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छत्तीसगढ़

बिना मान्यता एडमिशन के विज्ञापन पर हाईकोर्ट सख्त:5 स्कूलों को नोटिस जारी, शिक्षा सचिव से मांगा पर्सनल एफिडेविट, पुराने आदेशों पर भी मांगी रिपोर्ट

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रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने बिना मान्यता वाले स्कूलों के एडमिशन विज्ञापन के मामले में सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को इस मामले में पर्सनल एफिडेविट दाखिल करने का आदेश दिया है। साथ ही संबंधित स्कूल को पक्षकार बनाते हुए नोटिस जारी किया गया है।

मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई। यह सुनवाई जनहित याचिका (WPPIL No. 22/2016) में इंटरवीनर विकास तिवारी की ओर से उठाए गए मुद्दों पर की गई।

शिकायतों पर कार्रवाई नहीं, कोर्ट ने मांगी रिपोर्ट

सुनवाई के दौरान इंटरवीनर ने कोर्ट को बताया कि उनकी शिकायतों को 5 फरवरी 2026 को लोक शिक्षण संचालनालय ने दुर्ग, रायपुर और बिलासपुर के जिला शिक्षा अधिकारियों को भेजकर एक सप्ताह में कार्रवाई करने का निर्देश दिया था।

लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इस पर कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को आदेश का पालन करते हुए अगली सुनवाई तक कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।

एडमिशन विज्ञापन पर कोर्ट ने लिया संज्ञान

इंटरवीनर ने अदालत के सामने एक पत्रिका में प्रकाशित एडमिशन विज्ञापन भी प्रस्तुत किया। इसमें सत्र 2026–27 के लिए कई निजी स्कूलों में प्रवेश शुरू होने की जानकारी दी गई थी। याचिका में कहा गया कि ये स्कूल आवश्यक मान्यता के बिना संचालित हो रहे हैं

इसके बावजूद एडमिशन का विज्ञापन देकर छात्रों को प्रवेश देने की प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं। इसे अदालत के पूर्व आदेशों का उल्लंघन बताया गया।

किड्स एकेडमी के पांच ब्रांच शामिल

एडमिशन विज्ञापन में जिन स्कूलों का उल्लेख किया गया। इनमें तुलसी कृष्णा किड्स एकेडमी, मोवा के अलावा कृष्णा किड्स एकेडमी के ही शंकर नगर, न्यू राजेंद्र नगर, सुंदर नगर और शैलेंद्र नगर ये चार ब्रांच शामिल हैं।

कोर्ट ने मामले में कृष्णा पब्लिक स्कूल, तुलसी (रायपुर) को पक्षकार बनाते हुए नोटिस जारी करने का आदेश दिया है।

शिक्षा सचिव को जवाब देने का आदेश

डिवीजन बेंच ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को इस मामले में पर्सनल एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि बिना मान्यता के स्कूलों द्वारा एडमिशन का विज्ञापन देना अदालत के वैध आदेशों की अवमानना है।

कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 24 मार्च 2026 तय की है। उस दिन विभाग को कार्रवाई की स्थिति और अपना जवाब अदालत के सामने पेश करना होगा।

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छत्तीसगढ़

धमतरी : सपनों को उड़ान देने जरूरत होती है साहस और संकल्प की

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“स्कूटी दीदी” एनु की उड़ान

धमतरी । सपनों को उड़ान देने के लिए पंख नहीं, साहस और संकल्प की जरूरत होती है। इसी बात को सत्य साबित किया है छत्तीगसढ के धमतरी की एक साधारण लेकिन जुझारू युवती एनु ने, जो आज “स्कूटी दीदी” के नाम से जानी जाती हैं। संसाधनों की कमी, सामाजिक दबाव और सीमित अवसरों के बावजूद एनु ने न केवल आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाया, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को भी सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाई।

          एनु का जन्म एक सामान्य ग्रामीण परिवार में हुआ, जहाँ आर्थिक स्थिति सशक्त नहीं थी। परिवार में आय के सीमित स्रोत थे, और लड़कियों की शिक्षा को लेकर अब भी संकोच और संकीर्ण सोच (prevalent ) थी। परन्तु एनु की सोच इससे बिल्कुल अलग थी। वे हमेशा कुछ नया करने और अपने पैरों पर खड़े होने की इच्छा रखती थीं। कठिनाइयों और प्रतिकूलताओं के बीच भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और अर्थशास्त्र में परास्नातक(Post Graduation inEconomics) की उपाधि हासिल की। यह उपलब्धि ही अपने आप में उनके संघर्ष और लगन का प्रतीक थी।

         एनु का लक्ष्य केवल डिग्री लेनी ही मंज़िल नहीं थी। एनु जानती थीं कि केवल शिक्षा से रोजगार नहीं मिलेगा, जब तक उनके पास कोई कौशल न हो। इसी सोच के साथ उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन-बिहान से जुड़कर सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण लिया। इस प्रशिक्षण ने उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में पहला मजबूत कदम उठाने का अवसर दिया। लेकिन उनका सपना सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं था।

