देश
अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा का राज्यसभा के लिए नॉमिनेशन:ननद सुप्रिया से लोकसभा चुनाव हारीं; प्रफुल्ल पटेल के इस्तीफे के बाद सीट खाली थी
मुंबई, एजेंसी। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार ने गुरुवार (13 जून) को राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल किया। NCP (अजित गुट) के सांसद प्रफुल्ल पटेल के इस्तीफे के बाद यह सीट खाली हुई थी।
सुनेत्रा पवार ने महाराष्ट्र की बारामती सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा था। उनके सामने शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले थीं। चुनाव में सुनेत्रा अपनी ननद से करीब डेढ़ लाख वोटों से हार गई थीं।
मीटिंग के बाद सुनेत्रा पवार के नाम पर मुहर लगी
महाराष्ट्र के मंत्री छगन भुजबल ने कहा कि पार्टी के कोर ग्रुप के सदस्यों ने सुनेत्रा पवार को राज्यसभा सीट देने का फैसला सर्वसम्मति से किया है। कई लोग वह सीट चाहते थे, लेकिन चर्चा के बाद हमने फैसला किया है कि सुनेत्रा पवार को राज्यसभा भेजा जाना चाहिए। मैं इस फैसले से बिल्कुल भी परेशान नहीं हूं।
समझिए, प्रफुल्ल ने क्यों दिया इस्तीफा और उनके बचे हुए कार्यकाल में सुनेत्रा राज्यसभा जाएंगी
NCP (अविभाजित) के नेता प्रफुल्ल पटेल 2022-28 के लिए राज्यसभा सांसद चुने गए थे। इसके बाद पार्टी टूट गई और अजित पवार अपने चाचा शरद पवार से अलग हो गए। इस दौरान प्रफुल्ल ने अजित का साथ दिया। वहीं, शरद पवार ने दसवीं अनुसूची की धारा 2(A) के तहत पटेल के खिलाफ अयोग्यता याचिका दायर की। इसमें दलबदल के आधार पर अयोग्यता का प्रावधान था।
इसके बाद प्रफुल्ल ने फरवरी 2024 में राज्यसभा सीट से इस्तीफा दे दिया और NCP (अजित गुट) ने उन्हें राज्यसभा के नए कार्यकाल के नॉमिनेट किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X में लिखा कि मुझे 2022-2028 के कार्यकाल के लिए राज्यसभा सांसद के रूप में चुना गया था। मैंने राज्यसभा सदस्यता के अपने 4 साल के पुराने कार्यकाल से इस्तीफा दे दिया, क्योंकि मैं एक नए कार्यकाल के लिए राज्यसभा में चुना गया हूं। नया कार्यकाल 2024 से अगस्त 2030 तक प्रभावी होगा।
इसी वजह से NCP (अजित गुट) की एक राज्यसभा सांसद की जगह खाली थी। इस सीट के कार्यकाल में अभी 4 साल बाकी है। अब यहां से सुनेत्रा पवार राज्यसभा जाएंगी।
बारामती में सुप्रिया सुले और भाभी सुनेत्रा पवार के बीच मुकाबला था
महाराष्ट्र के बारामती लोकसभा सीट से शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले के खिलाफ सुनेत्रा पवार ने चुनाव लड़ा था। सुप्रिया ने उन्हें 1 लाख 58 हजार 333 वोटों से हराया था।
बारामती सीट 57 सालों से पवार परिवार का गढ़ माना जाता है। शरद पवार ने 1967 में पहली बार बारामती से विधानसभा चुनाव जीता था। वे 1972, 1978, 1980, 1985 और 1990 के विधानसभा चुनाव में यहां से लगातार जीते।
इसके बाद शरद 1991, 1996, 1998 और 2004 में बारामती से लगातार सांसद चुने गए। उन्होंने 2009 में अपनी बेटी सुप्रिया को ये सीट सौंप दी थी। सुप्रिया ने 2009, 2014 और 2019 में यहां से जीत दर्ज की। सुनेत्रा पहली बार चुनाव में उतरी थीं।
कौन हैं सुनेत्रा पवार…
60 साल की सुनेत्रा पवार सोशल एक्टिविस्ट हैं। सुनेत्रा पवार एनवायर्नमेंटल फोरम ऑफ इंडिया की संस्थापक हैं, जो 2010 में स्थापित NGO है। सुनेत्रा विद्या प्रतिष्ठान के लिए ट्रस्टी के रूप में काम करती हैं। वह 2011 में फ्रांस में विश्व उद्यमिता मंच थिंक टैंक की सदस्य रही हैं।
