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छत्तीसगढ़

रायपुर : विशेष लेख : राष्ट्रीय राजमार्ग पर संजीवनी बना डायल 1033

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  • कमलेश साहू
 विशेष लेख : राष्ट्रीय राजमार्ग पर संजीवनी बना डायल 1033
 विशेष लेख : राष्ट्रीय राजमार्ग पर संजीवनी बना डायल 1033

कल्पना कीजिए, आप एक खूबसूरत सफर पर हैं। चारों तरफ फैली खुली शानदार सड़क, रफ्तार पकड़ती गाड़ी और गुनगुनाता सुहाना मौसम। सब कुछ एकदम मुकम्मल लगता है। लेकिन अचानक, अगले ही मोड़ पर कोई अनहोनी हो जाए…। कई बार हाइवे पर हुआ एक अनचाहा हादसा पल भर में जिंदगी की खुशियों को मातम में बदल देता है। ऐसे किसी अनजान और सुनसान सफर पर, जहां दूर-दूर तक कोई अस्पताल या मदद नजर नहीं आती, वहां मोबाइल की स्क्रीन पर चमकता एक नंबर उम्मीद की सबसे बड़ी किरण बनकर उभरता है- 1033। आज देश के राष्ट्रीय राजमार्गों पर यह चार अंकों का नंबर महज एक हेल्पलाइन नहीं, बल्कि हजारों-लाखों मुसाफिरों के लिए संजीवनी साबित हो रहा है।

 विशेष लेख : राष्ट्रीय राजमार्ग पर संजीवनी बना डायल 1033
 विशेष लेख : राष्ट्रीय राजमार्ग पर संजीवनी बना डायल 1033

संकट के समय फरिश्ता बनती है एक कॉल

हाइवे पर दुर्घटना होने के बाद जो सबसे पहला घंटा होता है, उसे चिकित्सा विज्ञान में गोल्डन ऑवर (Golden Hour) कहा जाता है। इस एक घंटे के भीतर अगर घायल को सही इलाज मिल जाए, तो उसकी जान बचने की संभावना 80 फीसदी तक बढ़ जाती है। 1033 इसी गोल्डन ऑवर का रक्षक है।

जैसे ही कोई इस नंबर पर डायल करता है, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) का कॉल सेंटर तुरंत हरकत में आ जाता है। जीपीएस (GPS) ट्रैकिंग के जरिए हादसे की सटीक लोकेशन ट्रेस की जाती है और चंद मिनटों के भीतर एम्बुलेंस मौके पर पहुंचती है। घायलों को नजदीकी ट्रॉमा सेंटर या अस्पताल पहुंचाया जाता है। साथ ही रास्ता साफ करने के लिए क्रेन और पेट्रोलिंग गाड़ियां तैनात हो जाती हैं।

महज 7 से 10 मिनट में आ गई एम्बुलेंस

एनएचएआई के 1033 सेवा का लाभ लेने वाले नितिन वर्मा बताते हैं, “मैं रायपुर से बिलासपुर राष्ट्रीय राजमार्ग में सफ़र कर रहा था। दोपहर 2 बजे के करीब हाइवे पर मेरी गाड़ी का एक्सीडेंट हुआ, मोबाइल में नेटवर्क भी कम था। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं कहां हूं? मैंने 1033 लगाया, और महज 7 से 10 मिनट में एम्बुलेंस मेरे सामने थी। वो नंबर नहीं, मेरे लिए संजीवनी से कम नहीं था।”

सिर्फ हादसा नहीं, हर मुश्किल का हल है 1033

आमतौर पर लोग सोचते हैं कि यह नंबर सिर्फ एक्सीडेंट के समय काम आता है, लेकिन असल में यह हाइवे पर आपका सबसे भरोसेमंद साथी है। आप कई विपरीत स्थितियों में भी इसकी मदद ले सकते हैं। रात के सन्नाटे में अगर गाड़ी का टायर पंचर हो जाए या इंजन फेल हो जाए, हाइवे पर कोई पेड़ गिर गया हो, मवेशी आ गए हों या कोई भारी मलबा पड़ा हो, यात्रा के दौरान अगर अचानक किसी सहयात्री की तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ जाए, टोल प्लाजा या फास्टैग संबंधी कोई समस्या हो या हाइवे पर असुरक्षा महसूस हो रही हो… तो भी 1033 सेवा का लाभ लिया जा सकता है।

