कोरबा
बालको ने किसान मेला के अवसर पर कृषकों को किया सम्मानित

बालकोनगर। वेदांता समूह की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ने किसान दिवस के अवसर पर जामबहार और बेला गांव में किसान मेला आयोजन किया। आयोजित उत्सव में 32 गांवों के किसानों ने हिस्सा लिया। किसानों में नवाचार, सहयोग और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए सरकारी निकायों, वित्तीय संस्थानों और कृषि क्षेत्रों के विभिन्न हितधारकों को एकजुट करते हुए बदलाव के लिए एकजुट किया गया। बालको ने कृषि विभाग, उद्यानिकी विभाग, वन विभाग, भारतीय कृषि बीमा कंपनी (एआईसी), छत्तीसगढ़ नवकरणीय ऊर्जा विभाग, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक के साथ अपने सहयोगी स्वयं सेवी संस्था एक्शन फॉर फ़ूड प्रोडक्शन के सहयोग से कार्यक्रम को आयोजित किया। कार्यक्रम में 339 किसानों ने चर्चा, कार्यशाला और प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। उत्सव में विभिन्न गांव के 20 प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया। सम्मानित किसानों ने मोर जल मोर माटी परियोजना में अपनी भागीदारी के माध्यम से उल्लेखनीय कार्य कर, कृषि क्षेत्र में विभिन्न प्रभावशाली नवाचार को अपनाया है। किसानों का सम्मान और समर्थन उनके उपलब्धियों के सराहने के साथ समुदाय के लिए प्रेरक साबित हुआ जिससे कृषि क्षेत्र में नवाचार और सहयोग की भावना को बढ़ावा मिला है। उत्सव का केंद्र बिंदु किसान मेला था जिसमें कृषि जीविका और विकास के लिए महत्वपूर्ण जानकारी का प्रसार किया गया था। आयोजन में किसानों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए कृषि नवाचार और नवीन मशीनरी का प्रदर्शन। फसल बीमा में विभिन्न बीमा योजनाओं के माध्यम से किसानों को अपनी फसल सुरक्षित करने के बारे में शिक्षित करना तथा कृषि के लिए वित्तीय सहायता प्राप्त करने और किसानों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से विभिन्न सरकारी पहलों की विस्तृत जानकारी दी गई। बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निदेशक राजेश कुमार ने कहा कि हमारे किसान देश के आर्थिक विकास के प्रमुख अंग हैं। कंपनी हमेशा विभिन्न तकनीकी और नवाचार माध्यम से कृषक समुदाय के उत्थान और उन्नति के लिए कटिबद्ध है। बालको प्रशिक्षित किसानों ने जैविक खेती, कृषि नवाचार और नवीन तकनीकों की मदद से विभिन्न फसलों का उत्पादन बढ़ाने में सफलता पाई है। कृषि प्रोत्साहन परियोजना ‘मोर जल मोर माटी’ से किसानों को लाभ मिल रहा है। श्री कुमार ने कहा कि हम अपने सामुदायिक विकास कार्यक्रम के जरिए जरूरतमंदों किसानों की हरसंभव मदद करने के लिए प्रतिबद्ध है। बालको की सामुदायिक विकास परियोजना ‘मोर जल मोर माटी’ का प्रमुख उद्देश्य सिंचाई सुविधाओं को बढ़ाने, फसल उत्पादन में वृद्धि, किसानों को नवीनतम कृषि तकनीकों से अवगत कराने के साथ जल और मृदा प्रबंधन को उत्कृष्ट बनाना है। परियोजना का मुख्य घटक कृषि, जल प्रबंधन, पशुपालन, मत्स्य पालन, बाड़बंदी, वनोपज एवं वन संरक्षण और लाख की खेती शामिल है। परियोजना 1200 एकड़ से अधिक भूमि के साथ 3700 किसानों तक अपनी पहुंच बना चुका है। 1000 से अधिक किसानों ने आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाया है जिससे उनकी औसत वार्षिक आय के साथ-साथ उत्पादन में वृद्धि हुई है। तकनीकी सहयोग से लागत में कमी आई है। किसान आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं। इस परियोजना से युवा कृषि को मुख्य व्यवसाय के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहित हुए हैं। मोर जल मोर माटी पहल में लगभग 25 प्रतिशत लाभार्थी युवा किसान हैं। इस परियोजना से स्थानीय किसान अनेक शासकीय योजनाओं से लाभान्वित हो रहे हैं।
कोरबा
एस.ई.सी.एल. (SECL) द्वारा वादाखिलाफी से नाराज भू-विस्थापित फिर आंदोलन को मजबूर, 18 मार्च से अनिश्चितकालीन धरने का ऐलान
कोरबा/गेवरा। एस.ई.सी.एल. (SECL) गेवरा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम नरईबोध और प्रभावित ग्राम तहसील दीपका जिला कोरबा के भू-विस्थापित ग्रामीणों ने एक बार फिर से प्रबंधन के खिलाफ आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। प्रबंधन द्वारा बसाहट मुआवजा और वैकल्पिक रोजगार के वादे पूरे न करने से नाराज होकर प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों ने 18 मार्च 2026 से गेवरा क्षेत्र में अनिश्चितकालीन धरने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन की घोषणा की है ।
टूटे वादों की दास्तां
विगत माह ग्रामीण अपनी जायज मांगों को लेकर धरने पर बैठे थे। दिनांक 08/03/2026 को एस.ई.सी.एल. प्रबंधन ने लिखित आश्वासन दिया था कि 3 लोगों को वैकल्पिक रोजगार तुरंत दिया जाएगा और बाकी लोगों का बी-फॉर्म भी उसी तारीख से भराने की प्रक्रिया शुरू की जाएंगी। इस ठोस लिखित आश्वासन पर विश्वास करते हुए ग्रामीणों ने अपना आंदोलन स्थगित कर दिया था ।

