देश
आणंद में त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी की नींव रखने मौके बोले अमित शाह, ‘कांग्रेस ‘नेहरू-गांधी परिवार’ को छोड़ सबको भूल सकती है’
आणंद,एजेंसी। गुजरात के आणंद में केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी की आधारशिला रखते हुए कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। इस मौके पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपने ही नेता त्रिभुवनदास किशीभाई पटेल को भुला दिया, जिन्होंने अमूल की नींव रखी और देश में सहकारिता आंदोलन को एक नई दिशा दी।
शाह ने साफ किया कि लोकसभा में पेश किए गए त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी विधेयक, 2025 में इस यूनिवर्सिटी का नाम त्रिभुवनदास पटेल के सम्मान में रखा गया है, जो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे। उन्होंने कहा, “विपक्ष को शायद यह भी नहीं पता कि त्रिभुवनदास उनकी ही पार्टी से थे। लेकिन वे नेहरू-गांधी परिवार से नहीं थे, इसलिए कांग्रेस ने उन्हें भुला दिया।”
अमूल और सहकारिता आंदोलन में त्रिभुवनदास का योगदान
अमित शाह ने बताया कि त्रिभुवनदास पटेल ने सरदार पटेल के मार्गदर्शन में अमूल की स्थापना की और वर्गीज कुरियन को डेयरी साइंस पढ़ने के लिए विदेश भेजा। इसका नतीजा यह हुआ कि आज भारत विश्व में सबसे ज्यादा दूध उत्पादन करने वाला देश है। शाह ने कुरियन के योगदान को भी सराहा, लेकिन इस बात पर जोर दिया कि उस पूरी सोच की शुरुआत त्रिभुवनदास पटेल के विजन से हुई थी। शाह ने यह भी बताया कि जब त्रिभुवनदास अमूल से सेवानिवृत्त हुए, तो उन्होंने अपनी सेवामुक्ति पर मिले 6 लाख रुपये फाउंडेशन को दान में दे दिए, जो उनके समर्पण का प्रतीक है।
यूनिवर्सिटी का उद्देश्य और महत्व
अमित शाह ने कहा कि यह यूनिवर्सिटी सहकारिता क्षेत्र को नई दिशा देगी। इसमें प्रबंधन, वित्त, कानून और ग्रामीण विकास से जुड़े कोर्स होंगे। यह यूनिवर्सिटी 200 से ज्यादा सहकारी संस्थाओं से जुड़कर पीएचडी, डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स कराएगी। साथ ही, यह 40 लाख सहकारी कर्मियों को प्रशिक्षित कर भाई-भतीजावाद को खत्म करने में मदद करेगी।

मोदी सरकार की पहल और सहकारिता की मजबूती
शाह ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2021 में सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के बाद अब तक 60 नई पहलें शुरू की गई हैं, जो किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण विकास को गति देने के लिए हैं। पीएम मोदी ने 2 लाख नए पैक्स (प्राथमिक कृषि सहकारी समितियां) बनाने की घोषणा की है, जिससे 17 लाख लोग जुड़ेंगे। CBSE ने भी 9वीं से 12वीं तक के पाठ्यक्रम में सहकारिता को शामिल किया है, जिससे युवा पीढ़ी को इस क्षेत्र से जोड़ा जा सके।
अमूल: सहकारिता का मॉडल
शाह ने कहा कि अमूल आज 80,000 करोड़ रुपये के टर्नओवर के साथ देश का सबसे मूल्यवान ब्रांड है, जो 36 लाख ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहा है। उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि वर्गीज कुरियन के जन्म शताब्दी वर्ष को अमूल और गुजरात सरकार ने मनाया, लेकिन कांग्रेस ने इस ऐतिहासिक मौके को भी नजरअंदाज कर दिया।
अंत में शाह ने कहा, “त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी न सिर्फ एक शैक्षिक संस्थान है, बल्कि यह सहकारिता के जननायकों को सच्ची श्रद्धांजलि है, जो ग्रामीण भारत को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।”
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बैरकपुर में रैली के दौरान पीएम मोदी बोले – अब मैं बंगाल 4 मई के बाद BJP के शपथ ग्रहण में आऊंगा
बैरकपुर, एजेंसी। पीएम मोदी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण से पहले बैरकपुर में रैली को संबोधित कर रहे हैं। अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि बंगाल के माहौल को देखकर मुझे लग रहा है कि मैं भाजपा सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान फिर से आऊंगा।

