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कोरबा

बाड़ी में किसान ने लगाए चंदन के 1 हजार पौधे

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कोरबा। जिले के किसान अब पारंपरिक खेती के साथ ही पेड़, पौधों से भी आय बढ़ाने के लिए आगे आ रहे हैं। वन विभाग किसान वृक्ष मित्र योजना के तहत चंदन की खेती को बढ़ावा दे रहा है। ग्राम धौराभाठा के किसान अर्जुन सिंह कंवर की बाड़ी में लगाए गए करीब 1 हजार चंदन पौधे लहलहा रहे हैं। इसकी खुशबू दूर तक बिखरने लगी है। इस वजह से और भी किसान चंदन के पौधे लगाने आगे आ रहे हैं।

वन परिक्षेत्र पाली के धौराभाठा निवासी अर्जुन सिंह कंवर ने अगस्त 2024 में किसान वृक्ष मित्र योजना के तहत चंदन पौधों का रोपण किया था। वर्तमान में पौधों की उत्कृष्ट वृद्धि और जीवितता दर यह साबित कर रही है कि उन्होंने संरक्षण, सिंचाई और नियमित देखरेख पर विशेष ध्यान दिया है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार अर्जुन की मेहनत और समर्पण के कारण चंदन की खेती का यह माडल अन्य किसानों के लिए भी उदाहरण बन गया है। चंदन की खेती के प्रति किसानों का रुझान लगातार बढ़ रहा है। चंदन देश की सबसे मूल्यवान लकड़ी में शामिल है।

इसकी फसल तैयार होने में लगभग 12 से 15 वर्ष का समय लगता है, इसकी लकड़ी और तेल का बाजार मूल्य काफी अधिक होता है। यही कारण है कि केंद्र सरकार भी सफेद चंदन की खेती को प्रोत्साहित कर रही है। कटघोरा वनमंडल की ओर से इस वर्ष मानसून सत्र में 2500 से अधिक चंदन पौधों के रोपण की तैयारी की गई है, ताकि अधिक से अधिक किसानों को इस लाभकारी खेती से जोड़ा जा सके। इस वर्ष भी विभाग की ओर से पाली के हाईटेक नर्सरी में पौधे तैयार किए जा रहे हैं, जिसे किसानो को प्रदाय किया जाएगा।

किसानों को किसान वृक्ष योजना के तहत व्यवसायिक रूप से चंदन, सागौन की खेती से जोड़ा जा रहा है। दीर्घकालिक आय के विकल्प वाले इन पौधों से किसान आगामी समय में लाभांवित होंगे।

– कुमार निशांत, डीएफओ वन मंडल कटघोरा

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कोरबा

विश्व साइकिल दिवस पर स्वस्थ जीवन व पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती साइकिल रैली संपन्न

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बच्चों से लेकर अधिकारियों ने उत्साह से लिया हिस्सा

कोरबा। विश्व साइकिल दिवस के अवसर पर रविवार को जिला प्रशासन एवं खेल एवं युवा कल्याण विभाग, कोरबा द्वारा ‘‘रविवार साइकिल के नाम’’ अभियान के अंतर्गत साइकिल रैली का आयोजन किया गया। रैली का शुभारंभ एसईसीएल वालीबॉल मैदान से हुआ, जो मुड़ापार बाजार चौक, डीएवी विद्यालय मार्ग, हेलिपैड, घंटाघर तथा हनुमान मंदिर (सुभाष ब्लॉक कॉलोनी) होते हुए जी.एम. परिसर के मार्ग से पुनः एसईसीएल वॉलीबॉल मैदान पहुंचकर संपन्न हुई।

साइकिल रैली में पुलिस विभाग से रक्षित निरीक्षक अनंत राम पैकरा, नगर पालिक निगम सचिव रामेश्वर सिंह, वॉलीबॉल संघ से सुशील गर्ग, स्काउट-गाइड प्रभारी सुश्री उत्तरा कैवर्त एवं श्री दिगंबर सहित विभिन्न खेल संघों के पदाधिकारी, स्काउट-गाइड सदस्य, पुलिस विभाग, स्वास्थ्य विभाग, नगर पालिक निगम, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया तथा अन्य विभागों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

रैली में स्कूली बच्चों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों सहित लगभग 250 लोगों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम का उद्देश्य नागरिकों को साइकिल उपयोग के प्रति जागरूक करना, स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनसामान्य को प्रेरित करना था।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में वॉलीबॉल संघ, व्यायाम शिक्षकों, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस विभाग तथा अन्य सहयोगी संस्थाओं का विशेष योगदान रहा।

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कोरबा

अनुभव और आधुनिक तकनीक का संगम – कृषक मान सिंह कंवर ने सराही नई  तकनीकें, बेहतर सुविधाओं से सशक्त हो रहे किसान

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समय पर खाद-बीज और उर्वरकों की उपलब्धता से खेती हुई आसान, नैनो उर्वरकों को बताया लाभकारी

कोरबा। कोरबा जिले के ग्राम नवापारा निवासी अनुभवी कृषक मान सिंह कंवर वर्षों से कृषि कार्य से जुड़े हुए हैं। लगभग साढ़े चार एकड़ भूमि में खेती करने वाले श्री कंवर के लिए कृषि केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि उनके परिवार की आर्थिक और सामाजिक मजबूती का आधार भी रही है। लंबे अनुभव के आधार पर वे बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में कृषि के क्षेत्र में उल्लेखनीय सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिले हैं।

