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अब 200 और 500 के पुराने नोटों से बनेगा शानदार फर्नीचर! RBI का मास्टर प्लान

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मुंबई, एजेंसी। अक्सर आपने सुना होगा कि पैसा हाथों का मैल है, लेकिन अब यही पैसा आपके घर सजाने के काम आएगा। जी हां, दरअसल,  भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) एक ऐसी अनोखी योजना पर काम कर रहा है जिसे सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे। दरअसल, अब बाजार में चलन से बाहर हो चुके, फटे-पुराने और जले हुए नोटों को फेंकने या जलाने के बजाय उनसे मजबूत और टिकाऊ फर्नीचर तैयार किया जाएगा।

क्यों पड़ी इसकी जरूरत?
दरअसल, हर साल RBI के पास लगभग 15,000 टन वजन के ऐसे नोट जमा होते हैं जो इस्तेमाल के लायक नहीं बचते। अब तक इन नोटों को मशीनों से बारीक काटकर जला दिया जाता था और उनकी राख को जमीन में दबा दिया जाता था। लेकिन नोटों में इस्तेमाल होने वाली स्याही और रसायनों की वजह से यह तरीका पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बना हुआ था। साथ ही, इस पूरी प्रक्रिया में बैंक का काफी पैसा भी खर्च होता था।

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कचरे से ऐसे बनेगी ‘लकड़ी’
पर्यावरण को बचाने के लिए सरकार ने इसका हल निकाला और इस कचरे का सही इस्तेमाल करने के लिए RBI ने ‘Wooden Science and Technical Institute’ के साथ हाथ मिलाया है। इस संस्थान ने अपनी रिसर्च में कमाल कर दिखाया है। उन्होंने रद्दी नोटों को रिसायकल करके ऐसे प्लाईबोर्ड तैयार किए हैं, जो मजबूती के हर टेस्ट में पास हो चुके हैं। ये बोर्ड न केवल सामान्य प्लाई की तरह मजबूत हैं, बल्कि बेहद किफायती भी होंगे।
आम जनता के लिए क्या है खास?
अगर आप भी अपने घर के लिए नया सोफा, बेड या अलमारी बनवाने की सोच रहे हैं, तो जल्द ही आपको बाजार में नोटों से बनी प्लाई देखने को मिल सकती है। यह तकनीक न सिर्फ जंगलों को कटने से बचाएगी, बल्कि बेकार हो चुके कागजी नोटों को एक नया जीवन भी देगी।

खराब नोटों का क्या करता है बैंक?
नियम के मुताबिक, अगर आपके पास भी फटे या जले हुए नोट हैं, तो आप किसी भी बैंक में जाकर उन्हें बदल सकते हैं। बैंक इन नोटों को आरबीआई के जांच केंद्रों पर भेजते हैं। वहां मशीनों से यह तय किया जाता है कि कौन सा नोट वापस बाजार में जा सकता है और किसे रद्दी घोषित करना है। जो नोट 50% से ज्यादा खराब होते हैं, अब उन्हीं से यह खास फर्नीचर तैयार किया जाएगा।

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नीतीश कुमार इस्तीफे से पहले CM हाउस खाली कर रहे:7 सर्कुलर रोड बंगले में शिफ्ट हो रहा सामान, लालू के पड़ोसी बनेंगे

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पटना,एजेंसी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस्तीफे से पहले CM हाउस खाली कर रहे हैं। 1 अणे मार्ग से सामान 7 सर्कुलर रोड बंगले में शिफ्ट हो रहा है। मुख्यमंत्री आवास से ट्रैक्टर ट्रॉली में सामान बाहर ले जाया जा रहा है।

नीतीश कुमार ने 10 अप्रैल को राज्यसभा सांसद की शपथ ली। सूत्रों की मानें तो नीतीश 14 अप्रैल को CM पद से इस्तीफा दे सकते हैं। 15 अप्रैल को बिहार में नई सरकार बन सकती है।

CM पद से हटने के बाद नीतीश कुमार लालू यादव के पड़ोसी बन जाएंगे। वह दिल्ली तो जा रहे हैं, लेकिन बिहार में अपना ठिकाना नहीं छोड़ेंगे।

7 सर्कुलर रोड आवास का इस्तेमाल अभी नीतीश कुमार ही कर रहे हैं। इसे CM ऑफिस के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।

