैपेबिलिटी मैच्योरिटी मॉडल इंटीग्रेशन’ (सीएमएमआई) प्रमाणन को स्तर-5 से घटाकर स्तर-3 कर दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जुर्माना के प्रावधानों को इस तरह बदला गया कि उनका ध्यान त्रुटियों के बजाय गति पर केंद्रित हो गया। उन्होंने कहा कि साथ ही, उत्तर पुस्तिकाओं की ‘स्पाइन’ (बाइंडिंग) काटे बिना स्कैन करने की शर्त हटा दी गई और रोबोटिक स्कैनर के प्रावधान को भी खत्म कर दिया गया।

जयराम रमेश ने शेयर किया पोस्ट
रमेश ने अपने पोस्ट में कहा, “अंतिम ‘आरएफपी’ अगस्त 2025 में जारी किया गया था, जो सीबीएसई कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं से केवल छह महीने पहले था। हम पहले से ही जानते हैं कि ओएसएम को लागू करने की जल्दबाजी में क्षेत्रीय केंद्रों पर प्रायोगिक परियोजना आयोजित करने के सीबीएसई बोर्ड के समझदारी भरे सुझाव को नजरअंदाज कर दिया गया था।” उन्होंने आरोप लगाया कि स्पष्ट रूप से, सीबीएसई की कार्रवाई में अनावश्यक जल्दबाजी तथा गुणवत्ता एवं छात्र-केंद्रित प्रावधानों को कमजोर करने की झलक मिलती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस वर्ष से ही ओएसएम को अपना लिया जाए। कांग्रेस नेता ने अपनी पोस्ट में प्रश्न किया, ”कई सवाल उठते हैं- ‘आरएफपी’ में तकनीकी शर्तों को क्यों कमजोर किया गया? क्या यह निविदा के लिए बोली लगाने वाले ठेकेदारों के कहने पर किया गया था? सीबीएसई ने उन प्रावधानों (उच्च स्कैनिंग रिज़ॉल्यूशन, गलत तरीके से स्कैन की गई प्रतियों के लिए जुर्माना आदि) को क्यों कमजोर किया जो त्रुटियों को कम कर सकते थे और छात्रों व मूल्यांकनकर्ताओं की सहायता कर सकते थे? किस तरह का दबाव था?”

रमेश ने यह सवाल भी उठाया कि क्षेत्रीय स्तर पर प्रायोगिक परियोजना के जरिए गहन जांच किए बिना और तकनीकी बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता से समझौता करके ‘ओएसएम’ को अपनाने में इतनी जल्दबाजी दिखाने के पीछे क्या कारण था। उन्होंने सवाल किया, “क्या सीओईएमपीटी की पृष्ठभूमि की जांच की गई थी, जिसे अंततः सीबीएसई ने अनुबंध दिया? क्या सीबीएसई ने इस तथ्य पर विचार किया कि सीओईएमपीटी का नाम पहले ‘ग्लोबारेना’ था और वह विवादों में घिरी रही थी? क्या मोदी सरकार के राजनीतिक आकाओं की ओर से यह सुनिश्चित करने का दबाव था कि ठेका सीओईएमपीटी को ही मिले?”
कांग्रेस नेता रमेश ने कहा, ”सीबीएसई को पाक साफ होना चाहिए और वेंडर के चयन, आरएफपी में किए गए संशोधनों, ओएसएम को अपनाने में दिखाई गई जल्दबाजी के कारणों और परीक्षाओं से पहले आयोजित बोर्ड बैठकों के विवरण से संबंधित सभी दस्तावेज सार्वजनिक करने चाहिए। शायद मंत्री प्रधान कीचड़ उछालने और राजनीति करने के बजाय इन सवालों के जवाब दे सकते हैं।”
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