छत्तीसगढ़
रायपुर : देश और राज्य के भविष्य की दिशा तय करने का आधार है जनगणना : मुख्यमंत्री साय
मुख्यमंत्री ने जनगणना 2027 के तहत ऑनलाइन स्व-गणना कर राज्य स्तरीय अभियान का किया शुभारंभ
जनगणना के महाभियान में नागरिकों से सक्रिय भागीदारी की अपील
जनगणना के सटीक आंकड़े आगामी वर्षों की योजनाएं तैयार करने में होती है मददगार
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में जनगणना 2027 के तहत ऑनलाइन स्व-गणना कर जनगणना अभियान का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने स्वयं पोर्टल पर अपनी जानकारी दर्ज कर नागरिकों को इस राष्ट्रीय कार्य में सक्रिय भागीदारी का संदेश दिया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि भारत में विश्व का सबसे बड़ा जनगणना अभियान संचालित हो रहा है और छत्तीसगढ़ में भी आज से ऑनलाइन स्व-गणना की प्रक्रिया शुरू हो गई है। उन्होंने कहा कि नागरिक 16 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 के बीच ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपने परिवार से संबंधित जानकारी स्वयं दर्ज कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस बार जनगणना को आधुनिक और डिजिटल स्वरूप दिया गया है, जिससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुलभ हो सके।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जनगणना केवल आंकड़ों का संकलन नहीं, बल्कि देश और राज्य के भविष्य की दिशा तय करने का आधार है। इन आंकड़ों के आधार पर सरकार आने वाले वर्षों की योजनाएं तैयार करती है, ताकि विकास का लाभ हर वर्ग तक प्रभावी रूप से पहुंच सके। मुख्यमंत्री ने बताया कि 1 मई 2026 से जनगणना का पहला चरण शुरू होगा, जिसमें मकान सूचीकरण और गणना का कार्य किया जाएगा। 30 मई तक प्रगणक घर-घर जाकर आवासीय और गैर-आवासीय भवनों, उनकी स्थिति, उपयोग तथा बुनियादी सुविधाओं जैसे पेयजल, शौचालय, बिजली, रसोई गैस, इंटरनेट और संचार व्यवस्था से संबंधित जानकारी एकत्र करेंगे।
उन्होंने प्रदेशवासियों से आग्रह करते हुए कहा कि जब भी प्रगणक घर आएं, तो उन्हें सही, स्पष्ट और पूर्ण जानकारी दें, क्योंकि प्रत्येक जानकारी राज्य के विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि जनगणना के दौरान दी गई सभी व्यक्तिगत जानकारी पूर्णतः गोपनीय रखी जाती है और इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय एवं नीतिगत उद्देश्यों के लिए ही किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ तेजी से विकास के पथ पर अग्रसर है और “विकसित छत्तीसगढ़ 2047” के संकल्प को साकार करने में जनगणना की महत्वपूर्ण भूमिका है। सही आंकड़े ही बेहतर योजना और प्रभावी विकास की नींव रखते हैं। उन्होंने प्रदेश के सभी नागरिकों से इस महाअभियान को जनभागीदारी का उत्सव बनाने और सक्रिय सहयोग देने की अपील की।
इस दौरान अपर मुख्य सचिव तथा जनगणना के नोडल मनोज कुमार पिंगुआ, कलेक्टर रायपुर डॉ. गौरव कुमार सिंह, संचालक जनगणना कार्तिकेय गोयल सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

कोरबा
एसईसीएल सीएमडी हरीश दुहन द्वारा रामकृष्ण मिशन, बिलासपुर में CSR के तहत “मां सारदा चैरिटेबल डिस्पेंसरी” का उद्घाटन
बिलासपुर/कोरबा। आज दिनांक 15 अप्रैल 2026 को सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए एसईसीएल के सीएमडी हरीश दुहन ने कंपनी की कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) पहल के अंतर्गत “मां सारदा चैरिटेबल डिस्पेंसरी” का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि SECL की CSR पहलें केवल विकास तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समाज के हर वर्ग तक आवश्यक सुविधाएं पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता क्षेत्र बताते हुए कहा कि इस प्रकार की पहलें स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने के साथ-साथ समुदाय के जीवन स्तर को भी बेहतर बनाती हैं।