बंगाल मेरी आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र: PM मोदी
जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि “बंगाल के प्रति मेरा लगाव ‘शक्ति’ की भक्ति जैसा रहा है। यह भूमि मेरी व्यक्तिगत आध्यात्मिक यात्रा का ऊर्जा केंद्र रही है। बंगाल की महान विभूतियों और यहाँ की ‘जनता जनार्दन’ के असीम प्रेम ने मुझे हमेशा प्रेरित किया है। इस धरती पर मुझे जो अनुभव मिले हैं, उन्हें मैं अपना सौभाग्य मानता हूँ।”
जीत का भरोसा और शपथ ग्रहण का निमंत्रण दिया
इस चुनाव अभियान की अपनी अंतिम रैली बताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने पूरे बंगाल में जनता का मिजाज भांप लिया है। उन्होंने आत्मविश्वास के साथ कहा: “यह इस चुनाव में मेरी आखिरी रैली है। मैं इस भरोसे के साथ लौट रहा हूँ कि 4 मई को नतीजे आने के बाद, मुझे यहाँ भाजपा सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए दोबारा आना पड़ेगा।”
जनता के संदेश और कलाकृतियों पर चर्चा
प्रधानमंत्री ने रैलियों और रोड-शो के दौरान मिलने वाले प्रेम का जिक्र करते हुए कहा कि वे लोगों द्वारा दिए गए चित्रों और पत्रों को सहेज कर रखते हैं। उन्होंने बताया कि वे रात के समय इन चित्रों को ध्यान से देखते हैं और लोगों के पत्रों में छिपे दर्द और आशीर्वाद को महसूस करते हैं।
बैरकपुर में दिखेगा त्रिकोणीय मुकाबला
बैरकपुर विधानसभा क्षेत्र में इस बार कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है:
- भाजपा: पीएम मोदी यहाँ भाजपा उम्मीदवार कौस्तव बागची के समर्थन में प्रचार कर रहे हैं।
- TMC: सत्ताधारी दल की ओर से फिल्म निर्देशक और वर्तमान विधायक राज (राजू) चक्रवर्ती मैदान में हैं।
- CPI(M): वामपंथी दल ने सुमन रंजन बंद्योपाध्याय को उम्मीदवार बनाया है।
आस्था और लोकतंत्र का संगम
इससे पहले रविवार को प्रधानमंत्री ने उत्तर कोलकाता में रोड-शो शुरू करने से पहले ऐतिहासिक ठंठनिया कालीबाड़ी मंदिर में मां काली का आशीर्वाद लिया था। यह मंदिर 1703 में स्थापित हुआ था और आध्यात्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
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मुख्य वैज्ञानिक की अमेरिका में बसे भारतीयों से भावुक अपीलः “लौट आओ वतन…भारत माता को आपकी ज्यादा जरूरत”
नई दिल्ली,एजेंसी। आई टी (IT) कंपनी ज़ोहो कॉर्पोरेशन ( Zoho Corporation) के सह-संस्थापक और मुख्य वैज्ञानिक श्रीधर वेम्बु ने अमेरिका में रहने वाले भारतीयों से भारत लौटने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भारत की ताकत और कद इस बात पर निर्भर करेगा कि देश टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में कितना मज़बूत बनता है। वेम्बु ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर एक खुला पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने अपने निजी अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि 37 साल पहले, वह भी बिना किसी आर्थिक साधन के अमेरिका गए थे, लेकिन अच्छी शिक्षा और अपने भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों की बदौलत उन्होंने सफलता हासिल की। उन्होंने यह भी माना कि अमेरिका ने भारतीयों को अवसर दिए हैं, और इसके लिए हमें आभारी होना चाहिए।

