छत्तीसगढ़
जग्गी हत्याकांड…शूटर ने कहा- गिरफ्तारी के बाद बनाए गए सबूत:2 दोषियों ने किया सरेंडर, मेयर ढेबर के भाई सहित 25 के खिलाफ वारंट जारी
रायपुर, एजेंसी।
NCP नेता रामावतार जग्गी मर्डर केस के 2 दोषियों ने सोमवार को रायपुर कोर्ट में सरेंडर कर दिया है। इनमें शूटर चिमन सिंह और विनोद राठौड़ शामिल हैं। कोर्ट में सरेंडर करने के दौरान चिमन सिंह ने कहा कि, मेरी गिरफ्तारी के बाद सबूत बनाए गए हैं। इधर, मेयर ढेबर के भाई समेत सभी दोषियों के खिलाफ कोर्ट ने वारंट जारी कर दिया है।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 4 अप्रैल को 27 दोषियों की अपील खारिज कर दी थी। इनमें क्राइम ब्रांच के प्रभारी रहे आरसी त्रिवेदी, तत्कालीन मौदहापारा थाना प्रभारी वीके पांडे, CSP कोतवाली अमरीक सिंह गिल, सूर्यकांत तिवारी सहित मेयर एजाज ढेबर के भाई याहया ढेबर शामिल है।
मुझे किसी ने सुपारी नहीं दी- चिमन सिंह
सरेंडर करने के दौरान चिमन सिंह ने कहा कि, हाईकोर्ट गए थे लेकिन न्याय नहीं मिला। न्याय के लिए अब सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। जब पूछा गया कि, अमित जोगी का भी नाम आ रहा है तो कहा कि, आया था मेरे साथ। मुझे किसी ने सुपारी नहीं दी। मेरे खिलाफ कोई FIR नहीं थी मुझे गिरफ्तार करने के बाद सबूत बनाए गए हैं।
गिरफ्तारी वारंट जारी
रामअवतार जग्गी हत्याकांड के सभी दोषियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया गया है। कुल 27 आरोपियों में से 2 चिमन सिंह और विनोद सिंह राठौर ने सोमवार को कोर्ट में सरेंडर किया जिसके बाद दोनों को रायपुर सेन्ट्रल जेल भेजा गया है। वहीं बाकी के खिलाफ कोर्ट ने वारंट जारी किया है।
इन दोषियों की अपील पर कोर्ट ने सुनाया था फैसला
जग्गी हत्याकांड में दोषी अभय गोयल, याहया ढेबर, वीके पांडे, फिरोज सिद्दीकी, राकेश चंद्र त्रिवेदी, अवनीश सिंह लल्लन, सूर्यकांत तिवारी, अमरीक सिंह गिल, चिमन सिंह, सुनील गुप्ता, राजू भदौरिया, अनिल पचौरी, रविंद्र सिंह, रवि सिंह, लल्ला भदौरिया, धर्मेंद्र, सत्येंद्र सिंह, शिवेंद्र सिंह परिहार, विनोद सिंह राठौर, संजय सिंह कुशवाहा, राकेश कुमार शर्मा, (मृत) विक्रम शर्मा, जबवंत, विश्वनाथ राजभर की ओर से अपील दायर की गई थी।
‘अमित जोगी पर भी चलेगा मामला’
वहीं रायपुर कोर्ट पहुंचे रामवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने कहा कि 10 और 11 तारीख के बीच में सभी दोषियों को सरेंडर करना था। मुझे आज खबर मिली की 15 तारीख को सभी सरेंडर करेंगे। मैं अपने वकीलों के साथ यहां पहुंचा हूं।
सतीश जग्गी ने कहा कि, अमित जोगी को स्टे नहीं मिला है, स्टे मैंने लिया है। मैं सुप्रीम कोर्ट के शरण में जल्द से जल्द जाऊंगा। जैसे सारे अभियुक्तों पर प्रकरण चलाए गए, वैसे ही अमित जोगी पर भी प्रकरण चलेगा। मुझे विश्वास है कि जल्द से जल्द न्याय मिलेगा।
कौन थे रामावतार जग्गी?