उनके भाई वरिष्ठ राजनीतिज्ञ और पूर्व मंत्री पदमसिंह पाटिल हैं। उनके भतीजे राणा जगजीतसिंह पदमसिंह पाटिल उस्मानाबाद से भाजपा के विधायक हैं। उनके बड़े बेटे पार्थ ने मावल से 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन असफल रहे थे।
अजित पवार ने 2023 में चाचा शरद से नाता तोड़ा था
अजित पवार पिछले साल 2 जुलाई 2023 को NCP के आठ विधायकों के साथ भाजपा-शिवसेना (एकनाथ शिंदे) के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार में शामिल हो गए थे। इसी दिन शिंदे सरकार में अजित ने उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके बाद NCP दो धड़ों में बट गई थी। एक गुट अजित पवार और दूसरा शरद पवार का हो गया था।
भाभी से मुकाबले पर सुप्रिया ने कहा था- मेरी लड़ाई वैचारिक, निजी नहीं
सुप्रिया के खिलाफ सुनेत्रा के चुनावी मैदान में उतरने की अटकलें पहले से थीं। सुप्रिया ने 18 फरवरी को कहा था कि उनकी लड़ाई विचारों की है, पर्सनल नहीं है।
उन्होंने कहा- यह पारिवारिक लड़ाई कैसे हो सकती है? लोकतंत्र में कोई भी चुनाव लड़ सकता है। अगर उनके पास कोई मजबूत उम्मीदवार है तो मैं उस उम्मीदवार से बात करने के लिए तैयार हूं। विषय, समय या जगह कोई भी हो।
कोरबा
फ्लाई ऐश उद्योगों से फैल रहे प्रदूषण का मुद्दा संसद में गूंजा और दुष्प्रभाव सहित
पर्यावरण मुवायजा कितना वसूल व क्या कार्यवाही की सांसद ने पूछा
कोरबा। कोरबा लोकसभा क्षेत्र की सांसद ज्योत्सना चरणदास महंत ने संसद में कोरबा जिले में बढ़ती फ्लाई ऐश, लेगेसी ऐश और उद्योगों से फैल रहे प्रदूषण की गंभीर समस्या को उठाया। उन्होंने 100 प्रतिशत फ्लाई ऐश उपयोग का लक्ष्य पूरा नहीं करने वाले विद्युत संयंत्रों से अब तक वसूले गए मुआवजा और अन्य कार्यवाही की जानकारी भी चाही।
उन्होंने विशेष रूप से कोरबा जिले के ऐश पॉन्ड में पिछले तीन वर्षों में जमा लेगेसी ऐश की मात्रा और उसके वैज्ञानिक निपटान की समय-सीमा की जानकारी मांगने के साथ विद्युत संयंत्रों और औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले प्रदूषण का स्थानीय पर्यावरण, जल स्रोतों, कृषि और आम नागरिकों के स्वास्थ्य पर पड़ रहे असर पर चिंता जताई। सरकार की ओर से नियम का उल्लंघन करने पर ऐसे संयंत्रों पर की गई कार्यवाही का ब्यौरा भी मांगा। इसके जवाब में पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मामलों के केन्द्रीय मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने बताया कि 31 दिसंबर 2021 की अधिसूचना के अनुसार कोयला या लिग्नाइट आधारित ताप विद्युत गृहों को 100 फीसदी फ्लाई ऐश उपयोग करने आदेशित किया गया है। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण बोर्ड की ओर से कोरबा या प्रदेश के किसी भी ताप बिजली घरों पर पर्यावरणीय मुआवजा अधिरोपित नहीं किया गया है। मंत्री ने वजह बताई कि प्रथम तीन वर्षीय अनुपालन चक्र वित्त वर्ष 2022 से 2025 तक राख उपयोग संबंधी लक्ष्य के संबंध में कोई गैर अनुपालन होना नहीं पाया गया।
लोकसभा में सांसद ज्योत्सना महंत ने वन क्षेत्रों और जनजातीय बस्तियों में हो रही अवैध ऐश डंपिंग को रोकने के लिए किए जा रहे उपायों की जानकारी मांगी। उनका कहना था कि फ्लाई ऐश एक बड़ी समस्या है इसलिए स्थायी समाधान जरूरी है।