         एनु का अगला कदम था -मोबिलिटी यानी गतिशीलता की। वे चाहती थीं कि खुद स्कूटी चला सकें, ताकि गांव-गांव जाकर महिलाओं से मिलें, प्रशिक्षण दें और उनके जीवन को बदलने में योगदान दे सकें, लेकिन एक ग्रामीण युवती के लिए दोपहिया वाहन चलाना समाज के लिए असामान्य बात थी। इसके लिए उन्हें न केवल आत्मसंदेह से लड़ना पड़ा, बल्कि समाज की रूढ़िवादी सोच से भी लडना पडा। यही पर ‘प्रथम संस्था’ (PRATHAM Foundation) ने उन्हें स्कूटी चलाने का प्रशिक्षण दिया। पहले-पहले जब उन्होंने स्कूटी की चाबी हाथ में ली, तो लोगों ने ताने दिए – “लड़की होकर गाड़ी चलाएगी?”, “क्या ज़रूरत है इधर-उधर घूमने की?”, लेकिन एनु अडिग रहीं। उन्होंने अपने आत्मविश्वास के साथ इन बातों को अनसुना कर, प्रैक्टिस जारी रखी और जल्द ही स्कूटी चलाने में दक्ष हो गईं।

          धीरे-धीरे उनका आत्मविश्वास और कौशल दोनों बढ़ने लगे। अब वे गांवों में स्वतंत्र रूप से घूमने लगीं, महिलाओं से जुड़ीं, उन्हें मोटिवेट करने लगीं और अपनी यात्रा की कहानी सुनाकर उनमें भी आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा देने लगीं। यही वह मोड़ था जब उन्होंने तय किया कि अब वह खुद एक ड्राइविंग स्कूल शुरू करेंगी, ताकि अन्य महिलाओं को भी गाड़ी चलाना सिखा सकें। यह पहल ग्रामीण परिवेश में महिलाओं की स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम था।

         सन 2023 में एनु अपने सीमित संसाधनों के साथ “महिला दोपहिया प्रशिक्षण केंद्र” की शुरुआत की। शुरू में केवल 2-3 महिलाओं ने प्रशिक्षण लिया, लेकिन जल्द ही यह संख्या बढ़ती चली गई। आज उनकी पहचान पूरे ब्लॉक और जिले में “स्कूटी दीदी” के रूप में हो गई है। उन्होंने अब तक 30 से अधिक ग्रामीण महिलाओं को दोपहिया वाहन चलाने का प्रशिक्षण दिया है, जिनमें से कई महिलाएं अब स्वयं स्कूल, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र या बैंक जैसी जगहों पर काम करने के लिए आत्मनिर्भर रूप से आने-जाने लगी हैं।

          एनु की यह पहल न केवल महिलाओं के जीवन में आत्मविश्वास और स्वतंत्रता लाई है, बल्कि सामाजिक सोच को भी बदला है। अब गांवों में लोग अपनी बेटियों और बहुओं को एनु के पास भेजते हैं, यह सीखने कि कैसे वे भी “अपने सपनों की सवारी” कर सकती हैं। उनकी इस उपलब्धि के लिए विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी संस्थानों ने उन्हें सम्मानित भी किया है। हाल ही में उन्हें जिला प्रशासन द्वारा महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किया गया। एनु का सपना है कि वे आने वाले वर्षों में 1000 महिलाओं को ड्राइविंग सिखाएं और इसके लिए वे जल्द ही चारपहिया ड्राइविंग स्कूल भी शुरू करने की योजना बना रही हैं।

         एनु का जीवन इस बात का प्रमाण है कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती। उनकी कहानी हर उस महिला के लिए प्रेरणा है, जो समाज की जंजीरों को तोड़कर आगे बढ़ना चाहती है। स्कूटी दीदी एनु ने दिखा दिया कि सच्ची ताकत बाहरी साधनों में नहीं, बल्कि भीतर के आत्मबल और दृढ़ निश्चय में होती है।

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कोरबा

19 अप्रैल को नितेश कुमार मेमोरियल लायंस पब्लिक स्कूल खरहरकुड़ा का स्थापना दिवस, प्रख्यात अभिनेत्री मंदाकिनी आएंगी

