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विदेश

ट्रंप के पहुंचते ही NATO का बड़ा ऐलान: रक्षा क्षमता बढ़ाने पर अरबों डॉलर करेगा खर्च, पुराने AWACS विमानों की होगी विदाई

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अंकारा, एजेंसी। अमेरिका नीत सैन्य गठबंधन उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) ने मंगलवार को अरबों अमेरिकी डॉलर की हथियार खरीद योजना की घोषणा की। नाटो ने यह घोषणा ऐसे समय की जब मंगलवार दोपहर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप संगठन के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए तुर्किये के अंकारा शहर पहुंचे। माना जा रहा है कि नाटो ने यह घोषणा अस्थिर स्वभाव वाले ट्रंप को खुश करने की कोशिश के तहत की है। अंकारा में अमेरिकी राष्ट्रपति के विमान ‘एयर फोर्स वन’ के उतरने से ठीक पहले नाटो ने अरबों डॉलर के कई सैन्य परियोजनाओं की घोषणा की।

एक संगठन के तौर पर नाटो के पास अपना कोई हथियार नहीं है। ये हथियार इसके 32 सदस्य देशों की संपत्ति हैं। हालांकि नाटो के पास 14 अवाक्स पूर्व चेतावनी रडार निगरानी विमानों का बेड़ा है जो लगभग 50 साल पुराने हैं, और साथ ही कुछ नए निगरानी ड्रोन भी हैं। पुराने हो चुके विमानों को बदलने के लिए मंगलवार को एक समझौते की घोषणा की गई। स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन ने घोषणा की कि स्वीडिश कंपनी साब 10 देशों के समूह को 10 नए ग्लोबलआई निगरानी विमान की आपूर्ति करेगी।

कुछ परियोजनाओं का वित्तपोषण यूरोपीय संघ द्वारा स्थापित किफायती ऋण प्रणाली से किया जाएगा। इस प्रणाली के तहत पूंजी बाजार से 170 अरब अमेरिकी डॉलर तक की रकम जुटाई जाएगी। संगठन के महासचिव मार्क रुटे ने कहा, ”हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हम अपनी आर्थिक ताकत को सैन्य क्षमताओं में बदलें और धन का इस्तेमाल रक्षा परियोजनाओं से लेकर ड्रोन, मिसाइल और इंटरसेप्टर आदि के लिए करें।”

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मोदी-सुबियांतो ने बड़े रक्षा समझौते पर लगाई मुहर, इंडोनेशिया को ब्रह्मोस मिसाइल देगा भारत

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जकार्ता, एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच मंगलवार को हुई वार्ता में इंडोनेशियाई सैन्य बलों को ब्रह्मोस मिसाइलों की आपूर्ति, समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखला को सुदृढ़ बनाने पर सहमति बनी। दोनों पक्षों ने महत्वपूर्ण खनिज, प्रौद्योगिकी, खाद्य सुरक्षा, दवाओं और समुद्री सुरक्षा सहित कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा देने के लिए कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए। मोदी 2018 की भारत-इंडोनेशिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत व्यापार तथा सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने के उद्देश्य से तीन देशों की अपनी यात्रा के पहले चरण के तहत सोमवार को जकार्ता पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया।

ऐसा समझा जाता है कि दोनों देशों के रक्षा संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में इंडोनेशिया ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान इस हथियार की सफलता के बाद हवा से हवा में प्रहार करने वाली ‘अस्त्र’ मिसाइलों का भारत से आयात करने का फैसला किया है। महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने के लिए, भारत ने इंडोनेशिया में इस्पात, निकल और दुलर्भ स्थायी चुंबकों के निर्माण में निवेश करने का फैसला किया। भारत और इंडोनेशिया ने सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सबांग बंदरगाह का संयुक्त रूप से विकास करने पर भी सहमति जताई। यह बंदरगाह मलक्का जलडमरूमध्य के निकट स्थित है और भारत की ग्रेट निकोबार बंदरगाह परियोजना से लगभग 100 मील की दूरी पर है।

वार्ता के बाद अपने मीडिया बयान में मोदी ने कहा, ”2018 में बनी हमारी व्यापक रणनीतिक साझेदारी आज एक नयी उड़ान ले रही है। हम विकास, सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, संस्कृति और शिक्षा.. हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा रहे हैं।” उन्होंने कहा, ”मुझे विश्वास है, आज से भारत-इंडोनेशिया साझेदारी का एक सुनहरा अध्याय शुरू होगा।” प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच बढ़ता विश्वास द्विपक्षीय रक्षा, सुरक्षा और समुद्री सहयोग को मजबूत कर रहा है। उन्होंने कहा, ”आज हमने रक्षा आदान-प्रदान, आपदा प्रबंधन और औद्योगिक सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनाई।” मोदी ने इंडोनेशिया में भारतीय प्रबंधन संस्थान-बेंगलुरु का एक परिसर स्थापित करने के निर्णय की भी घोषणा की। उन्होंने कहा, ”हमें बहुत खुशी है कि भारत का UPI इंडोनेशिया की भुगतान प्रणाली के साथ जुड़ने जा रहा है।

इससे व्यापार सुगमता और यात्रा सुगमता, दोनों को ही बल मिलेगा।” दोनों पक्षों ने समुद्री अर्थव्यवस्था, समुद्री व्यापार और बंदरगाह विकास के क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने का फैसला किया। प्रधानमंत्री और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति ने पश्चिम एशिया की स्थिति सहित विभिन्न वैश्विक चुनौतियों पर भी चर्चा की। मोदी ने कहा, ”वैश्विक उथल-पुथल के इस दौर में भारत का मानना है कि संवाद और कूटनीति की भूमिका, पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।” उन्होंने कहा, ”फलस्तीन के विषय पर, हम द्वि-राष्ट्र समाधान और दीर्घकालिक शांति का समर्थन करते हैं।”  

