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कोरबा

अखिल भारतीय समाचार पत्र विक्रेता सम्मेलन का आयोजन 16 एवं 17 अगस्त को धनबाद में

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कोरबा। अखिल भारतीय समाचार पत्र विक्रेता सम्मेलन का आयोजन 16 और 17 अगस्त को धनबाद के बुद्धा लॉन, हीरक रोड, सुगियाडीह में किया जाएगा। इस सम्मेलन में देश के 22 राज्यों के प्रतिनिधि भाग लेंगे, जिसमें छत्तीसगढ़ अखबार वितरक संघ के प्रदेश संरक्षक पदम सिंह चंदेल, जिला अध्यक्ष विपेंद्र कुमार साहू, जिला सचिव जयकुमार नेताम, कोषाध्यक्ष लक्ष्मी राठौर शामिल होंगे।
सम्मेलन के दौरान कोरोना महामारी के बाद व्यापार में आए बदलाव, भविष्य की चुनौतियां और विक्रेताओं की आर्थिक व सामाजिक स्थिति पर चर्चा की जाएगी। 16 अगस्त को सम्मेलन का उद्घाटन सुबह 11 बजे हब इंडिया रियलिटी के पंकज कुमार और स्थानीय संगठन के संरक्षक रणविजय सिंह करेंगे।
इसके बाद, देश भर के संगठन प्रतिनिधि और प्रिंट मीडिया के पदाधिकारी अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। दोपहर के सत्र में संगठनात्मक मुद्दों पर चर्चा की जाएगी और महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएँगे। 17 तारीख को आमंत्रितों के सम्मान में वितरक सम्मान रैली का आयोजन किया जाएगा।
इस सम्मेलन के आयोजन को राष्ट्रीय वितरक मंच एवं धनबाद समाचार पत्र विक्रेता समिति की ओर से समिति अध्यक्ष राम रक्षा सिंह ने स्वीकार किया है। उन्होंने बताया कि इस सम्मेलन में देश भर के प्रतिनिधि भाग लेंगे और विक्रेताओं की समस्याओं पर चर्चा की जाएगी।

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कोरबा

मछुआ सहाकारी समिति मर्यादित रिंगनिया का मतदाता सूची प्रकाशित

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दावा-आपत्ति 09 अप्रैल तक आमंत्रित

कोरबा। रजिस्ट्रीकरण अधिकारी मछुआ सहाकारी समिति मर्यादित रिंगनिया पंजीयन क्रमांक 39 जी.आर. भतरा द्वारा सोसायटी के सदस्यों का मतदाता सूची का प्रकाशन 02 अप्रैल 2026 को किया जाकर दावा-आपत्ति 09 अप्रैल तक आमंत्रित किया गया है। दावा-आपत्ति लिखित में मय प्रमाण के हरिलाल/सदस्य के पास 09 अप्रैल तक कार्यालयीन समय पर सोसायटी के कार्यालय में प्रस्तुत किया जा सकता है। दावा-आपत्तियों का निराकरण सोसायटी कार्यालय में 10 अप्रैल 2026 को प्रातः 11.30 बजे से किया जायेगा तथा इस प्रकार उपांतरित सूची को अंतिम मतदाता सूची के रूप में प्रकाशित किया जायेगा।

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कोरबा

स्वास्थ्य विभाग द्वारा लू से बचाव हेतु एडवाइजरी जारी

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भीषण गर्मी में लू से बचाव हेतु आवश्यक उपाय अपनाने हेतु किया गया आग्रह

कोरबा। ग्रीष्म कालीन मौसम प्रारंभ होने पर तथा अधिक गर्मी पड़ने से शुष्क वातावरण में लू (तापाघात) की संभावना अधिक होती है। जो घातक या जानलेवा हो सकती है। जिले में बढ़ रही गर्मी को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग द्वारा लू से बचाव हेतु आवश्यक उपाय अपनाने के लिए एडवाइजरी जारी की है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि जिले में लगातार मौसम परिवर्तन के बाद तेज धूप एवं गर्मी प्रारंभ हो गया है। जिसके कारण लू लगने की संभावना बढ़ गई है। सूर्य की तेज गर्मी के दुष्प्रभाव से शरीर के तापमान में विपरीत प्रभाव पड़ता है जिससे शरीर में पानी और खनिज लवण नमक की कमी हो जाती है इसे लू लगना या हीट-स्ट्रोक कहा जाता है। वर्तमान में घर से बाहर जाकर ऑफिस वर्क करने वाले, खेती कार्य मे लगे आमजन तथा बाजार में खरीददारी आदि कार्य करने वाले व्यक्ति पर्याप्त मात्रा में पानी एवं पेय पदार्थो का सेवन नहीं कर पाते हैं। इस कारण वे निर्जलीकरण के शिकार हो जाते हैं, जिसका समय पर उपचार ना मिलने के कारण मरीज की हालत गंभीर हो जाती है।