SECL द्वारा रू.61.96 लाख की लागत से, रामकृष्ण मिशन, बिलासपुर के द्वारा स्थापित यह डिस्पेंसरी विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को ध्यान में रखते हुए विकसित की गई है। उद्घाटन अवसर पर वरिष्ठ अधिकारियों, मिशन के प्रतिनिधियों एवं स्थानीय नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

यह आधुनिक डिस्पेंसरी दंत चिकित्सा, सामान्य स्वास्थ्य परामर्श एवं मेडिसिन, बाल रोग, अस्थि रोग, नेत्र रोग और फिजियोथेरेपी जैसी विशेषज्ञ सेवाओं से सुसज्जित है। साथ ही यहां बुनियादी जांच एवं उपचार सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। निर्धारित ओपीडी के माध्यम से योग्य चिकित्सकों द्वारा नियमित सेवाएं प्रदान की जाएंगी, जिससे क्षेत्र के लोगों को विश्वसनीय और निरंतर स्वास्थ्य लाभ मिल सकेगा।
यह पहल बिलासपुर एवं आसपास के क्षेत्रों के हजारों लोगों के लिए सस्ती, सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी। SECL की यह पहल न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र में एक सराहनीय योगदान है, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति कंपनी की दृढ़ प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।

छत्तीसगढ़
वेदांता ब्लास्ट हादसा…1 घंटे में दोगुना किया प्रोडक्शन:लॉगबुक में खराबी का जिक्र, चेतावनी के बावजूद नहीं रोका काम, इसलिए फटा बॉयलर, अब तक 20 मौतें
सक्ती। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के वेदांता पावर प्लांट में मंगलवार (14 अप्रैल) दोपहर हुए बॉयलर ब्लास्ट की शुरुआती जांच रिपोर्ट में गंभीर लापरवाही सामने आई है। इस हादसे में 20 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 16 लोग घायल हैं। जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है।
शुरुआती जांच के अनुसार, यह केवल एक औद्योगिक दुर्घटना नहीं थी, बल्कि उत्पादन बढ़ाने की जल्दबाजी और सुरक्षा मानकों की अनदेखी का परिणाम था। रिपोर्ट में कहा गया है कि महज एक घंटे के भीतर उत्पादन क्षमता को करीब दोगुना करने की कोशिश की गई। लॉगबुक में खराबी का जिक्र था। चेतावनी के बावजूद काम नहीं रोका गया, इसलिए बॉयलर फट गया।
औद्योगिक सुरक्षा विभाग के बॉयलर इंस्पेक्टर उज्जवल गुप्ता और उनकी टीम ने बुधवार को लगभग 6 घंटे तक घटना स्थल की जांच की। शाम 8 बजे रिपोर्ट एसपी प्रफुल्ल ठाकुर को सौंपी गई। इस रिपोर्ट के आधार पर अब एफआईआर दर्ज की जाएगी। कलेक्टर अमृत विकास टोपनो ने भी मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं।


अब जानिए जांच रिपोर्ट में क्या कुछ पता चला ?
जांच रिपोर्ट के अनुसार, हादसा 14 अप्रैल को दोपहर 2:33 बजे हुआ। उस समय 2028 टीपीएच क्षमता वाले विशाल वाटर ट्यूब बॉयलर में फर्नेस प्रेशर (भट्ठी का दबाव) तेजी से बढ़ा। यह दबाव वृद्धि महज 1 से 2 सेकंड के भीतर हुई, जिससे सिस्टम को बंद करना या किसी तकनीकी खराबी को रोकना संभव नहीं था।
दबाव इतना अधिक था कि अंदरूनी विस्फोट हुआ और इसकी चपेट में बाहरी पाइपलाइन भी आ गई। जांच में सामने आया है कि, हादसे से पहले प्लांट में उत्पादन बढ़ाने के लिए बॉयलर का लोड तेजी से बढ़ाया गया। लोड 350 मेगावाट से बढ़ाकर लगभग 590 मेगावाट किया गया। यह वृद्धि बेहद कम समय (करीब एक घंटे) में की गई।
इतनी तेजी से लोड बढ़ाने के लिए ईंधन और हवा का अधिक सटीक संतुलन आवश्यक था, जिसका ध्यान नहीं रखा गया। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि उत्पादन बढ़ाने की इस जल्दबाजी ने पूरे सिस्टम को अस्थिर कर दिया।

