वाशिंगठन, एजेंसी। अमेरिका ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने एक इंटरव्यू में कहा कि मौजूदा हालात में यही असली मुद्दा है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मार्को रुबियो ने ‘फॉक्स न्यूज’ को दिए एक साक्षात्कार में ईरान के नये प्रस्ताव पर अपनी राय रखी। दरअसल, ईरान हाल ही में एक नया प्रस्ताव दिया है, जिसमें उसने कहा है कि वह फिलहाल अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत टालने को तैयार है। इसके बदले उसने मांग की है कि यदि अमेरिका अपनी नाकाबंदी हटा ले और युद्ध खत्म कर दे, तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य से अपना नियंत्रण हटा लेगा।
लेकिन इस प्रस्ताव पर अमेरिका ने सख्त रुख अपनाया है। रुबियो ने साफ कहा कि अगर ईरान में मौजूदा शासन बना रहता है, तो वह भविष्य में परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश जरूर करेगा। इसलिए किसी भी समझौते का मकसद यही होना चाहिए कि ईरान को इस दिशा में आगे बढ़ने से पूरी तरह रोका जाए।रुबियो ने यह भी कहा कि ईरान बातचीत में माहिर है और अक्सर ऐसे प्रस्ताव देकर समय हासिल करने की कोशिश करता है। उनके मुताबिक, अमेरिका को इस रणनीति को समझते हुए सतर्क रहना होगा और बिना ठोस गारंटी के कोई समझौता नहीं करना चाहिए। इस बयान से साफ है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत अभी भी आसान नहीं है। जहां ईरान पहले होर्मुज जलडमरूमध्य और नाकेबंदी जैसे मुद्दों पर ध्यान देना चाहता है, वहीं अमेरिका परमाणु कार्यक्रम को सबसे बड़ा खतरा मान रहा है।
काठमांडू/नई दिल्ली, एजेंसी। नेपाल में बाढ़ आने के 11वें दिन नुवाकोट से 64 साल की महिला का रेस्क्यू किया गया। वह घर में मलबे में ही दबी थी। उसे इलाज के लिए एयरलिफ्ट कर काठमांडू लाया जा रहा है।
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास भूस्खलन के बाद बाढ़ आई थी। तब से राहत-बचाव कार्य जारी है। त्रिशूली बाजार इलाके से 5 साल के बच्चे समेत तीन भारतीयों को भी सुरक्षित निकाला गया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार अब तक 169 भारतीयों को सुरक्षित निकाला है, जबकि 275 अब भी लापता हैं।
नेपाल में अब तक करीब 1344 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 12 हजार लोगों का रेस्क्यू किया गया है। फिलहाल 5300 से ज्यादा लोग लापता हैं। सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ से 32,000 से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं।
नेपाल आपदा से जुड़ी तस्वीरें…
नेपाल के दार्चुला जिले में शुक्रवार को भारी भूस्खलन हुआ।
लैंडस्लाइड का मलबा नीचे आने के बाद चौलानी नदी का रास्ता बंद हो गया।
त्रिशूली-3 ‘A’ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से शुक्रवार को 2 मजदूर जिंदा निकाले गए।
नेपाल में घर से 64 साल की महिला जिंदा निकाली गई
नेपाल के नुवाकोट शहर में शनिवार को रेस्क्यू टीम ने एक टूटे हुए घर से 64 साल की की एक महिला को जिंदा बाहर निकाला।
महिला की पहचान चंद्रिका श्रेष्ठ के रूप में हुई है। वह घर में बेहोश पाईं गईं थी।
इमरजेंसी टीम ने सबसे पहले महिला को पानी पिलाया जिसके बाद उन्हें ग्रे कंबल में लपेटकर घर से बाहर निकाला गया।
त्रिशूली हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से चीनी नागरिक का रेस्कयू
नेपाल सेना की रेस्क्यू टीम ने बाढ़ प्रभावित अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से एक चीनी नागरिक को जिंदा बाहर निकाल लिया है।
वह चीनी नागरिक भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ के बाद सुरंग के अंदर फंस गया था।
रेस्क्यू ऑपरेशन 216 मेगावाट के अपर त्रिशूली-1 प्रोजेक्ट की ऑडिट-4 सुरंग में चलाया गया। इसमें नेपाल सेना और दक्षिण कोरिया के आपदा विशेषज्ञों की संयुक्त टीम शामिल थी।
