बिना CGMC मंजूरी छत्तीसगढ़ में काम कर सकेंगे बाहरी डॉक्टर:जूडा बोला- फर्जीवाड़ा बढ़ेगा, लोकल्स की नौकरी खतरे में, स्वास्थ्य मंत्री बोले- व्यवस्था सुधरेगी
रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल काउंसिल की ओर से जारी नोटिफिकेशन के बाद प्रदेश में विवाद छिड़ गया है। दोनों नोटिफिकेशन 15 दिन के भीतर जारी किए हैं। पहला नोटिफिकेशन 27 मई को छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल ने जारी किया।
पहले नोटिफिकेशन में कहा गया कि दूसरे राज्यों में पंजीकृत एलोपैथिक चिकित्सकों (MBBS, MD, MS, DNB, DM, MCH) को छत्तीसगढ़ में चिकित्सकीय व्यवसाय (प्रैक्टिस) करने की अनुमति दी जा सकेगी। लेकिन काउंसिल की शर्त होगी कि दूसरे राज्य का कोई डॉक्टर अपना रजिस्ट्रेशन और जरूरी दस्तावेज जमा करेगा।
जांच के बाद उसे छत्तीसगढ़ में प्रैक्टिस करने की अनुमति दी जा सकेगी। इसके बाद 11 जून को छत्तीसगढ़ सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने नोटिफिकेशन जारी किया। जो काउंसिल के आदेश को सुपरसीड करता दिखाई देता है।
ये नोटिफिकेशन कहता है कि दूसरे राज्यों में रजिस्टर्ड डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ और अन्य स्वास्थ्यकर्मी भी बिना अतिरिक्त अनुमति के छत्तीसगढ़ में काम कर सकते हैं। काउंसिल के आदेश का विरोध जूनियर डॉक्टर्स और छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन कर रहे थे।
जूडा और फेडरेशन का कहना है कि, ये दोनों ही नोटिफिकेशन लोकल डॉक्टर्स के भविष्य पर संकट है। इसके साथ की फर्जी डॉक्टरों की संख्या भी बढ़ेगी, जो सीधे मरीजों के भविष्य में संकट है। हालांकि सरकार का तर्क है कि स्वास्थ्य सुविधाओं को ठीक करने अभी ये व्यवस्था जरूरी है। उन्होंने ये स्पष्ट किया है कि इससे लोकल डॉक्टर्स के भविष्य पर कोई संकट नहीं आएगा। पढ़िए रिपोर्ट…
पहले जारी दो नोटिफिकेशन को डिटेल में समझिए
1. 27 मई 2026 का छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल (CGMC) का आदेश
इस आदेश में कहा गया है कि
दूसरे राज्यों के MBBS, MD, MS, DNB, DM, MCh डॉक्टरों को राहत दी गई।
लेकिन शर्त जोड़ी गई अपना रजिस्ट्रेशन और जरूरी दस्तावेज जमा करेगा यानी सेल्फ अटेस्टेशन के बाद ही छत्तीसगढ़ में प्रैक्टिस की अनुमति प्राप्त कर सकते हैं।
काउंसिल पूरे दस्तावेजों की जांच के बाद अंतिम अनुमति देगा।
ये 27 मई का आदेश है।
2. 11 जून 2026 का स्वास्थ्य विभाग का आदेश
यह आदेश पहले वाले से कहीं ज्यादा व्यापक है।
यदि कोई व्यक्ति किसी भी राज्य की मेडिकल काउंसिल में रजिस्टर्ड डॉक्टर है।
किसी राज्य के नर्सिंग काउंसिल में रजिस्टर्ड है या पैरामेडिकल काउंसिल में रजिस्टर्ड है, या नेशनल मेडिकल (NMR) में दर्ज है।
तो वह छत्तीसगढ़ में काम कर सकता है। इस आदेश की सबसे महत्वपूर्ण लाइन है कि प्रैक्टिस के लिए छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल से अलग से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है।
ये 11 जून का आदेश है।
दोनों नोटिफिकेशन का व्यावहारिक असर उदाहरण से समझिए
केस 1 – एक MBBS डॉक्टर मध्यप्रदेश मेडिकल काउंसिल में रजिस्टर्ड है।
पहले: उसे छत्तीसगढ़ में अलग प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता था।
अब: वह सीधे छत्तीसगढ़ में नौकरी या प्रैक्टिस कर सकता है।
केस 2 – एक नर्स महाराष्ट्र नर्सिंग काउंसिल में रजिस्टर्ड है।
