Connect with us

छत्तीसगढ़

तमनार हिंसा का मास्टरमाइंड अरेस्ट, भीड़ को उकसाया था:महिला TI की पिटाई, आरक्षक के कपड़े फाड़े गए, प्लांट-गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई थी

Published

on

रायगढ़, एजेंसी। रायगढ़ जिले में तमनार हिंसा का मास्टरमाइंड पकड़ा गया है। कसडोल निवासी राजेश मरकाम (39) पर भीड़ को उकसाने का आरोप है, वह 6 महीने से फरार चल रहा था। राजेश इस मामले में नामजद आरोपी था और घटना के बाद से फरार चल रहा था।

बता दें कि भीड़ ने सीएचपी चौक, लिबरा में पुलिस बल पर हमला किया था, सरकारी वाहनों में आगजनी, प्लांट में तोड़फोड़ की गई थी, महिला पुलिसकर्मी के कपड़े फाड़े गए थे।

पुलिस उसकी लगातार तलाश कर रही थी। इस बीच गुरुवार को मुखबिर से सूचना मिली कि राजेश मरकाम ग्राम बरपाली आया हुआ है। इसके बाद तमनार और पूंजीपथरा पुलिस की संयुक्त टीम ने घेराबंदी कर उसे हिरासत में ले लिया। पूछताछ में उसने जुर्म स्वीकार किया।

जानिए क्या था पूरा मामला ?

दरअसल, मामला दिसंबर 2025 को धौराभाठा में हुई जनसुनवाई के विरोध से जुड़ा है। JPL कोयला खदान सेक्टर-1 कोल ब्लॉक से प्रभावित 14 गांवों के लोग 12 दिसंबर से धरने पर बैठे हुए थे। 27 दिसंबर की सुबह करीब 9 बजे लिबरा चौक पर लगभग 300 ग्रामीण जमा हो गए। सड़क पर बैठकर आने-जाने का रास्ता रोक दिया।

स्थिति बिगड़ती देख सुबह करीब 10 बजे अधिकारी और पुलिस बल मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने लोगों को समझाया। धरनास्थल पर लगे टेंट में वापस भेज दिया। कुछ समय बाद भीड़ की संख्या करीब 1000 के आसपास हो गई।

वीडियो में एक ग्रामीण महिला आरक्षक के कपड़े खींचते नजर आया।

वीडियो में एक ग्रामीण महिला आरक्षक के कपड़े खींचते नजर आया।

हालात बिगड़े, महिला TI को लात घूसों से पीटा

घरघोड़ा के एसडीएम और पुलिस अधिकारी लगातार माइक से लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करते रहे, लेकिन भीड़ बार-बार सड़क पर आकर रास्ता रोकने की कोशिश करती रही। करीब दोपहर ढाई बजे अचानक हालात बिगड़ गए। भीड़ ने पुलिस के बैरिकेड तोड़ दिए। पत्थर और डंडों से हमला कर दिया।

पुलिस पर जमकर लाठियां और पत्थर बरसाए गए। तमनार थाना प्रभारी कमला पुषाम को महिलाओं ने लात-घूंसे से पीटा, इस दौरान कई पुलिसकर्मी और महिला आरक्षक भी घायल हुए, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।

कोल हैंडलिंग प्लांट में घुसकर लगाई आग

जिला प्रशासन के मुताबिक उग्र भीड़ ने मौके पर खड़ी पुलिस बस, जीप और एम्बुलेंस में आग लगा दी। कई अन्य सरकारी वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया गया। इसके बाद भीड़ जिंदल के कोल हैंडलिंग प्लांट की ओर बढ़ गई। वहां घुसकर कन्वेयर बेल्ट, दो ट्रैक्टर और अन्य वाहनों में आग लगा दी गई। प्लांट के दफ्तर में भी तोड़फोड़ की गई।

अधिकारियों की मौजूदगी में भी पथराव

स्थिति संभालने के लिए लैलूंगा की विधायक विद्यावती सिदार, रायगढ़ कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक खुद मौके पर पहुंचे, लेकिन भीड़ और ज्यादा उग्र हो गई। अधिकारियों की मौजूदगी में भी पथराव हुआ और भीड़ दोबारा प्लांट की ओर जाकर आगजनी करती रही।

