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99 दिन बाद मारे गए पहलगाम हमले के तीन आतंकी:कहां से आए, 13 मिनट में किए 26 कत्ल

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पहलगाम,एजेंसी। कश्मीर की हरी-भरी बायसरन घाटी, उसकी खूबसूरती को निहारते टूरिस्ट, गोलियां, चीखें, बचने-बचाने की कोशिशें और 26 कत्ल, 22 अप्रैल को हुए पहलगाम अटैक की कहानी बस इतनी ही है। पहलगाम में तीन आतंकी आए और हमेशा का दर्द देकर चले गए। अब हमले के तीन महीने बाद सेना और पुलिस की टीमों ने श्रीनगर से 22 किमी दूर दाचीगाम के जंगलों में तीनों आतंकियों को मार गिराया है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को लोकसभा में कहा कि जिन आतंकियों ने बायसरन घाटी में हमारे 26 टूरिस्ट्स की जान ली। उनके खिलाफ ऑपरेशन महादेव चलाया गया और 28 जुलाई को तीनों को ढेर कर दिया गया। इन आतंकियों के नाम सुलेमान, हमजा अफगान और जिब्रान हैं। सुलेमान लश्कर का कमांडर था। इसके ढेरों सबूत हैं। अफगान और जिब्रान ए कैटेगरी के आतंकी थे।

इस स्टोरी में पढ़िए, देखिए और सुनिए पहलगाम हमले की पूरी कहानी…

शुरुआत ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ यानी बायसरन घाटी से

जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर से करीब 90 किमी दूर है पहलगाम। यहां से 6 किमी दूर बायसरन घाटी है। हरी घास के बड़े-बड़े मैदान, देवदार के घने जंगल, बर्फ से ढंकी पहाड़ियों की वजह से ये जगह स्विट्जरलैंड का एहसास दिलाती है। इसलिए इसका नाम ही पड़ गया मिनी स्विट्जरलैंड। यहां सिर्फ घोड़े या ट्रैक करके ही जा सकते हैं। पहलगाम से बायसरन घाटी जाने के तीन रास्ते हैं, जो एक पॉइंट पर जाकर मिलते हैं।

अप्रैल से जून और सितंबर से नवंबर बायसरन जाने का सबसे अच्छा टाइम माना जाता है। पीक सीजन की वजह से यहां काफी भीड़ होगी, ये बात आतंकी भी जानते थे। इसलिए उन्होंने हमले के लिए अप्रैल का महीना चुना।

22 अप्रैल का दिन, जब बायसरन घाटी में अटैक हुआ

दोपहर करीब 2 बजे, टूरिस्ट के ग्रुप घाटी में एंजॉय कर रहे थे। वीडियो-फोटो शूट कर रहे थे। एडवेंचर एक्टिविटी कर रहे थे। उसी वक्त तीन आतंकी जंगल की ओर से आए और गोलियां बरसाने लगे। पहली गोली करीब 2.20 बजे चली। शुरुआत में किसी को समझ नहीं आया कि क्या हुआ है।

जब लाशें गिरने लगीं, तब लगा कि हमला हुआ है। लोग बचने के लिए भागे, लेकिन उस मैदान में छिपने की जगह ही नहीं थी।

अहमदाबाद के ऋषि भट्ट उस वक्त जिप लाइन राइड कर रहे थे। अपना वीडियो बना रहे थे, लेकिन उसमें गोली लगने के बाद जमीन पर गिरते लोग भी रिकॉर्ड हो गए।

कुल 13 मिनट तक फायरिंग हुई। उसी वक्त मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा के रहने वाले नवीन चौधरी रील बना रहे थे। वे एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट के सेमिनार में शामिल होने कश्मीर गए थे।

नवीन को गोली चलने की आवाज आई। नवीन बताते हैं कि शुरुआत में लगा कि कोई पटाखे फोड़ रहा है। लोगों के चिल्लाने की आवाजें सुनकर और भागते देख समझ आया कि ये आतंकी हमला है। वे हमले वाली जगह से दूर थे, इसलिए सुरक्षित बच निकले।

