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TVK in Tamil Nadu: कांग्रेस नेताओं ने विजय थलापति से की मुलाकात, TVK को पूर्ण समर्थन दिया

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चेन्नई, एजेंसी। DMK की लंबे समय से सहयोगी रही कांग्रेस पार्टी ने बुधवार को अभिनेता-राजनेता विजय की TVK को तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए समर्थन देने की घोषणा की और द्रविड़ पार्टी से संबंध तोड़ लिए। तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी और कांग्रेस विधायक दल (CLP) ने TVK को सरकार बनाने के लिए अपना पूर्ण समर्थन देने का फैसला किया है। AICC तमिलनाडु के प्रभारी गिरीश चोडंकर ने TVK प्रमुख विजय के समर्थन मांगने के अनुरोध का हवाला देते हुए एक बयान में यह जानकारी दी। TVK प्रमुख विजय द्वारा स्वागत किए गए कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें राज्य में सरकार बनाने के लिए समर्थन पत्र सौंपा।

देश के मुख्य विपक्षी दल ने विजय को यह समर्थन इस शर्त के साथ दिया है कि टीवीके इस गठबंधन से ”सांप्रदायिक ताकतों” को दूर रखेगी। कांग्रेस के टीवीके साथ जाने के फैसले के साथ ही द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के साथ उसके 22 साल पुराने गठबंधन का पटाक्षेप तय माना जा रहा है। हालांकि कांग्रेस के तमिलनाडु प्रभारी गिरीश चोडानकर ने कहा कि कांग्रेस, द्रमुक के साथ संपर्क में है और एमके स्टालिन की पार्टी ‘इंडिया’ गठबंधन का हिस्सा है।

द्रमुक और कांग्रेस वर्ष 2004 से एक दूसरे की सहयोगी हैं। अतीत में भी कुछ मौकों पर दोनों का गठबंधन रहा है। टीवीके के नेता विजय ने कांग्रेस नेतृत्व को पत्र लिखकर समर्थन का आग्रह किया था, जिसके बाद पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और तमिलनाडु प्रभारी गिरीश चोडानकर ने इस पर विचार किया और फिर तमिलनाडु प्रदेश कांग्रेस कमेटी को निर्देशित किया गया कि वह राज्य की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए निर्णय ले। कांग्रेस विधायक दल की बैठक में विजय को समर्थन देने के फैसले पर मुहर लगाई गई। इसी बैठक में कन्याकुमारी किल्लियूर विधानसभा क्षेत्र से विधायक एस राजेश कुमार को विधायक दल का नेता भी चुना गया।

तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा में टीवीके को 108 सीटें हासिल हुई हैं, जिनमें से दो सीटों पर खुद विजय निर्वाचित हुए हैं। ऐसे में सरकार बनाने के लिए टीवीके को 11 और विधायकों के समर्थन की जरूरत है। कांग्रेस के पांच विधायक निर्वाचित हुए हैं। कांग्रेस अब तक द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा थी। कांग्रेस विधायक दल की बैठक के बाद तमिलनाडु प्रभारी गिरीश चोडानकर ने एक बयान में कहा, ”टीवीके के अध्यक्ष विजय ने तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए कांग्रेस से औपचारिक रूप से समर्थन का अनुरोध किया।

तमिलनाडु की जनता, विशेषकर युवाओं ने संवैधानिक सिद्धांतों में विश्वास रखने वाली धर्मनिरपेक्ष, प्रगतिशील और कल्याणकारी सरकार के लिए स्पष्ट, सशक्त और भारी बहुमत से अपना मत व्यक्त किया है। उन्होंने विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु टीवीके को अगली सरकार बनाने के लिए चुना है।” उन्होंने कहा कि कांग्रेस भारत में धर्मनिरपेक्ष, प्रगतिशील और कल्याणकारी राजनीति का समर्थन करती है और इसकी संस्थापक राजनीतिक पार्टी है। चोडानकर ने कहा, “तमिलनाडु की जनता के इस जनादेश का सम्मान करना, इसे कायम रखना और इसे मंजिल तक पहुंचाने में सहायता करना हमारा संवैधानिक कर्तव्य है।

ऐसे में तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी और कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) ने टीवीके को सरकार बनाने के लिए अपना पूर्ण समर्थन देने का निर्णय लिया है।” उन्होंने कहा कि कांग्रेस का समर्थन इस शर्त पर आधारित होगा कि टीवीके इस गठबंधन से उन सभी सांप्रदायिक ताकतों को दूर रखे जो भारत के संविधान में विश्वास नहीं करती हैं। उन्होंने कहा कि टीवीके और तमिलनाडु कांग्रेस के बीच यह गठबंधन आने वाले वर्षों और दशकों में पेरियार के सामाजिक न्याय के आदर्शों और डॉ. बी.आर. आंबेडकर के संवैधानिक आदर्शों के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता के साथ पेरुंथलाइवर कामराज के तमिलनाडु के गौरवशाली दिनों को वापस लाने का प्रयास करेगा।