सुरंग से बाहर निकालने के बाद चीनी नागरिक को इलाज और आगे की मदद के लिए नुवाकोट के त्रिशूली स्थित मैथिल बैरक ले जाया जा रहा है।
भूस्खलन के बाद नदी का पानी सामान्य
नेपाल के भट्टार में शुक्रवार को पहाड़ से मिट्टी और पत्थर गिरने से नदी का रास्ता कुछ देर के लिए रुक गया था। इससे नदी के नीचे रहने वाले लोगों को खतरा होने की चिंता थी। हालांकि, शनिवार को नदी बहाव सामान्य रहा।
जिला अधिकारी बार्टराज पौडेल ने बताया कि नदी के पानी में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। फिलहाल नदी का रास्ता भी बंद नहीं है।
उन्होंने कहा कि पहाड़ से मिट्टी-पत्थर गिरना भी अभी रुक गया है और फिलहाल कोई नया खतरा नजर नहीं आ रहा है। इस घटना में किसी इंसान या पशु की मौत नहीं हुई है। हालांकि, खतरे को देखते हुए 8 परिवारों को शुक्रवार को सुरक्षित जगह ले जाया गया था।
नेपाली सांसद बोले- बाढ़ से 800 अरब रुपए से ज्यादा का नुकसान
नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद अर्जुन नरसिंह केसी ने कहा कि बाढ़ के बाद रेस्क्यू और राहत कामों में तालमेल और लंबी अवधि की योजना की कमी रही।
उनके मुताबिक, आपदा से 800 अरब नेपाली रुपए से ज्यादा का नुकसान हुआ है। उन्होंने सरकार पर आपदा के बाद जरूरतों का आकलन जल्द शुरू नहीं करने का आरोप लगाया।
केसी ने जलवायु परिवर्तन से प्रभावित देशों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्लाइमेट जस्टिस और मुआवजे की मांग उठाने की बात कही। उन्होंने कहा कि इस आपदा ने एक बार फिर जलवायु असमानता का मुद्दा सामने ला दिया है।
नेपाल में बाढ़ से 32 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित
नेपाल में आई भीषण बाढ़ से अब तक 32,933 लोग प्रभावित हुए हैं। नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) की रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ से स्कूल-कॉलेज और दूसरे शैक्षणिक संस्थानों को नुकसान हुआ है, जिससे 6,500 से ज्यादा छात्र प्रभावित हुए हैं।
वहीं, 4 हेल्थ सेंटर पूरी तरह और 3 आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। बाढ़ में करीब 55 किमी सड़कें पूरी तरह टूट गईं। इसके अलावा 37 मोटरेबल ब्रिज और 68 झूला पुल भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। सरकार ने कहा है कि नुकसान का विस्तृत आकलन अभी पूरा नहीं हुआ है।
यह 26 अगस्त को नेपाल में आई बाढ़ की तस्वीर है।
नेपाल में बाढ़ से मरने वालों का आंकड़ा 1344 हुआ
नेपाल में बाढ़ से मरने वालों का आंकड़ा फिर बढ़ गया है। नेपाल पुलिस के मुताबिक, 1344 लोगों ने अब तक जान गंवाई है। वहीं तिब्बत में भी 31 लोगों की मौत हुई है।
भारत ने 7 विमानों से भेजी 95 टन राहत सामग्री
विदेश मंत्रालय के अनुसार, 26 अगस्त को बाढ़ आने के बाद से भारत ने नेपाल को करीब 95 टन राहत सामग्री भेजी है। यह सामग्री 7 विमानों के जरिए पहुंचाई गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 अगस्त को नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह से बात कर हरसंभव मदद का भरोसा दिया था। इसके कुछ घंटे बाद भारत ने राहत सामग्री की पहली खेप भेज दी थी।
भारत ने राहत-बचाव के लिए 54 विशेषज्ञों को भी नेपाल भेजा है। इनमें 30 सुरंग बचाव विशेषज्ञ, 19 फोरेंसिक विशेषज्ञ और 5 सदस्यीय मेडिकल टीम शामिल है। भारतीय टीमें नेपाल के अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रही हैं।
चीन से 1,907 भारतीय सुरक्षित नेपाल पहुंचे
विदेश मंत्रालय ने बताया कि चीन से 1,907 भारतीय नागरिक सुरक्षित नेपाल पहुंच चुके हैं। चीन के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में अब कोई भारतीय यात्री फंसा नहीं है।
