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शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन गिरावट, सेंसेक्स 148 अंक कमजोर

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मुंबई, एजेंसी। विदेशी पूंजी की लगातार निकासी और निजी क्षेत्र के आईसीआईसीआई बैंक में बिकवाली के बीच बृहस्पतिवार को स्थानीय शेयर बाजार बेहद उतार-चढ़ाव भरे कारोबार में गिरकर बंद हुए। सेंसेक्स में 148 अंक की गिरावट रही जबकि निफ्टी 88 अंक नीचे आ गया। बीएसई का 30 शेयरों वाला मानक सूचकांक सेंसेक्स 148.14 अंक यानी 0.18 प्रतिशत की गिरावट के साथ 83,311.01 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान इसने 83,846.35 के उच्चतम और 83,237.65 के निम्नतम स्तर को छुआ। एनएसई का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी 87.95 अंक यानी 0.34 प्रतिशत की गिरावट के साथ 25,509.70 अंक पर बंद हुआ। यह मानक सूचकांकों में गिरावट का लगातार दूसरा दिन रहा। 

मंगलवार को भी सेंसेक्स और निफ्टी में खासी गिरावट आई थी। बुधवार को बाजार ‘गुरु नानक जयंती’ पर बंद रहे थे। बृहस्पतिवार को सेंसेक्स के समूह में शामिल कंपनियों में से पावर ग्रिड में सर्वाधिक 3.15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इटर्नल में 2.44 प्रतिशत, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स में 1.67 प्रतिशत और बजाज फाइनेंस में 1.45 प्रतिशत की गिरावट रही। वहीं आईसीआईसीआई बैंक के शेयर में 1.21 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके उलट एशियन पेंट्स, रिलायंस इंडस्ट्रीज, महिंद्रा एंड महिंद्रा और अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयरों में बढ़त दर्ज की गई। 

शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने मंगलवार को 1,067.01 करोड़ रुपए के शेयरों की शुद्ध रूप से बिकवाली की थी जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 1,202.90 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे थे। जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘‘एशियाई बाजारों के अनुकूल रुख के बावजूद घरेलू बाजार में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी रही। एफआईआई की निरंतर निकासी के बीच व्यापक मुनाफावसूली देखी गई। एमएससीआई सूचकांक में चार भारतीय कंपनियों के शामिल होने और मजबूत अमेरिकी आंकड़ों से उपजा शुरुआती आशावाद कमजोर घरेलू पीएमआई आंकड़ों से कम हो गया।” 

मौसमी रूप से समायोजित एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई कारोबारी गतिविधि सूचकांक सितंबर के 60.9 से गिरकर अक्टूबर में 58.9 पर आ गया, जो मई के बाद से विस्तार की सबसे धीमी गति को दर्शाता है। व्यापक बाजार में छोटी कंपनियों का बीएसई स्मॉलकैप सूचकांक 1.53 प्रतिशत गिर गया जबकि मझोली कंपनियों के मिडकैप में 1.19 प्रतिशत की गिरावट रही। क्षेत्रवार सूचकांकों में उपयोगिता खंड 2.20 प्रतिशत के नुकसान में रहा जबकि धातु खंड में 2.03 प्रतिशत, ऊर्जा खंड में 1.96 प्रतिशत, जिंस खंड में 1.76 प्रतिशत और रियल्टी खंड में 1.51 प्रतिशत की गिरावट रही। 

बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों में से 3,012 शेयरों में गिरावट रही जबकि 1,202 कंपनियों में तेजी रही और 139 अन्य अपरिवर्तित रहीं। एशिया के अन्य बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की, चीन का शंघाई कम्पोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक सकारात्मक दायरे में बंद हुए। यूरोप के बाजार गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। अमेरिकी बाजार बुधवार को बढ़त के साथ बंद हुए थे। मंगलवार को सेंसेक्स 519.34 अंक गिरकर 83,459.15 अंक और निफ्टी 165.70 अंक गिरकर 25,597.65 अंक पर बंद हुआ था।

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टैक्स चोरी मामले में अनिल अंबानी के खिलाफ नहीं होगी कोई दंडात्मक कार्रवाई, अदालत से मिली राहत

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मुंबई, एजेंसी। बंबई उच्च न्यायालय ने काला धन अधिनियम के प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली उद्योगपति अनिल अंबानी की याचिका को स्वीकार करते हुए उन्हें कथित कर चोरी मामले में अभियोजन और जुर्माने जैसी दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम राहत दे दी है। अंबानी ने अपनी याचिका में कहा कि (अघोषित विदेशी आय और परिसंपत्तियां) तथा कर अधिरोपण अधिनियम, 2015 के कुछ प्रावधान संविधान के ‘अल्ट्रा वायर्स’ (अर्थात संविधान के अधिकार क्षेत्र से परे/विरोधी) हैं। न्यायमूर्ति बी. पी. कोलाबावाला और न्यायमूर्ति फिरदौस 

