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छत्तीसगढ़

दुर्ग के शिवनाथ नदी में फंसे 32 मजदूरों का रेस्क्यू:इनमें बच्चे, महिलाएं-बुजुर्ग, भारत माला परियोजना में काम करने गए थे, अचानक आई बाढ़

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रायपुर,एजेंसी। दुर्ग के थनौद गांव में शिवनाथ नदी में आई बाढ़ में फंसे 32 मजदूरों को एसडीआरएफ की रेस्क्यू टीम ने सुरक्षित निकाल लिया है। इनमें बच्चे, महिला और पुरुष शामिल हैं। सभी भारत माला परियोजना में काम करने आए थे। तभी नदी का जलस्तर बढ़ गया। प्रदेश में लगातार बारिश से कई नदी-नाले उफान पर हैं। गरियाबंद के रवेली में जान जोखिम में डालकर लोग उफनते नाले को पार कर रहे हैं।

कवर्धा जिले में एक ही परिवार की दो महिलाओं की आकाशीय बिजली गिरने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि दोनों महिलाएं चरोटा भाजी (साग) तोड़ने गई थीं। इसी दौरान अचानक मौसम खराब हो गया और गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिर पड़ी। यह घटना घटना 8 जुलाई की शाम लगभग 6:00 बजे की है।

कवर्धा में 2 महिलाओं की आकाशीय बिजली गिरने से मौत हो गई।

कवर्धा में 2 महिलाओं की आकाशीय बिजली गिरने से मौत हो गई।

12 जिलों में भारी बारिश के साथ अचानक बाढ़ की आशंका

इस बीच मौसम विभाग ने रायपुर-बिलासपुर समेत 12 जिलों में भारी बारिश के साथ अचानक बाढ़ आने की आशंका जताई है। इंद्रावती नदी के तेज बहाव में नाव पलटने से एक शख्स लापता है। एक व्यक्ति चट्टान पर फंसा हुआ है।वहीं

लगातार बारिश से राजिम में महानदी का जलस्तर बढ़ गया है। त्रिवेणी संगम स्थित कुलेश्वर महादेव की सीढ़ियां डूब गई हैं। रायगढ़ में केलो नदी का जलस्तर बढ़ने से डैम के 2 गेट खोले गए हैं। बता दें कि रायपुर में पिछले दो दिनों में 140 MM पानी गिर चुका है। अगले दो दिन बिलासपुर, दुर्ग और रायपुर संभाग के जिलों में बारिश का दौर जारी रह सकता है।

आज (बुधवार) राजनांदगांव, बालोद, दुर्ग, धमतरी,गरियाबंद, महासमुंद और बलौदाबाजार समेत 7 जिलों में ऑरेंज अलर्ट है। रायपुर, कोरबा, कबीरधाम, रायगढ़, सूरजपुर, बलरामपुर सहित प्रदेश के 21 जिलों में यलो अलर्ट है। वहीं पांच जिलों में मौसम सामान्य रहेगा।

शिवनाथ नदीं में आई बाढ़ में फंसे 32 मजदूरों का रेस्क्यू किया किया गया।

शिवनाथ नदीं में आई बाढ़ में फंसे 32 मजदूरों का रेस्क्यू किया किया गया।

गरियाबंद के रवेली में जान जोखिम में डालकर लोग उफनते नाले को पार कर रहे हैं।

गरियाबंद के रवेली में जान जोखिम में डालकर लोग उफनते नाले को पार कर रहे हैं।

इंद्रावती नदी में नाव पलटी, ग्रामीण लापता

दंतेवाड़ा जिले से होकर बहने वाली इंद्रावती नदी में बुधवार सुबह एक नाव पलट गई है।हादसे में एक व्यक्ति लापता है वहीं दूसरा चट्टानों के बीच फंसा हुआ है। बाजार से लौटते वक्त हादसा हुआ है। मामला बारसूर थाना क्षेत्र का है।

ग्रामीण बारसूर के पास स्थित मंगनार के रहने वाले हैं। जो नाव के सहारे बोधघाट बाजार गए हुए थे। लौटते वक्त इंद्रावती और गुडरा नदी के संगम में तेज बहाव के चलते इनकी नाव पलट गई। नाव में कितने लोग सवार थे ये अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है। फिलहाल पुलिस और प्रशासन की टीम को खबर कर दी गई है।