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कोरबा। 10 वर्ष पूर्व कोरबा शिक्षा जगत के लिए एक एतिहासिक दिन था, जब जिले के वनांचल क्षेत्र कोरबा-चाम्पा मार्ग खरहरकुड़ा (मड़वारानी) में एक ऐसे विद्यालय का अभ्युदय हुआ, जो ग्रामीण एवं गरीब बच्चों का भविष्य सुधारने का बीड़ा उठाया और सर्वोत्कृष्ट अंग्रेजी सीबीएसई माध्यम से शिक्षा देने लगा। आज यह विद्यालय कोरबा जिले का ही नहीं बल्कि प्रदेश का सर्वोत्कृष्ट विद्यालयों में शुमार है और वटवृक्ष की तरह अपनी छाया में हजारों ग्रामीण एवं निर्धन बच्चों का भविष्य उज्ज्वल बना रहा है। नितेश कुमार मेमोरियल लायंस पब्लिक स्कूल खरहरकुड़ा को कोरबा के जानेमाने समाजसेवी एवं उद्योगपति पीएमजेएफ लायन राजकुमार अग्रवाल एवं उनकी टीम ने इस विद्यालय को सींचा और क्षेत्र की शैक्षणिक उन्नति का अद्भूत मिशाल पेश किया। सर्वशिक्षा विशेषज्ञ अध्यापकों द्वारा यहां हजारों बच्चों का भविष्य गढ़ा जा रहा है। शिक्षा के साथ-साथ खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों ने इस विद्यालय की पहचान को पुख्ता किया, जिसके कारण इस विद्यालय को 07 स्टार रैटिंग अवार्ड से सम्मानित किया गया।
19 अप्रैल 2026 को यह विद्यालय अपना 10वां स्थापना दिवस मनाने जा रहा है, जिसमें बालीवुड की प्रख्यात अभिनेत्री एवं राम तेरी गंगा मैली… फेम मंदाकिनी आएंगी और बच्चों के साथ 10वां स्थापना दिवस को सेलिब्रेट करेंगी। अतिथि के रूप में कोरबा के कई जनप्रतिनिधि भी शामिल होंगे।

विद्यालय के चेयरमेन पीएमजेएफ लायन डॉ. राजकुमार अग्रवाल ने बताया कि विद्यालय के 10वां स्थापना दिवस को 19 अप्रैल 2026 रविवार को भव्यता से मनाने का निर्णय लिया गया है, जिसमें बालीवुड की प्रख्यात अभिनेत्री मंदाकिनी को आमंत्रित किया गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशिल्या देवी साय को भी आमंत्रित किया जा रहा है और संभवत: उनका भी सानिध्य हमारे विद्यालय को प्राप्त होगा। स्थापना दिवस को भव्यता से मनाया जाएगा, जिसमें बच्चों की मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुति के अलावा कई मनमोहक कार्यक्रम भी कराए जाएंगे और कोरबावासी अभिनेत्री मंंदाकिनी से रूबरू होंगे।
कौशिल्या देवी साय होंगी मुख्य अतिथि!

विद्यालय के चेयरमेन पीएमजेएफ लायन डॉ. राजकुमार अग्रवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशिल्या देवी साय को बतौर मुख्य अतिथि आमंत्रित करने हेतु प्रयास किया जा रहा है और संभवत: हमारे विद्यालय के स्थापना दिवस समारोह में वे अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगी।

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छत्तीसगढ़

बलौदाबाजार : समृद्ध और सुलभ ग्रामीण भारत के लिए मज़बूत आधारभूत संरचना है पुल -मंत्री टंक राम वर्मा

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राजस्व मंत्री वर्मा ने 7.82 करोड़ की लागत से बनने वाले नवापारा-सकरी-सतभांवा मार्ग का किया भूमिपूजन

समृद्ध और सुलभ ग्रामीण भारत के लिए मज़बूत आधारभूत संरचना है पुल -मंत्री श्री टंक राम वर्मा

बलौदाबाजार। राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि समृद्ध और सुलभ ग्रामीण भारत के लिए मज़बूत आधारभूत संरचना आवश्यक है। पुल केवल दो छोरों को नहीं जोड़ते, बल्कि जीवन, अवसर और विकास की संभावनाओं को जोड़ते हैं। गाँवों को बाज़ार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और रोज़गार से जोड़ने के लिए यह संरचनाएं रीढ़ की हड्डी जैसी होती हैं। राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने आज बलौदाबाजार-भाटापारा जिला के  विकासखंड सिमगा के ग्राम सकरी में नवापारा-सकरी-सतभांवा मार्ग निर्माण कार्य का विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर भूमिपूजन किया। पुल-पुलियों सहित इस मार्ग का निर्माण 7 करोड़ 82 लाख 58 हजार रुपए की लागत से किया जाएगा।

      कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि सड़क निर्माण से क्षेत्र के लोगों को आवागमन में बड़ी सुविधा मिलेगी और ग्रामीण विकास को गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लगातार आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए काम कर रही है और इस बार जिले में कई महत्वपूर्ण सड़कों के निर्माण को स्वीकृति मिली है। प्रदेश में बेहतर सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है, जिससे गांवों का शहरों से संपर्क और मजबूत होगा।

     मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि किसानों के हित में सरकार लगातार कार्य कर रही है। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के बाद कृषक उन्नति योजना के तहत शेष राशि का एकमुश्त भुगतान भी होली से पहले किसानों को कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अधिकांश गारंटी पूरी हो चुकी हैं। विकसित भारत 2047 के संकल्प को साकार करने के लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा। इस अवसर पर जनपद अध्यक्ष डॉ. दौलतराम पाल, जिला पंचायत सदस्य डॉ. मोहन वर्मा, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित थे।

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