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छत्तीसगढ़

रायपुर : सहकारिता से बढ़ेगी किसानों की आय, विकसित छत्तीसगढ़ की नींव होगी मजबूत : मुख्यमंत्री साय

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सहकारिता मंत्रालय के पांच वर्ष पूर्ण होने पर राज्य स्तरीय सहकारी सम्मेलन आयोजित

162 करोड़ से अधिक की तेंदूपत्ता प्रोत्साहन राशि वितरण का शुभारंभ, 1352 नई सहकारी समितियों के गठन से गांवों तक पहुंचा सहकार का विस्तार

पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, वनोपज, मत्स्य पालन और ग्रामीण उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में भी सहकारिता को मिल रहा है बढ़ावा

किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और आत्मनिर्भरता का सबसे प्रभावी माध्यम बन रही है सहकारिता

उत्कृष्ट सहकारी समितियों को सहकार प्रेरणा पुरस्कार से किया गया सम्मानित, महिला स्व सहायता समूह को वितरित किया गया लाभांश

 सहकारिता से बढ़ेगी किसानों की आय, विकसित छत्तीसगढ़ की नींव होगी मजबूत : मुख्यमंत्री श्री साय
 सहकारिता से बढ़ेगी किसानों की आय, विकसित छत्तीसगढ़ की नींव होगी मजबूत : मुख्यमंत्री श्री साय
 सहकारिता से बढ़ेगी किसानों की आय, विकसित छत्तीसगढ़ की नींव होगी मजबूत : मुख्यमंत्री श्री साय

रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय का गठन देश के विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय है। यह निर्णय ‘सहकार से समृद्धि’ के संकल्प को साकार करने वाला है। डबल इंजन की सरकार छत्तीसगढ़ में सहकारिता के माध्यम से किसानों, वनवासियों, महिला समूहों और ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने तथा उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मंडपम में भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के पांच वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय सहकारी सम्मेलन एवं सहकारी सप्ताह कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। 

 सहकारिता से बढ़ेगी किसानों की आय, विकसित छत्तीसगढ़ की नींव होगी मजबूत : मुख्यमंत्री श्री साय
 सहकारिता से बढ़ेगी किसानों की आय, विकसित छत्तीसगढ़ की नींव होगी मजबूत : मुख्यमंत्री श्री साय

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर उत्कृष्ट समितियों को सहकार प्रेरणा पुरस्कार प्रदान किया तथा संग्रहण वर्ष 2023 के 7.14 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए 162 करोड़ रुपये से अधिक की प्रोत्साहन पारिश्रमिक राशि के वितरण का शुभारंभ किया।

            मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि मैं किसान का बेटा हूं और बचपन से ही सहकारिता से मेरा गहरा रिश्ता रहा है। तभी से मुझे विश्वास था कि सहकारिता के क्षेत्र में असीम संभावनाएं हैं। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘सहकार से समृद्धि’ का वही सपना धरातल पर साकार होता दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रथम कार्यकाल में उन्हें राज्यमंत्री के रूप में साथ काम करने का अवसर मिला और उन्होंने किसानों के प्रति प्रधानमंत्री की संवेदनशीलता तथा समर्पण को बहुत करीब से देखा है। किसानों के कल्याण के प्रति इसी प्रतिबद्धता के कारण प्रधानमंत्री ने कृषि मंत्रालय का दायरा बढ़ाते हुए उसका नाम ‘कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय’ किया, ताकि किसानों का समग्र विकास सरकार की प्राथमिकता बने। सहकारिता किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और आत्मनिर्भरता का सबसे प्रभावी माध्यम बन रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में सहकारिता क्षेत्र को नई दिशा मिली है और इसका लाभ सीधे किसानों एवं ग्रामीण परिवारों तक पहुंच रहा है। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि केंद्र सरकार केवल कृषि ही नहीं बल्कि पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, वनोपज, मत्स्य पालन और ग्रामीण उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में भी सहकारिता को मजबूत कर रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के सहयोग से प्रदेश में दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में व्यापक बदलाव दिखाई देने लगे हैं। राज्य सरकार पशुपालन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।
         
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पहले किसानों को खेती-किसानी के लिए 16 से 18 प्रतिशत दर पर ऋण लेना पड़ता था और भारी-भरकम ब्याज का बोझ उन्हें आर्थिक रूप से परेशान कर देता था। आज सहकारिता व्यवस्था और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से किसानों को बिना ब्याज ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष प्रदेश के 15 लाख से अधिक किसानों को 8 हजार करोड़ रुपये से अधिक का ऋण उपलब्ध कराया गया है, जिससे किसानों को खेती के लिए सुलभ वित्तीय सहायता मिल रही है और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। 
               