ताज़ा घटनाक्रम और नाराज़गी
प्रेस बयान में प्रभावित ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रबंधन ने उन्हें झूठे आश्वासन देकर गुमराह किया है, पिछले 2-3 महीनों से लगातार रोजगार के लिए टालमटोल किया जा रहा है। वादा किए गए किसी भी बिंदु पर अमल नहीं हुआ है ।
प्रबंधन की इस वादाखिलाफी और तानाशाही रवैये से त्रस्त होकर ग्राम नरईबोध और प्रभावित क्षेत्र के समस्त पीड़ित भू-विस्थापित परिवार एक बार फिर से आंदोलन के लिए बाध्य हुए हैं ।
प्रमुख मांगें:-
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी निम्नलिखित मांगों का स्थायी निराकरण नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा:-
- प्रभावित क्षेत्र के सभी पात्र भू-विस्थापितों को तत्काल स्थायी रोजगार प्रदान किया जाए ।
- उचित बसाहट और मुआवजा राशि का वितरण अविलंब किया जाए ।
- वैकल्पिक रोजगार की रुकी हुई प्रक्रिया को तुरंत बहाल किया जाए ।
अनिश्चितकालीन धरने की घोषणा
यदि दिनांक 17 मार्च 2026 तक उपरोक्त समस्याओं का समाधान नहीं होता है तो 18 मार्च 2026 से ग्राम नरईबोध और प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीण एस.ई.सी.एल. गेवरा क्षेत्र में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगे। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यह एक शांतिपूर्ण आंदोलन होगा, लेकिन अपनी मांगों को लेकर वे अडिग हैं ।
प्रबंधन की जिम्मेदारी
ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा है कि यदि इस आंदोलन के दौरान किसी भी ग्रामीण को कोई क्षति पहुँचती है, या क्षेत्र में अशांति पैदा होती है, तो इसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी एस.ई.सी.एल. प्रबंधन की होगी। प्रशासन को भी इस विषय में सूचित कर दिया गया है ।




कोरबा
कोरबा जिले के प्रगतिशील मत्स्य कृषकों का अध्ययन भ्रमण सफल, कलेक्टर से की मुलाकात
कोरबा। मछली पालन विभाग द्वारा कोरबा जिले के प्रगतिशील मत्स्य कृषकों को राज्य के बाहर अध्ययन भ्रमण पर भेजा गया था। हितग्राही किसान भुवनेश्वर तथा कौशल्या गंगा में स्थित प्रशिक्षण केंद्रों में पहुँचे, जहाँ उन्होंने उन्नत एवं वैज्ञानिक मछली पालन तकनीकों की जानकारी हासिल की।

भ्रमण से लौटने के बाद आज कृषकों ने कलेक्टर कुणाल दुदावत से मुलाकात की। कलेक्टर ने किसानों से प्रशिक्षण के दौरान सीखी गई विधियों पर चर्चा की और कहा कि आधुनिक तकनीकों को अपनाकर न केवल उत्पादन बढ़ाया जा सकता है, बल्कि आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। उन्होंने किसानों को प्राप्त ज्ञान के आधार पर प्रभावी कार्य-योजना बनाकर जिले में मछली पालन को और अधिक प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए तथा उन्हें शुभकामनाएँ भी दीं।
इस अवसर पर मत्स्य विभाग के सहायक संचालक क्रांति कुमार बघेल भी उपस्थित रहे।