पीए फैन में बार-बार खराबी, बिगड़ा हवा-ईंधन संतुलन
रिपोर्ट में तकनीकी खामियों का भी खुलासा हुआ है। पीए (प्राइमरी एयर) फैन में 3-4 घंटे के भीतर तीन बार खराबी आई। सुबह करीब 10:30 बजे ही लॉगबुक में खराबी की चेतावनी दर्ज की गई थी। इसके बावजूद ऑपरेशन जारी रखा गया।
पीए फैन की खराबी के कारण फर्नेस में हवा और ईंधन का संतुलन बिगड़ गया, जिससे अधजला ईंधन (अनबर्न फ्यूल) जमा होने लगा। यही आगे चलकर विस्फोट का मुख्य कारण बना।

अनबर्न फ्यूल से बना प्रेशर, फटे पाइप
विशेषज्ञों के अनुसार, फर्नेस में जमा अनबर्न फ्यूल ने अचानक दहन के दौरान अधिक दबाव पैदा किया। इस दबाव से बॉटम रिंग हेडर के कनेक्टिंग पाइप फट गए। पाइप फटना मुख्य कारण नहीं, बल्कि द्वितीयक परिणाम था। असली वजह असंतुलित दहन और अचानक दबाव वृद्धि रही।
संभावित सिस्टम फेल्योर ने बढ़ाई तबाही
जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि अधिक दबाव के कारण पाइपिंग सिस्टम या अन्य तकनीकी हिस्सों में फेल्योर हुआ। सेफ्टी मैकेनिज्म समय पर काम नहीं कर पाया। बैकअप सिस्टम भी प्रभावी नहीं रहा।

बड़े सवाल: जिनका जवाब अभी बाकी
- जब सुबह ही सिस्टम में खराबी के संकेत मिल गए थे, तो ऑपरेशन रोका क्यों नहीं गया?
- क्या अधिक उत्पादन और मुनाफे के दबाव में सुरक्षा से समझौता किया गया?
- पीए फैन की खराबी के बावजूद बैकअप सिस्टम क्यों फेल रहा?
- क्या सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन जानबूझकर नजरअंदाज किया गया?
मुआवजे की घोषणा
हादसे के बाद कंपनी प्रबंधन और सरकार ने सहायता की घोषणा की है। कंपनी पाबंधन ने मृतकों के परिजनों को 35 लाख रुपए और एक सदस्य को नौकरी, घायलों को 15 लाख रुपए देने की घोषणा की है।
मुख्यमंत्री राहत से मृतकों को 5 लाख रुपए और घायलों को 50 हजार रुपए देने की घोषणा की गई है। वही प्रधानमंत्री राहत कोष से मृतकों को 2 लाख रुपए और घायलों को 50 हजार रुपए देने की घोषणा की गई है।
कांग्रेस ने बनाई 10 सदस्यीय जांच समिति
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने इस घटना की जांच के लिए 10 सदस्यीय टीम गठित की है। इसका नेतृत्व पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल करेंगे। इस टीम मे पूर्व मंत्री नोबेल कुमार वर्मा, खरसिया विधायक उमेश पटेल, चंद्रपुर विधायक रामकुमार यादव, कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव, जैजैपुर विधायक बालेश्वर साहू, अकलतरा विधायक राघवेंद्र सिंह, जांजगीर चांपा विधायक व्यास कश्यप, पामगढ़ विधायक शेषराज हरवंश, सक्ती जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष रश्मि गबेल, जांजगीर चांपा जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष राजेश अग्रवाल सदस्य है। यह समिति घटनास्थल का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट देगी।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी का नतीजा
शुरुआती जांच से साफ है कि, यह हादसा अचानक नहीं हुआ, बल्कि लगातार मिल रहे चेतावनी संकेतों की अनदेखी और उत्पादन बढ़ाने की जल्दबाजी का नतीजा था। तकनीकी गड़बड़ियों, खराब निगरानी और सुरक्षा मानकों की अनदेखी ने मिलकर एक ऐसी स्थिति पैदा की, जिसने कुछ ही सेकंड में पूरे सिस्टम को तबाह कर दिया।

छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ पावर प्लांट हादसा, 20 मौतें, 36 झुलसे:प्रोडक्शन बढ़ाने की जल्दबाजी में फटा बॉयलर, चेतावनी के बावजूद नहीं रोका काम, अब होगी FIR
सक्ती/रायगढ़ , एजेंसी। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में हुए वेदांता प्लांट हादसे में अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों में 4 छत्तीसगढ़ से हैं, बाकी यूपी, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से हैं। हादसे में कुल 36 लोग झुलसे हैं, 16 घायलों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज जारी है।
घटना के 24 घंटे बाद औद्योगिक सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर हादसे की जांच की। जिसमें प्लांट प्रबंधन की गंभीर लापरवाही सामने आई है।

शुरुआती जांच के मुताबिक, प्रोडक्शन दोगुना करने की जल्दबाजी में बॉयलर फटा। चेतावनी के बाद भी काम नहीं रोका गया, इसके अलावा सिस्टम में खराबी की बात भी कही गई। इसके आधार पर अब FIR दर्ज की जाएगी।
गुरुवार को उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन रायगढ़ पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले अपेक्स अस्पताल का दौरा किया, इसके बाद मेडिकल कॉलेज गए और फिर जिंदल फोर्टिस अस्पताल पहुंचे। यहां उन्होंने मरीजों से मुलाकात की और उनकी तबीयत के बारे में जानकारी ली।

सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में 14 अप्रैल दोपहर 2 बजे बॉयलर ब्लास्ट हुआ था।

बॉयलर ब्लास्ट के बाद 4 मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई थी।