इंद्रावती नदी में नाव पलटने से एक शख्स लापता है। वहीं एक व्यक्ति चट्टान पर फंसा हुआ है।

इंद्रावती नदी में नाव पलटने से एक शख्स लापता है। वहीं एक व्यक्ति चट्टान पर फंसा हुआ है।

इससे पहले रायपुर, बिलासपुर, बलौदाबाजार, दुर्ग में मंगलवार को जमकर बारिश हुई। बिलासपुर में कई निचले इलाकों के घरों और बस्तियों में पानी भर गया।

इसके साथ ही बस्तर के कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में स्थित तीरथगढ़ वाटरफॉल पूरे शबाब पर है। वाटरफॉल का खूबसूरत नजारा देखने पर्यटकों की भीड़ उमड़ रही है। लोग जान जोखिम में डालकर वाटरफॉल के नजदीक जाकर फोटोशूट करवा रहे हैं।

लगातार हो रही बारिश से राजिम के त्रिवेणी संगम का जलस्तर बढ़ गया है। कुलेश्वर महादेव मंदिर की सीढ़ियां डूबी।

लगातार हो रही बारिश से राजिम के त्रिवेणी संगम का जलस्तर बढ़ गया है। कुलेश्वर महादेव मंदिर की सीढ़ियां डूबी।

महानदी का जलस्तर बढ़ने से त्रिवेणी संगम का जलस्तर बढ़ गया है। कुलेश्वर महादेव की सीढ़ियां पानी में डूग गई हैं।

महानदी का जलस्तर बढ़ने से त्रिवेणी संगम का जलस्तर बढ़ गया है। कुलेश्वर महादेव की सीढ़ियां पानी में डूग गई हैं।

दुर्ग में शिवनाथ नदी का जलस्तर भी बढ़ गया है।

दुर्ग में शिवनाथ नदी का जलस्तर भी बढ़ गया है।

रायगढ़ में केलो नदी का जलस्तर पहले से अधिक बढ़ा हुआ है

रायगढ़ में केलो नदी का जलस्तर पहले से अधिक बढ़ा हुआ है

लगातार बारिश से जगदलपुर के तीरथगढ़ वाटरफॉल की खूबसूरती बढ़ गई है।

लगातार बारिश से जगदलपुर के तीरथगढ़ वाटरफॉल की खूबसूरती बढ़ गई है।

कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में स्थित तीरथगढ़ वाटरफॉल पूरी तरह शबाब पर है।

कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में स्थित तीरथगढ़ वाटरफॉल पूरी तरह शबाब पर है।

16 पिलरों पर कूद-कूदकर नदी पार कर रहे ग्रामीण

कांकेर जिले में 4 गांवों के लिए बारिश मुसीबत बन गई है। ग्रामीणों को आवागमन के लिए नदी पर बने स्टॉप डेम का सहारा लेना पड़ता है। वे 16 पिलरों पर कूद-कूदकर नदी पार कर रहे हैं, जिसका वीडियो सामने आया है। स्कूली बच्चों को भी इसी खतरनाक रास्ते से गुजरना पड़ता है।

जिला मुख्यालय से 45 किलोमीटर दूर बांसकुंड, ऊपर तोनका, नीचे तोनका और चलाचूर गांव के 500 से अधिक लोग बारिश की वजह से परेशान हैं। यहां चिनार नदी पर पुल नहीं बना है। ग्रामीण डैम के पिलरों को कूद-कूदकर नदी पार करने को मजबूर हैं।

बारिश की ये तस्वीरें देखिए

कांकेर जिले में चिनार नदी पर पुल नहीं बनने से लोग पिलरों पर कूद-कूदकर नदी पार रहे हैं।

कांकेर जिले में चिनार नदी पर पुल नहीं बनने से लोग पिलरों पर कूद-कूदकर नदी पार रहे हैं।

कोरबा के देवप्रहरी वाटरफॉल में फंसे 5 लड़के-लड़कियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

कोरबा के देवप्रहरी वाटरफॉल में फंसे 5 लड़के-लड़कियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

