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विदेश

यूरोप की ओर बढ़े US के ‘ विशाल उड़ते पेट्रोल पंप’, अमेरिका के अचानक सैन्य एक्शन से मची खलबली

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वाशिंगठन,एजेंसी। अगर आपने आज आसमान में बहुत सारे विशाल सैन्य विमान उड़ते देखे हैं, तो आप कोई सपना नहीं देख रहे ये सब असल में हो रहा है।अमेरिका के विभिन्न सैन्य ठिकानों से एक बड़ी संख्या में  एरियल रिफ्यूलिंग टैंकर विमान (यानी हवा में ईंधन भरने वाले विमान, जिन्हें “उड़ते हुए पेट्रोल पंप” भी कहा जाता है) उड़ान भर चुके हैं और ये सभी यूरोप की दिशा में बढ़ते दिख रहे हैं।

क्या संकेत दे रहे ये घटनाक्रम?

  • इस तरह के टैंकर विमान तब भेजे जाते हैं  जब अमेरिका बड़ी संख्या में लड़ाकू विमानों को लंबे समय तक आसमान में तैनात रखना चाहता है। 
  • टैंकर विमानों की ये तैनाती बताती है कि कोई बड़ी सैन्य गतिविधि या ऑपरेशन की तैयारी हो रही है। 
  • ऐसा तभी होता है जब  संभावित युद्ध या सैन्य तनाव बढ़ रहा हो और अमेरिकी सेना को अपने लड़ाकू विमानों को दूरस्थ क्षेत्रों में लंबे समय तक मिशन पर भेजना हो।

क्या बोले रक्षा विशेषज्ञ
हाल के दिनों में यूरोप में रूस और नाटो (NATO) के बीच तनाव पहले से कहीं ज्यादा बढ़ा है। ऐसे में यह आशंका जताई जा रही है कि अमेरिका  पूर्वी यूरोप या बाल्टिक क्षेत्र में सैन्य उपस्थिति बढ़ा सकता है।  रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि “इतने सारे टैंकर विमानों का एक साथ उड़ान भरना सामान्य बात नहीं है। यह दर्शाता है कि अमेरिका किसी बड़े एयर ऑपरेशन की तैयारी में है।”  अगर ऐसा है तो जल्द ही F-16, F-35 जैसे लड़ाकू विमान भी यूरोप भेजे जा सकते हैं। 

Pentagon से कोई आधिकारिक बयान नहीं
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (Pentagon) ने अभी तक  इस मिशन पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। लेकिन इंटरनेट पर और सोशल मीडिया पर लोग लगातार टैंकर विमानों की उड़ानों की  लाइव लोकेशन साझा कर रहे हैं, जिससे ये खबर और ज्यादा गर्म हो गई है।आकाश में इन विशाल विमानों की हलचल यह साफ संकेत दे रही है कि कुछ बड़ा और असामान्य घटने वाला है। अमेरिका की यह गतिविधि किसी बड़े सैन्य ऑपरेशन की ओर इशारा कर रही है। आने वाले कुछ दिन यूरोप और दुनिया की सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम हो सकते हैं। 

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विदेश

नेपाल में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1453 हुई, लगभग 5300 लोग अब भी लापता

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काठमांडू, एजेंसी। नेपाल में पिछले महीने अचानक आई विनाशकारी बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,453 हो गई है और 5285 लोग अब भी लापता हैं। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) ने शनिवार को यह जानकारी दी। एनडीआरआरएमए ने बताया कि अब तक 1,451 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि दो अन्य लोगों की इलाज के दौरान मौत हुई। उसने बताया कि अब तक कुल 13,795 लोगों को बचाया गया है। बचाए गए लोगों में से 1,113 लोग वर्तमान में 21 अस्थायी शिविरों में रह रहे हैं। इनमें नुवाकोट के 187, रसुवा के 805 और धादिंग जिले के 121 लोग शामिल हैं।

नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को अचानक आई बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के शहरों तथा गांवों में भारी तबाही मचाई थी। चीनी मीडिया के अनुसार, इस आपदा में तिब्बत में भी 43 लोगों की मौत हुई, जबकि 500 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। एनडीआरआरएमए के अनुसार, नेपाल में सुरक्षा एजेंसियों ने अब तक बाढ़ प्रभावित करीब 11,000 लोगों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई है। उसने बताया कि बाढ़ में घायल सात लोगों का अभी इलाज चल रहा है। आपदा के एक महीने बाद भी मृतकों की पहचान करना बड़ी चुनौती बना हुआ है।

एनडीआरआरएमए के अनुसार, अब तक बरामद 1,453 शवों में से 112 की पहचान कर उन्हें उनके परिवारों को सौंप दिया गया है। पुलिस ने बताया कि बरामद शवों और अवशेषों से 1,329 डीएनए नमूने एकत्र किए गए हैं, जबकि लापता लोगों के परिजनों से 2,060 अन्य नमूने लिये गए हैं।

