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छत्तीसगढ़

रायपुर : भीषण गर्मी को देखते हुए ग्रीष्मकालीन अवकाश में संशोधन, अब 20 अप्रैल से 15 जून तक रहेगा स्कूलों में अवकाश

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बढ़ती भीषण गर्मी में बच्चों की सेहत की सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर। प्रदेश में बढ़ती भीषण गर्मी और लू के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर स्कूलों के ग्रीष्मकालीन अवकाश की अवधि में आंशिक संशोधन किया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बढ़ती भीषण गर्मी में बच्चों की सेहत की सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित करना हम सब की जिम्मेदारी है। बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए  पूर्व निर्धारित ग्रीष्मकालीन अवकाश को पहले लागू करने का निर्णय लिया है, ताकि इस भीषण गर्मी में बच्चों की सेहत सुरक्षित रह सके।

स्कूल शिक्षा विभाग मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर द्वारा जारी आदेश के अनुसार, पूर्व में दिनांक 01 मई 2026 से 15 जून 2026 तक घोषित ग्रीष्मकालीन अवकाश में संशोधन करते हुए अब दिनांक 20 अप्रैल 2026 से 15 जून 2026 तक अवकाश घोषित किया गया है। यह आदेश प्रदेश के समस्त शासकीय, अनुदान प्राप्त, गैर अनुदान प्राप्त एवं अशासकीय शालाओं पर लागू होगा।

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कोरबा

कोरबा पुलिस को 02 दिन में महत्वपूर्ण सफलता 07 स्थायी वारंट, 41 गिरफ्तारी वारंट की तामिली कुल 48 वारंटियों को पकड़ा

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मोटर व्हीकल एक्ट के तहत 2 दिन में 24 शराब पीकर वाहन चलाने वालों के ख़िलाफ़ चालानी कार्यवाही

सजग कोरबा – सतर्क कोरबा” अभियान के तहत “ऑपरेशन शांति” चलाकर कोरबा पुलिस की व्यापक कार्यवाही

लंबे समय से फरार वारंटियों की त्वरित पहचान एवं गिरफ्तारी

जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में एक साथ समन्वित कार्यवाही

कानून-व्यवस्था सुदृढ़ करने हेतु निरंतर दबिश एवं निगरानी

यातायात नियमों के उल्लंघन पर प्रभावी नियंत्रण एवं चालानी कार्यवाही

कोरबा। जिले में शांति, सुरक्षा एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से कोरबा पुलिस द्वारा “सजग कोरबा, सतर्क कोरबा” अभियान के अंतर्गत “ऑपरेशन शांति” चलाकर स्थायी वारंट एवं गिरफ्तारी वारंट की तामिली हेतु विशेष अभियान संचालित किया गया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य लंबे समय से फरार वारंटियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित कर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है।

पुलिस अधीक्षक कोरबा सिद्धार्थ तिवारी के निर्देशन में, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पटले एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कटघोरा नीतिश ठाकुर के मार्गदर्शन में जिले के समस्त थाना एवं चौकी प्रभारियों को सघन अभियान चलाकर फरार वारंटियों की गिरफ्तारी हेतु विशेष निर्देश दिए गए थे। इसके पालन में पुलिस टीमों का गठन कर विभिन्न स्थानों पर दबिश दी गई एवं तकनीकी सहायता से आरोपियों की तलाश की गई।

उक्त अभियान के तहत दिनांक 15.04.2026 एवं 16.04.2026 के दौरान कोरबा पुलिस को महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त हुई, जिसमें—
▪️07 स्थायी वारंट की तामिली
▪️41 गिरफ्तारी वारंट की तामिली
▪️कुल 48 वारंटियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा (जेल) भेजा गया।

इसके अतिरिक्त, जिले में यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ करने एवं नियमों का पालन सुनिश्चित करने हेतु विशेष चेकिंग अभियान चलाया गया, जिसमें कोरबा पुलिस के द्वारा दो दिवस के भीतर मोटर व्हीकल एक्ट के तहत 24 शराब पीकर वाहन चलाने वालों के विरुद्ध कठोर चालानी कार्यवाही की गई।

पुलिस की अपील
कोरबा पुलिस आम नागरिकों से अपील करती है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें तथा किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल नजदीकी थाना/पुलिस को दें। वारंटियों को शरण देना या उनकी जानकारी छिपाना कानूनन अपराध है।

कोरबा पुलिस – सजग कोरबा, सतर्क कोरबा

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कोरबा

एसईसीएल सीएमडी हरीश दुहन द्वारा रामकृष्ण मिशन, बिलासपुर में CSR के तहत “मां सारदा चैरिटेबल डिस्पेंसरी” का उद्घाटन

