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कोरबा

114 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को दिया गया एनसीडी प्रशिक्षण

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कोरबा। कलेक्टर कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी एस.एन. केशरी के नेतृत्व में  स्वास्थ्य विभाग, यूनिसेफ तथा एकम फाउंडेशन के सहयोग से गैर संचारी रोग (एनसीडी) पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यशाला में जिले के 114 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को छत्तीसगढ़ में टाइप 1 डायबिटीज के बढ़ते प्रभाव, परामर्श तकनीक, सामुदायिक जागरूकता तथा इसके नैदानिक प्रबंधन के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई।

कार्यशाला के दौरान पेशेंट सपोर्ट ग्रुप और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की भूमिका के साथ-साथ रोगियों एवं स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के सामने आने वाली चुनौतियों पर भी गहन चर्चा की गई। प्रशिक्षण में विशेष रूप से इस बात पर बल दिया गया कि स्वास्थ्य कर्मी किस प्रकार टाइप 1 डायबिटीज मरीजों और उनके परिवारों को सामाजिक, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और आर्थिक बोझ से निपटने के लिए प्रभावी परामर्श प्रदान कर सकते हैं।
इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण सत्र को सीएमएचओ  डॉ केशरी, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. स्मिता सोना, यूनिसेफ स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. गजेन्द्र सिंह एवं जिला प्रबंधक (अस्पताल) कुमारी गीता एक्का द्वारा संपन्न कराया गया। कार्यक्रम के सफल संचालन में जिला प्रबंधक (एन.एच.एम.) पद्माकर शिंदे तथा एनसीडी कंसल्टेंट डॉ. नरेन्द्र जायसवाल का विशेष सहयोग रहा।

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कोरबा

मेहनत, लगन और कोसा पालन ने बदली जीवन की दिशा

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कोरबा। कोरबा जिले के ग्राम बरपाली-तानाखार (वि.ख. पोड़ी-उपरोड़ा) के निवासी शिवकुमार बिंझवार आत्मज दादूलाल अनुसूचित जाति के बीपीएल परिवार से आते हैं। उनके पास केवल 1.5 एकड़ कृषि भूमि है और आजीविका के अन्य साधन भी उपलब्ध नहीं थे, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और कोसा कृमिपालन को अपनी आजीविका का आधार बनाया। आज वे कोसा बीज केंद्र बरपाली के सबसे अति-उन्नत कोसा कृमिपालकों में शामिल हैं।
पिछले पंद्रह वर्षों से वे सपरिवार कोसा पालन का कार्य कर रहे हैं। मेहनत, तकनीकी जानकारी और रेशम विभाग से मिले मार्गदर्शन ने उनके कार्य को निखारा और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाया। वर्ष 2025-26 में उनके द्वारा प्रथम फसल से 20,151 नग डाबा कोसाफल का उत्पादन किया गया, जिसका समर्थन मूल्य 49,721 रुपये प्राप्त हुआ। तृतीय फसल से 26,300 नग डाबा कोसाफल उत्पन्न हुए और इसका समर्थन मूल्य 71,760 रुपये रहा। इस प्रकार उन्हें डीबीटी के माध्यम से कुल 01 लाख 21 हजार 481 रुपये की राशि प्राप्त हुई, जिसने उनके परिवार को स्थायी आर्थिक संबल प्रदान किया।
शिवकुमार ने अपनी सीमित भूमि और कम संसाधनों के बावजूद कोसा पालन को अपना प्रमुख व्यवसाय बना लिया। इस कार्य से प्राप्त आय से उन्होंने स्वयं के लिए दोपहिया वाहन खरीदा और अपने दोनों पुत्रों रोहित, जो कक्षा 12वीं में अध्ययनरत हैं, तथा राजेश, जो कक्षा 8वीं में पढ़ते हैं कि पढ़ाई के लिए बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की।
कोसा पालन की तृतीय फसल का समय नवंबर से जनवरी तक लगभग तीन माह का होता है। इस अवधि में उन्होंने रेशम विभाग द्वारा प्रदाय उच्च तकनीक और आधुनिक विधियों का सही उपयोग करते हुए उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की। विभाग द्वारा दी गई तकनीकी जानकारी का उन्होंने कोसा फार्म में बेहतर उपयोग किया और आज वे एक उत्कृष्ट कृषक के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं।
शिवकुमार न केवल स्वयं सफल हुए हैं, बल्कि उन्होंने अपने गाँव के 20 से 25 किसानों का समूह बनाकर उन्हें भी कोसा पालन के लिए प्रेरित किया है। उनकी अपेक्षा है कि रेशम विभाग समय-समय पर उन्हें निरोगी और उत्तम गुणवत्ता का टसर कोसा बीज उपलब्ध कराते रहे, जिससे वे उत्पादन बढ़ाकर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को और अधिक सुदृढ़ कर सकें।
मेहनत, लगन और सही तकनीकी मार्गदर्शन का परिणाम है कि शिवकुमार बिंझवार आज कोसा पालन की दुनिया में एक प्रेरणादायक उदाहरण बन चुके हैं। उन्होंने साबित किया है कि इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयास से सीमित साधनों के बावजूद जीवन को नई दिशा दी जा सकती है। उनकी यह यात्रा कई अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

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कोरबा

भाजपा कोसाबाड़ी मंडल का सघन जनसंपर्क अभियान तेज : पांच शक्तिकेंद्रों में संगठन विस्तार पर हुई अहम चर्चा