हिंसा मामले में अब तक 22 आरोपी जेल भेजे गए

घटना के बाद अलग-अलग शिकायतों के आधार पर तमनार थाने में कुल 16 एफआईआर दर्ज की गई थीं। इस मामले में अब तक 22 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जबकि अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है।

पूछताछ में हिंसा में शामिल होने की बात कबूली

इस बीच पुलिस ने सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए हिंसा के मुख्य आरोपी राजेश मरकाम (39) को गिरफ्तार किया। पुलिस पूछताछ में आरोपी ने आंदोलनकारियों के साथ मिलकर हिंसक घटनाओं में शामिल होना स्वीकार किया।

आंदोलनकारियों को भड़काने की भूमिका आई सामने

जांच के दौरान आंदोलनकारियों को भड़काने और दुष्प्रेरित करने की भूमिका सामने आने पर मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 49 भी जोड़ी गई। गुरुवार को आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।

एसएसपी शशि मोहन सिंह ने बताया कि हिंसा में राजेश मरकाम की मुख्य भूमिका थी। उसने लोगों को भड़काया, सरकारी अधिकारियों पर हमला कराया, वॉकी-टॉकी, मोबाइल लूटे, आगजनी और तोड़फोड़ में अहम भूमिका निभाई।

Continue Reading

कोरबा

सीएसईबी चौक पर भारी वाहन की टक्कर:कोरबा में एक्टिवा सवार की मौत, वाहन छोड़कर भागा ड्राइवर, ट्रैफिक व्यवस्था पर उठे सवाल

Published

on

कोरबा। कोरबा जिले में सड़क हादसे थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। शुक्रवार (3 जुलाई) को सीएसईबी चौकी के सामने एक तेज रफ्तार भारी वाहन ने एक्टिवा सवार को टक्कर मार दी। हादसे में युवक की मौके पर ही मौत हो गई। दुर्घटना के बाद चालक वाहन छोड़कर फरार हो गया।

घटना सीएसईबी चौक पर हुई, जहां आमतौर पर ट्रैफिक सिग्नल और पुलिसकर्मी तैनात रहते हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, तेज रफ्तार भारी वाहन ने अचानक एक्टिवा को अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि एक्टिवा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।

मृतक की हुई पहचान

मृतक की पहचान खरमोर निवासी व्यास राम के रूप में हुई है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। क्षतिग्रस्त एक्टिवा को भी मौके से हटाया गया। पुलिस ने मृतक के आधार कार्ड के जरिए परिजनों को घटना की सूचना दी।

ट्रैफिक व्यवस्था पर उठे सवाल

घटना के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधि लक्ष्मण श्रीवास ने ट्रैफिक व्यवस्था पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि सीएसईबी चौक शहर के सबसे व्यस्त चौराहों में से एक है, जहां हमेशा पुलिस और ट्रैफिक सिग्नल मौजूद रहते हैं। इसके बावजूद भारी वाहन का शहर के भीतर प्रवेश कर हादसा करना गंभीर लापरवाही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि शहर में ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। सोनालिया चौक, पवन टॉकीज और शारदा विहार फाटक जैसे इलाकों में भी भारी वाहनों और रेत से भरे ट्रैक्टरों की आवाजाही से लगातार हादसे हो रहे हैं।

सख्त कार्रवाई की मांग

लक्ष्मण श्रीवास ने प्रशासन से सवाल किया कि नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों और मालिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही। उन्होंने शहर में भारी वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही पर रोक लगाने और जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

Continue Reading

कोरबा

कोरबा में नशेड़ी ट्रेलर चालकों का तांडव:एक रात में 3 हादसे, बीच सड़क ट्रेलर छोड़कर भागा, मकान में गाड़ी और नाले में पलटा ट्रेलर