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बिलासपुर/कोरबा। आज दिनांक 15 अप्रैल 2026 को सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए एसईसीएल के सीएमडी हरीश दुहन ने कंपनी की कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) पहल के अंतर्गत “मां सारदा चैरिटेबल डिस्पेंसरी” का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि SECL की CSR पहलें केवल विकास तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समाज के हर वर्ग तक आवश्यक सुविधाएं पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता क्षेत्र बताते हुए कहा कि इस प्रकार की पहलें स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने के साथ-साथ समुदाय के जीवन स्तर को भी बेहतर बनाती हैं।

SECL द्वारा रू.61.96 लाख की लागत से, रामकृष्ण मिशन, बिलासपुर के द्वारा स्थापित यह डिस्पेंसरी विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को ध्यान में रखते हुए विकसित की गई है। उद्घाटन अवसर पर वरिष्ठ अधिकारियों, मिशन के प्रतिनिधियों एवं स्थानीय नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

यह आधुनिक डिस्पेंसरी दंत चिकित्सा, सामान्य स्वास्थ्य परामर्श एवं मेडिसिन, बाल रोग, अस्थि रोग, नेत्र रोग और फिजियोथेरेपी जैसी विशेषज्ञ सेवाओं से सुसज्जित है। साथ ही यहां बुनियादी जांच एवं उपचार सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। निर्धारित ओपीडी के माध्यम से योग्य चिकित्सकों द्वारा नियमित सेवाएं प्रदान की जाएंगी, जिससे क्षेत्र के लोगों को विश्वसनीय और निरंतर स्वास्थ्य लाभ मिल सकेगा।

यह पहल बिलासपुर एवं आसपास के क्षेत्रों के हजारों लोगों के लिए सस्ती, सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी। SECL की यह पहल न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र में एक सराहनीय योगदान है, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति कंपनी की दृढ़ प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।

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छत्तीसगढ़

वेदांता ब्लास्ट हादसा…1 घंटे में दोगुना किया प्रोडक्शन:लॉगबुक में खराबी का जिक्र, चेतावनी के बावजूद नहीं रोका काम, इसलिए फटा बॉयलर, अब तक 20 मौतें

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सक्ती। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के वेदांता पावर प्लांट में मंगलवार (14 अप्रैल) दोपहर हुए बॉयलर ब्लास्ट की शुरुआती जांच रिपोर्ट में गंभीर लापरवाही सामने आई है। इस हादसे में 20 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 16 लोग घायल हैं। जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है।

शुरुआती जांच के अनुसार, यह केवल एक औद्योगिक दुर्घटना नहीं थी, बल्कि उत्पादन बढ़ाने की जल्दबाजी और सुरक्षा मानकों की अनदेखी का परिणाम था। रिपोर्ट में कहा गया है कि महज एक घंटे के भीतर उत्पादन क्षमता को करीब दोगुना करने की कोशिश की गई। लॉगबुक में खराबी का जिक्र था। चेतावनी के बावजूद काम नहीं रोका गया, इसलिए बॉयलर फट गया।

औद्योगिक सुरक्षा विभाग के बॉयलर इंस्पेक्टर उज्जवल गुप्ता और उनकी टीम ने बुधवार को लगभग 6 घंटे तक घटना स्थल की जांच की। शाम 8 बजे रिपोर्ट एसपी प्रफुल्ल ठाकुर को सौंपी गई। इस रिपोर्ट के आधार पर अब एफआईआर दर्ज की जाएगी। कलेक्टर अमृत विकास टोपनो ने भी मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं।

अब जानिए जांच रिपोर्ट में क्या कुछ पता चला ?

जांच रिपोर्ट के अनुसार, हादसा 14 अप्रैल को दोपहर 2:33 बजे हुआ। उस समय 2028 टीपीएच क्षमता वाले विशाल वाटर ट्यूब बॉयलर में फर्नेस प्रेशर (भट्ठी का दबाव) तेजी से बढ़ा। यह दबाव वृद्धि महज 1 से 2 सेकंड के भीतर हुई, जिससे सिस्टम को बंद करना या किसी तकनीकी खराबी को रोकना संभव नहीं था।

दबाव इतना अधिक था कि अंदरूनी विस्फोट हुआ और इसकी चपेट में बाहरी पाइपलाइन भी आ गई। जांच में सामने आया है कि, हादसे से पहले प्लांट में उत्पादन बढ़ाने के लिए बॉयलर का लोड तेजी से बढ़ाया गया। लोड 350 मेगावाट से बढ़ाकर लगभग 590 मेगावाट किया गया। यह वृद्धि बेहद कम समय (करीब एक घंटे) में की गई।