नेपाल में 35 मोटरेबल और 45 सस्पेंशन ब्रिज क्षतिग्रस्त
स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, बाढ़ से मुख्य रूप से मध्य नेपाल में 35 मोटरेबल ब्रिज, 45 सस्पेंशन ब्रिज और करीब 40 किलोमीटर पक्की सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। इससे कई इलाकों में आवागमन प्रभावित हुआ है।
भारत ने कहा है कि वह नेपाल सरकार की जरूरत के अनुसार आगे भी मदद जारी रखेगा। इसके तहत फोरेंसिक किट, बेली ब्रिज और अन्य जरूरी सामग्री भेजने की योजना है।
नई दिल्ली/रोम, एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को सबसे लंबे समय तक लगातार प्रधानमंत्री रहने पर बधाई दी है।
मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट में मेलोनी को अपनी मित्र बताते हुए कहा कि उनकी यह उपलब्धि इटली के लोगों के उनके नेतृत्व पर भरोसे और विश्वास को दिखाती है।
उन्होंने कहा कि मेलोनी की दोस्ती भारत और इटली के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने में भी अहम रही है। मोदी ने दोनों देशों के लोगों के बेहतर भविष्य के लिए आगे भी मिलकर काम करने की उम्मीद जताई।
प्रधानमंत्री ने मेलोनी को आने वाले वर्षों में सफलता के लिए शुभकामनाएं भी दीं।
इटली गणराज्य बनने के बाद सबसे लंबा कार्यकाल
जॉर्जिया मेलोनी की सरकार ने शुक्रवार को लगातार 1413 दिन सत्ता में रहकर इटली में नया रिकॉर्ड बनाया। 1946 में इटली गणराज्य बनने के बाद यह किसी एक कैबिनेट का सबसे लंबा लगातार कार्यकाल है।
मेलोनी ने पूर्व प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी की दूसरी सरकार का रिकॉर्ड तोड़ा है। बर्लुस्कोनी की दूसरी कैबिनेट 2001 से 2005 तक 1412 दिन सत्ता में रही थी।
मेलोनी 22 अक्टूबर 2022 को इटली की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी थीं। वे दक्षिणपंथी पार्टी ‘ब्रदर्स ऑफ इटली’ की प्रमुख भी हैं।
मेलोनी ने भी मोदी को दी थी बधाई
जून 2026 में जब नरेंद्र मोदी ने 4399 दिन लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री रहकर जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ा था, तब इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने भी उन्हें बधाई दी थी।
मेलोनी ने सोशल मीडिया पर लिखा था, “बधाई हो नरेंद्र मोदी। आज आप भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं।”
मेलोनी ने बधाई देते हुए पीएम मोदी के साथ की यह तस्वीर भी पोस्ट की थी।
मेलोनी की पार्टी आज मनाएगी जश्न
मेलोनी की पार्टी ब्रदर्स ऑफ इटली (FdI) ने सरकार के रिकॉर्ड कार्यकाल के जश्न में शुक्रवार शाम दक्षिणी शहर बारी में बड़ी रैली आयोजित की है। इसमें मेलोनी भी भाषण देंगी।
रैली में हजारों समर्थकों के पहुंचने की उम्मीद है। करीब 80 बसों से समर्थकों को बारी लाया जा रहा है, जबकि कार्यक्रम स्थल पर करीब 10 हजार लोगों के बैठने की क्षमता है।
मेलोनी ने सरकार के लंबे कार्यकाल को बड़ी उपलब्धि बताया है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि सरकार ने लंबे समय तक सत्ता में बने रहने को ही अपनी उपलब्धि बना लिया है। यह रैली 2027 के चुनाव से पहले चुनावी ताकत दिखाने के कार्यक्रम के तौर पर भी देखी जा रही है।
इटली में सरकारें औसतन 13 महीने ही चलती हैं
इटली में पिछले कई दशकों से सरकारों के बार-बार बदलने और राजनीतिक अस्थिरता का इतिहास रहा है। 80 साल पहले गणराज्य बनने के बाद से देश में 68 सरकारें बन चुकी हैं।
इन सरकारों का औसत कार्यकाल करीब 13 महीने रहा है। ऐसे में मेलोनी की तीन दक्षिणपंथी और कंजरवेटिव पार्टियों वाली गठबंधन सरकार का करीब 4 साल तक टिकना बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
इटली में सरकारें जल्दी क्यों गिरती हैं?