अनुभवों की जुबानी, संजीवनी की कहानी

रात के सन्नाटे में भारी ट्रक का टायर फटा, 1033 ने दी राहत

ट्रक ड्राइवर गुरदीप सिंह अपने अनुभव साझा करते हैं, “बात रात के करीब 09:45 बजे की है। मैं अपना भारी-भरकम ट्रक लेकर रायपुर से बिलासपुर की ओर बढ़ रहे था। अचानक एक जोरदार आवाज के साथ ट्रक का टायर फट गया। भारी वाहन और ऊपर से रात का सन्नाटा… ऐसी स्थिति में हाइवे के किनारे ट्रक खड़ा करना और मदद ढूंढना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। मैने बिना वक्त गंवाए 1033 पर कॉल किया। एनएचएआई की टीम ने तुरंत मेरी लोकेशन ट्रेस की और हाईवे पेट्रोलिंग टीम मौके पर पहुंच गई। टीम ने न सिर्फ क्रेन और तकनीकी मदद का इंतजाम किया, बल्कि जब तक काम पूरा नहीं हुआ, वहां सुरक्षा सुनिश्चित की, ताकि कोई और बड़ा हादसा न हो।”

जब जाम हो गया चक्का तो पेट्रोलिंग टीम ने बढ़ाया मदद का हाथ

बिलासपुर-नागपुर रूट के मुसाफिर एस.पी. चौबे ने बताया, “हम अपनी कार से सफर कर रहे थे कि अचानक गाड़ी पंचर हो गई। जब स्टेपनी बदलने की बारी आई, तो एक नई मुसीबत खड़ी हो गई। बहुत दिनों से पहिया खुला नहीं था, इसलिए वह बुरी तरह जाम हो चुका था। मेरा ड्राइवर पसीने से तर-बतर होकर उसे खोलने की नाकाम कोशिश कर रहा था, लेकिन वह टस से मस नहीं हो रहा था। हाइवे के किनारे खड़ी हमारी गाड़ी और ड्राइवर की जद्दोजहद को वहां से गुजर रही 1033 की रूट पेट्रोलिंग व्हीकल (RPV) टीम ने खुद देख लिया।

टीम के जवान तुरंत हमारे पास रुके। उन्होंने न सिर्फ अपनी गाड़ी से जरूरी हैवी टूल्स (औजार) निकाले, बल्कि खुद आगे बढ़कर जाम हो चुके चक्के को खोला, टायर बदला और हमारी गाड़ी को रवाना किया। उनके इस अपनेपन और मुस्तैदी ने हमारा दिल जीत लिया।

भारी ट्रेलर का ब्रेक हुआ जाम, मुस्तैदी से टला बड़ा खतरा

हाइवे पर सुरक्षा सिर्फ छोटे वाहनों तक सीमित नहीं है, बल्कि भारी-भरकम कमर्शियल वाहनों के लिए भी 1033 एक सुरक्षा कवच है। ऐसा ही एक मामला बिलासपुर से महासमुंद की ओर जा रहे विशाल ट्रेलर के ड्राइवर शिवम यादव के साथ हुआ। उनके ट्रेलर का ब्रेक अचानक जाम हो गया और गाड़ी में जरूरी एयर प्रेशर नहीं बन पा रहा था। बीच हाइवे पर इतने बड़े वाहन का इस तरह रुकना बेहद खतरनाक था।

सूचना मिलते ही 1033 की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। भारी ट्रेलर के पीछे से आ रही तेज रफ्तार गाड़ियों को सचेत करने के लिए टीम ने सेफ्टी कोन और चेवरॉन साइन बोर्ड लगाए, ताकि एक सुरक्षित बफर जोन बन सके। इस हाई-प्रोफेशनल ट्रैफिक मैनेजमेंट की वजह से न तो हाइवे पर जाम लगा और न ही कोई दुर्घटना हुई। ट्रेलर को सुरक्षित तरीके से सुधरवाने की व्यवस्था की गई।

सरल, आसान और सुविधाजनक

1033 की सबसे खास बात इसकी सरलता और गति है। यह सेवा 24 घंटे, सातों दिन काम करती है। इसमें भाषा की कोई दीवार नहीं है। स्थानीय भाषाओं से लेकर हिंदी और अंग्रेजी, हर भाषा में यहां मदद मिलती है। टोल-फ्री होने के कारण मोबाइल में बैलेंस न होने पर भी इस पर कॉल की जा सकती है।