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जिस प्रकार दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व और सुरक्षा बलों के साहस से नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता मिली है, उसी प्रकार सहकारिता के माध्यम से भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा परिवर्तन लाया जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सहकारी सप्ताह के दौरान विषय विशेषज्ञों के मंथन से प्रदेश में सहकारिता के नए आयाम स्थापित होंगे और इसका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा।
             
सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के पांच वर्ष पूरे होना देश के लिए गौरव का विषय है। इस अवसर पर 29 जून से 06 जुलाई तक सहकारिता सप्ताह के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में छत्तीसगढ़ में सहकारिता के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हुए हैं और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सहकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना सहकारिता का मूल उद्देश्य है। 
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश की कोई भी पंचायत सहकारिता से वंचित न रहे, इस दिशा में कार्य करते हुए राज्य में 1352 नई सहकारी समितियों का गठन किया गया है।
                 इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने सहकारिता विभाग के ऑनलाइन पोर्टल का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से किसानों का पंजीयन पूरी तरह ऑनलाइन, पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से किया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री ने सहकारिता से जुड़े विभिन्न स्टालों का किया अवलोकन

            कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने विभिन्न सहकारी संस्थाओं द्वारा लगाए गए प्रदर्शनी स्टॉलों का अवलोकन किया और सहकारिता के माध्यम से किसानों, महिला स्व-सहायता समूहों तथा वनधन समितियों द्वारा किए जा रहे नवाचारों की सराहना की। उन्होंने हरित क्रांति आदिवासी सहकारी समिति जशपुर, महामाया बहुउद्देशीय सहकारी समिति कोरबा, बिलासा हैंडलूम एम्पोरियम, छत्तीसगढ़ हर्बल्स, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम, भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नाफेड), छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ, इफको तथा गंगा मैया दुग्ध उत्पादक संघ बालोद सहित विभिन्न संस्थाओं के स्टॉलों का अवलोकन कर उनके कार्यों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में 5 नवीन पैक्स समितियों को माइक्रो एटीएम वितरित किए तथा छत्तीसगढ़ हर्बल्स के पांच नए उत्पादों का लोकार्पण किया। उन्होंने उत्कृष्ट तेंदूपत्ता संग्राहकों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए, वन-धन समितियों की हैंडबुक का विमोचन किया, महिला स्व-सहायता समूहों को लाभांश वितरित किया तथा विभिन्न हितग्राहियों को सामग्री, प्रोत्साहन राशि और केसीसी ऋण वितरित किए। 

              कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, अपेक्स बैंक के प्राधिकृत अधिकारी केदारनाथ गुप्ता, छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ के अध्यक्ष रूपसाय सलाम, छत्तीसगढ़ तेलघानी विकास बोर्ड के अध्यक्ष जितेंद्र साहू, प्राधिकृत अधिकारी विपणन संघ शशिकांत द्विवेदी, सहकार भारती के कनिराम, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी संघ के प्राधिकृत अधिकारी सौरभ शर्मा, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी अंत्यावसायी वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार बेसरा, छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा विकास एवं विपणन सहकारी संघ के अध्यक्ष भोजराम देवांगन, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अध्यक्षगण, सहकारिता सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, आयुक्त सहकारिता रमेश शर्मा सहित जनप्रतिनिधि, विभिन्न सहकारी संस्थाओं के पदाधिकारी, किसान एवं बड़ी संख्या में हितग्राही उपस्थित थे।

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कोरबा

सीएसईबी चौक पर भारी वाहन की टक्कर:कोरबा में एक्टिवा सवार की मौत, वाहन छोड़कर भागा ड्राइवर, ट्रैफिक व्यवस्था पर उठे सवाल

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कोरबा। कोरबा जिले में सड़क हादसे थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। शुक्रवार (3 जुलाई) को सीएसईबी चौकी के सामने एक तेज रफ्तार भारी वाहन ने एक्टिवा सवार को टक्कर मार दी। हादसे में युवक की मौके पर ही मौत हो गई। दुर्घटना के बाद चालक वाहन छोड़कर फरार हो गया।

घटना सीएसईबी चौक पर हुई, जहां आमतौर पर ट्रैफिक सिग्नल और पुलिसकर्मी तैनात रहते हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, तेज रफ्तार भारी वाहन ने अचानक एक्टिवा को अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि एक्टिवा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।

मृतक की हुई पहचान

मृतक की पहचान खरमोर निवासी व्यास राम के रूप में हुई है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। क्षतिग्रस्त एक्टिवा को भी मौके से हटाया गया। पुलिस ने मृतक के आधार कार्ड के जरिए परिजनों को घटना की सूचना दी।