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देश

PM मोदी इंडोनेशिया पहुंचे, फाइटर जेट्स ने एस्कॉर्ट किया

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देश की 85% आबादी मुस्लिम, फिर भी गरुड़ एयरलाइन, नोट पर गणेश की तस्वीर छपी

जकार्ता, एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को इंडोनेशिया पहुंचे। सीमा पर पहुंचते ही मेजबान देश के फाइटर जेट्स ने उनके विमान को एस्कॉर्ट किया। प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी का यहां तीसरा दौरा है।

एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने उनका स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच होने वाली द्विपक्षीय बैठक में करीब रू.2,500 करोड़ की ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल डील पर मुहर लगने की संभावना है।

पीएम मोदी इंडोनेशिया के सबसे बड़े हिंदू मंदिर प्रम्बानन भी जाएंगे। 9वीं शताब्दी में बना यह मंदिर भगवान शिव, विष्णु और ब्रह्मा को समर्पित है और यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है।

इंडोनेशिया दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश है, लेकिन उसकी सांस्कृतिक विरासत पर हिंदू-बौद्ध सभ्यता की गहरी छाप दिखाई देती है। यहां रामलीला होती है, गरुड़ एयरलाइन है और नोट पर भगवान गणेश की तस्वीर भी छप चुकी है।

इंडोनेशिया का साबंग पोर्ट भारत के लिए अहम

इंडोनेशिया का साबंग पोर्ट अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के बेहद करीब है। भारत और इंडोनेशिया ने 2018 में प्रधानमंत्री मोदी की जकार्ता यात्रा के दौरान साबंग पोर्ट और आसपास समुद्री सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई थी। इसके तहत पोर्ट के विकास, समुद्री संपर्क, लॉजिस्टिक सहयोग और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

इंडोनेशिया भारत से ब्रह्मोस खरीदने वाला दूसरा देश बन सकता है

भारत और इंडोनेशिया के बीच करीब ₹2,500 करोड़ की ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सिस्टम की संभावित डील इस यात्रा का सबसे अहम एजेंडा मानी जा रही है। अगर समझौते पर मुहर लगती है तो फिलीपींस के बाद इंडोनेशिया ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने वाला दूसरा विदेशी ग्राहक बन सकता है।

ब्रह्मोस मिसाइल का विकास भारत के DRDO और रूस की ‘एनपीओ मशिनोस्ट्रोयेनिया’ के संयुक्त उपक्रम ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने किया है। यह दुनिया की सबसे तेज ऑपरेशनल सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में गिनी जाती है।

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अमेरिका में आजादी के 250 साल का जश्न:ट्रम्प बोले- अमेरिका को कम्युनिज्म नहीं चाहिए, हमने इसके खिलाफ दुनियाभर में जंग लड़ी

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वॉशिंगटन, एजेंसी। अमेरिका ने शनिवार को आजादी के 250 साल पूरे होने का जश्न मनाया। इस मौके पर देशभर में भव्य समारोह आयोजित किए।

मुख्य कार्यक्रम वॉशिंगटन डीसी के नेशनल मॉल में हुआ, जहां राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने राष्ट्र को संबोधित किया। बारिश और आंधी-तूफान के कारण कार्यक्रम में देरी हुई, लेकिन मौसम साफ होने के बाद समारोह शुरू हुआ।

अपने संबोधन में ट्रम्प ने कम्युनिज्म पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “हम अपने देश में कम्युनिस्टों को नहीं चाहते। कम्युनिज्म हमेशा हारता आया है और आगे भी हारेगा। यह अमेरिकी व्यवस्था के बिल्कुल विपरीत है।” ट्रम्प ने कहा कि अमेरिकी सैनिकों ने दुनिया भर में कम्युनिज्म के खिलाफ लड़ाई लड़ी, ताकि यह विचारधारा कभी अमेरिका के भीतर जगह न बना सके।

भाषण के बाद नेशनल मॉल में करीब 40 मिनट तक रिकॉर्ड आतिशबाजी हुई। इस दौरान 8.5 लाख से ज्यादा फायरवर्क्स हुए। व्हाइट हाउस ने इसे अमेरिका के इतिहास का सबसे बड़ा स्वतंत्रता दिवस फायरवर्क शो बताया।

अमेरिका की आजादी के 250 साल के जश्न की 5 बड़ी बातें

  • वॉशिंगटन डीसी में हुई आतिशबाजी में 8.5 लाख गोले दागे गए। यह करीब 40 मिनट तक चली।
  • देश के सभी 50 राज्यों में परेड, एयर शो, कॉन्सर्ट और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुए। न्यूयॉर्क में जहाजों की परेड निकली, जिसमें भारत समेत दुनिया भर से आए जहाज शामिल हुए।
  • फिलाडेल्फिया में टाइम कैप्सूल जमीन में दफन किया गया। इसे 250 साल बाद खोला जाएगा। इसमें आईफोन, कोका-कोला समेत सभी राज्यों के आम लोगों से जुड़ी चीजें रखी गईं।
  • राष्ट्रपति ट्रम्प ने वॉशिंगटन के नेशनल मॉल से देश को संबोधित किया। मंच पर नासा के आर्टेमिस-II मिशन के अंतरिक्ष यात्री और पूर्व सैनिक भी मौजूद रहे।
  • अमेरिका-250 कमिशन ने इस समारोह की तैयारी 2016 से ही शुरू कर दी थी। अमेरिकी कांग्रेस ने इसके लिए 150 मिलियन डॉलर (करीब रू.1,250 करोड़) का फंड मंजूर किया। इसके अलावा निजी कंपनियों ने भी फंडिंग की।
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