विभागीय मंत्री ने सांसद को जानकारी दी कि थर्मल पॉवर प्लांट को अप्रयुक्त संचित राख अर्थात लैगेशी ऐश का उपयोग क्रमिक रूप से करने को कहा गया है। 1 अप्रैल 2022 से 10 वर्ष के भीतर इसकी उपयोगिता तय होगी। सीएसईबी के हवाले से केन्द्रीय मंत्री ने बताया कि हसदेव ताप विद्युत संयंत्र स्थित ऐश पांड को छोडक़र कोरबा जिले में बेमतलब के ऐसे ऐश पांड को विद्युत कंपनी ने फिर से प्राप्त कर लिया है। वर्तमान में वहां संचित लैगेशी ऐश की कुल मात्र 210.64 लाख मिट्रिक टन है। सांसद ने ऐश ट्रैक के जरिए फ्लाई ऐश के प्रबंधन और ट्रैकिंग के बारे में नतीजे की जानकारी मांगी। इस पर उन्हें बताया गया कि केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा विकसित वेब पोर्टल पर राख उत्पादन और उपयोगिता की मासिक जानकारी अपलोड करने आदेशित किया गया है। इसके साथ ही ताप विद्युत संयंत्रों और सीपीसीबी द्वारा अधिकृत लेखा परीक्षकों से राख निपटान के लिए वार्षिक अनुपालन लेखा परीक्षा की रिपोर्ट पर भी ध्यान दिया जा रहा है। लोकसभा की कार्यवाही में सांसद ज्योत्सना महंत ने विद्युत संयंत्रों से वसूले गए पर्यावरणीय जुर्माने की उपयोगिता पर्यावरण व स्वास्थ्य क्षेत्र में तय करने की मांग भी सरकार से की। इस पर केन्द्रीय मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने स्पष्ट किया कि राख उपयोग अधिसूचना 2021 के अंतर्गत थर्मल पॉवर प्लांट व अन्य मामलों में लापरवाही बरतने वालों से एकत्रित किए गए पर्यावरण मुआवजे की राशि का उपयोग राखड़ के सुरक्षित निपटान के लिए होता है। इसके अतिरिक्त राख आधारित उत्पाद सहित राख के उपयोग पर अनुसंधान को उन्नत बनाने में भी हो सकता है। कहा गया कि छत्तीसगढ़ के थर्मल बिजली घरों पर पर्यावरणीय मुआवजा अधिरोपित नहीं किया गया है। इसलिए पर्यावरणीय मुआवजे के आबंटन का औचित्य नहीं है।
देश
फारूक अब्दुल्ला बोले- ऊपर वाले ने बचाया:हमलावर ने सिर पर कुछ इंच दूर से गोली चलाई थी, सुरक्षाकर्मी की वजह से बचे
श्रीनगर,एजेंसी। नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला पर बुधवार रात एक व्यक्ति ने फायरिंग कर दी। हमलावर ने सिर पर कुछ इंच दूर से गोली चलाई थी। गनीमत रही कि सुरक्षाकर्मियों ने हमलावर का हाथ ऊपर कर दिया और उन्हें गोली नहीं लगी।
अधिकारियों के मुताबिक फारूक जम्मू में एक शादी समारोह में पहुंचे थे। उनके साथ राज्य के डिप्टी सीएम सुरिंदर चौधरी भी थे। फारूक अब्दुल्ला ने गुरुवार को कहा-
मुझे ऊपर वाले ने बचाया है। शादी से निकलते समय मैंने कुछ आवाज सुनी, मुझे लगा कि यह पटाखा है। बाद में मुझे बताया गया कि एक आदमी ने पिस्तौल से दो गोलियां चलाईं। सुरक्षाकर्मियों ने बीच-बचाव किया, जिससे हथियार ऊपर की ओर हो गया और नुकसान होने से बच गया।
वहीं, हमलावर कमल ने पुलिस को बताया कि वह पिछले 20 सालों से फारूक अब्दुल्ला को मारना चाहता था। हमलावर को कोर्ट ने 5 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।
वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू में फायरिंग की घटना के बाद फारूक अब्दुल्ला से फोन पर बात की और उनका हालचाल पूछा।
फारूक अब्दुल्ला ने ये भी बताया…
- मेरे पास मेरी सिक्योरिटी की तारीफ करने के लिए शब्द नहीं हैं। लोकल पुलिस वाले, मेरे साथ रहने वाले सिक्योरिटी वाले और NSG के सदस्य शामिल थे, जो मेरी सुरक्षा के लिए मेरे सामने खड़े थे।
- मैं उस आदमी को नहीं जानता, न ही किसी ने मुझे उसके बारे में कभी कुछ बताया। जहां तक उसके मकसद की बात है मुझे कैसे पता चलता कि वह क्या हो सकता था?
