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कोरबा

कोरबा के होटल में लगी आग:स्टाफ ने फायर इक्विपमेंट से पाया काबू, दमकल विभाग भी पहुंचा

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कोरबा। कोरबा के निहारिका क्षेत्र में स्थित एक होटल काके दी हट्टी में शुक्रवार सुबह अचानक आग लग गई। हालांकि आग फैलने से पहले ही उस पर काबू पा लिया गया, जिससे एक बड़ी दुर्घटना टल गई।

मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, आग उस समय लगी जब होटल के रसोईघर में चूल्हा जलाया गया। बताया गया है कि रसोई में लगी चिमनी को कई दिनों से साफ नहीं किया गया था, जिससे उसमें तेल जम गया था। चूल्हा जलते ही जमे हुए तेल ने आग पकड़ ली और चिमनी में आग भड़क उठी।

हालांकि, आग लगते ही होटल कर्मचारियों ने सूझबूझ दिखाते हुए तुरंत फायर इक्विपमेंट का इस्तेमाल किया। कर्मचारियों ने अग्निशमन यंत्रों की मदद से आग पर काबू पा लिया। इसके तुरंत बाद फायर ब्रिगेड भी मौके पर पहुंची और आग को पूरी तरह बुझा दिया गया।

दुकानों में फायर इक्विपमेंट का इस्तेमाल करें

जिला चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष योगेश जैन ने घटनास्थल का दौरा किया और बताया कि होटल संचालक साहिल सलूजा ने समय पर सूचना दी थी। जांच में सामने आया कि रसोई की चिमनी काफी समय से साफ नहीं की गई थी, जिससे उसमें जमी चिकनाई ने आग को भड़काया।

योगेश जैन ने सभी होटल व्यवसायियों और दुकानदारों से अपील की है कि वे अपने प्रतिष्ठानों में अग्नि सुरक्षा उपकरण अवश्य रखें और समय-समय पर उनकी जांच कराते रहें, ताकि इस तरह की घटनाओं को टाला जा सके।

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कोरबा

भूमिहीन किसान छेदूराम ने कोसा उत्पादन से अर्जित किए 6.30 लाख रुपये

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कोरबा। जिले के विकासखण्ड कटघोरा के ग्राम सलोरा निवासी छेदूराम ने रेशम विभाग के सहयोग से सफलता की एक नई इबारत लिखी है। बीपीएल परिवार से ताल्लुक रखने वाले और बिना किसी कृषि भूमि वाले छेदूराम के लिए कोसा उत्पादन ही उनकी आजीविका का मुख्य सहारा है। पिछले 15 वर्षों से रेशम विभाग के साथ निरंतर कार्य करते हुए उन्होंने और उनके परिवार के सभी सदस्यों ने मिलकर कोसा कृमिपालन को अपनी आय का सशक्त जरिया बनाया है।  

इस वर्ष कोसा बीज केन्द्र कोरबा में कृमिपालन करते हुए छेदूराम ने तीन फसलों के दौरान कुल 1,73,733 नग कोसा का उत्पादन किया। इस शानदार उत्पादन के बदले उन्हें 6,30,816 रुपये की राशि प्राप्त हुई, जिसका भुगतान विभाग द्वारा सीधे उनके बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से किया गया है। छेदूराम ने रेशम विभाग के मार्गदर्शन में कार्य की बारीकियों को बहुत गहराई से सीखा और आज एक उत्कृष्ट कृषक के रूप में अपनी पहचान बनाई है। कोसा उत्पादन के खाली समय में वे विभाग में मजदूरी और मत्स्य आखेट का कार्य भी करते हैं।

श्री छेदूराम अब अन्य हितग्राहियों के लिए एक प्रेरणा बन गए हैं और उनका लक्ष्य भविष्य में और अधिक मेहनत कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को और बेहतर बनाना है। इस कार्य में रेशम विभाग द्वारा उन्हें समय पर उन्नत टसर कोसा बीज और निःशुल्क तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। रेशम विभाग के सहायक संचालक श्री बी.एस. भण्डारी ने बताया कि योजनाओं के तह विभाग द्वारा आवश्यक सहयोग हितग्राही को प्रदान किया गया है।  

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कोरबा

जंगल की पवित्र धरती पर इतिहास: राज्यपाल रमेन डेका की उपस्थिति में 108 निर्धन कन्याओं का विवाह, दिव्य श्री हनुमंत कथा का भव्य समापन