नीतीश ने अपनी देखरेख में इस बंगले को बनवाया था। ये भूकंप के झटके झेल सकता है। लॉन में कोलकाता से मंगाकर घास लगाई गई है।

7 सर्कुलर रोड स्थित इसी बंगले में सीएम नीतीश शिफ्ट होंगे।

7 सर्कुलर रोड स्थित इसी बंगले में सीएम नीतीश शिफ्ट होंगे।

नीतीश के शिफ्ट होने से पहले मेन गेट पर उनकी नेम प्लेट लगाई जा रही है।

नीतीश के शिफ्ट होने से पहले मेन गेट पर उनकी नेम प्लेट लगाई जा रही है।

7 सर्कुलर रोड के बंगले में गैस पाइपलाइन का सामान ले जाते ई-रिक्शा।

7 सर्कुलर रोड के बंगले में गैस पाइपलाइन का सामान ले जाते ई-रिक्शा।

नीतीश कुमार को पसंद है 7 सर्कुलर रोड बंगला

नीतीश कुमार को 7 सर्कुलर रोड बंगला पसंद है। 2014 लोकसभा चुनाव हारने के बाद उन्होंने CM पद छोड़ दिया था। जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया था। इसके बाद रहने के लिए 7 सर्कुलर रोड बंगले आ गए थे। इसी बंगले में रहते हुए नीतीश ने जीतन राम से मुख्यमंत्री की कुर्सी वापस ले ली थी। विधानसभा 2015 में जीत दर्ज की और मुख्यमंत्री बने थे।

CM बनने के बाद नीतीश एक अणे मार्ग गए, लेकिन 7 सर्कुलर बंगला अपने पास बनाए रखा। विपक्ष ने 2 बंगले रखने का आरोप लगाया तो इसे मुख्य सचिव के नाम अलॉट किया गया। नीतीश ने अपनी देखरेख में इस बंगले का भूकंप रोधी निर्माण कराया था।

नीतीश के नए 7 सर्कुलर रोड स्थित आवास के चारों तरफ ऊंची दीवारें बनाई गई है।ंं

नीतीश के नए 7 सर्कुलर रोड स्थित आवास के चारों तरफ ऊंची दीवारें बनाई गई है।ंं

लालू यादव के पड़ोसी बनेंगे नीतीश कुमार

नीतीश कुमार 7 सर्कुलर रोड में शिफ्ट हो रहे हैं। अब वे लालू यादव के पड़ोसी बन जाएंगे। यहां से राबड़ी आवास बस दो घर बाद है। दोनों बंगलों के बीच की दूरी करीब 200 मीटर होगी। दोनों घर सर्कुलर रोड के दक्षिण तरफ है।

7 सर्कुलर रोड वाले बंगले की खास बातें

  • 7 सर्कुलर रोड का पूरा इलाका हाई सिक्योरिटी जोन है। चारों तरफ ऊंची दीवार और प्रवेश द्वार बनाए गए हैं।
  • सीसीटीवी कैमरों की मदद से चप्पे-चप्पे की निगरानी की जाती है।
  • पुलिस और विशेष सुरक्षा बल की तैनाती की गई है। गेस्ट के लिए अलग गेट और चेकिंग व्यवस्था है।
  • बंगले में 6 VIP बेडरूम हैं। 2 बड़े ड्रॉइंग और मीटिंग हॉल है। एक बड़ा डाइनिंग हॉल है।
  • मुख्य भवन के सामने से लेकर पीछे वाले हिस्से तक बड़ा लॉन फैला हुआ है।
  • लॉन के बीच में एक छोटा तालाब है, जहां छठ पूजा के समय अर्घ्य दिया जाता है।
  • अलग गार्डन और वॉकिंग एरिया है। लॉन में टहलने के लिए ट्रैक बना है।
  • नेताओं और अधिकारियों से मिलने-जुलने के लिए अलग व्यवस्था है।
  • गेस्ट के लिए वेटिंग एरिया है। नेताओं के साथ बैठक के लिए अलग मीटिंग रूम है।
  • प्रेस और राजनीतिक मुलाकातों के लिए अलग जगह है।
  • कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों के लिए अलग आवासीय व्यवस्था की गई है।
  • सुरक्षाकर्मियों के लिए बैरक, घरेलू स्टाफ के लिए कमरे, ड्राइवर और दूसरे स्टाफ के लिए अलग क्षेत्र बनाया गया हैं।
  • बंगले में एक बड़े हॉल के साथ ही एक गोलंबरनुमा बैठक है। यहां एक मिनी ऑफिस भी है।
  • इस बंगले के बगल वाले आवास में सीएम का एक गोपनीय कार्यालय भी है।
  • इसमें सीएम के सचिव और निजी सहायकों के ऑफिस हैं। बगल वाले बंगले और 7 सर्कुलर रोड को अंदर से एक रास्ता जोड़ता है।
7 सर्कुलर रोड का पूरा इलाका हाई सिक्योरिटी जोन में आता है।