रायपुर में मंगलवार सुबह हुई बारिश से शहर के कई सड़कों पर पानी भर गया।

रायपुर में मंगलवार सुबह हुई बारिश से शहर के कई सड़कों पर पानी भर गया।

तेज बारिश के बाद रायपुर के महादेवघाट स्थित खारून नदी का जलस्तर बढ़ गया है।

तेज बारिश के बाद रायपुर के महादेवघाट स्थित खारून नदी का जलस्तर बढ़ गया है।

बिलासपुर में कई इलाके जलमग्न हो गए हैं। बारिश के कारण घरों में पानी घुस गया है। यह तस्वीर बिलासपुर के शेखर गुप्तार ने ड्रोन से ली है।

बिलासपुर में कई इलाके जलमग्न हो गए हैं। बारिश के कारण घरों में पानी घुस गया है। यह तस्वीर बिलासपुर के शेखर गुप्तार ने ड्रोन से ली है।

बिलासपुर में लगातार बारिश से रतनपुर-पेंड्रा मार्ग बंद हो गया है। कई इलाकों में पानी भर गया है।

बिलासपुर में लगातार बारिश से रतनपुर-पेंड्रा मार्ग बंद हो गया है। कई इलाकों में पानी भर गया है।

सरकंडा के शिवम होम्स कॉलोनी सहित आसपास के कई घरों में पानी भर गया है।

सरकंडा के शिवम होम्स कॉलोनी सहित आसपास के कई घरों में पानी भर गया है।

बिलासपुर में ग्रामीण क्षेत्र में नदी-नाले उफान पर हैं, जिससे बाढ़ आ गई है।

बिलासपुर में ग्रामीण क्षेत्र में नदी-नाले उफान पर हैं, जिससे बाढ़ आ गई है।

प्रदेश में अब तक 291.9 मिमी बरसा पानी

छत्तीसगढ़ में 1 जून से 7 जुलाई शाम 5 बजे तक 291.9 मिलीमीटर औसत वर्षा हो चुकी है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक प्रदेश में अब तक बलरामपुर जिले में सर्वाधिक 447.8 मिमी वर्षा हुई है। बेमेतरा जिले में सबसे कम 113.7 मिमी पानी बरसा है।

तस्वीर बिलासपुर के बंधवापारा, इमलीभाठा, चौबे कॉलोनी, जोरापारा की है। जहां जलभराव हो गया।

तस्वीर बिलासपुर के बंधवापारा, इमलीभाठा, चौबे कॉलोनी, जोरापारा की है। जहां जलभराव हो गया।

छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़ के अमृतधारा की तस्वीर है। भारी बारिश के बाद बाढ़ की स्थिति है।

छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़ के अमृतधारा की तस्वीर है। भारी बारिश के बाद बाढ़ की स्थिति है।

बस्तर का चित्रकोट वाटरफॉल भी अपने पूरे शबाब पर है।

बस्तर का चित्रकोट वाटरफॉल भी अपने पूरे शबाब पर है।

गरियाबंद में लगातार बारिश कई खेतों में पानी भर गया।

गरियाबंद में लगातार बारिश कई खेतों में पानी भर गया।

बलरामपुर में तेज बारिश से पुल बहा

बलरामपुर में चार दिन पहले गेरांव स्थित बांस झर्रा में पुल बहने से बड़मार क्षेत्र का संपर्क कई गांव से कट गया । मार्ग पर आना जाना बंद हो गया है। इलाके में लगातार बारिश से नदी-नाले उफान पर हैं। छत्तीसगढ़ में बारिश की बात करें तो 1 जून से अब तक 243.4 मिमी औसत बारिश रिकॉर्ड की गई है।

बीजापुर जिले में सबसे ज्यादा 382 मिमी बारिश और बेमेतरा जिले में सबसे कम 81.5 मिमी सबसे कम पानी गिरा है। आने वाले समय में मूसलाधार बारिश की उम्मीद है।

बलरामपुर के गेरांव के बांस झर्रा में पुल बहने से बड़मार क्षेत्र का संपर्क कई गांव से कट गया।

बलरामपुर के गेरांव के बांस झर्रा में पुल बहने से बड़मार क्षेत्र का संपर्क कई गांव से कट गया।

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छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ सरकार ने स्कूलों में रोजाना गायत्री, भोजन और दूसरे मंत्रों का पाठ अनिवार्य किया, कांग्रेस ने जताई आपत्ति