बदलते भारत के साथ हमारे हाइवे आधुनिक और हाई-स्पीड हो रहे हैं, लेकिन रफ्तार के इस दौर में सुरक्षा सबसे अहम है। अगली बार जब आप किसी लंबे सफर पर निकलें, तो अपनी गाड़ी की डिक्की चेक करने के साथ-साथ अपने दिमाग और मोबाइल की स्पीड डायल लिस्ट में 1033 को जरूर सेव कर लें। क्योंकि जब हाइवे पर मुश्किलें रास्ता रोकती हैं, तो यही चार अंक संजीवनी बनकर जिंदगी की रफ्तार को थमने नहीं देते।

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बेमेतरा: उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने जन समस्या निवारण शिविर में सुनीं नागरिकों की समस्याएं

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आमजनों के हितों के लिए सरकार प्रतिबद्ध : अरुण साव

आमजनों के हितों के लिए सरकार प्रतिबद्ध : श्री अरुण साव
आमजनों के हितों के लिए सरकार प्रतिबद्ध : श्री अरुण साव
आमजनों के हितों के लिए सरकार प्रतिबद्ध : श्री अरुण साव
आमजनों के हितों के लिए सरकार प्रतिबद्ध : श्री अरुण साव

बेमेतरा। उप मुख्यमंत्री तथा बेमेतरा जिले के प्रभारी मंत्री अरुण साव आज बेरला विकासखण्ड के आनंदगांव में आयोजित जन समस्या निवारण शिविर में शामिल हुए। उन्होंने इस दौरान ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं, मांगों एवं शिकायतों को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना। उन्होंने शिविर में विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण करते हुए अधिकारियों को प्राप्त आवेदनों का समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। 

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने जन समस्या निवारण शिविर में कहा कि लोगों को अपने जायज कार्यों के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें, यह प्रशासन की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि संवेदनशीलता एवं सुशासन सरकार की कार्यशैली का प्रमुख आधार है तथा आमजनों के हितों की रक्षा के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। शिविर में बड़ी संख्या में पहुंचे नागरिकों ने राजस्व, पेयजल, सड़क, बिजली तथा विभिन्न हितग्राही मूलक योजनाओं से संबंधित आवेदन प्रस्तुत किए। उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि हर आवेदन को गंभीरता से लेते हुए त्वरित निराकरण किया जाए।

गरीबों, किसानों, महिलाओं और युवाओं के कल्याण के लिए समर्पित है सरकार

शिविर को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि प्रदेश सरकार गरीबों, किसानों, महिलाओं एवं युवाओं के कल्याण के लिए लगातार कार्य कर रही है। शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना ही सरकार का मुख्य उद्देश्य है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में देश एवं प्रदेश में चौमुखी विकास हो रहा है। सरकार द्वारा जनता के हित में लगातार बड़े निर्णय लिए जा रहे हैं। उन्होंने महतारी वंदन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना सहित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और जरूरतमंद परिवारों को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

सरकार जनता के बीच पहुंचकर समस्याओं का कर रही समाधान

बेमेतरा विधायक दीपेश साहू ने कहा कि सरकार जनता के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं को सुनने और उनका निराकरण करने का कार्य कर रही है। शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है।

विभिन्न योजनाओं के हितग्राही हुए लाभान्वित

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने शिविर में विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को लाभान्वित किया। महिला एवं बाल विकास विभाग अंतर्गत नोनी सुरक्षा योजना के तहत 5 बालिकाओं को पंजीयन पत्र प्रदान किए गए। इसके अलावा 8 गर्भवती माताओं की गोदभराई तथा 5 बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार कराया गया। टीबी उन्मूलन अभियान के अंतर्गत 3 हितग्राहियों को सुपोषण किट वितरित की गई तथा प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत आवास पूर्ण होने पर 5 हितग्राहियों को उनके नए घरों की चाबियां सौंपी गईं।

पौधारोपण कर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने हाई स्कूल उपकेंद्र परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि बढ़ते ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के दौर में पौधारोपण अत्यंत आवश्यक है तथा यह आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए भी जरूरी है। उन्होंने नागरिकों से पौधारोपण अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की।