कोरबा
कोरबा जिले में एलपीजी गैस और पेट्रोल की पर्याप्त उपलब्धता, आपूर्ति पूरी तरह सुचारू’
एक दिन में गैस डिलीवरीः सुभाष चंद्र अग्रवाल को मिली त्वरित सेवा
अफवाहों पर ध्यान न दें, व्यवस्था पूरी तरह सामान्य
कोरबा। जिले में एलपीजी गैस सिलेंडर एवं पेट्रोल की उपलब्धता पूरी तरह सामान्य और सुचारू बनी हुई है। शासन के निर्देशों के अनुरूप कलेक्टर कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन में जिले में आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावी ढंग से संचालित किया जा रहा है, ताकि आमजन को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। सभी वितरण केंद्रों और पेट्रोल पंपों पर पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित किया गया है तथा नियमित मॉनिटरिंग के माध्यम से आपूर्ति की स्थिति पर सतत नजर रखी जा रही है। आम नागरिकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए व्यवस्था को सुगम, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाए रखा गया है, जिससे सभी उपभोक्ताओं को समय पर आवश्यक संसाधन उपलब्ध हो सकें।
इसी व्यवस्था की सफलता का एक स्पष्ट और प्रेरक उदाहरण कोरबा जिले के शहरी क्षेत्र इंद्राविहार कॉलोनी के निवासी सुभाष चंद्र अग्रवाल हैं। उन्होंने बीते दिन घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर के लिए बुकिंग की थी और आज ही उन्हें बिना किसी परेशानी के समय पर सिलेंडर प्राप्त हो गया। उनका यह अनुभव दर्शाता है कि जिले में आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह सुचारू और प्रभावी ढंग से संचालित हो रही है।

श्री अग्रवाल ने बताया कि प्रारंभ में उन्हें भी गैस उपलब्धता को लेकर कुछ भ्रम था, लेकिन जब उन्होंने स्वयं जाकर सिलेंडर प्राप्त किया, तब यह स्पष्ट हो गया कि जिले में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और वितरण व्यवस्था व्यवस्थित रूप से संचालित की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में गैस वितरण प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और निर्बाध है, जिससे उपभोक्ताओं को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं हो रही है।
अंत में उन्होंने आमजन से अपील की कि किसी भी प्रकार की अफवाहों या भ्रामक जानकारी पर ध्यान न दें। जिले में एलपीजी गैस की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित है और सभी उपभोक्ताओं को उनकी आवश्यकता के अनुसार समय पर सिलेंडर उपलब्ध कराया जा रहा है।
स्टॉक की हो रही मॉनीटरिंग : खाद्य अधिकारी
खाद्य अधिकारी घनश्याम कंवर ने बताया कि सभी वितरकों के स्टॉक की मॉनिटरिंग की जा रही है और प्रतिदिन पूर्व की भांति नया स्टॉक नियमित रूप से आ रहा है ।
शहर की प्रमुख गैस एजेंसियों सारांश गैस, कोरबा गैस एजेंसी और पवन गैस एजेंसी, की आपूर्ति स्थिति, दैनिक वितरण क्षमता और लंबित बुकिंग की प्रगति का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। प्रशासन का उद्देश्य उपभोक्ताओं को समयबद्ध रूप से गैस सिलेंडर उपलब्ध कराना है।
सारांश गैस के पास वर्तमान में सिलेंडरों का स्टॉक उपलब्ध है। जनवरी-फरवरी में औसत 450 सिलेंडर प्रतिदिन वितरण किया गया था, जिसे अब बढ़ाकर 480 सिलेंडर प्रतिदिन कर दिया गया है।
कोरबा गैस एजेंसी में सिलेंडरों का स्टॉक उपलब्ध है। पूर्व में प्रतिदिन औसत वितरण 630 सिलेंडर था, जिसे बढ़ाकर 650 सिलेंडर प्रतिदिन किया गया है। पवन गैस एजेंसी में सिलेंडरों का वर्तमान स्टॉक है। एजेंसी ने अपनी वितरण क्षमता को 300 से बढ़ाकर 370 सिलेंडर प्रतिदिन कर दिया है। प्रशासन ने सभी एजेंसियों को निर्देशित किया है कि स्टॉक उपलब्धता और दैनिक वितरण क्षमता में संतुलन स्थापित करते हुए उपभोक्ताओं तक समय पर रसोई गैस पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए। साथ ही लंबित बुकिंग के त्वरित निपटान के लिए संसाधनों और परिवहन व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जा रहा है।

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