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रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग के तहत आने वाले सभी स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे 2026-27 शैक्षणिक सत्र से रोजाना सांस्कृतिक, शैक्षिक व मूल्यों पर आधारित गतिविधियां आयोजित करें। अधिकारियों ने बताया कि इसमें इनमें राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के साथ-साथ गायत्री, दीप, भोजन और अन्य मंत्रों का पाठ भी शामिल होगा। उन्होंने कहा कि इस कदम का मकसद छात्रों के बौद्धिक विकास को बढ़ावा देना और उन्हें भारतीय संस्कृति व परंपराओं से परिचित कराना है।

इस कदम की विपक्षी दल कांग्रेस ने आलोचना की है और भाजपा सरकार पर स्कूलों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का एजेंडा थोपने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से 12 जून को सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को जारी आदेश के अनुसार स्कूल अब दिन में तीन अलग-अलग समय पर अनिवार्य गतिविधियां आयोजित करेंगे। उन्होंने कहा कि नए निर्देश के तहत, सुबह प्रार्थना में राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, दीप मंत्र, सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र और महान हस्तियों की जीवनियों का पाठ शामिल होगा।

अधिकारी ने बताया कि मध्याह्न भोजन के दौरान छात्र सामूहिक रूप से भोजन मंत्र का पाठ करेंगे, जबकि शाम को स्कूल की छुट्टी के दौरान राज्य गीत, गायत्री मंत्र और शांति मंत्र का पाठ किया जाएगा। अधिकारी ने बताया कि इस पहल का मकसद छात्रों में देशभक्ति, अनुशासन, नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा देना है, साथ ही भारतीय परंपराओं और राष्ट्रीय आदर्शों के साथ उनके जुड़ाव को मजबूत करना है।

उन्होंने बताया कि सरकार ने जिला शिक्षा अधिकारियों को आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। उन्होंने बताया कि अधिकारी स्कूलों का निरीक्षण करेंगे और तय निर्देश का उल्लंघन करने वाले स्कूल प्रबंधन या प्राचार्य के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है।

कांग्रेस ने साधा निधाना

इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए, छत्तीसगढ़ कांग्रेस के संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने शैक्षणिक संस्थान में धार्मिक मंत्रों का पाठ अनिवार्य करने की ज़रूरत पर सवाल उठाया।शुक्ला ने कहा, “राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत और राज्य गीत का पाठ करना उचित है। लेकिन गायत्री मंत्र, दीप मंत्र, सरस्वती मंत्र और भोजन मंत्र को अनिवार्य क्यों किया गया है? सरकार स्कूलों को सरस्वती शिशु मंदिरों में बदलने के लिए दृढ़ संकल्पित दिखती है। सरकारी स्कूलों में आरएसएस का एजेंडा थोपना गलत है।”

उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में सभी धर्मों, जातियों और समुदायों के छात्र पढ़ते हैं और कुछ खास धार्मिक मंत्रों का पाठ अनिवार्य करने से दूसरे धर्मों के लोगों की भावनाएं आहत हो सकती हैं।शुक्ला ने कहा, “भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और हमारा संविधान सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान की गारंटी देता है। सरकारी स्कूलों में शिक्षा किसी खास धर्म पर आधारित नहीं होनी चाहिए।”

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छत्तीसगढ़

जगदलपुर : बस्तर में पुनर्वास की नई मिसाल:पुनर्वासित नक्सलियों के लिए  निःशुल्क रिवर्स वासेक्टॉमी कैंप, 73 सफल सर्जरी

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पुनर्वासित नक्सलियों के लिए  निःशुल्क रिवर्स वासेक्टॉमी कैंप, 73 सफल सर्जरी

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में, विशेष रूप से जगदलपुर के महारानी अस्पताल में, मुख्यधारा में लौटे (पुनर्वासित) माओवादियों के लिए मुफ्त रिवर्स वासेक्टॉमी (रिवर्स नसबंदी) शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इन जटिल सर्जिकल शिविरों का उद्देश्य उन पूर्व नक्सलियों को माता-पिता बनने का अवसर प्रदान करना है, जिन्हें प्रतिबंधित संगठनों द्वारा जबरन नसबंदी (नसबंदी शिविरों) के लिए मजबूर किया गया था।