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अपना घर सेवा समिति ने रचा सेवा, संस्कार और सनातन वैभव का अद्भुत अध्याय — नन्हा महाराज के सहयोग से ढपढप बना आस्था का महासंगम

कोरबा/बांकीमोंगरा। कोरबा जिले के वनांचल क्षेत्र स्थित ग्राम ढपढप (बांकीमोंगरा) की पावन धरती पर आयोजित दिव्य श्री हनुमंत कथा का समापन ऐसा ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और भावनात्मक दृश्य बनकर सामने आया, जिसने पूरे क्षेत्र को भक्ति, सेवा और सनातन चेतना से सराबोर कर दिया।
घने जंगलों और प्राकृतिक शांति के बीच आयोजित यह पांच दिवसीय आयोजन केवल कथा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आस्था, मानवता, नारी सम्मान, सामाजिक समरसता और लोककल्याण का विराट महायज्ञ बन गया।
इस भव्य आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि 108 निर्धन कन्याओं का सामूहिक विवाह अत्यंत गरिमामय और धार्मिक वातावरण में संपन्न कराया गया और इस पावन अवसर को और भी ऐतिहासिक बना दिया छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका की उपस्थिति ने, जिन्होंने स्वयं उपस्थित होकर सभी नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद प्रदान किया तथा उनके समक्ष वरमाला के साथ विवाह समारोह का शुभारंभ हुआ।
राज्यपाल की उपस्थिति ने इस आयोजन की गरिमा को कई गुना बढ़ा दिया और यह कार्यक्रम पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय बन गया।

अपना घर सेवा समिति ने किया ऐतिहासिक और अनुकरणीय आयोजन

इस पूरे विराट और सुव्यवस्थित धार्मिक-सामाजिक आयोजन को अपना घर सेवा समिति ने अत्यंत समर्पण, सेवा भाव और शानदार व्यवस्थाओं के साथ संपन्न कराया।
समिति ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि संकल्प सेवा का हो और भावना लोककल्याण की हो, तो जंगल के बीचों-बीच भी ऐसा दिव्य और ऐतिहासिक आयोजन संभव है, जिसे लोग वर्षों तक याद रखें।
कथा स्थल की व्यवस्था, श्रद्धालुओं के स्वागत, विवाह कार्यक्रम, धार्मिक अनुशासन, सेवाकार्य, मंचीय गरिमा और आयोजन की भव्यता—हर स्तर पर अपना घर सेवा समिति की सक्रिय और प्रेरक भूमिका स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
नन्हा महाराज का मिला विशेष सहयोग, आयोजन की गरिमा हुई और ऊंची

इस पुण्य और भव्य आयोजन में सर्वमंगल मंदिर के नन्हा महाराज का भी विशेष सहयोग, सहभागिता और आध्यात्मिक समर्थन प्राप्त हुआ।
उनकी उपस्थिति और सहयोग ने आयोजन को और अधिक श्रद्धामय, ऊर्जावान और धार्मिक स्वरूप प्रदान किया।
नन्हा महाराज ने इस पूरे आयोजन में अपनी आध्यात्मिक सहभागिता से इसे केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति के महापर्व का स्वरूप प्रदान किया।
जंगल के बीचों-बीच उमड़ा आस्था का ऐसा सैलाब कि पंडाल भी पड़ गया छोटा

ग्राम ढपढप जैसे वनांचल क्षेत्र में श्रद्धालुओं का ऐसा अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ा कि विशाल पंडाल भी छोटा पड़ गया। कोरबा जिले के साथ-साथ पूरे छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से श्रद्धालु बड़ी संख्या में कथा स्थल पहुंचे।
सड़कें, रास्ते, गांव की गलियां, कथा स्थल और आसपास का पूरा क्षेत्र श्रद्धालुओं की भीड़ से भरा नजर आया।
स्थानीय ग्रामीणों और गांववासियों के लिए यह दृश्य किसी चमत्कार से कम नहीं था।
लोग आश्चर्यचकित थे कि जंगलों के बीच स्थित एक छोटे से ग्राम में इतना विराट धार्मिक आयोजन, इतनी विशाल भीड़ और इतनी भव्य व्यवस्था देखने को मिलेगी।
पूरा वातावरण “जय श्रीराम”, “जय बजरंगबली” और “बागेश्वर धाम सरकार की जय” के जयघोष से गूंजता रहा।
श्रद्धा, भक्ति और सनातन ऊर्जा का ऐसा दृश्य पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक रूप से झंकृत करता रहा।
108 निर्धन कन्याओं का विवाह बना आयोजन का सबसे पावन और प्रेरक अध्याय