कारोबारी बैकग्राउंड वाले रामावतार जग्गी देश के बड़े नेताओं में शुमार पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के बेहद करीबी थे। विद्याचरण शुक्ल जब कांग्रेस छोड़कर NCP में शामिल हुए, तो जग्गी भी उनके साथ-साथ गए। विद्याचरण ने जग्गी को छत्तीसगढ़ में NCP का कोषाध्यक्ष बना दिया।
जग्गी के हत्या से पहले प्रदेश के सियासी हालात
छत्तीसगढ़ अलग प्रदेश बना, तब विधानसभा में कांग्रेस बहुमत में थी। कांग्रेस की ओर से सीएम पद की रेस में विद्याचरण शुक्ल का नाम सबसे आगे चल रहा था, लेकिन आलाकमान ने अचानक अजीत जोगी को मुख्यमंत्री बना दिया। इस वजह से पहले से नाराज चल रहे विद्याचरण शुक्ल पार्टी में अपनी अनदेखी से और ज्यादा नाराज हो गए।
नवंबर 2003 में विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले ही उन्होंने कांग्रेस छोड़कर NCP जॉइन कर ली। NCP के बढ़ते दायरे से कांग्रेस को सत्ता से बाहर होने का डर सताने लगा था।
21 साल पहले गोली मारकर हुई थी हत्या
4 जून 2003 को एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में 31 अभियुक्त बनाए गए थे। जिनमें से दो बुलटू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे। पूर्व सीएम अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को छोड़कर बाकी 28 को सजा मिली थी। बाद में अमित जोगी बरी हो गए थे। इसके खिलाफ रामवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। इस पर अमित जोगी के पक्ष में स्टे है।
इधर, हाईकोर्ट में अपील पर रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी के अमित जोगी की दोषमुक्ति के खिलाफ पेश क्रिमिनल अपील पर उनके अधिवक्ता बीपी शर्मा ने तर्क दिया और बताया कि हत्याकांड की साजिश तत्कालीन राज्य सरकार की ओर से प्रायोजित थी।
जब CBI की जांच शुरू हुई, तब सरकार के प्रभाव में सारे सबूतों को मिटा दिया गया था। ऐसे केस में सबूत अहम नहीं हैं, बल्कि षड्यंत्र का पर्दाफाश जरूरी है। लिहाजा, इस केस के आरोपियों को सबूतों के अभाव में दोषमुक्त नहीं किया जा सकता।
छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी श्रद्धांजलि:भाजपा जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश जायसवाल के पिता का निधन
बलरामपुर,एजेंसी। बलरामपुर में विष्णुदेव साय ने बलरामपुर में भाजपा जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश जायसवाल के दिवंगत पिता जागेश्वर जायसवाल को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री बलरामपुर नगर के वार्ड क्रमांक 12 स्थित उनके पैतृक निवास पहुंचे और शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर संवेदनाएं व्यक्त कीं।
भाजपा जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश जायसवाल के पिता जागेश्वर जायसवाल का हाल ही में निधन हो गया था। इस दौरान मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए ईश्वर से प्रार्थना की कि उन्हें शांति प्रदान करें और शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में धैर्य व संबल दें।