Published

on

कोरबा। कोरबा जिले में गुरुवार देर रात नशे में धुत ट्रेलर चालकों ने एक के बाद एक तीन हादसे कर दिए। अलग-अलग जगह हुई इन घटनाओं में कई लोगों की जान बाल-बाल बच गई। गुस्साए लोगों ने कुछ चालकों की पिटाई कर उन्हें पुलिस के हवाले कर दिया।

ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक, इस साल जनवरी से अब तक शराब पीकर वाहन चलाने के 1014 मामलों में 1 करोड़ 10 लाख 40 हजार रुपये से ज्यादा का जुर्माना वसूला जा चुका है।

बीच सड़क ट्रेलर छोड़कर भागा चालक

पहली घटना मानिकपुर चौकी क्षेत्र के शारदा विहार पेट्रोल पंप के पास हुई। यहां नशे में धुत ट्रेलर चालक वाहन को बीच सड़क पर खड़ा कर चाबी लगी हालत में छोड़कर चला गया। इससे सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई और घंटों जाम लगा रहा।

नाराज लोगों ने चालक को पकड़कर उसकी पिटाई की और पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची मानिकपुर पुलिस ने ट्रेलर हटवाकर यातायात बहाल कराया।

कोयला लदी ट्रेलर मकान में घुसी

दूसरी घटना रामनगर बाईपास मार्ग पर हुई। शराब के नशे में चालक और हेल्पर तेज रफ्तार कोयला लदी ट्रेलर पर नियंत्रण खो बैठे। ट्रेलर सड़क किनारे बने एक मकान में जा घुसी और आंगन में लगे पेड़ से टकराकर रुकी। राहत की बात यह रही कि हादसे के समय घर में मौजूद लोग सुरक्षित बच गए।

20 फीट गहरे नाले में गिरी ट्रेलर

तीसरी घटना कोतवाली थाना क्षेत्र के मानिकपुर बाईपास मार्ग पर हुई। यहां एक तेज रफ्तार ट्रेलर अनियंत्रित होकर करीब 20 फीट गहरे नाले में जा गिरी। हादसे में चालक को मामूली चोटें आईं। पुलिस का कहना है कि नाले की गहराई को देखते हुए यह बड़ा हादसा हो सकता था।

1014 मामलों में 1.10 करोड़ से ज्यादा जुर्माना

ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। जनवरी से अब तक ऐसे 1014 मामलों में कार्रवाई करते हुए 1 करोड़ 10 लाख 40 हजार रुपये से अधिक का जुर्माना वसूला गया है।

अधिकारियों का कहना है कि नशे में वाहन चलाना सड़क हादसों की बड़ी वजह बना हुआ है, इसलिए आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

Continue Reading

छत्तीसगढ़

हाईकोर्ट बोला- जनहित में है शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण:शासन के आदेश पर मुहर, छत्तीसगढ़ विद्यालयीन कर्मचारी संघ समेत 24 से ज्यादा शिक्षकों की याचिकाएं खारिज

Published

on

बिलासपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस बीडी गुरु ने प्रदेशभर के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण (रैशनलाइजेशन) की नीति को सही ठहराया है। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार का यह फैसला जनहित में लिया गया है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ विद्यालयीन शिक्षक कर्मचारी संघ समेत प्रदेशभर के शिक्षकों की ओर से दायर 24 से ज्यादा याचिकाओं को खारिज कर दिया है।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि स्कूलों में शिक्षकों के असमान वितरण को दूर करने के लिए सरकार का यह कदम बड़े जनहित में है। ट्रांसफर और पोस्टिंग पूरी तरह सरकार के प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र का हिस्सा हैं। किसी भी सरकारी कर्मचारी को एक ही स्थान पर बने रहने का कोई संवैधानिक या कानूनी अधिकार नहीं है।

युक्तियुक्तकरण नीति को दी गई थी चुनौती

राज्य सरकार ने 2 अगस्त 2024 को स्कूलों और शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण के लिए दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसके बाद अप्रैल 2025 में इसके क्रियान्वयन के आदेश जारी किए गए। इस नीति के तहत अतिशेष (सरप्लस) शिक्षकों को शिक्षकविहीन और एकल-शिक्षकीय स्कूलों में पदस्थ करने का प्रावधान किया गया।