उधर, घाटी में आतंकियों ने लोगों से नाम और धर्म पूछा, कलमा पढ़ने के लिए कहा, जो कलमा नहीं पढ़ पाए उनके सिर में गोली मार दी।

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देश

RBI की नीति, अमेरिका-ईरान तनाव और तेल की कीमतों में उछाल से अगले सप्ताह शेयर बाजार में तेजी आने की संभावना

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मुंबई,एजेंसी।  वैश्विक अनिश्चितताओं और घरेलू चिंताओं के कारण बढ़ी अस्थिरता के बीच भारतीय शेयर बाजार लगातार छठे सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुए। बेंचमार्क सूचकांकों में लगभग 0.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। निवेशक अब एक और महत्वपूर्ण सप्ताह के लिए तैयार हैं, जहां भारतीय रिजर्व बैंक के नीतिगत निर्णय, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से बाजार की दिशा तय होने की उम्मीद है।

छुट्टियों के कारण छोटा हुआ यह सप्ताह कमजोर शुरुआत के साथ शुरू हुआ, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने निवेशकों के विश्वास को प्रभावित किया और व्यापक बिकवाली को जन्म दिया। हालांकि, तत्काल तनाव बढ़ने की आशंका कम होने और तेल की कीमतों में कुछ नरमी के संकेत मिलने से सप्ताह के मध्य में बाजारों में सुधार देखने को मिला। इस सुधार के बावजूद, अस्थिर वैश्विक संकेतों, विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार निकासी, मुद्रास्फीति की चिंताओं और कमजोर रुपये के कारण अस्थिरता बनी रही।

सप्ताह के अंत तक निफ्टी 22,713.10 पर स्थिर हुआ, जबकि सेंसेक्स 73,319.55 पर बंद हुआ। निफ्टी के तकनीकी विश्लेषण पर टिप्पणी करते हुए विशेषज्ञों ने कहा कि तकनीकी दृष्टि से 22,150-21,900 का स्तर महत्वपूर्ण समर्थन क्षेत्र साबित हो सकता है। एक विश्लेषक ने बताया, “ऊपर की ओर, 23,000-23,500 के स्तर में प्रतिरोध देखा जा रहा है। साप्ताहिक सापेक्ष शक्ति सूचकांक (RSI) 27.88 पर है।” 

आगे की बात करें तो, सभी की निगाहें RBI के आगामी मौद्रिक नीति निर्णय पर टिकी होंगी। मौद्रिक नीति समिति (MPC) की वित्त वर्ष 2027 के पहले सत्र के लिए 6 से 8 अप्रैल तक बैठक होनी है। भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी एक महत्वपूर्ण कारक बने रहेंगे। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष और भी तीव्र होता दिख रहा है, सैन्य तनाव बढ़ने की खबरें आ रही हैं और डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ी चेतावनी जारी की है।

स्थिति में और अधिक गिरावट वैश्विक जोखिम भावना को काफी हद तक प्रभावित कर सकती है और शेयर बाजारों में नई अस्थिरता पैदा कर सकती है। कच्चे तेल की कीमतें, जो पहले से ही तेजी से बढ़ रही हैं, एक और महत्वपूर्ण कारक होंगी। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 109 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। फरवरी के अंत से 50 प्रतिशत से अधिक की इस वृद्धि ने भारतीय कंपनियों के लिए मुद्रास्फीति के दबाव और इनपुट लागतों को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

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छत्तीसगढ़

ओडिशा में भूकंप, बस्तर में भी महसूस हुए झटके:करीब 5 किमी नीचे 4.4 तीव्रता के झटके, किसी भी तरह का कोई नुकसान नहीं

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जगदलपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के पड़ोसी राज्य ओडिशा के कोरापुट में शनिवार देर भूकंप आया, जिसके हल्के झटके बस्तर के कुछ इलाकों में भी महसूस किए गए हैं। रात करीब 11:31 बजे आए 4.4 तीव्रता के इस भूकंप का केंद्र ओडिशा का कोरापुट में था। झटके हल्के रहे और अब तक किसी तरह के नुकसान की सूचना नहीं है।