कांग्रेस नेता ने कहा, ”दोनों पार्टियों के बीच आपसी सम्मान, उचित हिस्सेदारी और साझा जिम्मेदारी पर आधारित यह गठबंधन न केवल इस सरकार के गठन के लिए है, बल्कि स्थानीय निकायों, लोकसभा और राज्यसभा के भावी चुनावों के लिए भी है।” उन्होंने कहा, ”विजय और राहुल गांधी संयुक्त रूप से एक धर्मनिरपेक्ष और प्रगतिशील सरकार के लिए तमिलनाडु के लोगों के इस ऐतिहासिक फैसले का सम्मान करने और तमिलनाडु की जनता विशेषकर युवाओं के सपनों और वादों को पूरा करने का संकल्प लेते हैं।” चोडानकर ने संवाददाताओं से कहा कि विजय को समर्थन देने की एकमात्र शर्त यही है कि उनकी अगुवाई वाली सरकार में भाजपा या उसका कोई सहयोगी दल शामिल नहीं होना चाहिए। कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने जनादेश का सम्मान करते हुए टीवीके को समर्थन देने का फैसला किया।

उन्होंने कहा, ”तमिलनाडु के लोगों ने बदलाव और विजय और टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार के लिए मतदान किया है। हालांकि, टीवीके पार्टी या किसी अन्य पार्टी या गठबंधन को निर्णायक जनादेश नहीं मिला। लेकिन जनादेश विजय के नेतृत्व में सरकार में बदलाव के लिए है और यह धर्मनिरपेक्ष होना चाहिए। इस जनादेश का सम्मान करते हुए, विजय ने कांग्रेस पार्टी से संपर्क किया, और कांग्रेस पार्टी ने भी उस गठन को अपना समर्थन दिया।” वेणुगोपाल ने मंगलवार रात संवाददाताओं से कहा था, “टीवीके अध्यक्ष विजय ने कांग्रेस से तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए समर्थन का अनुरोध किया है। उन्होंने अपने राजनीतिक मिशन में पेरुमथलाईवर कामराज से भी प्रेरणा लेने की बात कही है। कांग्रेस का स्पष्ट मानना है कि तमिलनाडु में जनादेश एक ऐसी धर्मनिरपेक्ष सरकार के लिए है, जो संविधान की अक्षरशः रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हो।” उन्होंने कहा था कि कांग्रेस इस बात के लिए प्रतिबद्ध है कि भाजपा और उसके प्रतिनिधि किसी भी तरह से तमिलनाडु सरकार को न चलाएं। 

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पावर ग्रिड के निदेशक मंडल ने कर्ज सीमा बढ़ाकर 2.2 लाख करोड़ रुपए करने को मंजूरी दी

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नई दिल्ली, एजेंसी। सार्वजनिक क्षेत्र की पावर ग्रिड कॉरपोरेशन के निदेशक मंडल ने कंपनी की कर्ज लेने की सीमा 1.80 लाख करोड़ रुपए से बढ़ाकर 2.20 लाख करोड़ रुपए करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। कंपनी ने शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि निदेशक मंडल की शुक्रवार को हुई बैठक में यह मंजूरी दी गई। हालांकि, इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर आगामी वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में शेयरधारकों की मंजूरी के बाद लगेगी। 

निदेशक मंडल ने इसके अलावा बैंक ऑफ बड़ौदा से बाह्य वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) के जरिये 50 करोड़ अमेरिकी डॉलर तक की विदेशी मुद्रा जुटाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी। कंपनी ने कहा कि निदेशक मंडल ने उडुमलपेट-मदुरै 400 केवी एकल सर्किट (एस/सी) लाइन को 400 केवी क्वाड डबल सर्किट (डी/सी) लाइन में उन्नत/परिवर्तित करने की परियोजना को भी मंजूरी दी है। करीब 772.65 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना को आवंटन की तारीख से 30 महीने के भीतर, यानी 11 अगस्त, 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।  

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दुनियाभर की सुस्त अर्थव्यवस्था के बीच दौड़ेगी इंडियन इकोनॉमी, Goldman Sachs का अनुमान

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मुंबई, एजेंसी। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंदी और भू-राजनीतिक तनाव के बादल छाए हुए हैं लेकिन भारत की विकास रफ्तार को लेकर अच्छी खबर सामने आई है। करीब 150 साल पुराने वैश्विक निवेश बैंक Goldman Sachs ने अनुमान जताया है कि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और महंगाई में कमी के चलते भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहेगी। बैंक ने भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाते हुए कहा है कि आने वाले समय में दुनिया की सुस्त अर्थव्यवस्था के बीच भी भारत सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रह सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, पहले जहां युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित व्यवधान को देखते हुए चालू वित्त वर्ष में भारत की GDP वृद्धि 6.1% रहने का अनुमान लगाया गया था, वहीं अब इसे बढ़ाकर 6.5% कर दिया गया है। बैंक का कहना है कि वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में आर्थिक गतिविधियां अपेक्षा से बेहतर रही हैं, जिससे विकास दर के अनुमान में सुधार हुआ है।