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विदेश

पाकिस्तान : डेरा इस्माइल खान में धमाका, 12 लोगों की मौत, 18 अन्य घायल

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इस्लामाबाद,एजेंसी। पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में शनिवार को प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के एक आत्मघाती हमलावर ने पुलिस चौकी को निशाना बनाया, जिसमें दो महिलाओं और दो बच्चों समेत कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई तथा 18 अन्य घायल हो गए। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

पाकिस्तान की राष्ट्रीय आपातकालीन प्रतिक्रिया सेवा रेस्क्यू 1122 के अनुसार, यह घटना डेरा इस्माइल खान जिले की दराजिंदा तहसील में हुई, जो अशांत खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान प्रांतों की सीमा के पास स्थित है। क्षेत्रीय पुलिस अधिकारी खान मुबाशिर मलिक ने बताया कि आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटकों से लदी ट्रैक्टर-ट्रॉली को अमन मेला पुलिस चौकी से टकरा दिया। उन्होंने बताया कि हमले में 12 लोगों की मौत हुई और 18 अन्य घायल हुए हैं।

पुलिस के अनुसार, मारे गए लोगों में सीमा शुल्क और उत्पाद शुल्क विभाग के दो अधिकारी भी शामिल हैं। घायलों को इलाज के लिए जिला मुख्यालय अस्पताल ले जाया गया, जबकि मृतकों के शव भी वहीं पहुंचाए गए हैं। पुलिस ने बताया कि हमले में इस्तेमाल किए गए विस्फोटकों की प्रकृति का पता लगाने के लिए बम निरोधक दस्तों को घटनास्थल पर भेजा गया है। सुरक्षा बलों ने हमले के बाद इलाके की घेराबंदी करके तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। मामले की आगे जांच की जा रही है। 

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देश

पाकिस्तानी PM की धमकी- पानी रोकना जंग जैसा:UN में शहबाज बोले- कश्मीर गले की नस, भारत का जवाब- अवैध कब्जे वाले कश्मीर की हालत देखें

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न्यूयॉर्क, एजेंसी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार को UN में भारत को जंग की धमकी दी। उन्होंने कहा कि भारत सिंधु नदी का पानी न रोके। पानी रोकने की कोशिश को पाकिस्तान युद्ध की कार्रवाई मानेगा।

शहबाज शरीफ ने UN में कश्मीर का मुद्दा भी उठाया। शहबाज ने कहा कि कश्मीर हमारे लिए गर्दन की नस है।

कश्मीर का मुद्दा उठाने पर UN में भारत की फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने कहा कि पाकिस्तान को अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) की हालत देखनी चाहिए।

पहलगाम हमले और भारत-पाकिस्तान संघर्ष का जिक्र

शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में पहलगाम हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की सेना ने फील्ड मार्शल आसीम मुनीर के नेतृत्व में सटीक जवाब दिया।

उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तारीफ करते हुए कहा कि मई 2025 में दोनों देशों के बीच तनाव कम कराने और युद्ध जैसी स्थिति टालने में उनकी भूमिका अहम रही।

शहबाज ने कहा कि ट्रम्प की कोशिशों से बड़ा टकराव टल गया। इसका 87 सेकेंड का वीडियो ट्रम्प ने शुक्रवार को बिना किसी टिप्पणी के ट्रुथ सोशल पर शेयर किया।

शहबाज ने यह भी कहा कि दक्षिण एशिया में फिर से ऐसे हालात नहीं बनने चाहिए। उनके मुताबिक, इसके लिए कश्मीर मुद्दे का समाधान जरूरी है।

शहबाज शरीफ के दावों पर भारतीय राजनयिक आर. श्रीनिवास हंसते नजर आए।

शहबाज शरीफ के दावों पर भारतीय राजनयिक आर. श्रीनिवास हंसते नजर आए।

सिंधु जल संधि पर भारत के कदम को बताया गैरकानूनी

शहबाज ने कहा कि पिछले साल भारत-पाकिस्तान संघर्ष के बाद भारत ने इस संधि को एकतरफा रोक दिया, जिसका कोई कानूनी आधार नहीं है।

शहबाज ने दावा किया कि UN के विशेषज्ञों और स्थायी मध्यस्थता अदालत ने भी इस मामले में भारत के दावों और कदमों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि इससे पाकिस्तान का रुख सही साबित हुआ है।

अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि पर रोक लगा दी थी। हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। भारत का आरोप है कि हमले में शामिल आतंकियों को पाकिस्तान का समर्थन था।