- सवाल यह है कि इस शादी में कई जाने-माने लोग मौजूद थे, इसलिए पुलिस को सही सावधानी बरतनी चाहिए थी। लेकिन पुलिस का कोई इंतजाम नहीं था।
- सिर्फ मेरे लिए नहीं, बल्कि उस शादी में कई जाने-माने लोग आए थे। ऐसे इवेंट में प्रोटेक्शन होना जरूरी था, खासकर आज जिस तरह के माहौल में हम रह रहे हैं।
- इस मामले की सही जांच होनी चाहिए। अब यह गृहमंत्री पर है कि वे जांच करें और पता लगाएं कि ऐसा क्यों हुआ और इसका क्या कारण था। आजकल इस तरह की चीजें होती रहती हैं।
- हमलावर को हमेशा फायदा होता है। उसे पता होता है कि वह आपको कहां टारगेट करना चाहता है। लेकिन मैं यह नहीं कहूंगा कि सिक्योरिटी और बढ़ानी चाहिए। यह मुख्य मुद्दा नहीं है।

हमलावर कमल सिंह जमवाल को गुरुवार को मेडिकल चेकअप के लिए ले जाया गया।
हमलावर ने पहले कहा यही मकसद था, फिर बोला- गलती हो गई
नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रेसिडेंट फारूक अब्दुल्ला पर हमला करने का आरोपी कमल सिंह जामवाल पर पूछताछ में कई बार बयान बदल चुका है। घटना के बाद रात में उसने दावा किया था कि पिछले 20 साल से वो फारूक अब्दुल्ला को मारना चाहता था।
आरोपी ने कहा था कि यही मेरी जिंदगी का मकसद था। लेकिन घटना के बाद अगली सुबह उसने कहा कि हमसे गलती हो गई। अब पछतावा हो रहा है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि ये घटना के समय थोड़ा नशे में भी था। गुरुवार को मेडिकल जांच के लिए ले जाते वक्त जामवाल ने कहा- मैंने किसी के कहने पर गोली नहीं चलाई। मैंने अपनी मर्जी से गोली चलाई है।
जांचकर्ताओं ने शुरुआती तौर पर ये माना है कि आरोपी फायरिंग करते समय कथित तौर पर शराब पी हुई थी। पुलिस सूत्रों ने कहा कि आरोपी अगले दिन पछतावे की हालत में लग रहा था और उसने ऐसे बयान दिए जो उसके पहले के दावों से उलट थे।
आरोपी ने पूछताछ के दौरान कई अलग-अलग बातें बताई हैं। इसलिए उससे अलग-अलग कई अधिकारियों ने बारी-बारी से पूछताछ की है। जिससे उसके असली वजह का पता लगाया जा सके। इसके साथ ही पुलिस उसके 20 साल पुराने बैकग्राउंड की भी जांच कर रही है। आरोपी के पड़ोसियों और रिश्तेदारों से भी पूछताछ की गई है।
सीसीटीवी में रिकॉर्ड हुई घटना…
घटना का सीसीटीवी भी सामने आया है। इसमें देखा जा सकता है कि 70 साल के हमलावर कमल सिंह जामवाल ने पीछे से आकर फारूक के सिर पर रिवॉल्वर तान दी। सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत हमलावर का हाथ हटाया जिससे फायर हवा में हो गया।
हमलावर ने फारूक का पीछा किया

हमलावर कमल पीछे चलते हुए फारूक अब्दुल्ला के करीब आता है।
सिर पर रिवॉल्वर तानी

इसके बाद वह फारूक अब्दुल्ला के सिर के पास रिवॉल्वर लेकर जाता है और फायर करता है।
सिक्योरिटी गार्ड ने हमलावर की कोहनी पकड़कर हाथ उठाया

फायर करते ही सुरक्षाकर्मी कमल को पकड़कर जमीन पर गिरा देते हैं।
हमलावर को भीड़ ने पकड़ लिया

घटना के तुरंत बाद सुरक्षाकर्मी और वहां मौजूद लोगों ने हमलावर को पकड़ लिया।
हमलावर के साथ मारपीट

कुछ लोगों ने आरोपी कमल सिंह को पकड़ने के बाद उसके साथ मारपीट भी की।
थाने में हमला करना कबूल किया