कच्चे तेल की कीमतों का अनुमान घटाया

Goldman Sachs ने कच्चे तेल के पूर्वानुमान में भी कटौती की है। बैंक के मुताबिक, वर्ष 2026 की तीसरी और चौथी तिमाही में कच्चे तेल की औसत कीमत 82 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान है, जबकि पहले यह अनुमान 92 डॉलर प्रति बैरल था। वहीं 2027 के लिए अनुमान 80 डॉलर से घटाकर 75 डॉलर प्रति बैरल कर दिया गया है।

भारतीय बास्केट के कच्चे तेल की कीमत भी हाल के दिनों में तेजी से घटी है। जून में यह घटकर करीब 86.31 डॉलर प्रति बैरल रही, जबकि 24 जून को इसका स्तर 70.71 डॉलर प्रति बैरल दर्ज किया गया।

महंगाई का अनुमान भी हुआ कम

Goldman Sachs ने भारत के महंगाई अनुमान को भी घटा दिया है। बैंक ने वित्त वर्ष के लिए महंगाई का अनुमान 5.1% से घटाकर 4.9% कर दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक यूरिया कीमतों में कमी आने से खाद सब्सिडी पर सरकार का बोझ कम हो सकता है। साथ ही तेल की कीमतों में गिरावट से सरकार पर राजकोषीय दबाव भी कम होने की संभावना है। हालांकि मौसम से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण मांग पर असर पड़ने की आशंका बनी हुई है।

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Volkswagen की 4 फैक्ट्रियां बंद करने का प्लान, 1,00,000 लोग होंगे बेरोगजार

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बर्लिन, एजेंसी। यूरोप की दिग्गज ऑटोमोबाइल कंपनी फॉक्सवैगन AG कुछ फैक्ट्रियां बंद कर सकती है और कर्मचारियों की संख्या में भारी कटौती पर विचार कर रही हैं। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में हुई बोर्ड बैठक में कंपनी के CEO ओलिवर ब्लूम ने एक नई रणनीति पेश की। प्रस्तावित योजना के तहत कर्मचारियों की छंटनी का आंकड़ा बढ़ाकर करीब 1 लाख तक किया जा सकता है। फिलहाल Volkswagen Group में लगभग 6.57 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं। समूह के तहत Volkswagen के अलावा Porsche और Audi जैसे प्रीमियम ब्रांड भी शामिल हैं।

जर्मनी में 4 प्लांट बंद हो सकते हैं

रिपोर्ट के अनुसार, रणनीति में इस दशक के अंत तक जनरल ओवरहेड कॉस्ट में 11 अरब यूरो (12.5 अरब डॉलर) तक की कटौती करना और मीडियम टर्म में जर्मनी में 4 फैक्ट्रियां बंद करना भी शामिल है। इनमें नेकरसल्म में Audi के प्लांट के साथ-साथ हनोवर, ज्विकौ और एमडेन में फॉक्सवैगन के प्लांट शामिल हैं।

इसके अलावा कंपनी Volkswagen ब्रांड और उसके कंपोनेंट बिजनेस को अलग करने के विकल्प पर भी विचार कर रही है। लंबे समय से कम मुनाफे से जूझ रहे Volkswagen ब्रांड को अधिक लाभदायक और कुशल बनाने की दिशा में यह कदम अहम माना जा रहा है।

क्यों उठाने पड़ रहे हैं ये कदम?

फॉक्सवैगन इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रही है। अमेरिका के आयात शुल्क (टैरिफ), चीन में कमजोर मांग और यूरोप में BYD तथा Stellantis जैसी कंपनियों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने कंपनी पर दबाव बढ़ा दिया है। इसी वजह से लागत घटाने और कारोबार को अधिक प्रभावी बनाने की रणनीति तैयार की जा रही है।

पहले से जारी है कर्मचारियों की संख्या घटाने का अभियान

रिपोर्ट के अनुसार, करीब 28,000 कर्मचारी पहले ही स्वैच्छिक रूप से कंपनी छोड़ने पर सहमत हो चुके हैं। यह 2030 तक पूरे Volkswagen Group में 50,000 कर्मचारियों की संख्या कम करने की पहले घोषित योजना का हिस्सा है।

हालांकि, नई प्रस्तावित छंटनी योजना को कर्मचारी संगठनों का विरोध झेलना पड़ सकता है। Volkswagen के सुपरवाइजरी बोर्ड में आधी सीटें कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के पास हैं, जबकि जर्मनी का लोअर सैक्सनी राज्य भी बोर्ड में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और आमतौर पर कर्मचारी यूनियनों का समर्थन करता है। ऐसे में कंपनी के लिए इस योजना को लागू करना आसान नहीं होगा।

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