इतनी तेजी से लोड बढ़ाने के लिए ईंधन और हवा का अधिक सटीक संतुलन आवश्यक था, जिसका ध्यान नहीं रखा गया। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि उत्पादन बढ़ाने की इस जल्दबाजी ने पूरे सिस्टम को अस्थिर कर दिया।

पीए फैन में बार-बार खराबी, बिगड़ा हवा-ईंधन संतुलन

रिपोर्ट में तकनीकी खामियों का भी खुलासा हुआ है। पीए (प्राइमरी एयर) फैन में 3-4 घंटे के भीतर तीन बार खराबी आई। सुबह करीब 10:30 बजे ही लॉगबुक में खराबी की चेतावनी दर्ज की गई थी। इसके बावजूद ऑपरेशन जारी रखा गया।

पीए फैन की खराबी के कारण फर्नेस में हवा और ईंधन का संतुलन बिगड़ गया, जिससे अधजला ईंधन (अनबर्न फ्यूल) जमा होने लगा। यही आगे चलकर विस्फोट का मुख्य कारण बना।

अनबर्न फ्यूल से बना प्रेशर, फटे पाइप

विशेषज्ञों के अनुसार, फर्नेस में जमा अनबर्न फ्यूल ने अचानक दहन के दौरान अधिक दबाव पैदा किया। इस दबाव से बॉटम रिंग हेडर के कनेक्टिंग पाइप फट गए। पाइप फटना मुख्य कारण नहीं, बल्कि द्वितीयक परिणाम था। असली वजह असंतुलित दहन और अचानक दबाव वृद्धि रही।

संभावित सिस्टम फेल्योर ने बढ़ाई तबाही

जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि अधिक दबाव के कारण पाइपिंग सिस्टम या अन्य तकनीकी हिस्सों में फेल्योर हुआ। सेफ्टी मैकेनिज्म समय पर काम नहीं कर पाया। बैकअप सिस्टम भी प्रभावी नहीं रहा।

बड़े सवाल: जिनका जवाब अभी बाकी

  • जब सुबह ही सिस्टम में खराबी के संकेत मिल गए थे, तो ऑपरेशन रोका क्यों नहीं गया?
  • क्या अधिक उत्पादन और मुनाफे के दबाव में सुरक्षा से समझौता किया गया?
  • पीए फैन की खराबी के बावजूद बैकअप सिस्टम क्यों फेल रहा?
  • क्या सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन जानबूझकर नजरअंदाज किया गया?

मुआवजे की घोषणा

हादसे के बाद कंपनी प्रबंधन और सरकार ने सहायता की घोषणा की है। कंपनी पाबंधन ने मृतकों के परिजनों को 35 लाख रुपए और एक सदस्य को नौकरी, घायलों को 15 लाख रुपए देने की घोषणा की है।

मुख्यमंत्री राहत से मृतकों को 5 लाख रुपए और घायलों को 50 हजार रुपए देने की घोषणा की गई है। वही प्रधानमंत्री राहत कोष से मृतकों को 2 लाख रुपए और घायलों को 50 हजार रुपए देने की घोषणा की गई है।

कांग्रेस ने बनाई 10 सदस्यीय जांच समिति

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने इस घटना की जांच के लिए 10 सदस्यीय टीम गठित की है। इसका नेतृत्व पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल करेंगे। इस टीम मे पूर्व मंत्री नोबेल कुमार वर्मा, खरसिया विधायक उमेश पटेल, चंद्रपुर विधायक रामकुमार यादव, कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव, जैजैपुर विधायक बालेश्वर साहू, अकलतरा विधायक राघवेंद्र सिंह, जांजगीर चांपा विधायक व्यास कश्यप, पामगढ़ विधायक शेषराज हरवंश, सक्ती जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष रश्मि गबेल, जांजगीर चांपा जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष राजेश अग्रवाल सदस्य है। यह समिति घटनास्थल का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट देगी।

सुरक्षा मानकों की अनदेखी का नतीजा

शुरुआती जांच से साफ है कि, यह हादसा अचानक नहीं हुआ, बल्कि लगातार मिल रहे चेतावनी संकेतों की अनदेखी और उत्पादन बढ़ाने की जल्दबाजी का नतीजा था। तकनीकी गड़बड़ियों, खराब निगरानी और सुरक्षा मानकों की अनदेखी ने मिलकर एक ऐसी स्थिति पैदा की, जिसने कुछ ही सेकंड में पूरे सिस्टम को तबाह कर दिया।

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