7 सर्कुलर रोड का पूरा इलाका हाई सिक्योरिटी जोन में आता है।

नंबर 7 से है नीतीश को लगाव

नीतीश कुमार अपने लिए नंबर 7 को लकी मानते हैं। वह केंद्र सरकार में रेल मंत्री बने थे, तब उनके फोन नंबर का अंतिम अंक 7 था।

नीतीश जब पहली बार मुख्यमंत्री बने थे तो उन्हें जो गाड़ी मिली थी उसका नंबर 777 था। नीतीश ने 1977 में राजनीति शुरू की थी। 1987 में युवा लोकदल के अध्यक्ष बने थे। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने अपनी महत्वाकांक्षी योजनाओं को 7 निश्चय नाम दिया। अभी बिहार सरकार 7 निश्चय पार्ट-3 पर काम कर रही है।

19 साल से बिहार की सत्ता का केंद्र रहा है 1 अणे मार्ग

नीतीश अभी सीएम आवास एक अणे मार्ग में रह रहे हैं। यह घर लगभग 19 साल से बिहार की सत्ता का केंद्र रहा है। यहीं से नीतीश कुमार ने राज्य की राजनीति और प्रशासन को दिशा दी। अब राज्यसभा जाने के बाद उनका 7 सर्कुलर रोड में शिफ्ट होना एक तरह से बिहार की राजनीति में नई भूमिका की शुरुआत माना जा रहा है।

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डीजल पर डबल झटका… सरकार के इस फैसले से घबराईं तेल कंपनियां

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नई दिल्ली,एजेंसी। केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात को लेकर एक बड़ा और अहम फैसला लिया है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी नए आदेश के अनुसार, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी हवाई ईंधन पर लगने वाले निर्यात शुल्क में भारी बढ़ोतरी कर दी गई है। इस कदम को ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू आपूर्ति बनाए रखने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

डीजल और ATF पर बढ़ा टैक्स, कंपनियों पर बढ़ेगा दबाव

सरकार की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, डीजल के निर्यात पर लगने वाली ड्यूटी को दोगुने से भी अधिक बढ़ा दिया गया है। पहले जहां डीजल पर 21.5 रुपये प्रति लीटर का निर्यात शुल्क लगता था, उसे अब बढ़ाकर 55.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।

इसी तरह, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर भी टैक्स बढ़ाया गया है। एटीएफ पर लगने वाला निर्यात शुल्क 29.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 42 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इस फैसले से तेल कंपनियों के लिए निर्यात करना महंगा हो जाएगा।

क्यों लिया गया यह फैसला?

सरकार का यह कदम घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। दरअसल, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें अधिक होती हैं, तो रिफाइनरी कंपनियां ज्यादा मुनाफे के लिए ईंधन का निर्यात बढ़ा देती हैं। इससे देश के भीतर सप्लाई प्रभावित हो सकती है। निर्यात शुल्क बढ़ाकर सरकार कंपनियों को घरेलू बाजार में ही डीजल और अन्य ईंधनों की बिक्री के लिए प्रोत्साहित करना चाहती है, ताकि देश में किसी तरह की कमी न हो और कीमतें नियंत्रण में रहें।

पेट्रोल पर राहत, कोई नया टैक्स नहीं

इस बीच राहत की बात यह है कि पेट्रोल के निर्यात पर कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया है। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी पहले की तरह ‘शून्य’ (Nil) बनी रहेगी। इसका मतलब है कि फिलहाल पेट्रोल की घरेलू उपलब्धता को लेकर सरकार को किसी तरह की चिंता नहीं है।

क्या होगा असर?