बीज पुंसवन अभियान का किया शुभारंभ

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अभिनव पहल करते हुए बीज पुंसवन अभियान का शुभारंभ किया। इस विशेष बीज पुंसवन को मिट्टी, गोबर एवं गोमूत्र के मिश्रण से तैयार किया गया है, जिसके भीतर बीज रखा गया है। बरसात के मौसम में इसे लगाने पर पौधा अंकुरित होगा। इस पहल से व्यापक स्तर पर पौधारोपण को बढ़ावा मिलेगा।

बेमेतरा की कलेक्टर सुश्री प्रतिष्ठा ममगाई, एसएसपी रामकृष्ण साहू, छत्तीसगढ़ विकास बोर्ड के अध्यक्ष प्रहलाद रजक और जिला पंचायत की अध्यक्ष श्रीमती कल्पना योगेश तिवारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीण बड़ी संख्या में कार्यक्रम में उपस्थित थे।

18.65 करोड़ के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन

उप मुख्यमंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री अरुण साव ने अपने एक दिवसीय बेमेतरा प्रवास के दौरान गोश्वारा क्षेत्र में विभिन्न विभागों के अंतर्गत कुल 18 करोड़ 65 लाख 07 हजार रुपए की लागत के 12 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग अंतर्गत 46.22 लाख रुपए की लागत से निर्मित 3 विकास कार्यों का भूमिपूजन किया गया। वहीं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अंतर्गत 12 करोड़ 87 लाख 80 हजार रुपए की लागत से निर्मित एक कार्य का लोकार्पण किया गया।

इसी प्रकार जनपद पंचायत बेरला अंतर्गत 4 करोड़ 53 लाख 54 हजार रुपए की लागत से 4 कार्यों का भूमिपूजन तथा 77.51 लाख रुपए की लागत से 4 कार्यों का लोकार्पण किया गया। इस प्रकार कुल 7 कार्यों का भूमिपूजन एवं 5 कार्यों का लोकार्पण किया गया। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से क्षेत्र में पेयजल, आधारभूत संरचना एवं ग्रामीण विकास से जुड़ी सुविधाओं का विस्तार होगा तथा आम नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों के लिए बड़ी सौगात

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों एवं विधायक दीपेश साहू की मांग पर विभिन्न विकास कार्यों हेतु राशि स्वीकृत करने की घोषणा की। उन्होंने जामगांव एवं लावातरा में सीसी रोड निर्माण के लिए 10-10 लाख रुपए स्वीकृत किए। इसके अतिरिक्त ग्राम चेट में सीसी रोड निर्माण हेतु 5 लाख रुपए, बारगांव में सीसी रोड निर्माण हेतु 5 लाख रुपए, बारगांव में मुक्तिधाम निर्माण हेतु 6.25 लाख रुपए, सुरहोली में व्यवसायिक परिसर निर्माण हेतु 4.95 लाख रुपए तथा जमघट में सीसी रोड निर्माण हेतु 5 लाख रुपए स्वीकृत करने की घोषणा की। इनके साथ ही उप मुख्यमंत्री श्री साव ने नगरीय निकाय भिंभौरी, बेरला एवं कुसमी में विकास कार्यों के लिए 1-1 करोड़ रुपए स्वीकृत करने की घोषणा की। इन घोषणाओं से क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं के विकास को नई गति मिलेगी तथा ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में जनसुविधाओं का विस्तार होगा।

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छत्तीसगढ़

फीस बढ़ोतरी के खिलाफ कांग्रेस ने शिक्षा विभाग दफ्तर घेरा:गेट पर ताला लगाकर जताया विरोध, सरकारी स्कूलों की बढ़ी फीस वापस लेने की मांग

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रायपुर, एजेंसी। रायपुर में सरकारी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी के खिलाफ कांग्रेस ने बैरन बाजार स्थित शिक्षा विभाग के संयुक्त संचालक कार्यालय का घेराव किया। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन करते हुए शिक्षा विभाग और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

प्रदर्शन का नेतृत्व शहर कांग्रेस अध्यक्ष श्रीकुमार शंकर मेनन ने किया। कांग्रेस नेताओं ने कार्यालय के मुख्य गेट पर ताला लगाकर विरोध जताया और शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

