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कोरबा

कोरबा के झोरा घाट में पुलिस की कार्रवाई:23 बाइक जब्त, शराब पीकर स्टंट करने वालों पर शिकंजा, चालानी कार्रवाई की

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कोरबा। कोरबा जिले के प्रसिद्ध पिकनिक स्पॉट झोरा घाट में रविवार को पुलिस ने हुड़दंग मचाने वालों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। इस दौरान तेज रफ्तार, बिना साइलेंसर, तीन सवारी और शराब के नशे में बाइक चला रहे 23 युवकों की मोटरसाइकिलें जब्त की गईं। यह अभियान कोरबा एसपी के निर्देश पर चलाया गया।

दरअसल, रविवार की छुट्टी होने के कारण ‘मिनी गोवा’ के नाम से मशहूर झोरा घाट पर हजारों की संख्या में पर्यटक और स्थानीय लोग पिकनिक मनाने पहुंचे थे।

झोरा घाट पर भारी संख्या में लोग छुट्टियों के दिन पिकनिक मानाने पहुंचते हैं

झोरा घाट पर भारी संख्या में लोग छुट्टियों के दिन पिकनिक मानाने पहुंचते हैं

मौजूद परिवारों को परेशानी हुई और दुर्घटना का खतरा बढ़ गया

इस दौरान कुछ युवक बाइकों से स्टंट करते, तेज आवाज वाले साइलेंसर लगाकर फर्राटे भरते और शराब के नशे में वाहन चलाते दिखे। इससे वहां मौजूद परिवारों को परेशानी हो रही थी और दुर्घटना का खतरा बढ़ गया था।

पुलिस ने असामाजिक तत्वों पर कार्रवाई की

पुलिस ने असामाजिक तत्वों पर कार्रवाई की

23 बाइक जब्त कर थाने ले गई

हुड़दंग की सूचना मिलते ही कटघोरा थाना प्रभारी धर्मनारायण तिवारी के नेतृत्व में पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने झोरा घाट में सघन वाहन चेकिंग अभियान चलाया।

जांच के दौरान बिना लाइसेंस, बिना हेलमेट, मोडिफाइड साइलेंसर, तीन सवारी और शराब पीकर वाहन चलाते पाए गए 23 बाइक राइडर्स पर मोटर व्हीकल एक्ट के तहत चालानी कार्रवाई की गई। सभी 23 बाइक जब्त कर थाने लाई गईं।

23 लोगों पर चालानी कार्रवाई की और उनकी बाइक भी जब्त कर ली गई है

23 लोगों पर चालानी कार्रवाई की और उनकी बाइक भी जब्त कर ली गई है

असामाजिक तत्व पर्यटन स्थल की शांति भंग करते है

थाना प्रभारी धर्मनारायण तिवारी ने बताया कि यह कार्रवाई कोरबा एसपी के निर्देशों का पालन करते हुए की गई है। उन्होंने कहा कि झोरा घाट एक संवेदनशील पर्यटन स्थल है, जहां हर रविवार को भारी भीड़ उमड़ती है। कुछ असामाजिक तत्वों के कारण यहां शांति भंग होती है और दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।

पुलिस ने दी चेतावनी और पर्यटकों से की अपील

पुलिस ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि भविष्य में भी बिना लाइसेंस, बिना साइलेंसर, तीन सवारी और शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

पुलिस ने पर्यटकों से अपील की है कि वे पिकनिक स्पॉट पर किसी भी प्रकार का नशा न करें और शांतिपूर्ण तरीके से प्रकृति का आनंद लेते हुए नियमों का पालन करें। इस कार्रवाई से झोरा घाट में हड़कंप मच गया और पर्यटकों ने पुलिस के कदम की सराहना की है।

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कोरबा

नेशनल लोक अदालत का आयोजन: दुर्गेश को ट्राईसायकिल मिलते ही खिला चेहरा

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कई मामलों का किया गया निराकरण
कोरबा।
संतोष शर्मा, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोरबा, अविनाश तिवारी श्रम न्यायाधीश कोरबा, गरिमा शर्मा, प्रथम जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश कोरबा, ममता भोजवानी द्वितीय जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश कोरबा, सीमा प्रताप चंद्र, जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एफ. टी. सी.) कोरबा, कु. मयूरा, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोरबा, कु. डाली ध्रुव द्वितीय व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ श्रेणी कोरबा, सोनी तिवारी प्रथम व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ श्रेणी कोरबा, कु. कुमुदिनी गर्ग, प्रथम व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ श्रेणी कोरबा, कु. डिंपल सचिव, शिशुपाल सिंह सहायक ग्रेड दो जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोरबा द्वारा रामसागरपारा वार्ड क्रमांक 1 में रहने वाले दुर्गेश कंवर जिसे बचपन से ही विकलांग होने की वजह से चलने में दिक्कत होती थी, को ट्राई साइकिल प्रदान किया गया।
दुर्गेश कंवर का आवागमन अब आसान होगा। ट्राईसायकिल मिलने पर दुर्गेश कंवर के चेहरे पर मुस्कान बिखर गई और अतिथियों का आभार जताया।