पूनीवाला की पीठ ने मंगलवार को अंबानी की याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि इस अधिनियम के खिलाफ उच्च न्यायालय में अन्य याचिकाएं भी लंबित हैं। इस पर अंतिम सुनवाई उचित समय पर की जाएगी। अदालत ने केंद्र सरकार को इस याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए हलफनामा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। उच्च न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि अंबानी के खिलाफ पहले ही आकलन आदेश पारित किया जा चुका है और उन्होंने आयकर आयुक्त (अपील) के समक्ष अपील दायर की है। अदालत ने कहा, ”उक्त अपील आगे बढ़ सकती है और उस पर आदेश पारित किए जा सकते हैं। हालांकि, हम स्पष्ट करते हैं कि इस रिट याचिका की सुनवाई और अंतिम निपटारे तक याचिकाकर्ता के खिलाफ अभियोजन और जुर्माने सहित कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।” 

क्या था आयकर विभाग का आरोप

आयकर विभाग ने आठ अगस्त 2022 को अंबानी को नोटिस जारी कर आरोप लगाया था कि उन्होंने स्विट्जरलैंड के दो बैंक खातों में रखे 814 करोड़ रुपए से अधिक के अघोषित धन पर 420 करोड़ रुपए की कर चोरी की है। विभाग के नोटिस के अनुसार, अंबानी पर काले धन कानून की धारा 50 और 51 के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है। इसमें अधिकतम 10 वर्ष की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। आयकर विभाग ने अंबानी पर ”जानबूझकर” कर चोरी करने का आरोप लगाया है और कहा है कि उन्होंने विदेशी बैंक खातों तथा वित्तीय हितों का विवरण भारतीय कर अधिकारियों को ”जानबूझकर” नहीं दिया। 

अंबानी ने क्या दिया जवाब

अंबानी ने अपनी याचिका में दावा किया कि काला धन कानून 2015 में लागू हुआ था, जबकि कथित लेनदेन आकलन वर्ष 2006-07 और 2010-11 से संबंधित हैं। याचिका में दलील दी गई कि इस कानून के प्रावधानों को पूर्व प्रभाव (रेट्रोस्पेक्टिव) से लागू नहीं किया जा सकता। आयकर विभाग के नोटिस के मुताबिक, अंबानी बहामास स्थित ‘डायमंड ट्रस्ट’ नामक इकाई और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में स्थापित ‘नॉर्दर्न अटलांटिक ट्रेडिंग अनलिमिटेड (नाटू)’ के ” आर्थिक योगदानकर्ता तथा लाभकारी स्वामी” थे। विभाग ने आरोप लगाया कि अंबानी ने इन विदेशी परिसंपत्तियों का खुलासा अपनी आयकर रिटर्न (आईटीआर) में नहीं किया और इस प्रकार काले धन कानून के प्रावधानों का उल्लंघन किया। कर अधिकारियों के अनुसार, इन दोनों खातों में अघोषित धन का कुल मूल्य 8,14,27,95,784 रुपए आंका गया है और इस पर देय कर 4,20,29,04,040 रुपए है। 

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PF कटता है तो मिल सकता है रू.7 लाख तक का मुफ्त बीमा, जानिए EPFO की EDLI Scheme के बारे में…

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नई दिल्ली, एजेंसी। प्राइवेट सेक्टर में नौकरी करने वाले लाखों कर्मचारियों के लिए एक जरूरी खबर है। अकसर कर्मचारियों यह जानकारी नहीं होती कि उनके PF खाते के साथ एक मुफ्त जीवन बीमा सुविधा भी जुड़ी होती है। यदि किसी कर्मचारी का EPF (Employees’ Provident Fund) कटता है, तो वह EPFO की EDLI (Employee Deposit Linked Insurance) योजना के तहत बीमा सुरक्षा का हकदार होता है।

इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि कर्मचारी को इसके लिए अलग से कोई प्रीमियम नहीं देना पड़ता। बीमा का पूरा खर्च नियोक्ता (Employer) द्वारा वहन किया जाता है। ऐसे में EPF से जुड़े पात्र कर्मचारियों को बिना एक्सट्रा निवेश के लाखों रुपये तक का जीवन बीमा कवर मिल सकता है।

 क्या है EDLI योजना?
EDLI  कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) द्वारा संचालित एक बीमा योजना है। यदि किसी EPF सदस्य की सेवा अवधि के दौरान मृत्यु हो जाती है, तो उसके नामित व्यक्ति (Nominee) या कानूनी वारिस को एकमुश्त बीमा राशि दी जाती है।

 कितना मिलता है बीमा कवर?
EDLI योजना के तहत अधिकतम रू.7 लाख तक का बीमा लाभ दिया जा सकता है। वहीं कुछ निर्धारित परिस्थितियों में न्यूनतम रू.2.5 लाख तक की राशि भी मिल सकती है। बीमा राशि कर्मचारी के वेतन और EPF खाते से जुड़े रिकॉर्ड के आधार पर तय की जाती है।