नजदीक का इलाका होने की वजह से जगदलपुर के आसपास के इलाकों में लोगों ने भूकंप के झटकों को महसूस किया। शहर के आडावाल क्षेत्र में भी कंपन महसूस होते ही कई लोग घरों से बाहर निकल आए। हालांकि, झटकों की अवधि बेहद कम होने के कारण अधिकांश लोगों को संभलने का मौका ही नहीं मिला।

ओडिशा के कोरापुट था भूकंप का केंद्र

भूकंप का केंद्र ओडिशा के कोरापुट क्षेत्र में था, जो बस्तर मुख्यालय से करीब 80 किलोमीटर दूर स्थित है। यही वजह रही कि इसका असर बस्तर में भी महसूस किया गया। भूकंप मॉनिटरिंग ऐप से मिले आंकड़ों के मुताबिक, इसकी तीव्रता 4.4 मापी गई, जबकि केंद्र जमीन से लगभग 5 किलोमीटर गहराई में था।

कम गहराई के बावजूद तीव्रता कम होने के कारण झटके हल्के रहे। प्रशासन के अनुसार अब तक कहीं से किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है।

अप्रैल 2024 में भी 2.6 तीव्रता का भूकंप दर्ज हुआ था

दरअसल, एक समय बस्तर और कोरापुट क्षेत्र को भूकंप मुक्त माना जाता था, लेकिन पिछले कुछ समय में यहां बार-बार हल्के झटके महसूस किए जा रहे हैं। इससे पहले अप्रैल 2024 में भी 2.6 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था, जिसका केंद्र नजदीक होने के कारण उस समय कंपन ज्यादा महसूस हुआ था।

विशेषज्ञों का कहना है कि, इस क्षेत्र में भूकंप के केंद्र लगातार दर्ज हो रहे हैं, लेकिन तीव्रता कम होने से बड़े नुकसान की आशंका नहीं रहती। इसके बावजूद लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

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देश

ईरानी राजदूत का दावा: जंग में US-इजराइल की हर रणनीति फेल ! दुश्मन के हर दबाव को ईरान ने ताकत में बदला

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नई दिल्ली,एजेंसी। नई दिल्ली में तैनात ईरानी राजदूत Mohammad Fathali ने अमेरिका और इजराइल के खिलाफ बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा युद्ध में अमेरिका (United States) और इजराइल (Israel) की रणनीति असफल साबित हो रही है।   ईरानी राजदूत ने सोशल मीडिया पर लिखा कि दुनिया भर के कई थिंक टैंक्स के विश्लेषण से यह साफ हो रहा है कि यह अभियान “रणनीतिक विफलता” की ओर बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि Iran ने दबाव को सहन करते हुए उसे अपनी ताकत में बदल दिया है। फथाली ने यह भी कहा कि ईरान की सभ्यतागत ताकत उसे लंबे समय तक संघर्ष करने की क्षमता देती है और यही उसकी रणनीतिक बढ़त बन रही है।इस बीच ईरान की सेना ने भी सख्त चेतावनी दी है। सैन्य प्रवक्ता Ebrahim Zolfaghari ने कहा कि अगर अमेरिका ने हमले जारी रखे, तो जवाब में अमेरिकी और इजराइली ठिकानों पर “कुचल देने वाले हमले” किए जाएंगे।  यह चेतावनी खास तौर पर उन देशों के लिए भी है, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं।

ईरान ने साफ कहा है कि ऐसे देश भी हमलों का निशाना बन सकते हैं। दरअसल, यह पूरा तनाव तब और बढ़ गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के पुलों, बिजलीघरों और ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाने की धमकी दी। उन्होंने यहां तक कहा कि जरूरत पड़ी तो ईरान को “Stone Age” तक पहुंचा देंगे। कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट में हालात बेहद तनावपूर्ण हैं, जहां एक तरफ युद्ध तेज हो रहा है और दूसरी तरफ बयानबाजी से स्थिति और भड़क रही है।

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