घटना के बाद प्लांट में अफरा-तफरी मच गई थी।

ब्लास्ट के बाद प्लांट को भी नुकसान पहुंचा, कलपुर्जे टूटकर बिखर गए थे।

मजदूर उमेंद्र और किस्मत अली का रायपुर के निजी अस्पताल में इलाज जारी है।

उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने रायगढ़ में घायलों से मुलाकात की।
मजिस्ट्रियल जांच भी होगी
औद्योगिक सुरक्षा विभाग के बॉयलर इंस्पेक्टर उज्जवल गुप्ता और उनकी टीम ने बुधवार को लगभग 6 घंटे तक घटना स्थल की जांच की। शाम 8 बजे रिपोर्ट एसपी प्रफुल्ल ठाकुर को सौंपी गई। इस रिपोर्ट के आधार पर अब FIR दर्ज की जाएगी।
अब जानिए शुरूआती जांच में क्या कुछ सामने आया ?
विभाग के अनुसार, हादसा 14 अप्रैल को दोपहर 2:33 बजे हुआ। उस समय 2028 टीपीएच क्षमता वाले विशाल वाटर ट्यूब बॉयलर में फर्नेस प्रेशर (भट्ठी का दबाव) तेजी से बढ़ा। यह दबाव 1 से 2 सेकेंड के अंदर बढ़ा, जिससे सिस्टम को बंद करना या किसी तकनीकी खराबी को रोकना संभव नहीं था।
दबाव इतना तेज था कि अंदरूनी विस्फोट हुआ और इसकी चपेट में बाहरी पाइपलाइन भी आ गई। जांच में सामने आया है कि, 1 घंटे में दोगुना उत्पादन करने के लिए बॉयलर का लोड तेजी से बढ़ाया गया। लोड 350 मेगावाट से बढ़ाकर लगभग 590 मेगावाट किया गया। यह वृद्धि बहुत कम समय में की गई।
इतनी तेजी से लोड बढ़ाने के लिए ईंधन और हवा का अधिक सटीक संतुलन जरुरी था, जिसका ध्यान नहीं रखा गया। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि उत्पादन बढ़ाने की इस जल्दबाजी ने पूरे सिस्टम को अस्थिर कर दिया।
इसके साथ ही पीए फैन में बार-बार खराबी, अनबर्न फ्यूल से प्रेशर बनना, पाइपिंग सिस्टम का फेल होना और बेकअप का समय पर काम नहीं करने का भी जिक्र है। कलेक्टर अमृत विकास टोपनो ने भी मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। 30 दिन के अंदर इसकी रिपोर्ट भी मांगी गई है।
इन बिंदुओं पर होगी मजिस्ट्रियल जांच
- घटना कब और कैसे हुई
- घटना के लिए कौन जिम्मेदार हैं
- घटना का तकनीकी या मानवीय क्या कारण है
- हादसे वाले दिन कौन-कौन मजदूर कार्यरत थे, किनकी मौत हुई, कौन घायल हुए
- प्रशासनिक अधिकारियों ने कब कब प्लांट का निरीक्षण किया, क्या कोई खामियां मिली थी, यदि हां तो क्या कार्रवाई की गई
- भविष्य में इस प्रकार की घटना ना हो, इस रोकने के उपाय और सुझाव
मृतकों के परिजनों को मिलेगा मुआवजा
वेदांता प्रबंधन ने मृतक परिजन को 35-35 लाख रुपए सहायता राशि और नौकरी देने का ऐलान किया है। घायलों को 15-15 लाख रुपए दिए जाएंगे। इससे पहले PMO ने मुआवजे की घोषणा की थी।
PMNRF से हर मृतकों के परिवार वालों को 2 लाख रुपए और घायलों को 50 हजार रुपए दिए जाएंगे। छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से मृतकों के परिवार वालों को 5-5 लाख और घायलों को 50 हजार रुपए दिए जाएंगे।


रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में शवों का पोस्टमॉर्टम हुआ।
हादसे में कुल 36 लोग झुलसे
प्लांट सिक्योरिटी हेड प्रेम झा के मुताबिक, हादसे में कुल 36 लोग घायल हुए हैं, जिसमें से 12 लोग छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं। बाकी लोग बिहार, पश्चिम बंगाल और झारखंड के हैं।
घायल मजदूरों का इलाज जारी
रायगढ़ के अलग अलग अस्पताल में 11 घायलों का इलाज चल रहा है। रायगढ़ के बालाजी मेट्रो हॉस्पिटल में बनवारी लाल, उपेंद्र और परदेशी लाल चंद्रा का इलाज जारी है। वहीं 2 मजदूरों उमेंद्र और किस्मत अली का रायपुर के निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है।
एक दिन पहले मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 7 और जिला अस्पताल में 5 शवों का पोस्टमॉर्टम किया गया। पीएम कराने के लिए मृतकों के परिजन भटकते रहे। वहीं 5 मृतकों के परिजन नहीं आ पाने की वजह से आज (गुरुवार) को शवों का पोस्टमॉर्टम किया गया
मृतकों के परिजन को 1 करोड़ मुआवजा देने की मांग
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने मृतकों के परिजनों को 1-1 करोड़ और घायलों को 50-50 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग की है। बैज ने कहा कि इस घटना में 17 मजदूरों की मौत और 36 लोगों के घायल होने की खबर बेहद पीड़ादायक है।
दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी- श्रम मंत्री
छत्तीसगढ़ के श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन ने कहा कि तत्काल जांच के निर्देश दिए गए हैं। हादसे के लिए जिम्मेदार दोषियों पर श्रम कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।

सक्ती हादसे में PMO ने मुआवजे की घोषणा की है।

सीएम विष्णुदेव साय ने मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख मुआवजे की घोषणा की।
हादसे से जुड़ी और तस्वीरें…

हादसे में 4 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी।

18 घायलों को रायगढ़ के जिंदल फोर्टिस अस्पताल लाया गया।

हादसे में मजदूर पूरी तरह झुलस गया है, पहचान जारी है।

दामाद की मौत की सूचना के बाद उसके ससुर और अन्य परिजन शव लेने यूपी के केवाल से रायगढ़ पहुंचे।

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