इटली की राजनीति में लंबे समय से कई पार्टियों का दबदबा रहा है। चुनाव के बाद अक्सर किसी एक पार्टी को इतनी सीटें नहीं मिलतीं कि वह अकेले सरकार बना सके। ऐसे में सरकार बनाने के लिए अलग-अलग पार्टियों को गठबंधन करना पड़ता है।
समस्या तब शुरू होती है, जब गठबंधन में शामिल पार्टियों के बीच किसी मुद्दे पर मतभेद बढ़ जाते हैं। गठबंधन की एक छोटी पार्टी भी समर्थन वापस ले ले, तो सरकार बहुमत खो सकती है। इसके बाद प्रधानमंत्री को इस्तीफा देना पड़ सकता है या नई सरकार बनाने की कोशिश करनी पड़ती है। इटली में सरकार को संसद के दोनों सदनों- चैंबर ऑफ डेप्युटीज और सीनेट का समर्थन बनाए रखना जरूरी है।
मोदी ने मेलोनी को ‘मेलोडी’ टॉफी दी थी
पीएम मोदी ने मेलोनी को मेलोडी टॉफी गिफ्ट की थी। यह टॉफी भारत में 1983 से बिक रही है। इसे पारले कंपनी बनाती है।
मई 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इटली के दौरे पर गए थे। इस दौरान उन्होंने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को मेलोडी टॉफी का पैकेट गिफ्ट किया था।
मेलोनी ने बाद में इसका वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया और मोदी को गिफ्ट के लिए धन्यवाद दिया था। मोदी और मेलोनी की साथ की तस्वीरों के बाद सोशल मीडिया पर #Melodi काफी लोकप्रिय हुई थी।
नई दिल्ली, एजेंसी। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच मजबूत होते रिश्तों से कई दूसरे देश ‘जलते’ हैं।
गोर ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प प्रधानमंत्री मोदी को अपना दोस्त मानते हैं और दिसंबर में होने वाले G20 समिट के दौरान जिन नेताओं से वह मिलना चाहते हैं, उनमें मोदी का नाम सबसे ऊपर होगा।
फ्रांस में 17 जून 2026 को G7 समिट में पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रम्प की आखिरी बार मुलाकात हुई थी।
G20 में मोदी-ट्रम्प की अलग मुलाकात संभव
सर्जियो गोर ने इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में कहा कि ट्रम्प और मोदी के बीच अच्छे व्यक्तिगत रिश्ते हैं। ऐसे में दिसंबर में G20 समिट के लिए मोदी के फ्लोरिडा पहुंचने पर दोनों नेताओं की अलग से मुलाकात भी हो सकती है।
हालांकि, मोदी और ट्रम्प के बीच अलग से द्विपक्षीय बैठक की अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। गोर ने ट्रम्प के 2027 में भारत दौरे की संभावना के भी संकेत दिए। उन्होंने कहा कि ट्रम्प 2020 में अपनी भारत यात्रा को अब भी याद करते हैं।
अमेरिकी राजदूत के मुताबिक, जब भी ट्रम्प भारत की बात करते हैं तो वह यहां के लोगों से मुलाकात और प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपने रिश्तों को याद करते हैं।
गोर ने कहा कि अगला साल आने में ज्यादा समय नहीं है। हालांकि, उन्होंने ट्रम्प के भारत दौरे की कोई तारीख या आधिकारिक कार्यक्रम नहीं बताया।
ट्रेड डील पर बोले- समझौते के काफी करीब
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर गोर ने कहा कि दोनों देश समझौते के काफी करीब हैं। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद डील से जुड़े मुद्दों पर दोबारा काम किया जा रहा है। उन्हें उम्मीद है कि अगले कुछ महीनों में दोनों देश समझौते को अंतिम रूप दे सकते हैं।
गोर ने कहा कि इतने बड़े व्यापार समझौते में समय लगना सामान्य है। उन्होंने अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ता का उदाहरण देते हुए कहा कि बड़े व्यापारिक समझौतों में कई साल लग सकते हैं।
240 अरब डॉलर का व्यापार, 500 अरब डॉलर का लक्ष्य
गोर के मुताबिक, भारत और अमेरिका के बीच अभी करीब 240 अरब डॉलर का व्यापार है। दोनों देशों का लक्ष्य आने वाले वर्षों में इसे बढ़ाकर 500 अरब डॉलर करना है।
उन्होंने कहा कि ट्रेड डील से दोनों देशों को आर्थिक फायदा हो सकता है। अमेरिका एक मजबूत और स्थिर भारत के साथ मिलकर काम करना चाहता है।
गोर के बयान से साफ है कि भारत-अमेरिका के रिश्तों में व्यापार के साथ दोस्ती और रणनीतिक साझेदारी भी अहम है।