ये हमलावर कमल सिंह है। सुरक्षाकर्मी उससे पूछताछ कर हमले के कारणों का पता लगा रहे हैं।
जम्मू में नेशनल कॉन्फ्रेंस के कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन
नेशनल कॉन्फ्रेंस के हजारों कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने बुधवार को पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला पर हाल ही में हुए हमले की निंदा करते हुए जम्मू में एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी पार्टी के झंडे, प्लेकार्ड और बैनर लिए हुए थे और केंद्र और लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा के नेतृत्व वाले प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए।
पार्टी नेताओं ने इस घटना को केंद्र शासित प्रदेश में लोकतांत्रिक राजनीति के लिए एक गंभीर चुनौती बताया। नेशनल कॉन्फ्रेंस के एक सीनियर नेता ने रैली को संबोधित करते हुए प्रदर्शनकारियों से कहा, हमारे नेता पर हमला मंजूर नहीं है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को सजा मिलनी चाहिए।

जम्मू में नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं ने प्रदर्शन किया।
पुलिस बोली- हमलावर के पास कई साल से लाइसेंसी हथियार
पुलिस के मुताबिक, हमलावर पिछले कई सालों से लाइसेंसी हथियार इस्तेमाल कर रहा है। फारूक अब्दुल्ला, सुरिंदर चौधरी और दूसरे बड़े नेता नेशनल कॉन्फ्रेंस के कार्यकर्ता सुरजीत सिंह के बेटे की शादी में शामिल हुए थे। हमलावर सुरजीत सिंह का कजिन है। वह बिजनेसमैन है और उसकी पुराने शहर में कुछ दुकानें हैं।
CM उमर बोले- Z+ सिक्योरिटी में कोई करीब कैसे आया
फारूक के बेटे और जम्मू-कश्मीर के CM उमर अब्दुल्ला ने X पर लिखा कि एक आदमी लोडेड पिस्टल लेकर पॉइंट-ब्लैंक रेंज में आ गया और गोली चला दी। अल्लाह का शुक्र है कि मेरे पिता बाल-बाल बचे। सवाल उठता है कि कोई Z+ NSG प्रोटेक्टेड पूर्व CM के इतने करीब कैसे पहुंच गया।
घटना के बाद डिप्टी CM सुरिंदर चौधरी ने कहा- पुलिस से पूछना चाहिए कि रॉयल पार्क में इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई। वहां लोकल पुलिस से कोई नहीं था। यह बहुत बड़ी सिक्योरिटी चूक है।

घटना के बाद फारूक अब्दुल्ला के घर के बाहर सिक्योरिटी बढ़ा दी गई है।
फारूक अब्दुल्ला 3 बार CM रह चुके हैं
डॉं फारूक जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी के अध्यक्ष हैं। वे तीन बार जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री रहे हैं। उनके पिता शेख अब्दुल्ला भी मुख्यमंत्री थे। फारूक के बेटे उमर अब्दुल्ला अभी राज्य के मुख्यमंत्री हैं।
फारूक ने मेडिकल की पढ़ाई की और कुछ समय तक डॉक्टर के रूप में काम किया, लेकिन बाद में वे राजनीति में आ गए और अपने पिता की पार्टी से जुड़कर सक्रिय राजनीति करने लगे।
सीएम के रूप में फारूक का पहला कार्यकाल 1982 से 1984 तक रहा। 1986 से 1990 तक वे दूसरी बार और 1996 से 2002 तक तीसरी बार मुख्यमंत्री रहे। वे लोकसभा सदस्य भी रह चुके हैं। अब्दुल्ला 2009 से 2014 तक केंद्रीय ऊर्जा मंत्री भी रह चुके हैं।