पुनर्वासित नक्सलियों के लिए  निःशुल्क रिवर्स वासेक्टॉमी कैंप, 73 सफल सर्जरी

    बस्तर संभाग में मुख्यधारा में लौट रहे पुनर्वासित नक्सलियों को सामान्य और खुशहाल पारिवारिक जीवन प्रदान करने की दिशा में जिला प्रशासन और बस्तर पुलिस ने एक ऐतिहासिक एवं मानवीय पहल की है। जगदलपुर के ऐतिहासिक महारानी अस्पताल में पुनर्वासित लाभार्थियों के लिए विशेष निःशुल्क रिवर्स वासेक्टॉमी (रीकैनालाइजेशन) सर्जिकल कैंप का सफल आयोजन किया गया।  यह शिविर बस्तर जिला प्रशासन, बस्तर पुलिस और यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (वेस्ट जोन) के संयुक्त प्रयास से आयोजित किया गया, जिसमें देश के प्रतिष्ठित यूरोलॉजिस्ट एवं माइक्रोसर्जरी विशेषज्ञों ने अपनी सेवाएं दीं।

73 सफल सर्जरी, पुनर्वास को मिली नई दिशा

    यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. राजेश कुकरेजा ने बताया कि इस मानवीय अभियान के प्रथम चरण में 33 तथा द्वितीय चरण में 40 सफल सर्जरी की गईं। इस प्रकार दो चरणों में कुल 73 सफल रिवर्स वासेक्टॉमी ऑपरेशन संपन्न हुए हैं। उन्होंने बताया कि यह अत्यंत जटिल माइक्रोसर्जरी है, जिसकी सफलता दर सामान्यतः सीमित होती है। ऐसे में बस्तर जैसे सुदूर क्षेत्र में इतने बड़े पैमाने पर सफल ऑपरेशन चिकित्सा सेवा और मानवीय संवेदनशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण हैं।

देशभर के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने दी सेवाएं

    शिविर में इंदौर से डॉ. राजेश कुकरेजा, मुंबई से डॉ. निनाद तांबोली एवं डॉ. पार्थ मानेक, पुणे से डॉ. सागर भालेराव एवं डॉ. राहुल पाटिल, नांदेड़ से डॉ. अभिषेक भालेराव और रायपुर से डॉ. राहुल कपूर और डॉ. घनश्याम हटवार सहित कई विशेषज्ञ चिकित्सकों ने स्वैच्छिक सेवाएं प्रदान कीं।

पहले भी मिली सफलता, गूंजी हैं किलकारियां
 
    बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी. ने कहा कि इस प्रकार के प्रयासों से पहले भी सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं और कई आत्मसमर्पित परिवारों के घरों में बच्चों की किलकारियां गूंज चुकी हैं। उन्होंने इसे पुनर्वास और सामाजिक पुनर्स्थापन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

दो माह की बच्ची का पिता बना पूर्व नक्सली

    बस्तर के पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा ने एक प्रेरणादायक उदाहरण साझा करते हुए बताया कि हाल ही में एक पुनर्वासित नक्सली, जिसकी पहले रिवर्स वासेक्टॉमी की गई थी, वह वर्तमान में दो माह की बच्ची का पिता बना है। उन्होंने कहा कि यह इस पूरी मुहिम की सबसे बड़ी सफलता और मानवीय पुनर्वास का जीवंत प्रमाण है। पहले ऐसी जटिल सर्जरी के लिए मरीजों को महानगरों का रुख करना पड़ता था, लेकिन अब बस्तर के महारानी अस्पताल में ही यह सुविधा उपलब्ध होना पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है।

विशेषज्ञों और कर्मचारियों का हुआ सम्मान

    कैंप के सफल आयोजन पर महारानी अस्पताल प्रबंधन एवं बस्तर पुलिस द्वारा सभी विशेषज्ञ चिकित्सकों को बस्तर की कला एवं संस्कृति से जुड़े स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। वहीं शिविर में योगदान देने वाले अस्पताल कर्मियों और जमीनी कार्यकर्ताओं को भी सम्मानित किया गया।