किन लोगों को मिलता है लाभ?
इस योजना का लाभ उन कर्मचारियों को मिलता है जिनका EPF खाता सक्रिय है और जिनकी सैलरी से नियमित PF कटता है।
-EPF खाते में दर्ज नॉमिनी को राशि मिलती है।
-नॉमिनी नहीं होने पर परिवार के सदस्य या कानूनी उत्तराधिकारी दावा कर सकते हैं।
-यदि लाभार्थी नाबालिग है तो उसके अभिभावक को राशि प्रदान की जाती है।

DLI क्लेम करने की प्रक्रिया/ जरूरी दस्तावेज:
-Form 5IF (EDLI Claim Form)
– मृत्यु प्रमाण पत्र
-नॉमिनी या दावेदार का पहचान पत्र
– बैंक खाते की जानकारी (पासबुक या कैंसिल चेक)
– UAN या EPF सदस्य का विवरण
-नॉमिनी न होने पर उत्तराधिकार प्रमाण पत्र

कैसे जमा करें क्लेम ?
दावेदार आवश्यक दस्तावेजों के साथ फॉर्म भरकर कर्मचारी के अंतिम नियोक्ता से वैरिफाई करा सकता है। इसके बाद संबंधित EPFO कार्यालय में आवेदन जमा किया जाता है। कुछ मामलों में ऑनलाइन क्लेम की सुविधा भी उपलब्ध रहती है। दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद बीमा राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेज दी जाती है। आमतौर पर क्लेम का निपटारा 30 दिनों के भीतर किया जाता है।

नॉमिनी अपडेट रखना जरूरी 
EPFO ने हाल ही में बताया कि केवल e-Nomination भरना पर्याप्त नहीं है। नॉमिनी को आधार आधारित e-Sign के माध्यम से सत्यापित करना भी जरूरी है। यदि यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती है तो PF, पेंशन और EDLI से जुड़े लाभ प्राप्त करने में परिवार को परेशानी हो सकती है।

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RBI के उपायों से 2026-27 में 55 से 65 अरब डॉलर का प्रवाह हो सकता आकर्षित

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नई दिल्ली, एजेंसी। भारतीय रिजर्व बैंक के हाल के कदमों से भारत को चालू वित्त वर्ष में 55 से 65 अरब डॉलर का पूंजी प्रवाह आकर्षित करने, रुपए को स्थिर करने और देश के भुगतान संतुलन को अधिशेष में लाने में मदद मिलने की उम्मीद है। भारतीय स्टेट बैंक के आर्थिक शोध विभाग की एक रिपोर्ट में यह कहा गया है। रिपोर्ट ‘इकोरैप’ में कहा गया है कि केंद्रीय बैंक के फरवरी और जून, 2026 के कदमों को रुपए को स्थिर करने, घरेलू बॉन्ड बाजार को मजबूत करने, अधिक स्थिर विदेशी पूंजी को आकर्षित करने और बाह्य वित्त पोषण में आने वाली बाधाओं को कम करने के एक समन्वित प्रयास के रूप में देखा जाना चाहिए। 

केंद्रीय बैंक ने विदेशी पूंजी को आकर्षित करने और देश के भुगतान संतुलन को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इन कदमों में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा बाह्य वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) को बढ़ावा देने के लिए रियायती विदेशी मुद्रा विनिमय दर अदला-बदली की सुविधा शामिल है। आरबीआई ने बैंकों को नए तीन से पांच साल के विदेशी मुद्रा प्रवासी (बैंक) खाता (एफसीएनआर) जमा जुटाने के लिए भी ऐसी ही सुविधा दी है। एसबीआई रिपोर्ट के अनुसार, बाह्य वाणिज्यिक उधारी पर फरवरी के कदम संरचनात्मक और बाजार विकास को ध्यान में रखकर उठाए गए थे, जबकि जून में किए गए उपायों का मकसद विदेशी मुद्रा प्रवाह को आकर्षित करना और घरेलू ब्याज दरों को बढ़ाए बिना रुपए को सहारा देना है। 

रिपोर्ट में कहा गया, ”करीब 55-65 अरब डॉलर का प्रवाह यह सुनिश्चित करेगा कि अनुमानित 16 प्रतिशत कर्ज वृद्धि के मुकाबले बैंक प्रणाली में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जमा वृद्धि बढ़कर लगभग 14.5-15 प्रतिशत हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, इसका मतलब यह होगा कि नियामकीय छूट को समायोजित करने के बाद कर्ज- जमा अंतर लगभग एक लाख करोड़ रुपए कम हो जाएगा और ब्याज दरों का ढांचा और नीचे आएगा। आरबीआई ने डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर में गिरावट को थामने के लिए नए एफसीएनआर (बी) जमा के लिए अमेरिका डॉलर-रुपया विदेशी विनिमय अदला-बदली सुविधा शुरू की है। ये जमा कम से कम तीन साल और अधिक से अधिक पांच साल की अवधि के लिए होंगे। यह सुविधा सोमवार से लागू हुई और 16 अक्टूबर, 2026 तक खुली रहेगी। 

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