ट्रैफिक व्यवस्था पर उठे सवाल

घटना के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधि लक्ष्मण श्रीवास ने ट्रैफिक व्यवस्था पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि सीएसईबी चौक शहर के सबसे व्यस्त चौराहों में से एक है, जहां हमेशा पुलिस और ट्रैफिक सिग्नल मौजूद रहते हैं। इसके बावजूद भारी वाहन का शहर के भीतर प्रवेश कर हादसा करना गंभीर लापरवाही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि शहर में ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। सोनालिया चौक, पवन टॉकीज और शारदा विहार फाटक जैसे इलाकों में भी भारी वाहनों और रेत से भरे ट्रैक्टरों की आवाजाही से लगातार हादसे हो रहे हैं।

सख्त कार्रवाई की मांग

लक्ष्मण श्रीवास ने प्रशासन से सवाल किया कि नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों और मालिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही। उन्होंने शहर में भारी वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही पर रोक लगाने और जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

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कोरबा

कोरबा में नशेड़ी ट्रेलर चालकों का तांडव:एक रात में 3 हादसे, बीच सड़क ट्रेलर छोड़कर भागा, मकान में गाड़ी और नाले में पलटा ट्रेलर

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कोरबा। कोरबा जिले में गुरुवार देर रात नशे में धुत ट्रेलर चालकों ने एक के बाद एक तीन हादसे कर दिए। अलग-अलग जगह हुई इन घटनाओं में कई लोगों की जान बाल-बाल बच गई। गुस्साए लोगों ने कुछ चालकों की पिटाई कर उन्हें पुलिस के हवाले कर दिया।

ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक, इस साल जनवरी से अब तक शराब पीकर वाहन चलाने के 1014 मामलों में 1 करोड़ 10 लाख 40 हजार रुपये से ज्यादा का जुर्माना वसूला जा चुका है।

बीच सड़क ट्रेलर छोड़कर भागा चालक

पहली घटना मानिकपुर चौकी क्षेत्र के शारदा विहार पेट्रोल पंप के पास हुई। यहां नशे में धुत ट्रेलर चालक वाहन को बीच सड़क पर खड़ा कर चाबी लगी हालत में छोड़कर चला गया। इससे सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई और घंटों जाम लगा रहा।

नाराज लोगों ने चालक को पकड़कर उसकी पिटाई की और पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची मानिकपुर पुलिस ने ट्रेलर हटवाकर यातायात बहाल कराया।

कोयला लदी ट्रेलर मकान में घुसी

दूसरी घटना रामनगर बाईपास मार्ग पर हुई। शराब के नशे में चालक और हेल्पर तेज रफ्तार कोयला लदी ट्रेलर पर नियंत्रण खो बैठे। ट्रेलर सड़क किनारे बने एक मकान में जा घुसी और आंगन में लगे पेड़ से टकराकर रुकी। राहत की बात यह रही कि हादसे के समय घर में मौजूद लोग सुरक्षित बच गए।

20 फीट गहरे नाले में गिरी ट्रेलर

तीसरी घटना कोतवाली थाना क्षेत्र के मानिकपुर बाईपास मार्ग पर हुई। यहां एक तेज रफ्तार ट्रेलर अनियंत्रित होकर करीब 20 फीट गहरे नाले में जा गिरी। हादसे में चालक को मामूली चोटें आईं। पुलिस का कहना है कि नाले की गहराई को देखते हुए यह बड़ा हादसा हो सकता था।

1014 मामलों में 1.10 करोड़ से ज्यादा जुर्माना

ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। जनवरी से अब तक ऐसे 1014 मामलों में कार्रवाई करते हुए 1 करोड़ 10 लाख 40 हजार रुपये से अधिक का जुर्माना वसूला गया है।

अधिकारियों का कहना है कि नशे में वाहन चलाना सड़क हादसों की बड़ी वजह बना हुआ है, इसलिए आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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छत्तीसगढ़

हाईकोर्ट बोला- जनहित में है शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण:शासन के आदेश पर मुहर, छत्तीसगढ़ विद्यालयीन कर्मचारी संघ समेत 24 से ज्यादा शिक्षकों की याचिकाएं खारिज