पहले: स्थानीय पंजीयन को लेकर सवाल उठ सकते थे।
अब: वह सीधे छत्तीसगढ़ के अस्पताल में काम कर सकती है।
लोकल डॉक्टर बोले- ये राज्य के स्वास्थ्य और डॉक्टरों पर खतरा
पहले नोटिफिकेशन पर CGDF और JDA का कहना है कि उनका विरोध केवल दूसरे राज्यों के डॉक्टरों के आने का नहीं, बल्कि रोजगार, भर्ती और स्थानीय डॉक्टरों के हितों से भी जुड़ा हुआ है।
छत्तीसगढ़ में पहले से 16 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। हर साल 2455 एमबीबीएस और 435 एमडी/एमएस सीटों से नए डॉक्टर तैयार हो रहे हैं। सरकार ने 5 नए मेडिकल कॉलेज खोलने का भी फैसला किया है।
इसके बावजूद सरकारी अस्पतालों में बड़ी संख्या में पद खाली हैं और नियमित भर्ती नहीं हो रही है। ऐसे में बाहर के राज्यों के डॉक्टरों को बिना अतिरिक्त स्थानीय अनुमति के प्रैक्टिस की छूट देना स्थानीय डॉक्टरों के हितों के खिलाफ माना जा रहा है।
सरकार बोली- ये अस्थायी व्यवस्था, सत्यापन अनिवार्य, रजिस्ट्रेशन नहीं
पूरे मामले में हमने स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से सरकार का पक्ष जाना। मंत्री जायसवाल ने कहा कि, ये अस्थायी व्यवस्था है। हमारे राज्य में डॉक्टरों की कमी है। जब तक कमी पूरी नहीं हो जाती, ये अस्थायी व्यवस्था रहेगी।
यह व्यवस्था डॉक्टरों की कमी वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत करने के लिए लाई गई है। इससे अस्पतालों को विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध कराने में आसानी होगी। वहीं दोनों नोटिफिकेशन पर उन्होंने तर्क दिया कि पुरानी व्यवस्था में काउंसिल का अप्रूवल अनिवार्य होता था।
डॉक्टरों के विरोध के कारण ये भी
1. राज्य मेडिकल काउंसिल की भूमिका कमजोर होने का डर
अब तक छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल के पास यह जानकारी रहती थी कि राज्य में कौन-कौन डॉक्टर प्रैक्टिस कर रहे हैं। यदि दूसरे राज्यों के डॉक्टरों को सीधे काम करने की अनुमति मिल जाती है, तो स्थानीय डॉक्टरों का कहना है कि राज्य की निगरानी व्यवस्था कमजोर हो सकती है।
2. जवाबदेही का सवाल
यदि किसी दूसरे राज्य में पंजीकृत डॉक्टर के खिलाफ शिकायत आती है, तो कार्रवाई कौन करेगा? छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल या उस राज्य की मेडिकल काउंसिल जहां उसका पंजीकरण है? इस पर स्पष्ट व्यवस्था की मांग की जा रही है।
3. रोजगार और प्रतिस्पर्धा
कुछ डॉक्टरों को आशंका है कि बड़े निजी अस्पताल दूसरे राज्यों से डॉक्टर बुलाकर नियुक्तियां करेंगे, जिससे स्थानीय डॉक्टरों के लिए अवसर कम हो सकते हैं या फीस और वेतन पर दबाव बढ़ सकता है।
4. नर्सिंग होम एक्ट के तहत अधिसूचना
मेडिकल प्रैक्टिस और डॉक्टरों के पंजीकरण से जुड़े विषय आमतौर पर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) और संबंधित परिषदों के दायरे में आते हैं। ऐसे में राज्य सरकार ने नर्सिंग होम एक्ट के तहत यह आदेश जारी किया है, जिसकी कानूनी व्याख्या पर भी चर्चा हो रही है।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन भी विरोध में उतरा
इस अधिसूचना का इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) रायपुर ने भी कड़ा विरोध किया है। एसोसिएशन के प्रेसिडेंट डॉक्टर कुलदीप सोलंकी का कहना है कि यदि बिना वैध रजिस्ट्रेशन और निर्धारित प्रक्रिया पूरी किए डॉक्टर, नर्स या अन्य हेल्थ प्रोफेशनल्स को प्रैक्टिस की अनुमति दी जाती है, तो इससे मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा होगा।
