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बिज़नस

कौन है दुनिया की सबसे ऊंची इमारत ‘Burj Khalifa’ का असली मालिक? जानिए हर साल कितनी होती है कमाई?

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दुबई, एजेंसी। दुनिया की सबसे ऊंची और आलीशान इमारत ‘बुर्ज खलीफा’ का नाम किसने नहीं सुना होगा? आसमान को छूती इस गगनचुंबी इमारत को देखने के लिए दुनिया भर से लोग दुबई पहुंचते हैं लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिरकार इस विशाल इमारत का असली मालिक कौन है? इसे बनाने में कितने पैसे खर्च हुए थे और यह हर साल कितनी कमाई करती है? आइए जानते हैं…

किसके पास है बुर्ज खलीफा का मालिकाना हक? 

बुर्ज खलीफा का मुख्य मालिकाना हक दुबई की सबसे बड़ी और मशहूर रियल एस्टेट कंपनी Emaar Properties के पास है। इस कंपनी की शुरुआत साल 1997 में हुई थी और इसके चेयरमैन मोहम्मद अलब्बार (Mohamed Alabbar) हैं। हालांकि पूरी इमारत का मूल ढांचा इमार प्रॉपर्टीज का है लेकिन इसके अंदर बने कई लग्जरी अपार्टमेंट्स और कमर्शियल ऑफिस स्पेस को दुनिया भर के बड़े बिजनेसमैन और अमीर लोगों ने खरीद रखा है। इसलिए वे अपने-अपने हिस्से के व्यक्तिगत मालिक हैं।

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शुरुआत में क्या था इस टावर का नाम?

शुरुआत में इस टावर का नाम ‘बुर्ज दुबई’ रखा गया था लेकिन साल 2010 में इसके उद्घाटन के समय इसका नाम बदलकर ‘बुर्ज खलीफा’ कर दिया गया। यह नाम संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के तत्कालीन राष्ट्रपति शेख खलीफा बिन जायद अल नाहयान के सम्मान में रखा गया था।

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सिर्फ 6 साल में बनकर हुई तैयार

आजकल जहां एक आम 20 मंजिला इमारत बनने में 7 से 8 साल लग जाते हैं, वहीं 828 मीटर ऊंचे और 163 मंजिलों वाले बुर्ज खलीफा को महज 6 साल में बनाकर खड़ा कर दिया गया था। इसका निर्माण कार्य साल 2004 में शुरू हुआ था और 2010 में इसे आम जनता के लिए खोल दिया गया। इसे बनाने में लगभग 1.5 अरब डॉलर (यानी 1.5 Billion Dollars) की भारी-भरकम लागत आई थी।

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ध्यान रहे इसमें सिर्फ टावर बनाने का खर्च शामिल है आसपास की जमीन और इंफ्रास्ट्रक्चर की कीमत अलग है। इसके निर्माण में एक साथ करीब 12,000 मजदूरों ने दिन-रात काम किया था। इसे सैमसंग Samsung C&T, एराबटेक Arabtec और बेसिक्स Besix जैसी कंपनियों ने मिलकर बनाया जबकि इसका शानदार डिजाइन आर्किटेक्ट एड्रियन स्मिथ ने तैयार किया था।

ऐसे होती है अरबों की कमाई

बुर्ज खलीफा की सबसे ज्यादा कमाई इसके ऑब्जर्वेशन डेक से होती है जहां से लोग खड़े होकर पूरे दुबई का खूबसूरत नजारा देखते हैं। यहां हर साल करीब 1.7 करोड़ पर्यटक (Tourists) आते हैं। यहां एंट्री की न्यूनतम टिकट लगभग 37 डॉलर है। केवल इस टिकट की बिक्री से ही सालाना करीब 62.1 करोड़ डॉलर की कमाई हो जाती है।

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इसके अलावा इमारत के अंदर मौजूद मशहूर ‘अरमानी होटल’ (Armani Hotel), आलीशान फ्लैटों से मिलने वाला किराया और वीआईपी कॉर्पोरेट ऑफिसों से भी करोड़ों डॉलर की इनकम होती है। टिकट बिक्री के अलावा अन्य माध्यमों से यह टावर हर साल करीब 15 करोड़ से 40 करोड़ डॉलर तक कमा लेता है।

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देश

पावर ग्रिड के निदेशक मंडल ने कर्ज सीमा बढ़ाकर 2.2 लाख करोड़ रुपए करने को मंजूरी दी

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नई दिल्ली, एजेंसी। सार्वजनिक क्षेत्र की पावर ग्रिड कॉरपोरेशन के निदेशक मंडल ने कंपनी की कर्ज लेने की सीमा 1.80 लाख करोड़ रुपए से बढ़ाकर 2.20 लाख करोड़ रुपए करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। कंपनी ने शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि निदेशक मंडल की शुक्रवार को हुई बैठक में यह मंजूरी दी गई। हालांकि, इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर आगामी वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में शेयरधारकों की मंजूरी के बाद लगेगी। 

निदेशक मंडल ने इसके अलावा बैंक ऑफ बड़ौदा से बाह्य वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) के जरिये 50 करोड़ अमेरिकी डॉलर तक की विदेशी मुद्रा जुटाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी। कंपनी ने कहा कि निदेशक मंडल ने उडुमलपेट-मदुरै 400 केवी एकल सर्किट (एस/सी) लाइन को 400 केवी क्वाड डबल सर्किट (डी/सी) लाइन में उन्नत/परिवर्तित करने की परियोजना को भी मंजूरी दी है। करीब 772.65 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना को आवंटन की तारीख से 30 महीने के भीतर, यानी 11 अगस्त, 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।  

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देश

दुनियाभर की सुस्त अर्थव्यवस्था के बीच दौड़ेगी इंडियन इकोनॉमी, Goldman Sachs का अनुमान