हालाँकि, वेम्बु ने एक चेतावनी भी दी: अब अमेरिकी आबादी का एक बड़ा हिस्सा ऐसा है जो मानता है कि भारतीय उनकी नौकरियाँ छीन रहे हैं। उनके अनुसार, भले ही यह भावना बहुमत का विचार न हो, लेकिन बड़ी संख्या में लोग ऐसा मानते हैं जो भविष्य के लिए चिंता का विषय है। अमेरिकी राजनीति पर टिप्पणी करते हुए, उन्होंने कहा कि वहाँ भारतीयों के पास ज़्यादा विकल्प नहीं हैं। उनके विचार में, भारतीय “कट्टर दक्षिणपंथी” (Hard Right) और “जागरूक वामपंथी” (Woke Left) के बीच फँसे हुए हैं, और दोनों ही स्थितियों में इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि उन्हें पूरा सम्मान मिलेगा। वेम्बु ने सफल भारतीयों से भारत लौटने और देश के विकास में योगदान देने की अपील की। उन्होंने तर्क दिया कि भारत की युवा आबादी को तकनीकी नेतृत्व की आवश्यकता है, और जो भारतीय विदेशों में काम कर चुके हैं, वे इस भूमिका को निभाने के लिए सबसे उपयुक्त स्थिति में हैं।

इस बीच, अमेरिका में H-1B वीज़ा कार्यक्रम को लेकर विवाद भी बढ़ता जा रहा है। अमेरिका के कुछ सांसद इस कार्यक्रम को तीन साल के लिए निलंबित करने की माँग कर रहे हैं, उनका आरोप है कि इसका दुरुपयोग सस्ते विदेशी श्रम को नियुक्त करने के लिए किया जा रहा है। कुल मिलाकर, वेम्बु का संदेश केवल भावनात्मक ही नहीं, बल्कि रणनीतिक भी है। वह चाहते हैं कि भारतीय अपनी प्रतिभा और अनुभव का उपयोग करके भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर और मज़बूत बनाएँ, जिससे देश वैश्विक मंच पर अधिक सम्मान प्राप्त कर सके।
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Ladakh New District: लद्दाख में 5 नए जिले घोषित, अब दो की जगह होंगे सात जिले, जानें कौन-कौन से नए district बने
लद्दाख,एजेंसी। लद्दाख से एक बड़ी खबर सामने आई। उपराज्यपाल VK सक्सेना ने सोमवार को घोषणा की कि उन्होंने केंद्र सरकार की उस अधिसूचना को मंजूरी दे दी है जिसके तहत लद्दाख में 5 नए जिले बनाए जाएंगे। इसके साथ ही केंद्र शासित प्रदेश में जिलों की कुल संख्या 2 से बढ़कर 7 हो गई है।
एक पोस्ट में उपराज्यपाल ने इस कदम को क्षेत्र के लिए ‘ऐतिहासिक दिन’ बताया और कहा कि लोगों की लंबे समय से लंबित मांग अब पूरी हो गई है। उन्होंने X पर एक पोस्ट में कहा, “लद्दाख के लिए एक ऐतिहासिक दिन। मैंने लद्दाख में 5 नए जिलों के गठन की अधिसूचना को मंजूरी दे दी है, जिससे लद्दाख के लोगों की आकांक्षाओं और लंबे समय से लंबित मांग को पूरा किया जा सके।”

कौन-कौन से बने नए जिले?
-नुब्रा (Nubra)
-शाम (Sham)
-चांगथांग (Changthang)
-ज़ांस्कर (Zanskar)
-द्रास (Drass)
अभी लद्दाख में दो जिले हैं – लेह और कारगिल।
इन नए जिलों के जुड़ने से केंद्र शासित प्रदेश में कुल 7 जिले हो जाएंगे। उपराज्यपाल ने कहा कि यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित और समृद्ध लद्दाख के दृष्टिकोण के अनुरूप है। उन्होंने आगे कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में गृह मंत्रालय ने अगनस्त 2024 में ही इस निर्णय को मंजूरी दे दी थी।
उपराज्यपाल सक्सेना के अनुसार, नए जिलों के गठन से जमीनी स्तर पर शासन को मजबूती मिलेगी, प्रशासन का विकेंद्रीकरण होगा और सार्वजनिक सेवाओं की त्वरित डिलीवरी सुनिश्चित होगी, विशेष रूप से दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में। उन्होंने यह भी कहा कि इस कदम से विकास, रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है, साथ ही शासन को जनता के करीब लाया जा सकेगा। अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि यह सुनिश्चित करने के प्रयास किए जाएंगे कि लद्दाख के प्रत्येक नागरिक को इस परिवर्तनकारी निर्णय से लाभ मिले।
यह घटनाक्रम अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के बाद हुआ, जिससे जम्मू और कश्मीर राज्य का विशेष दर्जा समाप्त हो गया और क्षेत्र को दो केंद्र शासित प्रदेशों – जम्मू और कश्मीर और लद्दाख में विभाजित किया गया।
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