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SC बोला-पेरेंट्स की सैलरी OBC क्रीमी लेयर का आधार नहीं:सिविल सेवा पास करने वाले कैंडिडेट्स को राहत, आरक्षण का फायदा नहीं मिला था
नई दिल्ली,एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि OBC आरक्षण में क्रीमी लेयर का फैसला केवल माता-पिता की आय के आधार पर नहीं किया जा सकता। माता-पिता या अभिभावकों के पद (पोस्ट) और सामाजिक स्थिति (स्टेटस) को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
साथ ही कहा कि अगर सरकारी कर्मचारियों के बच्चों और प्राइवेट या PSU कर्मचारियों के बच्चों को अलग-अलग तरीके से आरक्षण दिया जाए तो यह अनुचित भेदभाव होगा।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने यह फैसला दिया। कोर्ट ने केंद्र सरकार की अपील को खारिज करते हुए दिल्ली, मद्रास और केरल हाईकोर्ट के फैसलों को सही माना।
कोर्ट ने उन UPSC कैंडिडेट्स को बड़ी राहत दी है, जिन्हें सिविल सेवा परीक्षा पास करने के बावजूद नौकरी नहीं दी गई थी। सरकार ने उनके माता-पिता की सैलरी को आधार मानकर उन्हें क्रीमी लेयर की श्रेणी में डाल दिया था। कोर्ट ने साफ किया कि सरकार ने कैंडिडेट्स को आरक्षण से बाहर करने के लिए गलत पैमाना अपनाया।
सरकार ने सैलरी को आय में जोड़ दिया
- यह पूरा विवाद उन कैंडिडेट्स से जुड़ा है जिनके माता-पिता पब्लिक सेक्टर्स (पीएसयू), बैंक या इसी तरह के संस्थानों में काम करते थे। इन कुछ कैंडिडेट्स ने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) में याचिका दायर की थी। वे सिविल सेवा परीक्षा में OBC (नॉन क्रीमी लेयर) का लाभ चाहते थे। ट्रिब्यूनल ने सरकार को आदेश दिया था कि उन्हें उनके OBC श्रेणी के आरक्षण के आधार पर नौकरी दी जाए।
- केंद्र सरकार ने 1993 का ऑफिस मेमोरेंडम (OM) जारी किया था, जिसमें बताया गया था कि OBC में क्रीमी लेयर कौन होगा। उसमें कहा गया था कि वेतन और कृषि आय को आय सीमा तय करने में शामिल नहीं किया जाएगा। लेकिन 14 अक्टूबर 2004 के स्पष्टीकरण में PSU और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के वेतन-आय को शामिल करने की बात कही गई थी।
- सरकार ने इस स्पष्टीकरण पत्र का सहारा लेकर कैंडिडेट्स के माता-पिता की सैलरी को आय में जोड़ दिया था। इस वजह से कैंडिडेट्स को आरक्षण का फायदा नहीं मिला था।
कोर्ट ने कहा- एक पत्र मुख्य नीति को नहीं बदल सकता
कोर्ट ने कहा कि 2004 का एक पत्र मुख्य नीति को नहीं बदल सकता। कोर्ट यह भी पाया कि सरकारी कर्मचारियों और पीएसयू कर्मचारियों के बीच भेदभाव करना गलत है।
अगर सरकारी कर्मचारियों के बच्चों को पद के आधार पर छूट मिलती है, तो पीएसयू कर्मचारियों के बच्चों को केवल सैलरी के आधार पर आरक्षण से बाहर करना समानता के अधिकार का उल्लंघन है।
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया कि वह 6 महीने के भीतर इन कैंडिडेट्स के दावों पर फिर से विचार करे। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर जरूरी हो तो इन कैंडिडेट्स को नौकरी देने के लिए अलग से पद बनाए जाएं।
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