इस नीति के खिलाफ दुर्ग, कोंडागांव, कांकेर, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, रायपुर, कोरबा, बिलासपुर और महासमुंद समेत कई जिलों के शिक्षकों और शिक्षक संगठनों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं।

नियमों की अनदेखी का लगाया आरोप

याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि यह नीति शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा-25 के खिलाफ है, जिसमें स्कूलवार छात्र-शिक्षक अनुपात बनाए रखने का प्रावधान है। उनका आरोप था कि अतिशेष शिक्षकों की पहचान करते समय वरिष्ठता की अनदेखी की गई और ‘लास्ट इन, फर्स्ट आउट’ नियम को यांत्रिक तरीके से लागू किया गया।

राज्यपाल के नाम से आदेश जारी नहीं होने का भी उठाया मुद्दा

शिक्षकों की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि यह आदेश संविधान के अनुच्छेद-166 के तहत राज्यपाल के नाम से विधिवत जारी नहीं किया गया, इसलिए इसे वैध नीति नहीं माना जा सकता।

सरकार ने रखा अपना पक्ष

राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि युक्तियुक्तकरण का प्रस्ताव 9 जुलाई 2024 को मंत्रिपरिषद की बैठक में मंजूर किया गया था। इसके बाद 16 जुलाई 2024 को राज्यपाल के नाम से विभागीय आदेश जारी किया गया।

सरकार ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता कोई ऐसा स्कूलवार आंकड़ा प्रस्तुत नहीं कर सके, जिससे यह साबित हो कि छात्र-शिक्षक अनुपात का उल्लंघन हुआ है।

हाईकोर्ट ने कहा- आदेश पूरी तरह वैध

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सरकार का 16 जुलाई 2024 का आदेश कैबिनेट की मंजूरी के बाद राज्यपाल के नाम से जारी किया गया था। इसलिए अदालत ने अनुच्छेद 166 के उल्लंघन की दलील को खारिज कर दिया।

अदालत ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता ऐसे कोई ठोस आंकड़े या डेटा पेश नहीं कर सके, जिससे यह साबित हो कि इस नीति से किसी स्कूल में छात्र-शिक्षक अनुपात प्रभावित हुआ है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक कोई सरकारी नीति पूरी तरह अवैध, मनमानी या दुर्भावनापूर्ण न हो, तब तक उसमें न्यायिक हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।

16 हजार से ज्यादा शिक्षकों और प्राचार्यों का हुआ युक्तियुक्तकरण

प्रदेश के ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी है। कई स्कूल ऐसे हैं जहां या तो कोई शिक्षक नहीं है या केवल एक ही शिक्षक के भरोसे पढ़ाई चल रही है। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। वहीं, शहरी क्षेत्रों के कई स्कूलों में जरूरत से अधिक शिक्षक पदस्थ हैं।

इसी असमानता को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने अतिशेष शिक्षकों को शिक्षकविहीन और एकल-शिक्षकीय स्कूलों में पदस्थ करने का फैसला लिया था। हाई कोर्ट ने भी अपने फैसले में कहा कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना राज्य का संवैधानिक दायित्व है और इस उद्देश्य से उठाए गए उचित कदमों में अदालत हस्तक्षेप नहीं कर सकती।

बता दें कि युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के तहत प्रदेश में 16,165 शिक्षकों और प्राचार्यों का स्थानांतरण किया गया है। इसके अंतर्गत राज्य की कुल 10,463 शालाओं का युक्तियुक्तकरण किया गया, जिनमें 10,297 ऐसे स्कूल शामिल हैं जो एक ही परिसर में संचालित हो रहे हैं।

Continue Reading
Advertisement

Trending

Copyright © 2020 Divya Akash | RNI- CHHHIN/2010/47078 | IN FRONT OF PRESS CLUB TILAK BHAVAN TP NAGAR KORBA 495677