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बिलासपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस बीडी गुरु ने प्रदेशभर के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण (रैशनलाइजेशन) की नीति को सही ठहराया है। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार का यह फैसला जनहित में लिया गया है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ विद्यालयीन शिक्षक कर्मचारी संघ समेत प्रदेशभर के शिक्षकों की ओर से दायर 24 से ज्यादा याचिकाओं को खारिज कर दिया है।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि स्कूलों में शिक्षकों के असमान वितरण को दूर करने के लिए सरकार का यह कदम बड़े जनहित में है। ट्रांसफर और पोस्टिंग पूरी तरह सरकार के प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र का हिस्सा हैं। किसी भी सरकारी कर्मचारी को एक ही स्थान पर बने रहने का कोई संवैधानिक या कानूनी अधिकार नहीं है।

युक्तियुक्तकरण नीति को दी गई थी चुनौती

राज्य सरकार ने 2 अगस्त 2024 को स्कूलों और शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण के लिए दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसके बाद अप्रैल 2025 में इसके क्रियान्वयन के आदेश जारी किए गए। इस नीति के तहत अतिशेष (सरप्लस) शिक्षकों को शिक्षकविहीन और एकल-शिक्षकीय स्कूलों में पदस्थ करने का प्रावधान किया गया।

इस नीति के खिलाफ दुर्ग, कोंडागांव, कांकेर, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, रायपुर, कोरबा, बिलासपुर और महासमुंद समेत कई जिलों के शिक्षकों और शिक्षक संगठनों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं।

नियमों की अनदेखी का लगाया आरोप

याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि यह नीति शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा-25 के खिलाफ है, जिसमें स्कूलवार छात्र-शिक्षक अनुपात बनाए रखने का प्रावधान है। उनका आरोप था कि अतिशेष शिक्षकों की पहचान करते समय वरिष्ठता की अनदेखी की गई और ‘लास्ट इन, फर्स्ट आउट’ नियम को यांत्रिक तरीके से लागू किया गया।

राज्यपाल के नाम से आदेश जारी नहीं होने का भी उठाया मुद्दा

शिक्षकों की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि यह आदेश संविधान के अनुच्छेद-166 के तहत राज्यपाल के नाम से विधिवत जारी नहीं किया गया, इसलिए इसे वैध नीति नहीं माना जा सकता।

सरकार ने रखा अपना पक्ष

राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि युक्तियुक्तकरण का प्रस्ताव 9 जुलाई 2024 को मंत्रिपरिषद की बैठक में मंजूर किया गया था। इसके बाद 16 जुलाई 2024 को राज्यपाल के नाम से विभागीय आदेश जारी किया गया।

सरकार ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता कोई ऐसा स्कूलवार आंकड़ा प्रस्तुत नहीं कर सके, जिससे यह साबित हो कि छात्र-शिक्षक अनुपात का उल्लंघन हुआ है।

हाईकोर्ट ने कहा- आदेश पूरी तरह वैध

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सरकार का 16 जुलाई 2024 का आदेश कैबिनेट की मंजूरी के बाद राज्यपाल के नाम से जारी किया गया था। इसलिए अदालत ने अनुच्छेद 166 के उल्लंघन की दलील को खारिज कर दिया।

अदालत ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता ऐसे कोई ठोस आंकड़े या डेटा पेश नहीं कर सके, जिससे यह साबित हो कि इस नीति से किसी स्कूल में छात्र-शिक्षक अनुपात प्रभावित हुआ है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक कोई सरकारी नीति पूरी तरह अवैध, मनमानी या दुर्भावनापूर्ण न हो, तब तक उसमें न्यायिक हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।

16 हजार से ज्यादा शिक्षकों और प्राचार्यों का हुआ युक्तियुक्तकरण

प्रदेश के ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी है। कई स्कूल ऐसे हैं जहां या तो कोई शिक्षक नहीं है या केवल एक ही शिक्षक के भरोसे पढ़ाई चल रही है। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। वहीं, शहरी क्षेत्रों के कई स्कूलों में जरूरत से अधिक शिक्षक पदस्थ हैं।

इसी असमानता को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने अतिशेष शिक्षकों को शिक्षकविहीन और एकल-शिक्षकीय स्कूलों में पदस्थ करने का फैसला लिया था। हाई कोर्ट ने भी अपने फैसले में कहा कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना राज्य का संवैधानिक दायित्व है और इस उद्देश्य से उठाए गए उचित कदमों में अदालत हस्तक्षेप नहीं कर सकती।

बता दें कि युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के तहत प्रदेश में 16,165 शिक्षकों और प्राचार्यों का स्थानांतरण किया गया है। इसके अंतर्गत राज्य की कुल 10,463 शालाओं का युक्तियुक्तकरण किया गया, जिनमें 10,297 ऐसे स्कूल शामिल हैं जो एक ही परिसर में संचालित हो रहे हैं।

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