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मुंबई, एजेंसी। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंदी और भू-राजनीतिक तनाव के बादल छाए हुए हैं लेकिन भारत की विकास रफ्तार को लेकर अच्छी खबर सामने आई है। करीब 150 साल पुराने वैश्विक निवेश बैंक Goldman Sachs ने अनुमान जताया है कि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और महंगाई में कमी के चलते भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहेगी। बैंक ने भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाते हुए कहा है कि आने वाले समय में दुनिया की सुस्त अर्थव्यवस्था के बीच भी भारत सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रह सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, पहले जहां युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित व्यवधान को देखते हुए चालू वित्त वर्ष में भारत की GDP वृद्धि 6.1% रहने का अनुमान लगाया गया था, वहीं अब इसे बढ़ाकर 6.5% कर दिया गया है। बैंक का कहना है कि वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में आर्थिक गतिविधियां अपेक्षा से बेहतर रही हैं, जिससे विकास दर के अनुमान में सुधार हुआ है।

कच्चे तेल की कीमतों का अनुमान घटाया

Goldman Sachs ने कच्चे तेल के पूर्वानुमान में भी कटौती की है। बैंक के मुताबिक, वर्ष 2026 की तीसरी और चौथी तिमाही में कच्चे तेल की औसत कीमत 82 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान है, जबकि पहले यह अनुमान 92 डॉलर प्रति बैरल था। वहीं 2027 के लिए अनुमान 80 डॉलर से घटाकर 75 डॉलर प्रति बैरल कर दिया गया है।

भारतीय बास्केट के कच्चे तेल की कीमत भी हाल के दिनों में तेजी से घटी है। जून में यह घटकर करीब 86.31 डॉलर प्रति बैरल रही, जबकि 24 जून को इसका स्तर 70.71 डॉलर प्रति बैरल दर्ज किया गया।

महंगाई का अनुमान भी हुआ कम

Goldman Sachs ने भारत के महंगाई अनुमान को भी घटा दिया है। बैंक ने वित्त वर्ष के लिए महंगाई का अनुमान 5.1% से घटाकर 4.9% कर दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक यूरिया कीमतों में कमी आने से खाद सब्सिडी पर सरकार का बोझ कम हो सकता है। साथ ही तेल की कीमतों में गिरावट से सरकार पर राजकोषीय दबाव भी कम होने की संभावना है। हालांकि मौसम से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण मांग पर असर पड़ने की आशंका बनी हुई है।

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देश

Volkswagen का 4 फैक्ट्रियां बंद करने का प्लान, 1,00,000 लोग होंगे बेरोगजार

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बर्लिन, एजेंसी। यूरोप की दिग्गज ऑटोमोबाइल कंपनी फॉक्सवैगन AG कुछ फैक्ट्रियां बंद कर सकती है और कर्मचारियों की संख्या में भारी कटौती पर विचार कर रही हैं। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में हुई बोर्ड बैठक में कंपनी के CEO ओलिवर ब्लूम ने एक नई रणनीति पेश की। प्रस्तावित योजना के तहत कर्मचारियों की छंटनी का आंकड़ा बढ़ाकर करीब 1 लाख तक किया जा सकता है। फिलहाल Volkswagen Group में लगभग 6.57 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं। समूह के तहत Volkswagen के अलावा Porsche और Audi जैसे प्रीमियम ब्रांड भी शामिल हैं।

जर्मनी में 4 प्लांट बंद हो सकते हैं

रिपोर्ट के अनुसार, रणनीति में इस दशक के अंत तक जनरल ओवरहेड कॉस्ट में 11 अरब यूरो (12.5 अरब डॉलर) तक की कटौती करना और मीडियम टर्म में जर्मनी में 4 फैक्ट्रियां बंद करना भी शामिल है। इनमें नेकरसल्म में Audi के प्लांट के साथ-साथ हनोवर, ज्विकौ और एमडेन में फॉक्सवैगन के प्लांट शामिल हैं।

इसके अलावा कंपनी Volkswagen ब्रांड और उसके कंपोनेंट बिजनेस को अलग करने के विकल्प पर भी विचार कर रही है। लंबे समय से कम मुनाफे से जूझ रहे Volkswagen ब्रांड को अधिक लाभदायक और कुशल बनाने की दिशा में यह कदम अहम माना जा रहा है।

क्यों उठाने पड़ रहे हैं ये कदम?

फॉक्सवैगन इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रही है। अमेरिका के आयात शुल्क (टैरिफ), चीन में कमजोर मांग और यूरोप में BYD तथा Stellantis जैसी कंपनियों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने कंपनी पर दबाव बढ़ा दिया है। इसी वजह से लागत घटाने और कारोबार को अधिक प्रभावी बनाने की रणनीति तैयार की जा रही है।

पहले से जारी है कर्मचारियों की संख्या घटाने का अभियान

रिपोर्ट के अनुसार, करीब 28,000 कर्मचारी पहले ही स्वैच्छिक रूप से कंपनी छोड़ने पर सहमत हो चुके हैं। यह 2030 तक पूरे Volkswagen Group में 50,000 कर्मचारियों की संख्या कम करने की पहले घोषित योजना का हिस्सा है।

हालांकि, नई प्रस्तावित छंटनी योजना को कर्मचारी संगठनों का विरोध झेलना पड़ सकता है। Volkswagen के सुपरवाइजरी बोर्ड में आधी सीटें कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के पास हैं, जबकि जर्मनी का लोअर सैक्सनी राज्य भी बोर्ड में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और आमतौर पर कर्मचारी यूनियनों का समर्थन करता है। ऐसे में कंपनी के लिए इस योजना को लागू करना आसान नहीं होगा।

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