    कार्यक्रम के अंत में सीएमएचओ डॉ. संजय बसाक तथा सिविल सर्जन डॉ. संजय प्रसाद ने सभी विशेषज्ञ चिकित्सकों, प्रशासनिक अधिकारियों, पैरामेडिकल स्टाफ और पुलिस विभाग का आभार व्यक्त किया। यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया ने भी बस्तर पुलिस और जिला प्रशासन की इस संवेदनशील पुनर्वास पहल की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे अभियानों में सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई। यह पहल केवल चिकित्सा सेवा नहीं, बल्कि हिंसा से प्रभावित जीवन में नई उम्मीद, परिवार जीवन और भविष्य लौटाने का एक संवेदनशील प्रयास बनकर उभरी है।

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छत्तीसगढ़

रायपुर : पर्यटन के राष्ट्रीय मानचित्र पर चमका छत्तीसगढ़ की संस्कृति

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इंडिया टुडे टूरिज्म समिट एंड अवॉर्ड्स 2026 में मिला ‘कल्चरल टूरिज्म विनर’ अवार्ड

गोवा में केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने किया सम्मानित, पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने ग्रहण किया अवॉर्ड

लोक संस्कृति, जनजातीय विरासत और पर्यटन नवाचारों को मिली राष्ट्रीय पहचान

पर्यटन के राष्ट्रीय मानचित्र पर चमका छत्तीसगढ़ की संस्कृति

रायपुर। छत्तीसगढ़ ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन क्षमता का परचम लहराया है। गोवा में आयोजित प्रतिष्ठित ’‘इंडिया टुडे टूरिज्म समिट एंड अवॉर्ड्स-2026’’ में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड को ’‘कल्चरल टूरिज्म विनर’’ अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, अद्वितीय जनजातीय परंपराओं, स्थानीय लोककला और पर्यटन विकास के क्षेत्र में किए गए नवाचारों को मिली राष्ट्रीय मान्यता है। केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने यह सम्मान प्रदान किया, जिसे राज्य की ओर से पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने ग्रहण किया। इस अवसर पर गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत सहित बिहार, तेलंगाना, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और गोवा के पर्यटन मंत्री तथा देशभर के पर्यटन विशेषज्ञ और उद्योग प्रतिनिधि मौजूद रहे।

जीवंत संस्कृति और जनजातीय विरासत से बनी छत्तीसगढ़ की पहचान

         यह सम्मान छत्तीसगढ़ द्वारा अपनी समृद्ध लोक संस्कृति, जनजातीय परंपराओं, कला, हस्तशिल्प, लोक उत्सवों और सांस्कृतिक धरोहरों को पर्यटन विकास से जोड़ने के लिए किए जा रहे सतत प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर मिली महत्वपूर्ण सफलता है। पिछले कुछ वर्षों में छत्तीसगढ़ ने सांस्कृतिक पर्यटन को राज्य की पर्यटन नीति के केंद्र में रखकर जिस तरह योजनाबद्ध ढंग से कार्य किया है, उसने देशभर का ध्यान आकर्षित किया है। यही कारण है कि आज छत्तीसगढ़ केवल प्राकृतिक सौंदर्य और जलप्रपातों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी जीवंत संस्कृति और जनजातीय विरासत के लिए भी तेजी से पहचान बना रहा है।

छत्तीसगढ़ का पर्यटन मॉडल चर्चा का केंद्र रहा

          समिट के दौरान आयोजित विशेष पैनल चर्चा ’‘हिडन इंडिया हाउ इमर्जिंग डेस्टिनेशंस आर ड्राइविंग डोमेस्टिक टूरिज्म ग्रोथ’’ में भी छत्तीसगढ़ का पर्यटन मॉडल चर्चा का केंद्र रहा। इस सत्र में पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष नीलू शर्मा, पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन तथा छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक विवेक आचार्य ने राज्य की पर्यटन उपलब्धियों, नवाचारों, निवेश संभावनाओं और भविष्य की रणनीतियों पर विस्तार से विचार रखे। पैनल चर्चा में बताया गया कि किस प्रकार छत्तीसगढ़ ने स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए पर्यटन को सांस्कृतिक संरक्षण और आर्थिक विकास का माध्यम बनाया है।

राष्ट्रीय स्तर पर मिली यह पहचान प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि

          पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने अवॉर्ड प्राप्त करने के बाद कहा कि यह सम्मान पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व और सम्मान का विषय है। उन्होंने कहा कि राज्य की लोक संस्कृति, जनजातीय परंपराओं, कला, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक विरासत को पर्यटन से जोड़ने के लिए किए जा रहे प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर मिली यह पहचान प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल पर्यटन स्थलों का विकास करना ही नहीं, बल्कि पर्यटन को स्थानीय लोगों की आजीविका, सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बनाना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह सम्मान छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख सांस्कृतिक पर्यटन गंतव्यों में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत सहित पूरी टीम का योगदान

          श्री अग्रवाल ने कहा कि यह सम्मान छत्तीसगढ़ के प्रत्येक नागरिक, हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की पूरी टीम, पर्यटन उद्योग से जुड़े हितधारकों, कलाकारों, शिल्पकारों और स्थानीय समुदायों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। मैं इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर सभी प्रदेशवासियों, पर्यटन विभाग तथा छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की पूरी टीम को हार्दिक बधाई देता हूं। यह सम्मान हमें पर्यटन विकास के क्षेत्र में और अधिक उत्साह तथा प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने की प्रेरणा देगा।

’‘कल्चरल टूरिज्म विनर’’ अवार्ड राज्य की बढ़ती पर्यटन पहचान का प्रतीक

        ’इंडिया टुडे टूरिज्म समिट एंड अवॉर्ड्स’ देश के सबसे प्रतिष्ठित पर्यटन आयोजनों में से एक है। इस मंच पर पर्यटन क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले राज्यों, संस्थानों और पर्यटन परियोजनाओं को सम्मानित किया जाता है। साथ ही, पर्यटन क्षेत्र से जुड़े नीति-निर्माताओं, विशेषज्ञों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को पर्यटन विकास की चुनौतियों और संभावनाओं पर विचार-विमर्श का अवसर भी मिलता है। ऐसे प्रतिष्ठित मंच पर छत्तीसगढ़ को ’‘कल्चरल टूरिज्म विनर’’ के रूप में सम्मानित किया जाना राज्य की बढ़ती पर्यटन पहचान का प्रतीक है।

छत्तीसगढ़ ने सांस्कृतिक पर्यटन का विकसित किया विशिष्ट मॉडल 

         छत्तीसगढ़ ने सांस्कृतिक पर्यटन के क्षेत्र में जो विशिष्ट मॉडल विकसित किया है, वह देश के अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकता है। बस्तर की जनजातीय संस्कृति, सिरपुर की ऐतिहासिक धरोहर, भोरमदेव मंदिर समूह, चित्रकोट और तीरथगढ़ जैसे विश्वस्तरीय प्राकृतिक पर्यटन स्थल, पारंपरिक हस्तशिल्प, लोक संगीत और लोक नृत्य राज्य की पर्यटन पहचान को विशिष्ट बनाते हैं। इन सभी को योजनाबद्ध तरीके से पर्यटन परिपथों से जोड़कर राज्य ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है।

सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने कलाकारों, शिल्पकारों और जनजातीय समुदायों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने का कार्य

          छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय कलाकारों, शिल्पकारों और जनजातीय समुदायों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में भी लगातार कार्य किया जा रहा है। राज्य सरकार पर्यटन स्थलों पर बेहतर सुविधाओं के विकास, डिजिटल प्रचार-प्रसार, सामुदायिक पर्यटन और सांस्कृतिक आयोजनों के विस्तार पर विशेष ध्यान दे रही है। इसका सकारात्मक परिणाम अब राष्ट्रीय स्तर पर दिखाई देने लगा है।

छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की महत्वपूर्ण भूमिका

         इस उपलब्धि पर पर्यटन विभाग, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड, पर्यटन उद्योग से जुड़े हितधारकों तथा प्रदेशवासियों में हर्ष का वातावरण है। यह सम्मान राज्य में पर्यटन निवेश, पर्यटकों की संख्या और रोजगार के नए अवसरों को बढ़ावा देगा। साथ ही, छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

अग्रणी सांस्कृतिक पर्यटन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी

        राष्ट्रीय मंच पर मिला यह सम्मान केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक समृद्धि, पर्यटन संभावनाओं और दूरदर्शी पर्यटन नीति की बड़ी स्वीकृति है। यह उपलब्धि आने वाले वर्षों में राज्य को भारत के अग्रणी सांस्कृतिक पर्यटन गंतव्यों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

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