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कोरबा

विश्व रेड क्रॉस दिवस पर राम सिंह अग्रवाल सम्मानित

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रायपुर में शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने किया सम्मान
कोरबा। विश्व रेड क्रॉस दिवस के अवसर पर शुक्रवार को राजधानी रायपुर में आयोजित सम्मान समारोह में रेड क्रॉस सोसाइटी कोरबा इकाई के चेयरमैन एवं समाजसेवी राम सिंह अग्रवाल को मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। कोरबा में “चाचा नेहरू” के नाम से पहचान रखने वाले राम सिंह अग्रवाल को रेड क्रॉस समिति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया।शिक्षासमारोह में प्रदेश के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव विशेष रूप से मौजूद रहे। इस दौरान उन्होंने रेड क्रॉस सोसाइटी के माध्यम से किए जा रहे सामाजिक कार्यों की सराहना की।

राम सिंह अग्रवाल ने अपने कार्यकाल में कोरबा जिले में रेड क्रॉस समिति की गतिविधियों को तेज गति से आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके नेतृत्व में अब तक 1370 नए सदस्यों को रेड क्रॉस सोसाइटी से जोड़ा गया है। इसके साथ ही रक्तदान के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं।

समाजसेवा और मानवता के प्रति समर्पित कार्यों के लिए मिले इस सम्मान पर जिले के सामाजिक संगठनों एवं नागरिकों ने राम सिंह अग्रवाल को बधाई दी है।

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कुसमुंडा

12 वर्षों का अन्याय और प्रशासन की वादाखिलाफी, गेवरा बस्ती के ग्रामीण 21 मई से करेंगे अनिश्चितकालीन खदान बंदी

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कोरबा/कुसमुंडा। एसईसीएल (SECL) कुसमुंडा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम गेवरा बस्ती के ग्रामीणों का धैर्य अब जवाब दे चुका है। पिछले 12 वर्षों से अपनी जमीन रोजगार और उचित बसाहट के लिए संघर्ष कर रहे ग्रामीणों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। प्रशासन और प्रबंधन को सौंपे गए अल्टीमेटम के अनुसार यदि 15 दिनों के भीतर उनकी मांगों का निराकरण नहीं हुआ, तो 21 मई 2026 से कुसमुंडा खदान का चक्का पूरी तरह जाम कर दिया जाएगा ।

आश्वासनों का जाल और 12 साल का वनवास

ग्रामीणों का आरोप है कि 13 मई 2014 से उनकी जमीनों पर स्टे लगाया गया और 18 जुलाई 2018 को अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन आज तक न तो मुआवजा मिला, न ही नौकरी और बसाहट। ग्रामीणों ने भावुक होते हुए कहा- हम अपने ही घरों में कैदी बन गए हैं। जमीन पर स्टे होने के कारण हम न उसे बेच पा रहे हैं और न ही बच्चों की शादी या अन्य सामाजिक कार्यों के लिए आर्थिक व्यवस्था कर पा रहे हैं ।

जल संकट और खेती की तबाही

विज्ञप्ति के माध्यम से ग्रामीणों ने बताया कि खदान के विस्तार के कारण क्षेत्र का जलस्तर गिर चुका है, खेती पूरी तरह चौपट हो गई है और पीने के पानी की भारी किल्लत है। एसईसीएल प्रबंधन न तो पानी की व्यवस्था कर रहा है और न ही फसल के नुकसान की क्षतिपूर्ति दे रहा है ।

प्रमुख मांगें:-

12 वर्षों से लंबित मुआवजे का तत्काल भुगतान ।

प्रभावित युवाओं को नियमानुसार स्थायी रोजगार ।

बुनियादी सुविधाओं से युक्त बसाहट स्थल का चयन और पुनर्वास ।

खेती और पानी के नुकसान की उचित क्षतिपूर्ति ।

प्रबंधन को अंतिम चेतावनी

ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि वे पिछले सात महीनों से लगातार धरना-प्रदर्शन और पत्राचार कर रहे हैं। अधिकारी बार-बार आश्वासन देते हैं, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं होता। अब दफ्तरों के चक्कर लगाते-लगाते थक चुके ग्रामीण मानसिक और आर्थिक रूप से टूट चुके हैं ।

गेवरा बस्ती के ग्रामीणों ने कहा कि अब और आश्वासन नहीं समाधान चाहिए। अगर 15 दिन में हमारी समस्याएँ हल नहीं हुईं तो होने वाले उग्र आंदोलन और खदान बंदी की पूरी जिम्मेदारी एसईसीएल प्रबंधन और जिला प्रशासन की होगी ।

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