IMA रायपुर ने कहा कि संबंधित अधिसूचना में कई गंभीर खामियां हैं। संगठन के अनुसार इस तरह की व्यवस्था से प्रदेश में फर्जी चिकित्सकों और अप्रमाणित स्वास्थ्यकर्मियों की गतिविधियां बढ़ सकती हैं, जिससे धोखाधड़ी होने की आशंका है।
IMA ने ये भी कहा है कि अधिसूचना जारी करने का अधिकार संबंधित परिषद या नियामक संस्था का होना चाहिए, न कि केवल स्वास्थ्य विभाग के प्रशासनिक स्तर पर। IMA के अनुसार छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल के कई पद लंबे समय से रिक्त हैं, जिससे पंजीयन और सत्यापन की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
कोरबा। कोरबा के बंसल इंफ्राप्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, गेवरा में कार्यरत करीब 150 कर्मचारियों के लंबित वेतन और बोनस भुगतान की मांग को लेकर कर्मचारियों ने एसईसीएल गेवरा के मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय का घेराव किया। करीब एक घंटे तक चले प्रदर्शन में कर्मचारियों ने नारेबाजी कर दीपावली से पहले बकाया भुगतान की मांग उठाई।
कर्मचारियों के समर्थन में छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना (गैर-राजनीतिक संगठन) के प्रदेश उपाध्यक्ष उमागोपाल भी मौजूद रहे। प्रबंधन की ओर से 6 नवंबर तक सभी कर्मचारियों का बोनस भुगतान करने का आश्वासन मिलने के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ।
लंबे समय से लंबित है वेतन और बोनस
कर्मचारियों का कहना है कि उनका वेतन और बोनस लंबे समय से बकाया है। भुगतान नहीं होने से उनके परिवारों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दीपावली नजदीक होने के कारण कर्मचारियों ने त्योहार से पहले राशि जारी करने की मांग की। उनका कहना था कि वेतन और बोनस नहीं मिलने से त्योहार की तैयारियां प्रभावित हो रही हैं।
एक घंटे तक कार्यालय का घेराव
बकाया भुगतान को लेकर कर्मचारियों ने मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय परिसर में करीब एक घंटे तक प्रदर्शन किया। इस दौरान नारेबाजी करते हुए प्रबंधन से तत्काल भुगतान की मांग की गई। प्रदर्शन में उमागोपाल ने भी कर्मचारियों का समर्थन किया।
प्रबंधन ने 6 नवंबर तक बोनस देने का दिया भरोसा
मामले को लेकर एसईसीएल प्रबंधन ने कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल से चर्चा की। इसके बाद प्रबंधन ने आश्वासन दिया कि 6 नवंबर तक सभी कर्मचारियों के बोनस का भुगतान कर दिया जाएगा। इस आश्वासन के बाद कर्मचारियों ने प्रदर्शन समाप्त कर दिया।
मजदूरों के हितों के लिए आवाज उठाने की बात
छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के प्रदेश उपाध्यक्ष उमागोपाल ने कहा कि मजदूर दिन-रात मेहनत कर कंपनी और खदान के उत्पादन में योगदान देते हैं। ऐसे में त्योहार के समय उनका वेतन और बोनस रोकना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि मजदूरों को अपना हक पाने के लिए कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, यह सुनिश्चित करना प्रबंधन की जिम्मेदारी है। संगठन मजदूरों के हितों और अधिकारों के लिए लगातार आवाज उठाता रहेगा।