इस्लामोफोबिया का भी मुद्दा उठाया

शहबाज शरीफ ने दुनिया में बढ़ते इस्लामोफोबिया पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मुस्लिमों को नफरत भरी बयानबाजी, भेदभाव और हमलों का सामना करना पड़ रहा है। मस्जिदों पर हमले और कुरान के अपमान की घटनाएं भी चिंता का विषय हैं।

भारत का जिक्र करते हुए शहबाज ने आरोप लगाया कि सीमा पार RSS से प्रभावित विचारधारा धार्मिक नफरत को बढ़ावा दे रही है।

उन्होंने कहा कि इसका असर मॉब लिंचिंग, सांप्रदायिक हिंसा, धार्मिक स्थलों पर हमलों और धार्मिक स्वतंत्रता पर पाबंदियों के रूप में दिखाई दे रहा है।

होर्मुज और बाब अल-मंदेब को खुला रखने की अपील

शहबाज ने होर्मुज स्ट्रेट और बाब अल-मंदेब को दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम समुद्री रास्ते बताया। उन्होंने कहा कि ये रास्ते खुले रहने चाहिए और इन्हें देशों के बीच टकराव का रास्ता नहीं बनने देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इन समुद्री रास्तों से दुनिया के कई देश जुड़े हुए हैं। अगर ये रास्ते बंद होते हैं तो इसका असर सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

भारत ने कहा- जम्मू-कश्मीर हमारा अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा

भारत ने जम्मू-कश्मीर को अपना अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा बताते हुए पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर की स्थिति का मुद्दा उठाया।

भारत की UN में फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने कहा कि पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर के लोग लंबे समय से हो रही मनमानी हत्याओं, हिंसा और बुनियादी अधिकारों से वंचित हैं। उनके बारे में भी सवाल किए जाने चाहिए।

भारत के जवाब की 5 बड़ी बातें

सीमा पार आतंकवाद पर नतीजे भुगतने होंगे-

सीमा पार आतंकवाद पाकिस्तान की पुरानी नीति रही है। भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी रक्षा करने के अधिकार का इस्तेमाल जारी रखेगा। पाकिस्तान की ओर से होने वाले आतंकवाद के गंभीर परिणाम होंगे।

पाकिस्तान में रहता था ओसामा बिन लादेन-

भारतीय अफसर पेटल गहलोत ने ओसामा बिन लादेन के पाकिस्तान में रहने का जिक्र किया। उन्होंने कहा दुनिया ने 9/11 आतंकी हमले की 25वीं बरसी मनाई है। उस हमले का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान की सेना की सबसे बड़ी सैन्य अकादमी के पास रहता था।

पाकिस्तान के लोकतंत्र में सेना की भूमिका-

गहलोत ने पाकिस्तान में लोकतांत्रिक अधिकारों और शासन व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में असली ताकत चुनी हुई सरकार के पास नहीं, बल्कि सेना के हाथ में है।

धार्मिक असहिष्णुता पर भारत ने अल्पसंख्यकों का मुद्दा उठाया-

भारत ने पाकिस्तान में धार्मिक असहिष्णुता और अल्पसंख्यकों की स्थिति का मुद्दा उठाया। गहलोत ने ईशनिंदा कानूनों, कट्टरता और नफरत के पाकिस्तान के रिकॉर्ड का हवाला दिया।

पाकिस्तान सरकार फॉर्म 47 सरकार है-

गहलोत ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि पाकिस्तान के लोग जिस सरकार को खुद ‘फॉर्म 47 सरकार’ कहते हैं, उनसे ऐसी ही उम्मीद की जा सकती है। भारत ने उस देश से लोकतांत्रिक अधिकारों और मानवीय मूल्यों पर उपदेश सुने, जो इस समय अपने ही लोगों से सुरक्षा का खतरा है।

क्या है फॉर्म 47 सरकार

‘फॉर्म 47 सरकार’ पाकिस्तान में विपक्ष, खासकर PTI और उसके समर्थकों की ओर से शहबाज शरीफ की गठबंधन सरकार के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला राजनीतिक शब्द है।

इसका संबंध फरवरी 2024 के आम चुनाव के बाद उठे चुनावी धांधली के आरोपों से है। फॉर्म 47 चुनाव आयोग का आधिकारिक दस्तावेज है, जिसमें निर्वाचन क्षेत्र के संकलित नतीजे दर्ज होते हैं।

विपक्ष का आरोप है कि फॉर्म 47 में दर्ज वोटों का आंकड़ा मतदान केंद्रों के फॉर्म 45 से मेल नहीं खाता और नतीजे तैयार करते समय हेरफेर की गई, जिससे PTI समर्थित उम्मीदवारों को नुकसान हुआ।

इसी आधार पर विपक्ष शहबाज सरकार को ‘फॉर्म 47 सरकार’ कहता है। पेटल गहलोत ने भी इसी राजनीतिक आरोप के संदर्भ में यह शब्द इस्तेमाल किया।

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