इस पांच दिवसीय दिव्य श्री हनुमंत कथा का सबसे पुण्यदायी और भावुक क्षण वह रहा, जब 108 निर्धन कन्याओं का सामूहिक विवाह वैदिक मंत्रोच्चार, धार्मिक परंपराओं और सामाजिक गरिमा के साथ संपन्न कराया गया।
यह केवल विवाह कार्यक्रम नहीं था, बल्कि समाजसेवा, संस्कार और नारी सम्मान का जीवंत उत्सव बन गया।
उपस्थित हजारों श्रद्धालु इस आयोजन में बाराती भी बने और घराती भी, जिससे पूरा वातावरण पारिवारिक, आध्यात्मिक और भावनात्मक हो उठा। जहां एक ओर बेटियों के हाथ पीले हुए, वहीं दूसरी ओर हजारों लोगों ने यह अनुभव किया कि सच्चा धर्म वही है, जो किसी के जीवन में खुशियां भर दे।
निर्धन कन्याओं का विवाह क्यों माना जाता है महान पुण्य?

सनातन संस्कृति में कन्यादान को सबसे श्रेष्ठ दानों में से एक माना गया है। जब समाज किसी निर्धन कन्या के विवाह में सहयोग करता है, तब वह केवल एक विवाह नहीं कराता, बल्कि—
एक बेटी का जीवन संवारता है
एक परिवार की चिंता दूर करता है
समाज में सहयोग और समरसता बढ़ाता है
दहेज और दिखावे जैसी कुरीतियों को कमजोर करता है
धर्म को व्यवहारिक रूप में स्थापित करता है
इस दृष्टि से देखा जाए तो ढपढप की धरती पर हुआ 108 निर्धन कन्याओं का विवाह वास्तव में महादान, महापुण्य और लोकसेवा का अद्भुत उदाहरण बन गया।
जंगल की यह धरती अब केवल ग्राम नहीं, तीर्थ बन गई

ग्राम ढपढप का यह वनांचल क्षेत्र पहले अपनी प्राकृतिक शांति और ग्रामीण सादगी के लिए जाना जाता था, लेकिन अब यह स्थान भक्ति, सेवा और सनातन संस्कृति की नई पहचान बन गया है।
जहां हनुमंत कथा गूंजी हो,
जहां संतों का आशीर्वाद मिला हो,
जहां 108 बेटियों के विवाह संपन्न हुए हों,
और जहां राज्यपाल की उपस्थिति में वरमाला का शुभारंभ हुआ हो—
वह भूमि केवल भूमि नहीं रहती, वह तीर्थधाम बन जाती है।
श्रद्धालुओं का मानना रहा कि इस आयोजन के बाद ढपढप की धरती और भी अधिक पवित्र, पूज्य और पुण्यमयी हो गई है।
कथा ने जगाई भक्ति, सेवा ने जीत लिया सबका मन

पांच दिनों तक चले इस आयोजन में श्री बागेश्वर धाम सरकार पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी महाराज की कथा, प्रवचन और आध्यात्मिक संदेशों ने श्रद्धालुओं के मन में भक्ति, संस्कार और सनातन चेतना का नया संचार किया।
उनकी वाणी ने केवल धार्मिक भाव नहीं जगाए, बल्कि समाज को सेवा, धर्म, राष्ट्र, संस्कृति और मानवता का भी संदेश दिया।
समापन दिवस पर कथा स्थल में उपस्थित श्रद्धालुओं की संख्या इस बात का प्रमाण थी कि यह आयोजन जन-जन की आस्था का केंद्र बन चुका था।
भक्ति, सेवा और संस्कार का अमिट इतिहास रच गया ढपढप

ग्राम ढपढप (बांकीमोंगरा) में संपन्न यह आयोजन आने वाले समय में कोरबा जिले के सबसे भव्य, सबसे पुण्यदायी और सबसे ऐतिहासिक धार्मिक आयोजनों में गिना जाएगा।
इस आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि—
जहां सेवा हो,
जहां संतों का आशीर्वाद हो,
जहां बेटियों के जीवन संवरें,
जहां समाज एक परिवार बन जाए,
वहीं सच्चे अर्थों में सनातन का वैभव प्रकट होता है।
ढपढप की यह पावन धरती अब केवल एक गांव नहीं, बल्कि आस्था, सेवा, संस्कार और सनातन एकता का जीवंत प्रतीक बन चुकी है।