कोरबा। धनतेरस के अवसर पर शुक्रवार को कोरबा बाजार में काफी रौनक दिखी। सराफा बाजार जहां गुलजार है, वहीं आटोमोबाईल से लेकर बर्तन और कपड़ों की बम्पर खरीदी-बिक्री हुई। खासकर सराफा बाजार में सोने-चांदी से लेकर डायमण्ड की बिक्री जमकर हुई। सोना-चांदी में उतार-चढ़ाव के बीच ग्राहकों ने धनतेरस पर सोना खरीदी को शुभ मानते हुए सोने के जेवर, सिक्के खरीदे, वहीं चांदी के गहने से लेकर चांदी की मूर्तियां एवं सिक्के भी खरीदे। कनक मंदिर ज्वेलर्स सहित कई दुकानों में ग्राहकों की भीड़
समाचार लिखे जाने तक सराफा बाजार गुलजार रहा। पावर हाऊस रोड स्थित कनक मंदिर ज्वेलर्स में सुबह से लेकर समाचार लिखे जाने तक ग्राहकों की भीड़ देखी गई। कनक मंदिर ज्वेलर्स कोरबा का सबसे प्रतिष्ठित सराफा दुकान है, जहां लोगों का विश्वास अमिट सा हो गया है। कनक मंदिर ज्वेलर्स के संचालक शंकर सोनी ने बताया कि धनतेरस में लोग आभूषण खरीदना ज्यादा शुभ मानते हैं और इस बार पिछली बार से कहीं अधिक सोने-चांदी के आभूषण, चांदी के सिक्के, चांदी की मूर्तियों की जमकर बिक्री हुई। उन्होंने बताया कि हमारे प्रतिष्ठान में आईएसआई मार्का ज्वेलरी और आधुनिकतम डिजाईन के मनमोहक आभूषण महिलाओं को काफी पसंद आ रहे हैं और हम ग्राहकों की संतुष्टि को ही असली कमाई मानते हैं। इसीलिए हमारा ध्येय वाक्य है- स्वर्ण धन-सुरक्षित धन…। सोने में निवेश आज की जरूरत है और समय आने पर स्वर्ण धन से करेंसी धन तुरंत मिल जाता है। आटो बाजार एवं कपड़ा बाजार भी गुलजार
कोरबा में महिन्द्रा की गाड़ियों की बिक्री में जबरदस्त उछाल देखने को मिला। महिन्द्रा के नई वर्जन की गाड़ियां कोरबा के शो रूम आटो सेंटर टी पी नगर कोरबा में तुरंत उपलब्ध हो जाती हैं, जिसके कारण महिन्द्रा की गाड़ियां लोगों को पसंद आ रही हैं। महिन्द्रा की गाड़ियां सुरक्षित एवं मजबूत होने के साथ-साथ कम्फर्टेबल होती हैं और आज के दौर में महिन्द्रा गाड़ियों की बिक्री में काफी उछाल आ रहा है। दिवाली में लोग नए कपड़े पहनते हैं और आज धनतेरस में कपड़ों की खरीदी भी जमकर हुई। कपड़ा के कई बड़े-बड़े शो रूम ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं। बर्तन दुकानों में भी भीड़ देखी गई, क्योंकि जो लोग जेवर नहीं खरीद सकते, वे धनतेरस में बर्तन खरीदकर धनतेरस में पूजा करते हैं। सड़क पर रेलमपेल भीड़: पुलिस सड़क पर उतरी सड़क पर धनतेरस में रेलमपेल भीड़ देखी गई और कई जगह दुकानों के सामने पार्किंग न होने के कारण लोग अपनी गाड़ियां सड़क पर ही खड़ी करते देखे गए, जिसके कारण कई जगह जाम की स्थिति निर्मित हो गई। सड़क में यातायात व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए शहर में कोतवाली पुलिस, टी पी नगर में चौकी पुलिस, निहारिका क्षेत्र में सिविल लाईन पुलिस सड़क पर उतर कर व्यवस्था दुरूस्त करते नजर आई।
कोरबा। कोरबा प्रेस क्लब द्वारा डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफार्म की आड़ में हो रही कथित अनियमितताओं, आपराधिक गतिविधियों, व्यक्तिगत प्रताड़ना, भयादोहन (ब्लैकमेलिंग) और अवैध वसूली पर रोक लगाने के संबंध में एक कड़ा रुख अपनाया गया है। इस संबंध में कोरबा प्रेस क्लब के पदाधिकारियों द्वारा आज कलेक्टर कुणाल दुदावत और पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी को ज्ञापन सौंपा गया। इस दौरान कोरबा प्रेस क्लब के अध्यक्ष नौशाद खान, संरक्षक कमलेश यादव, उपाध्यक्ष राजकुमार शाह, सचिव दिनेश राज, उप सचिव हरीश तिवारी, कार्यकारिणी सदस्य नवाब हुसैन, राजेश मिश्रा (मिठ्ठू) सहित सम्माननीय सदस्य प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
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