इस फैसले का सीधा असर तेल कंपनियों के मुनाफे और उनकी रणनीति पर पड़ेगा। निर्यात महंगा होने से कंपनियां अब घरेलू बाजार पर ज्यादा ध्यान देंगी। साथ ही, इससे देश में ईंधन की सप्लाई बेहतर रहने और कीमतों में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

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मोदी-राहुल संसद परिसर में मिले, हाथ जोड़कर अभिवादन किया:महात्मा फुले जयंती कार्यक्रम के बाद बातचीत की

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नई दिल्ली,एजेंसी। PM नरेंद्र मोदी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बीच शनिवार को संसद परिसर में बातचीत हुई। दोनों नेता समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती पर श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे।

कार्यक्रम के बाद पीएम मोदी नेताओं से मिल रहे थे। वह राहुल के पास गए। दोनों ने एक-दूसरे का हाथ जोड़कर अभिवादन किया। पीएम ने नेता विपक्ष राहुल से बातचीत भी की।

राहुल के अलावा पीएम मोदी लोकसभा स्पीकर ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और अर्जुन राम मेघवाल से भी मिले।

संसद परिसर में मोदी- राहुल की मुलाकात की तस्वीरें:

पीएम मोदी ने कार से उतरकर ओम बिरला, जेपी नड्डा और राहुल गांधी का हाथ जोड़कर अभिवादन किया।

पीएम मोदी ने कार से उतरकर ओम बिरला, जेपी नड्डा और राहुल गांधी का हाथ जोड़कर अभिवादन किया।

पीएम मोदी और राहुल के बीच कुछ देर बातचीत भी हुई।

पीएम मोदी और राहुल के बीच कुछ देर बातचीत भी हुई।

पीएम और राहुल जब बात कर रहे थे तब जेपी नड्डा भी उनके बगल में खड़े थे।

पीएम और राहुल जब बात कर रहे थे तब जेपी नड्डा भी उनके बगल में खड़े थे।

इसके पहले भी हुई हैं दोनो नेताओं की मुलाकातें:

9 अगस्त 2024: लोकसभा सत्र के बाद चाय पर चर्चा

संसद सत्र के समापन के बाद अनौपचारिक बैठक में पीएम मोदी, राहुल गांधी, ओम बिरला व अन्य नेता।

संसद सत्र के समापन के बाद अनौपचारिक बैठक में पीएम मोदी, राहुल गांधी, ओम बिरला व अन्य नेता।

26 जून 2024: लोकसभा स्पीकर को आसन तक छोड़ने के लिए साथ आए

लोकसभा चुनाव के बाद 26 जून 2024 को लोकसभा में ओम बिरला को स्पीकर चुना गया। मोदी, राहुल गांधी स्पीकर बिरला को अध्यक्ष के आसन तक लेकर गए। इस दौरान ओम बिरला से हाथ मिलाने के बाद पीएम मोदी और राहुल गांधी ने एक-दूसरे से भी हाथ मिलाया।

20 जुलाई, 2018: राहुल ने संसद में गले लगाया

20 जुलाई 2018 को लोकसभा में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हो रही थी। राहुल गांधी सरकार की आलोचना करने के बाद अपनी सीट से उठकर सीधे PM मोदी के पास गए। पीएम सीट पर ही बैठे रहे तो राहुल ने उन्हें वहीं गले लगा लिया। प्रधानमंत्री पहले तो हैरान रह गए, लेकिन फिर उन्होंने राहुल को वापस बुलाकर हाथ मिलाया और बातचीत की।

मोदी ने बाद में इस घटना को याद करते हुए मजाक में कहा कि मैं यहां (लोकसभा) आया और कई चीजें सीखीं। पहली बार मैंने गले लगाने और गले पड़ने में फर्क भी समझा।

16 दिसंबर 2016: कांग्रेस का दल लेकर मोदी से मिले राहुल

कांग्रेस नेताओं का एक दल 16 दिसंबर 2016 को पीएम मोदी से मिलने पहुंचा। यहां भी मोदी और राहुल की मुलाकात हुई।

कांग्रेस नेताओं का एक दल 16 दिसंबर 2016 को पीएम मोदी से मिलने पहुंचा। यहां भी मोदी और राहुल की मुलाकात हुई।

27 मई 2014: जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि

2014 में कार्यभार संभालने के कुछ समय बाद पीएम मोदी ने भारत के पहले प्रधानमंत्री की 50वीं पुण्यतिथि पर शांति वन में राहुल गांधी से मुलाकात की थी। इसके अलावा राजघाट (महात्मा गांधी के समाधि स्थल) और शक्ति स्थल पर भी कई बार दोनों नेताओं ने एक-दूसरे का अभिवादन किया है।

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