उक्त आयोजन में मां सर्वमंगला मंदिर के पुरोहित मयंक पांडेय, राणा मुखर्जी, जिला पंचायत अध्यक्ष पवन सिंह, सुबोध सिंह अमरजीत सिंह,अखिलेश अग्रवाल, विजय राठौर , इत्यादि की अहम भूमिका रही।

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कोरबा

SECL becomes the only CIL subsidiary to register positive growth in Production, Offtake and OBR in FY 2025–26

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Company records growth across all three key parameters with 176.2 MT production, 178.6 MT offtake and 364.3 MCuM overburden removal

Bilaspur/Korba. South Eastern Coalfields Limited (SECL) has achieved a significant milestone in FY 2025–26, emerging as the only subsidiary of Coal India Limited to register positive growth across all three key performance parameters—coal production, offtake and overburden removal (OBR).

Strong Performance in Production, Offtake & OBR

SECL recorded coal production of 176.2 million tonnes, reflecting a growth of 5.26% (8.8 MT) over the previous year.
Coal offtake stood at 178.6 million tonnes, registering a growth of 4.6% (7.9 MT).
Rail despatch witnessed a 16% increase, while despatch through First Mile Connectivity (FMC) grew by 28%.
With 364.3 million cubic metres of overburden removal, SECL achieved its highest-ever OBR, strengthening future coal readiness.
In addition, the company achieved a landmark in land acquisition with 358 hectares acquired, marking a remarkable 867% growth over the previous year.

Environment & Sustainability

SECL continued its strong focus on environmental stewardship. During the year, 13.96 lakh saplings were planted, including Miyawaki-based dense plantation initiatives.
The company commissioned 43.78 MW of solar capacity, leading to a reduction of approximately 41,200 tonnes of CO₂ emissions.
Further, 408 lakh kilolitres of mine water was utilised, enabling irrigation across more than 3,800 hectares of land.

Capacity Expansion & New Projects

Through environmental clearances, SECL secured 2.16 MTY incremental capacity, while Terms of Reference approvals paved the way for 39.02 MTY future capacity addition.
Key project approvals include Durgapur Opencast Project (10 MTY) and Amritdhara Underground Project.

Coal Quality & Transparency

Coal grade confirmation improved significantly from 68% to 75%.
The company’s digital initiative ‘DigiCOAL’ strengthened real-time monitoring and transparency, earning recognition at the national level by the Central Vigilance Commission.

Employment & Social Inclusion

SECL provided employment to 511 dependents, marking its highest-ever figure with a 24% growth.
Additionally, 754 Project Affected Persons (PAPs) were provided employment, along with recruitment of 42 Mining Sirdars.

Transparent Procurement & Governance Excellence

Procurement worth ₹25,799 crore was undertaken through the Government e-Marketplace (GeM), achieving record performance.
SECL secured the top position for the third consecutive year in Special Campaign 5.0.

Technological Innovation & Infrastructure
SECL became the first coal PSU in India to implement paste fill technology, marking a major step towards safer and sustainable underground mining.
Average loading reached 53.2 rakes per day, strengthening coal evacuation efficiency.
Rail corridor projects further enhanced the company’s logistics and evacuation network.

Diversification Initiatives
SECL made notable progress in diversification areas including coal gasification, ultra-supercritical thermal power, coal washery development, critical minerals exploration, rare earth extraction and hydro-based energy solutions—aligning with future energy requirements.

Corporate Social Responsibility
In FY 2025–26, CSR projects worth ₹365.39 crore were approved across key sectors such as healthcare, education, environment and livelihoods, reaffirming SECL’s commitment beyond mining.

Women Empowerment
SECL set new benchmarks in gender inclusion by establishing the first all-women dispensary and all-women central store unit in the coal industry.

“This achievement of South Eastern Coalfields Limited in FY 2025–26 is the result of the dedication, hard work and team spirit of each and every employee. Despite numerous operational and geographical challenges, our workforce has consistently delivered, ensuring notable growth in production, offtake and overburden removal.
This success is not merely about numbers, but a reflection of our collective commitment towards the nation’s energy security. I extend my heartfelt congratulations to the entire SECL family for their outstanding contribution and am confident that with the same spirit and dedication, we will continue to scale new heights in the future.”
— Harish Duhan, Chairman-cum-Managing Director, SECL

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