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कोरबा। भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक विस्तार और बूथ स्तर तक पार्टी को मजबूत करने के उद्देश्य से भाजपा कोसाबाड़ी मंडल द्वारा सोमवार को मंडल क्षेत्र के विभिन्न शक्तिकेंद्रों में सघन जनसंपर्क अभियान चलाया गया। यह अभियान भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी के कुशल मार्गदर्शन में कोसाबाड़ी मंडल अध्यक्ष डॉ. राजेश राठौर के नेतृत्व में संपन्न हुआ, जिसमें संगठन को और अधिक सक्रिय एवं सशक्त बनाने को लेकर व्यापक चर्चा की गई।

कार्यक्रम के दौरान मंडल के पांच प्रमुख शक्तिकेंद्रों — बुधवारी क्रमांक 02 (वार्ड 24), शिवाजी नगर (वार्ड 25), सीएसईबी कॉलोनी (वार्ड 21), ढोडीपारा (वार्ड 17) तथा बुधवारी क्रमांक 01 में जनसंपर्क करते हुए कार्यकर्ताओं की बैठक आयोजित की गई। इन बैठकों में संगठन विस्तार, कार्यकर्ताओं की भूमिका और आगामी कार्यक्रमों को लेकर रणनीति पर चर्चा की गई।

इस अवसर पर भाजपा जिला उपाध्यक्ष मंजू सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहीं। उनके साथ मंडल अध्यक्ष डॉ. राजेश राठौर, शक्तिकेंद्र प्रभारी ज्योति वर्मा, प्रकाश अग्रवाल, श्रीधर द्विवेदी, अनिल वस्त्रकार, दिनेश वैष्णव, तेरस दास दीवान सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
कार्यक्रम में सम्माननीय पार्षद लक्ष्मण श्रीवास, पंकज देवांगन, राकेश वर्मा, पूर्व पार्षद धन साय साहू सहित अनेक जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति रही। वहीं मीडिया प्रभारी पवन सिन्हा, करन राजपाल, अनिल डनसेना भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

इसके साथ ही शक्तिकेंद्र संयोजक विलास बुटोलिया, धर्मपाल सोलंकी, रीता नेमी, गिरधारी रजक, दुर्गेश राठौर, श्याम साहू, सुरेंद्र राजवाड़े सहित अनेक पदाधिकारी, महिला कार्यकर्ता एवं वार्ड के ज्येष्ठ-श्रेष्ठ कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

बैठक के दौरान संगठन को और अधिक मजबूत करने, बूथ स्तर तक सक्रियता बढ़ाने तथा आम जनता के बीच सरकार की योजनाओं को पहुंचाने के लिए कार्यकर्ताओं से निरंतर जनसंपर्क बनाए रखने का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम में मिलाप राम बरेठ, पुनि राम साहू, सरिता कौशिक, हार बाई यादव, स्वाति कश्यप, निर्मला चक्रधारी, राखी तिवारी, चंचला राठौर, केया सेन, अलका, प्रियंका, मीना, अयोध्या सोनी, दीपक कश्यप, मनोज शर्मा, कृष्णा महंत, बिहारी रजक, सिकेंद्र मसीह, गणेश भवसागर, लक्ष्मी, सुनील चौहान सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
बैठक के अंत में सभी कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर संगठन को और अधिक सशक्त बनाने तथा पार्टी की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

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कोरबा में बाल विवाह के खिलाफ 100 दिवसीय अभियान:तीन चरणों में धर्मगुरुओं, छात्रों और पंचायतों को दिलाई गई शपथ

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कोरबा। कोरबा जिले में बाल विवाह के खिलाफ 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान चलाया गया। भारत सरकार के केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की पहल पर यह अभियान गांवों और कस्बों में केंद्रित रहा। कोरबा लोकसभा क्षेत्र की सांसद ज्योत्सना महंत ने ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।

इस मुक्ति रथ ने जिलेभर में भ्रमण किया और दूरस्थ पंचायतों तथा गांवों तक पहुंचा। अभियान से बड़ी संख्या में लोगों को जोड़ा गया। रथ ने लोगों को बाल विवाह के स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका पर पड़ने वाले दुष्परिणामों से अवगत कराया, साथ ही इसके कानूनी पहलुओं की जानकारी देते हुए समझाया कि बाल विवाह एक दंडनीय अपराध है।

महिलाओं को बाल विवाह के खिलाफ सन्देश दिया

महिलाओं को बाल विवाह के खिलाफ सन्देश दिया

देश के 439 जिलों में बाल विवाह मुक्ति रथ

‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान के एक साल पूरे होने पर भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 4 दिसंबर, 2025 को देशव्यापी ‘100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान’ की घोषणा की थी। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी संगठनों ने इस अभियान का नेतृत्व करते हुए देश के 439 जिलों में ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ निकाले।

अभियान के दौरान यह संदेश दिया गया कि बाल विवाह कोई सामाजिक कुप्रथा नहीं, बल्कि विवाह की आड़ में बच्चों से बलात्कार है। इसे एक अपराध और कानूनन दंडनीय माना गया। बताया गया कि बाल विवाह किसी भी बच्ची के जीवन की संभावनाओं को खत्म कर देता है और उन्हें कुपोषण, अशिक्षा व गरीबी के दुष्चक्र में धकेल देता है।

तीन चरणों में चला अभियान

यह अभियान तीन चरणों में चला। पहले चरण में शैक्षणिक संस्थानों को जोड़ा गया, जबकि दूसरे चरण में धर्मगुरुओं से अनुरोध किया गया कि वे विवाह संपन्न कराने से पहले आयु की जांच करें और बाल विवाह कराने से इनकार करें। इसके अतिरिक्त, कैटरर्स, सजावट करने वालों, बैंक्वेट हॉल मालिकों और विवाह में सेवाएं देने वाले बैंड व घोड़ी वालों से भी बाल विवाह में अपनी सेवाएं न देने का आग्रह किया गया।

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