रायपुर में फीस बढ़ोतरी के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन

रायपुर में फीस बढ़ोतरी के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन

महंगाई के बीच फीस बढ़ाना गलत

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि पहले से महंगाई से परेशान जनता पर अब स्कूल फीस बढ़ाकर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है। उनका कहना है कि पेट्रोल-डीजल, गैस, बिजली और राशन की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार को फीस बढ़ाने की बजाय राहत देनी चाहिए थी।

कांग्रेस का आरोप है कि शिक्षा विभाग ने हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्तर पर विभिन्न मदों में फीस बढ़ा दी है। खेलकूद, प्रायोगिक परीक्षा, लैब, स्काउट-गाइड और निजी परीक्षा शुल्क में भी वृद्धि की गई है।

फीस माफी की मांग

शहर कांग्रेस अध्यक्ष श्रीकुमार शंकर मेनन ने मांग की कि इस साल सरकारी स्कूलों की पूरी फीस माफ की जाए, ताकि अभिभावकों को राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने कोरोना काल में फीस माफ की थी और स्वामी आत्मानंद स्कूल जैसे मॉडल शुरू किए थे।

शिक्षा व्यवस्था बदहाल

पूर्व संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने सरकार पर शिक्षा व्यवस्था की अनदेखी का आरोप लगाया। वहीं पूर्व विधायक कुलदीप जुनेजा ने शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार बढ़ने का दावा करते हुए सरकार को जिम्मेदार ठहराया।करीब तीन घंटे तक चले प्रदर्शन में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शिक्षा विभाग कार्यालय के बाहर धरना दिया और फीस वृद्धि वापस लेने की मांग की।

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कोरबा

कोरबा में मिली लाश का खुलासा:पुलिस हत्या मान रही थी, फोरेंसिक जांच में आत्महत्या निकली, मानसिक रूप से परेशान था मृतक

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कोरबा। कोरबा के सीएसईबी चौकी क्षेत्र स्थित कोहड़िया में 10 मई को सड़क किनारे मिली खून से सनी लाश के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस जिस मामले की जांच हत्या मानकर कर रही थी, वह पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच के बाद आत्महत्या निकला।

बसंत पटेल (37) की रक्तरंजित लाश सड़क किनारे झाड़ियों में मिली थी। घटनास्थल पर खून के धब्बे और शव घसीटने जैसे निशान मिलने से हत्या की आशंका जताई गई थी।

लाश मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची थी

लाश मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची थी

टूटी बीयर बोतल से खुद पर किया हमला

घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने फोरेंसिक और डॉग स्क्वायड टीम को मौके पर बुलाया था। घटनास्थल से एक टूटी हुई बीयर की बोतल भी बरामद हुई थी।

सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी ने बताया कि पीएम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच में हत्या के कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं। जांच में सामने आया कि मृतक ने टूटी बीयर बोतल के धारदार कांच से खुद पर हमला किया था।

डॉक्टरों और फोरेंसिक टीम ने चोटों की जांच के बाद पुष्टि की कि सभी घाव स्वयं पहुंचाए गए थे।

आवश्यक कार्रवाई करते हुए पुलिसकर्मी

आवश्यक कार्रवाई करते हुए पुलिसकर्मी

मानसिक रूप से परेशान था मृतक

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि बसंत पटेल मानसिक रूप से अस्वस्थ थे और उनका इलाज चल रहा था। घटना के बाद आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की गई, लेकिन किसी संदिग्ध व्यक्ति की मौजूदगी नहीं मिली। इससे आत्महत्या की आशंका और मजबूत हुई।

फैक्ट्री कर्मचारी था मृतक

बसंत पटेल मूल रूप से मस्तूरी के सोनसरी गांव के निवासी थे। पिछले तीन वर्षों से वे सर्वमंगला बरमपुर में किराए के मकान में रह रहे थे और इंडस्ट्रियल एरिया स्थित एक फैक्ट्री में काम करते थे।

9 मई की सुबह वे काम पर जाने के लिए घर से निकले थे, लेकिन रात तक वापस नहीं लौटे। अगले दिन 10 मई की सुबह उनकी लाश कोहड़िया इलाके में मिली थी।

मृतक शादीशुदा थे और उनके दो बच्चे हैं। बताया जा रहा है कि घटना से दो दिन पहले ही वे अपने छोटे भाई की शादी में शामिल होकर गांव से कोरबा लौटे थे।

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