लू से बचाव हेतु आवश्यक उपाय –
आम लोगों के द्वारा आवश्यक उपाय अपनाकर लू (तापाघात ) से बचाव किया जा सकता है। जिसके अंतर्गत गर्मी के दिनों में हमेशा घर से बाहर जाते समय सफेद, सूती या हल्के रंग के कपड़े पहनना, भोजन करके तथा पानी पीकर ही घर से बाहर निकलना, घर से बाहर जाते समय गर्दन के पिछले भाग कान एवं सिर को कपड़े/ गमछे से ढककर ही निकलना, छतरी एवं रंगीन चश्मे का प्रयोग करना,  गर्मी के दिनों में अधिक मात्रा में पानी पिना तथा ज्यादातर पेय पदार्थों का सेवन करना सहित अन्य उपाय अपना सकते है। इसी प्रकार बाहर जाते समय पानी साथ रखें, धूप में बेवजह बाहर जाने से बचें, बच्चों बुजुर्गों व गर्भवती महिलाओं का विशेष ध्यान रखें, साथ ही उन्हें समय-समय पर पानी पीने के लिए प्रेरित करें एवं सुपाच्य भोजन एवं तरल पदार्थों का सेवन कराएं। गर्मी के दिनों में तीव्र धूप को घर के अंदर आने से रोकें तथा जहाँ तक संभव हो अधिक से अधिक समय तक धूप में रहकर व्यायाम तथा मेहनत का काम ना करें, धूप में नंगे पांव ना चलें। इन सावधानियों को अपनाकर स्वयं को लू (तापघात) से बचा जा सकता है।

लू (तापाघात) के लक्षण-

लू का शिकार होने पर व्यक्ति में सिर दर्द, बुखार, उल्टी एवं अत्यधिक पसीना आना, बेहोशी, चक्कर आना, सांस फूलना, दिल की धड़कन तेज होना, कमजोरी महसूस होना, शरीर में ऐंठन तथा त्वचा लाल एवं सूखी होना जैसे अन्य लक्षण शामिल है।

लू से बचाव हेतु प्राथमिकी उपचार –

लू (तापाघात) होने पर रोगी को छायादार स्थान पर कपड़े गीले कर लिटायें एवं हवा करें। रोगी को बेहोशी की स्थिती में कोई भी भोज्य/पेय पदार्थ का सेवन नहीं कराएं एवं उसे तत्काल चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराएं। रोगी के होश में आने की स्थिति में उसे ठंडे पेय पदार्थ, जीवन रक्षक घोल, कच्चा आम का पना आदि पेय पदार्थों का सेवन कराएं। रोगी के शरीर के तापमान को कम करने के लिए उसके शरीर पर ठंडे पानी की पट्टियाँ रखें, प्रभावित व्यक्ति को शीघ्र ही नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र उपचार के लिए ले जाए।
सीएमएचओ ने बताया कि जिले के मेडिकल कॉलेज, सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों तथा शहरी स्वास्थ्य केन्द्रों में लू (तापघात) से बचाव हेतु पर्याप्त मात्रा में आवश्यक जीवन रक्षक दवाइयां एवं ओ. आर. एस. की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।
कलेक्टर श्री दुदावत तथा सीएमएचओ ने जिले के नागरिकों से गर्मी के मौसम में लू (तापाघात) से बचाव हेतु आवश्यक उपाय को अपनाने का आग्रह किया है। जिससे स्वयं और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकें।

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कोरबा

भूमिहीन किसान छेदूराम ने कोसा उत्पादन से अर्जित किए 6.30 लाख रुपये

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कोरबा। जिले के विकासखण्ड कटघोरा के ग्राम सलोरा निवासी छेदूराम ने रेशम विभाग के सहयोग से सफलता की एक नई इबारत लिखी है। बीपीएल परिवार से ताल्लुक रखने वाले और बिना किसी कृषि भूमि वाले छेदूराम के लिए कोसा उत्पादन ही उनकी आजीविका का मुख्य सहारा है। पिछले 15 वर्षों से रेशम विभाग के साथ निरंतर कार्य करते हुए उन्होंने और उनके परिवार के सभी सदस्यों ने मिलकर कोसा कृमिपालन को अपनी आय का सशक्त जरिया बनाया है।  

इस वर्ष कोसा बीज केन्द्र कोरबा में कृमिपालन करते हुए छेदूराम ने तीन फसलों के दौरान कुल 1,73,733 नग कोसा का उत्पादन किया। इस शानदार उत्पादन के बदले उन्हें 6,30,816 रुपये की राशि प्राप्त हुई, जिसका भुगतान विभाग द्वारा सीधे उनके बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से किया गया है। छेदूराम ने रेशम विभाग के मार्गदर्शन में कार्य की बारीकियों को बहुत गहराई से सीखा और आज एक उत्कृष्ट कृषक के रूप में अपनी पहचान बनाई है। कोसा उत्पादन के खाली समय में वे विभाग में मजदूरी और मत्स्य आखेट का कार्य भी करते हैं।

श्री छेदूराम अब अन्य हितग्राहियों के लिए एक प्रेरणा बन गए हैं और उनका लक्ष्य भविष्य में और अधिक मेहनत कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को और बेहतर बनाना है। इस कार्य में रेशम विभाग द्वारा उन्हें समय पर उन्नत टसर कोसा बीज और निःशुल्क तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। रेशम विभाग के सहायक संचालक श्री बी.एस. भण्डारी ने बताया कि योजनाओं के तह विभाग द्वारा आवश्यक सहयोग हितग्राही को प्रदान किया गया है।  

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