उन्होंने कहा कि पहले किसानों को खेती के लिए आवश्यक संसाधनों, खाद, बीज और उर्वरकों की उपलब्धता में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब शासन की किसान हितैषी योजनाओं और बेहतर व्यवस्थाओं के कारण स्थिति काफी बदल चुकी है। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा किसानों को समय पर आवश्यक कृषि आदान सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे खेती की तैयारी सुगमता से हो रही है। उन्होंने बताया कि खरीफ सीजन की शुरुआत में किसानों को खाद, बीज एवं उर्वरक सरल प्रक्रिया के माध्यम से प्राप्त हो रहे हैं, जिससे उन्हें अनावश्यक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ रहा है।
श्री कंवर ने कहा कि वर्तमान में खेती की जिम्मेदारी मुख्य रूप से उनके बच्चों द्वारा संभाली जा रही है, लेकिन बढ़ती उम्र के बावजूद उनका खेती के प्रति उत्साह और लगाव आज भी बना हुआ है। वे नियमित रूप से खेती-किसानी से जुड़े विषयों पर जानकारी लेते हैं और नई तकनीकों को अपनाने के लिए परिवार को प्रेरित करते हैं।
उन्होंने किसानों से आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने का आग्रह करते हुए कहा कि समय के साथ बदलती तकनीकों को स्वीकार करना आवश्यक है। इससे उत्पादन क्षमता बढ़ती है और खेती अधिक लाभकारी बनती है। नैनो उर्वरकों के संबंध में उन्होंने कहा कि यह किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हो रहे हैं। इनके उपयोग से कम लागत में बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं, फसलों की वृद्धि में सहायता मिलती है तथा पारंपरिक उर्वरकों की तुलना में इनका उपयोग अधिक सुविधाजनक और प्रभावी है। साथ ही नैनो उर्वरक मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखने में भी सहायक हैं।

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कुसमुंडा

विशाल मजदूर एवं भू-विस्थापित महासभा 12 जून को कुसमुंडा में, समान काम-समान वेतन की उठेगी बुलंद आवाज

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RCWF के प्रोफेसर भागवत प्रसाद दुबे के नेतृत्व में कोयला खदानों के 12 जोनों से जुटेंगे हजारों ठेका श्रमिक और भू-विस्थापित

अशोक पटेल, संतोष चौहान, विनोद सारथी और गोविंदा सारथी ने गांवों में पहुंचकर भरी हुंकार, एकजुटता की अपील

कोरबा/कुसमुंडा। कोयलांचल क्षेत्र के ठेका श्रमिकों और भू-विस्थापितों के हक और अधिकारों की रक्षा के लिए आगामी 12 जून 2026 (शुक्रवार) को कुसमुंडा के महतरी अंगना में एक विशाल महासभा का आयोजन होने जा रहा है। इस महासभा का मुख्य एजेंडा समान काम समान वेतन और स्थानीय भू-विस्थापितों को उनका वाजिब हक दिलाना है ।

इस महा-आयोजन को सफल बनाने के लिए अशोक पटेल, संतोष चौहान, विनोद सारथी और गोविंदा सारथी लगातार जमीनी स्तर पर सक्रिय हैं। इन नेताओं ने क्षेत्र के विभिन्न गांवों और आउटसोर्सिंग कंपनियों में ठेका श्रमिकों व भू-विस्थापितों के बीच पहुंचकर सघन जनसंपर्क किया और चर्चा-परिचर्चा के माध्यम से उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक किया ।

शोषक ताकतों के खिलाफ एकजुटता का आह्वान

इस विशाल महासभा का नेतृत्व राष्ट्रीय कालरी वर्कर्स फेडरेशन (RCWF) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रोफेसर भागवत प्रसाद दुबे कर रहे हैं। महासभा की तैयारियों को लेकर प्रोफेसर दुबे ने सभी ठेका श्रमिकों और भू-विस्थापितों से एकजुट होने की भावुक और पुरजोर अपील की है ।

दुबे ने कहा मजदूरों और भू-विस्थापितों के साथ लंबे समय से हो रहे शोषण के खिलाफ अब आर-पार की लड़ाई का वक्त आ गया है। हमें आज संघर्ष की राह चुननी होगी, ताकि हमारी आने वाली पीढ़ी का भविष्य उज्जवल, सुरक्षित और बेहतर बन सके। यह महासभा केवल एक बैठक नहीं बल्कि हमारे हक की क्रांति की शुरुआत है ।

12 जोनों से उमड़ेगा जनसैलाब

आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि इस महासभा में पूरे कोयला खदान क्षेत्र के सभी 12 जोनों के ठेका मजदूर और भू-विस्थापित हजारों की संख्या में शामिल होने जा रहे हैं। श्रमिक नेताओं ने बताया कि इस कार्यक्रम के माध्यम से मजदूर और विस्थापित अपनी सामूहिक ताकत और एकजुटता का पुरजोर इजहार करेंगे, जिससे प्रबंधन और शोषक ताकतों को उनकी मांगें मानने पर मजबूर होना पड़े ।

प्रमुख मांगें जिन पर होगी चर्चा

समान काम के लिए समान वेतन का नियम सख्ती से लागू हो भू-विस्थापितों को रोजगार उचित मुआवजा और पुनर्वास की बेहतर सुविधाएं मिलें ठेका श्रमिकों का आर्थिक व मानसिक शोषण तुरंत बंद हो ।

आयोजन समिति ने क्षेत्र के समस्त प्रबुद्ध नागरिकों श्रमिक भाइयों और विस्थापित परिवारों से अपील की है कि वे 12 जून को शनिवार के दिन ठीक 3:00 बजे समय पर कुसमुंडा महतरी अंगना पहुंचकर इस महासभा को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाएं ।

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