भाजपा जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश जायसवाल के पिता को श्रद्धांजलि देने पहुंचे CM सहित कई मंत्री
मंत्रीगणों और जनप्रतिनिधियों ने दी श्रद्धांजलि
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन के कैबिनेट मंत्री राम विचार नेताम और राजेश अग्रवाल भी मौजूद रहे। साथ ही क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, पार्टी पदाधिकारी और गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में कार्यक्रम में शामिल हुए। सभी उपस्थित जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने दिवंगत जागेश्वर जायसवाल के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उन्होंने उनके सरल स्वभाव और सामाजिक योगदान को याद करते हुए परिवारजनों को ढांढस बंधाया।


छत्तीसगढ़
बिना मान्यता एडमिशन के विज्ञापन पर हाईकोर्ट सख्त:5 स्कूलों को नोटिस जारी, शिक्षा सचिव से मांगा पर्सनल एफिडेविट, पुराने आदेशों पर भी मांगी रिपोर्ट
रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने बिना मान्यता वाले स्कूलों के एडमिशन विज्ञापन के मामले में सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को इस मामले में पर्सनल एफिडेविट दाखिल करने का आदेश दिया है। साथ ही संबंधित स्कूल को पक्षकार बनाते हुए नोटिस जारी किया गया है।
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई। यह सुनवाई जनहित याचिका (WPPIL No. 22/2016) में इंटरवीनर विकास तिवारी की ओर से उठाए गए मुद्दों पर की गई।
शिकायतों पर कार्रवाई नहीं, कोर्ट ने मांगी रिपोर्ट
सुनवाई के दौरान इंटरवीनर ने कोर्ट को बताया कि उनकी शिकायतों को 5 फरवरी 2026 को लोक शिक्षण संचालनालय ने दुर्ग, रायपुर और बिलासपुर के जिला शिक्षा अधिकारियों को भेजकर एक सप्ताह में कार्रवाई करने का निर्देश दिया था।
लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इस पर कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को आदेश का पालन करते हुए अगली सुनवाई तक कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।
एडमिशन विज्ञापन पर कोर्ट ने लिया संज्ञान
इंटरवीनर ने अदालत के सामने एक पत्रिका में प्रकाशित एडमिशन विज्ञापन भी प्रस्तुत किया। इसमें सत्र 2026–27 के लिए कई निजी स्कूलों में प्रवेश शुरू होने की जानकारी दी गई थी। याचिका में कहा गया कि ये स्कूल आवश्यक मान्यता के बिना संचालित हो रहे हैं
इसके बावजूद एडमिशन का विज्ञापन देकर छात्रों को प्रवेश देने की प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं। इसे अदालत के पूर्व आदेशों का उल्लंघन बताया गया।
किड्स एकेडमी के पांच ब्रांच शामिल
एडमिशन विज्ञापन में जिन स्कूलों का उल्लेख किया गया। इनमें तुलसी कृष्णा किड्स एकेडमी, मोवा के अलावा कृष्णा किड्स एकेडमी के ही शंकर नगर, न्यू राजेंद्र नगर, सुंदर नगर और शैलेंद्र नगर ये चार ब्रांच शामिल हैं।
कोर्ट ने मामले में कृष्णा पब्लिक स्कूल, तुलसी (रायपुर) को पक्षकार बनाते हुए नोटिस जारी करने का आदेश दिया है।
शिक्षा सचिव को जवाब देने का आदेश
डिवीजन बेंच ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को इस मामले में पर्सनल एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि बिना मान्यता के स्कूलों द्वारा एडमिशन का विज्ञापन देना अदालत के वैध आदेशों की अवमानना है।
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 24 मार्च 2026 तय की है। उस दिन विभाग को कार्रवाई की स्थिति और अपना जवाब अदालत के सामने पेश करना होगा।


छत्तीसगढ़
ई-चालान को लेकर पुलिस विभाग पर सवाल,आम जनता की परेशानी का आरोप
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में ई-चालान को लेकर आम जनता की परेशानी का मामला सामने आया है।
शहर के कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों ने आरोप लगाया है कि यातायात नियमों के उल्लंघन पर भेजे जा रहे ई-चालान की राशि अधिक होने से लोगों को आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

आरोप है कि कई मामलों में 1000 से लेकर 5000 रुपये तक के ई-चालान भेजे जा रहे हैं।
जिससे आम नागरिकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि चालान भरने के लिए उन्हें अपना काम छोड़कर यातायात कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे समय और धन दोनों की हानि होती है।
इस संबंध में पत्रकार वेलफेयर एसोसिएशन रायपुर (छ.ग) के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश तिवारी सहित समाजसेवी अंबिका तिवारी, हर्षा परपानी, राजेश साहू, मुकेश कुमार वर्मा और विजय महापात्र ने संयुक्त रूप से प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर ई-चालान की प्रक्रिया की समीक्षा करने की मांग की है।
ज्ञापन में कहा गया है कि आम जनता की सुविधा को ध्यान में रखते हुए चालान प्रणाली को सरल बनाया जाए और राशि निर्धारण में भी पारदर्शिता रखी जाए।
वहीं प्रशासन की ओर से कहा गया है कि ई-चालान यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है और शिकायत मिलने पर मामले की जांच की जाएगी।


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